Knijga O Kristu

2 Timoteju 3:1-17

Opasnosti u posljednjim vremenima

1I znaj, Timoteju, da će posljednja vremena biti teška 2jer će ljudi biti sebični i pohlepni za novcem. Bit će oholi i hvalisavci, rugat će se Bogu, bit će neposlušni roditeljima i nezahvalni. Ništa im neće biti sveto. 3Bit će tvrda srca i nikad ni u čemu neće popuštati drugima; bit će lažljivci i stvarat će nevolje, neobuzdano će živjeti. Bit će grubi i okrutni, izrugivat će se onima koji nastoje biti dobri. 4Izdavat će svoje prijatelje; to su usijane glave, nadmene i ohole, koje će više voljeti svjetovne užitke nego štovanje Boga. 5Zadržat će izvanjsko obličje pobožnosti, ali će se odreći njezine sile. Takvih se ljudi klonite.

6Takvi su oni koji se uvlače u kuće i pridobivaju ženice opterećene bremenom grijeha, kojima vladaju različite strasti. 7One uvijek uče, a nikako da spoznaju istinu. 8Ti se učitelji bore protiv istine kao što su se Janes i Jambres suprotstavili Mojsiju. To su ljudi pokvarena uma i nevaljane vjere. 9Ali neće više napredovati jer će svima postati jasno da su bezumnici, baš kao što se dogodilo Janesu i Jambresu.

Pavao zadužuje Timoteja

10Ali ti znaš što poučavam, kako živim i što mi je životni naum. Znaš moju vjeru i što sam sve propatio. Znaš moju ljubav i postojanost. 11Znaš kakva sam progonstva i patnje pretrpio u Antiohiji, u Ikoniju i Listri. Ali Gospodin me iz svih izbavio. 12A i svi koji hoće pobožno živjeti u Kristu Isusu bit će progonjeni. 13Zli će pak ljudi i varalice napredovati iz zla u gore. Varat će druge, ali će i sami biti prevareni.

14Ali ti ostani vjeran onome čemu si poučen. Znaš da u to možeš vjerovati jer znaš da možeš vjerovati onome tko te je poučio. 15Odmalena poznaješ Sveto pismo, koje ti je dalo mudrost da primiš spasenje po vjeri u Krista Isusa. 16Jer cijelo je Sveto pismo od Boga nadahnuto i korisno za poučavanje, za popravljanje i odgajanje u pravednosti. 17Bog nas kroz njega oprema da budemo sposobni za svako djelo ljubavi.

Hindi Contemporary Version

2 तिमोथियॉस 3:1-17

1यह समझ लो कि अंतिम दिन कष्ट देनेवाला समय होगा. 2मनुष्य स्वार्थी, लालची, डींगमार, अहंकारी, परमेश्वर की निंदा करनेवाला, माता-पिता की आज्ञा टालनेवाला, दयारहित, अपवित्र, 3निर्मम, क्षमा रहित, दूसरों की बुराई करनेवाला, असंयमी, कठोर, भले का बैरी, 4विश्वासघाती, ढीठ, घमंडी तथा परमेश्वर भक्त नहीं परंतु सुख-विलास के चाहनेवाले होंगे. 5उनमें परमेश्वर भक्ति का स्वरूप तो दिखाई देगा किंतु इसका सामर्थ्य नहीं. ऐसे लोगों से दूर रहना.

6इन्हीं में से कुछ वे हैं, जो घरों में घुसकर निर्बुद्धि स्त्रियों को अपने वश में कर लेते हैं, जो पापों में दबी तथा विभिन्न वासनाओं में फंसी हुई हैं. 7वे सीखने का प्रयास तो करती हैं किंतु सच्चाई के सारे ज्ञान तक पहुंच ही नहीं पातीं. 8जिस प्रकार यान्नेस तथा याम्ब्रेस ने मोशेह का विरोध किया था, उसी प्रकार ये भ्रष्ट बुद्धि के व्यक्ति सच का विरोध करते हैं. बनावटी है इनका विश्वास. 9यह सब अधिक समय तक नहीं चलेगा क्योंकि उन दोनों के समान उनकी मूर्खता सबके सामने प्रकाश में आ जाएगी.

तिमोथियॉस को अंतिम प्रभार

10तुमने मेरी शिक्षा, स्वभाव, उद्देश्य, विश्वास, सताए जाने के समय, प्रेम तथा धीरज और सहनशीलता का भली-भांति अनुसरण किया है 11तथा तुम्हें मालूम है कि अंतियोख़, इकोनियॉन तथा लुस्त्रा नगरों में मुझ पर कैसे-कैसे अत्याचार हुए, फिर भी उन सभी में से प्रभु ने मुझे निकाला है. 12यह सच है कि वे सभी, जो मसीह येशु में सच्चाई का जीवन जीने का निश्चय करते हैं, सताए ही जाएंगे, 13परंतु दुष्ट तथा बहकानेवाले छल करते और स्वयं छले जाते हुए लगातार विनाश के गड्ढे में गिरते जाएंगे. 14किंतु तुम स्वयं उन शिक्षाओं में, जो तुमने प्राप्त की तथा जिनकें विषय में तुम आश्वस्त हो चुके हो, स्थिर रहो, यह याद रखते हुए कि किन्होंने तुम्हें ये शिक्षाएं दी हैं, 15यह भी कि बचपन से तुम पवित्र अभिलेखों से परिचित हो, जो तुम्हें वह बुद्धिमता देने में समर्थ हैं, जिससे मसीह येशु में विश्वास के द्वारा उद्धार प्राप्त होता है. 16सारा पवित्र शास्त्र परमेश्वर की प्रेरणा से रचा गया है. यह शिक्षा देने, गलत धारणाओं का विरोध करने, दोष-सुधार तथा धार्मिकता की शिक्षा के लिए सही है, 17कि परमेश्वर का जन पूरी तरह से हर एक अच्छे कार्य के लिए सुसज्जित पाया जाए.