Nueva Versión Internacional

Joel 3:1-21

El juicio de las naciones

1»En aquellos días, en el tiempo señalado,

cuando restaure yo la suerte de Judá y de Jerusalén,

2reuniré a todas las naciones

y las haré bajar al valle de Josafat.3:2 En hebreo, Josafat significa el Señor juzga; también en v. 12.

Allí entraré en juicio contra los pueblos

en cuanto a mi propiedad, mi pueblo Israel,

pues lo dispersaron entre las naciones

y se repartieron mi tierra.

3Se repartieron a mi pueblo echando suertes,

cambiaron a niños por prostitutas

y, para emborracharse,

vendieron niñas por vino.

4»Ahora bien, Tiro y Sidón, y regiones todas de Filistea, ¿qué tienen en contra mía? ¿Quieren acaso vengarse de mí? Si es así, yo haré que muy pronto recaiga sobre ustedes su propia venganza, 5pues se robaron mi oro y mi plata, y se llevaron a sus templos mis valiosos tesoros. 6A los griegos les vendieron el pueblo de Jerusalén y de Judá, para alejarlos de su tierra.

7»Sepan, pues, que voy a sacarlos de los lugares donde fueron vendidos, y haré que recaiga sobre ustedes su propia venganza. 8Venderé sus hijos y sus hijas al pueblo de Judá, y ellos a su vez los venderán a los sabeos, una nación lejana». El Señor lo ha dicho.

9Proclamen esto entre las naciones:

¡Prepárense3:9 Prepárense. Lit. Santifíquense. para la batalla!

¡Movilicen a los soldados!

¡Alístense para el combate todos los hombres de guerra!

10Forjen espadas con los azadones

y hagan lanzas con las hoces.

Que diga el cobarde:

«¡Soy un valiente!»

11Dense prisa, naciones vecinas,

reúnanse en ese lugar.

¡Haz bajar, Señor, a tus valientes!

12«Movilícense las naciones;

suban hasta el valle de Josafat,

que allí me sentaré

para juzgar a los pueblos vecinos.

13Mano a la hoz,

que la mies está madura.

Vengan a pisar las uvas,

que está lleno el lagar.

Sus cubas se desbordan:

¡tan grande es su maldad!»

14¡Multitud tras multitud

en el valle de la Decisión!

¡Cercano está el día del Señor

en el valle de la Decisión!

15Se oscurecerán el sol y la luna;

dejarán de brillar las estrellas.

16Rugirá el Señor desde Sión,

tronará su voz desde Jerusalén,

y la tierra y el cielo temblarán.

Pero el Señor será un refugio para su pueblo,

una fortaleza para los israelitas.

Bendiciones para el pueblo de Dios

17«Entonces ustedes sabrán que yo, el Señor su Dios,

habito en Sión, mi monte santo.

Santa será Jerusalén,

y nunca más la invadirán los extranjeros.

18»En aquel día las montañas destilarán vino dulce,

y de las colinas fluirá leche;

correrá el agua por los arroyos de Judá.

De la casa del Señor brotará una fuente

que irrigará el valle de las Acacias.

19Pero Egipto quedará desolado,

y Edom convertido en desierto,

por la violencia cometida contra el pueblo de Judá,

en cuya tierra derramaron sangre inocente.

20Judá y Jerusalén serán habitadas

para siempre, por todas las generaciones.

21¿Perdonaré la sangre que derramaron?

¡Claro que no la perdonaré!»

¡El Señor hará su morada en Sión!

Hindi Contemporary Version

योएल 3:1-21

जाति-जाति के लोगों का न्याय किया जाना

1“उन दिनों में और उस समय पर,

जब मैं यहूदिया और येरूशलेम के लोगों को बंधुआई से लौटा लाऊंगा,

2तब मैं सब जाति के लोगों को इकट्ठा करूंगा

और उन्हें नीचे यहोशाफ़ात3:2 अर्थ: परमेश्वर न्याय करता है की घाटी में ले आऊंगा.

वहां मैं उनकी परीक्षा करूंगा

उन्होंने मेरे निज भाग अर्थात मेरे लोग इस्राएलियों के साथ जो कुछ किया, उसके लिये.

क्योंकि उन्होंने मेरे लोगों को जात-जाति के लोगों के बीच तितर-बितर कर दिया है

और उन्होंने मेरे देश को बांट दिया है.

3वे मेरे लोगों के लिये पांसा फेंकते हैं

और उन्होंने वेश्याओं के बदले में लड़कों को दे दिया है;

उन्होंने दाखमधु पीने के लिये लड़कियों को बेच दिया है.

4“हे सोर और सीदोन और फिलिस्तिया के सारे क्षेत्र के लोगों, अब तुम्हारे पास मेरे विरुद्ध में क्या है? क्या तुम उस बात का बदला चुका रहे हो, जो मैंने किया है? यदि तुम मुझे वापस बदला चुका रहे हो, तो मैं शीघ्र ही, तेजी से, तुम्हारे द्वारा किए गए कामों को वापस तुम्हारे ही सिर पर डाल दूंगा. 5क्योंकि तुम मेरा चांदी और मेरा सोना ले लिये और मेरे बहुमूल्य खजानों को अपने मंदिरों में रख लिये हो. 6तुमने यहूदिया और येरूशलेम के लोगों को यूनानियों के हाथ बेच दिया, ताकि तुम उन्हें उनके देश से दूर कर सको.

7“देखो, मैं उन्हें उन स्थानों से लौटाकर लानेवाला हूं, जहां तुमने उन्हें बेच दिया था, और तुम्हारे किए गये कामों को वापस तुम्हारे ही सिर पर डाल दूंगा. 8मैं तुम्हारे बेटे और बेटियों को यहूदिया के लोगों के हाथ बेच दूंगा, और वे उन्हें बहुत दूर रहनेवाली एक जाति शबाईयों के हाथ बेच देंगे.” याहवेह ने कहा है.

9जाति-जाति के लोगों के बीच यह घोषणा करो:

युद्ध की तैयारी करो!

योद्धाओं का आव्हान करो!

लड़ने वाले सब लोग निकट आये और आक्रमण करें.

10अपने हल की फालों को पीटकर उनकी तलवारें बना लो

और अपने हंसियों को पीटकर उनके बर्छी बना लो.

जो दुर्बल है वह कहे,

“मैं बलवान हूं!”

11चारों तरफ के जाति-जाति के सब लोगों, जल्दी करके आओ,

और वहां तुम इकट्ठे हो जाओ.

हे याहवेह, अपने योद्धाओं को नीचे ले आइए!

12“जाति-जाति के लोग उत्तेजित हों;

और वे यहोशाफ़ात की घाटी में जाएं,

क्योंकि वहां मैं चारों तरफ के जाति-जाति के

सब लोगों का न्याय करने बैठूंगा.

13हंसिया चलाना शुरू करो,

क्योंकि फसल पक गया है.

आओ, अंगूर को रौंदो,

क्योंकि अंगूर-रस का कुंड भर गया है

और हौज छलक रहे हैं—

उनकी दुष्टता बहुत ज्यादा है!”

14निर्णय की घाटी में

लोगों का भीड़ ही भीड़ है!

क्योंकि निर्णय की घाटी में

याहवेह का दिन निकट है.

15सूर्य और चंद्रमा पर अंधकार छा गया है,

और तारे चमकना बंद कर देंगे.

16याहवेह ज़ियोन से गरजेंगे

और येरूशलेम से गर्जन सुनाई देगा;

आकाश और पृथ्वी कांप उठेंगे.

पर याहवेह अपने लोगों के लिए एक शरण स्थान,

और इस्राएल के लोगों के लिए एक सुरक्षा गढ़ होंगे.

परमेश्वर के लोगों के लिये आशीष

17“तब तुम जानोगे कि मैं, याहवेह ही तुम्हारा परमेश्वर हूं,

जो अपने पवित्र पर्वत, ज़ियोन पर निवास करता हूं.

येरूशलेम एक पवित्र स्थान होगा;

परदेशी फिर कभी उस पर आक्रमण न कर पाएंगे.

18“उस दिन पहाड़ों नई अंगूर की दाखमधु टपकेगी,

और पहाड़ियों से दूध बहेगा;

यहूदिया के सब दर्रों में पानी बहेगा.

याहवेह के भवन से पानी का एक सोता फूट निकलेगा

और शित्तीम घाटी की सिंचाई करेगा.

19पर मिस्र देश उजाड़ हो जाएगा,

और एदोम एक बेकार निर्जन देश,

क्योंकि इन्होंने यहूदिया के लोगों पर अत्याचार किया था,

और इन्होंने उनके देश में निर्दोष लोगों का खून बहाया था.

20यहूदिया में लोग सदा-सर्वदा निवास करते रहेंगे

और येरूशलेम में लोग पीढ़ी-पीढ़ी तक रहेंगे.

21क्या मैं उन निर्दोष लोगों के खून का बदला लिये बिना छोड़ दूंगा?

नहीं, बिलकुल नहीं.”

याहवेह ज़ियोन में निवास करते हैं!