Het Boek

Psalmen 63:1-12

1Een psalm van David, die hij schreef in de woestijn van Juda.

2God, mijn God, ik zoek U overal,

mijn hart dorst naar U.

Ook mijn lichaam verlangt naar U

in dit dorre, droge land, waar geen water is.

3Ik heb U in uw heiligdom gezien,

ik zag uw kracht en majesteit.

4Uw goedheid en trouw overtreffen het leven zelf.

Ik zal met mijn mond uw naam grootmaken.

5Mijn leven lang wil ik U prijzen,

mijn handen naar U opheffen wanneer ik bid.

6Er is niets anders waarnaar ik verlang,

er komen prachtige lofliederen over mijn lippen,

7ook ʼs nachts als ik wakker lig en over U nadenk.

8Want U bent mij altijd te hulp gekomen.

Ik jubel het uit vanuit de beschermde plaats

waar U mij in leven houdt.

9Alles in mij richt zich op U.

Ik kan niet zonder U,

uw hand houdt mij vast.

10Maar de mensen die op mijn ondergang uit zijn,

zullen in de diepte van de aarde worden neergelaten.

11Zij zullen omkomen door het zwaard

en ten prooi vallen aan de wilde dieren.

12Maar de koning verheugt zich in God,

ieder die bij Hem zweert,

zal reden tot vreugde hebben

en zich op Hem kunnen beroemen,

want Hij brengt de leugenaar tot zwijgen.

Hindi Contemporary Version

स्तोत्र 63:1-11

स्तोत्र 63

दावीद का एक स्तोत्र. जब वह यहूदिया प्रदेश के निर्जन प्रदेश में थे.

1परमेश्वर, आप मेरे अपने परमेश्वर हैं,

अत्यंत उत्कटतापूर्वक मैं आपके सान्निध्य की कामना करता हूं;

सूखी और प्यासी भूमि में,

जहां जल है ही नहीं,

मेरे प्राण आपके लिए प्यासा

एवं मेरी देह आपकी अभिलाषी है.

2आपके पवित्र स्थान में मैंने आपका दर्शन किया है,

कि आपके सामर्थ्य तथा तेज को निहारू.

3इसलिये कि आपका करुणा-प्रेम मेरे जीवन की अपेक्षा कहीं अधिक श्रेष्ठ है,

मेरे मुख से आपके स्तवन के उद्गार निकलते रहेंगे.

4मैं आजीवन आपका धन्यवाद करता रहूंगा.

आपकी महिमा का ध्यान कर मैं अपने हाथ उठाऊंगा.

5ओंठों पर गीत और मुख से स्तुति के वचनों,

से मेरे प्राण ऐसे तृप्त हो जाएंगे, जैसे उत्कृष्ट भोजन से.

6जब मैं बिछौने पर होता हूं, तब आपका स्मरण करता हूं;

मैं रात्रि के प्रहरों में आपके विषय में चिंतन करता रहूंगा.

7क्योंकि आप ही मेरे सहायक है,

आपके पंखों की छाया मुझे गीत गाने के लिए प्रेरित करती है.

8मैं आपके निकट रहना चाहता हूं;

आपका दायां हाथ मुझे संभाले रहता है.

9जो मेरे प्राणों के प्यासे हैं, उनका विनाश निश्चित है;

वे पृथ्वी की गहराई में समा जाएंगे.

10वे तलवार से घात किए जाने के लिए सौंप दिए जाएंगे,

कि वे सियारों का आहार बन जाएं.

11राजा परमेश्वर में उल्‍लासित रहेगा;

वे सभी, जिन्होंने परमेश्वर में श्रद्धा रखी है, उनका स्तवन करेंगे,

जबकि झूठ बोलनेवालों के मुख चुप कर दिए जाएंगे.