New International Reader's Version

Amos 1:1-15

1These are the words of Amos. He was a shepherd from the town of Tekoa. Here is the vision he saw concerning Israel. It came to him two years before the earthquake. At that time Uzziah was king of Judah. Jeroboam, the son of Jehoash, was king of Israel. Here are the words of Amos.

2He said,

“The Lord roars like a lion from Jerusalem.

His voice sounds like thunder from Zion.

The grasslands of the shepherds turn brown.

The top of Mount Carmel dries up.”

The Lord Judges Israel’s Neighbors

3The Lord says,

“The people of Damascus have sinned again and again.

So I will judge them.

They used threshing sleds with iron teeth

to crush Gilead’s people.

4So I will send fire to destroy the palace of King Hazael.

It will burn up the forts of his son Ben-Hadad.

5I will break down the city gate of Damascus.

I will kill the king

who lives in the Valley of Aven, that evil place.

He holds the ruler’s scepter in Beth Eden.

The people of Aram will be taken away to Kir as prisoners,”

says the Lord.

6The Lord says,

“The people of Gaza have sinned again and again.

So I will judge them.

They captured whole communities.

They sold them to Edom.

7So I will send fire to destroy the walls of Gaza.

It will burn up its forts.

8I will kill the king of Ashdod.

He holds the ruler’s scepter in Ashkelon.

I will use my power against Ekron.

Every single Philistine will die,”

says the Lord and King.

9The Lord says,

“The people of Tyre have sinned again and again.

So I will judge them.

They captured whole communities.

They sold them to Edom.

They did not honor the treaty

of friendship they had made.

10So I will send fire to destroy the walls of Tyre.

It will burn up its forts.”

11The Lord says,

“The people of Edom have sinned again and again.

So I will judge them.

They chased Israel with swords

that were ready to strike them down.

They killed the women of the land.

They were angry all the time.

Their anger was like a fire that blazed out.

It could not be stopped.

12So I will send fire to destroy the city of Teman.

It will burn up Bozrah’s forts.”

13The Lord says,

“The people of Ammon have sinned again and again.

So I will judge them.

They ripped open the pregnant women in Gilead.

They wanted to add land to their territory.

14So I will set fire to destroy the walls of Rabbah.

It will burn up its forts.

War cries will be heard on that day of battle.

Strong winds will blow on that stormy day.

15Ammon’s king will be carried away.

So will his officials,”

says the Lord.

Hindi Contemporary Version

आमोस 1:1-15

1ये आमोस द्वारा कहे गये वचन हैं, जो उसने भूकंप के दो वर्ष पहले इस्राएल के संबंध में एक दर्शन देखकर उस समय में कही थी, जब यहूदिया पर राजा उज्जियाह का तथा इस्राएल पर योआश के पुत्र यरोबोअम का शासन था. आमोस तेकोआ नगर के चरवाहों में से एक था.

2आमोस ने कहा:

“ज़ियोन से याहवेह का स्वर गर्जन करता है

और येरूशलेम से उनका शब्द गूंजता है;

चरवाहों के चरागाह मुरझा गए हैं,

तथा कर्मेल पर्वत का शिखर झुलस गया है.”

इस्राएल के पड़ोसियों का न्याय

3यह याहवेह का कहना है:

“दमेशेक नगर के तीन,

नहीं वरन चार अपराधों के कारण, मैं उसे दंड देने से पीछे नहीं हटूंगा.

क्योंकि उसने गिलआद पर

लोहे के तीक्ष्ण शस्त्रों से प्रहार किया है,

4तब मैं हाज़ाएल के परिवार पर आग बरसाऊंगा

और वह बेन-हद्द के गढ़ को नष्ट कर देगी.

5दमेशेक नगर के प्रवेश द्वार को मैं तोड़ डालूंगा;

और आवेन1:5 अर्थ: दुष्टता घाटी के राजा को,

और बेथ-एदेन में राजदंड धरनेवाले को, मैं नाश कर दूंगा.

अरामवासी कीर में बंधुआई में चले जाएंगे,”

यह याहवेह का कहना है.

6याहवेह का यह कहना है:

“अज्जाह1:6 या गाज़ा नगर के तीन,

नहीं वरन चार अपराधों के कारण, मैं दंड देने से पीछे नहीं हटूंगा.

क्योंकि उसने पूरे प्रजा को बंधुआई में ले गया

और उन्हें एदोम को बेच दिया है,

7तब मैं अज्जाह नगर की दीवारों पर आग बरसाऊंगा

जो उसके राजमहलों को जलाकर नष्ट कर देगी.

8मैं अशदोद के राजा को,

और अश्कलोन में राजदंड धरनेवाले को नाश कर दूंगा.

एक्रोन पर मैं अपने हाथों से तब तक वार करूंगा,

जब तक कि आखिरी फिलिस्तीनी भी मार न डाला जाए,”

यह प्रभु याहवेह का कहना है.

9याहवेह का यह कहना है:

“सोर नगर के तीन,

नहीं वरन चार अपराधों के कारण, मैं दंड देने से पीछे नहीं हटूंगा.

क्योंकि उसने संपूर्ण बंधुआई के समूह को एदोम को बेच दिया है,

और भाईचारे की वाचा का अनादर किया है,

10तब मैं सोर की दीवारों पर आग बरसाऊंगा

जो उसके राजमहलों को जलाकर नष्ट कर देगी.”

11याहवेह का यह कहना है:

“एदोम के तीन पापों के कारण,

तीन नहीं वरन चार पापों के कारण, मैं दंड देने से पीछे नहीं हटूंगा.

क्योंकि उसने तलवार लेकर अपने भाई को खदेड़ा

और देश की महिलाओं को घात किया,

क्रोध में वह निरंतर उनका संहार करता गया

उसका रोष सदा बना रहा,

12मैं तेमान पर आग बरसाऊंगा

जो बोज़राह के राजमहलों को जलाकर भस्म कर देगी.”

13याहवेह का यह कहना है:

“अम्मोनवासियों के तीन,

नहीं वरन चार अपराधों के कारण, मैं उसे दंड देने से पीछे न हटूंगा.

क्योंकि उसने गिलआद की गर्भवती स्त्रियों के पेट इसलिये चीर दिया

ताकि वह अपनी सीमा का विस्तार कर सके,

14तब युद्ध के उस दिन जब शोरगुल हो रहा होगा,

जब उग्र आंधी और उपद्रव हो रहा होगा

तब मैं रब्बाह नगर की दीवारों पर आग लगा दूंगा,

जो उसके राजमहलों को जलाकर नष्ट कर देगी.

15अम्मोन के राजा

और उसके कर्मचारी एक साथ बंधुआई में चले जाएंगे,”

यह याहवेह का कहना है.