Песнь Сулеймана 4 – CARSA & HCV

Священное Писание (Восточный перевод), версия с «Аллахом»

Песнь Сулеймана 4:1-16

Он:

1– Как прекрасна ты, милая моя,

как прекрасна!

Глаза твои за вуалью словно голуби.

Твои волосы – как стадо чёрных коз,

что сходит с горы Галаад.

2Зубы твои белы, как стадо выстриженных овец,

выходящих из купальни.

У каждого есть свой близнец,

никто из них не одинок.

3Губы твои словно алая лента,

уста твои прекрасны.

Щёки твои за вуалью – румяны,

как половинки граната.

4Шея твоя как башня Давуда,

изящно сложенная,

украшенная тысячью щитов,

все они – щиты воинов.

5Груди твои как два оленёнка,

как двойня газели,

что пасётся среди лилий.

6Пока не наступил день

и не скрылись тени,

я пойду на гору мирровую

и на холм ладана.

7Милая моя, ты вся прекрасна,

в тебе нет изъяна!

8Пойдём со мной с Ливана, невеста моя,

со мной с Ливана.

Спустись с вершины Аманы,

с вершины Сенира и Хермона4:8 Эти четыре горы находятся на севере от Исраила. Сенир и Хермон – две вершины одного горного кряжа.,

уйди от логовищ львов,

от горных убежищ барсов.

9Ты похитила сердце моё, сестра4:9 Сестра – это выражение, как ласковое обращение к невесте или жене, было в обычае на древнем Востоке. Также в ст. 10, 12; 5:1, 2. моя, невеста моя;

ты похитила сердце моё

одним взглядом своих очей,

одной лишь бусинкой своего ожерелья.

10Как отрадна любовь твоя, сестра моя, невеста моя!

Насколько слаще вина любовь твоя,

и аромат благовоний твоих лучше всех ароматов!

11Из уст твоих сочится сотовый мёд, невеста моя,

мёд и молоко под языком твоим.

Благоухание одежды твоей как аромат ливанского кедра.

12Ты запертый сад, сестра моя, невеста моя,

заключённый источник, запечатанный родник.

13Ты – сад с гранатовыми деревьями,

с превосходными плодами,

с кипером и нардом4:13 Нард – растение, произрастающее только в Индии, на Гималаях, с пурпурно-красными цветами, листья которого издают приятный аромат. Из этого растения получали дорогостоящее масло.;

14нардом и шафраном,

с благовонным тростником и корицей,

с разными благовонными деревьями,

с миррой и алоэ4:14 Алоэ – источающее ароматную смолу дерево, родиной которого является Индокитай, использовалось как благовоние, а также при бальзамировании. Не имеет ничего общего с общеизвестным обыкновенным алоэ.

всякими лучшими ароматами.

15Ты садовый родник,

источник свежей воды,

текущей с Ливанских гор.

Она:

16– Пробудись, северный ветер,

и приди, южный,

подуй на сад мой

и разнеси аромат его!

Пусть возлюбленный мой придёт в сад свой

и вкусит плоды его превосходные.

Hindi Contemporary Version

सर्वश्रेष्ठ गीत 4:1-16

नायक

1कितनी सुंदर हो तुम मेरी प्रिया!

मेरी आंखों के लिए कितनी प्रिय हो तुम!

ओढ़नी के पीछे तुम्हारी आंखें कबूतरी के समान हैं.

तुम्हारे बाल गिलआद पर्वत की ढाल पर

चढ़ाई कर रही बकरियों के समान हैं.

2तुम्हारे दांत अभी-अभी ऊन कतरे हुए भेड़ों के समान हैं,

जो नहाकर आईं हैं,

उन सभी के जुड़वां बच्‍चे होते हैं,

तथा जिनमें से एक भी अकेला नहीं है.

3तुम्हारे ओंठ लाल रंग की डोरी के समान हैं;

तथा मनमोहन है तुम्हारा मुंह.

तुम्हारे गाल तुम्हारी ओढ़नी

के पीछे अनार की दो फांक के समान हैं.

4दावीद द्वारा बनाए गए मीनारों के समान है तुम्हारी गर्दन,

जिन्हें पत्थरों को तराशकर बनाया गया है,

जिन पर एक हज़ार ढालें लटका दी जाती हैं,

वीर योद्धाओं की सभी गोलाकार ढालें.

5तुम्हारी दोनों छातियां हिरणी के दो बच्चों के समान हैं,

हिरणी के जुड़वां बच्‍चे,

जो सोसन के फूलों के बीच चरते हैं.

6शाम होने तक

जब छाया मिटने लगती है,

मैं गन्धरस के पहाड़ पर चला जाऊंगा,

हां, लोबान की पहाड़ी पर.

7मेरी प्रियतमा, तुम सर्वांग सुंदरी हो;

कोई भी दोष नहीं है तुममें.

8मेरी दुल्हिन, मेरे साथ लबानोन से आ जाओ,

कैसा होगा जब तुम मेरे साथ लबानोन से आओगी.

उतर आओ; अमाना शिखर से,

सेनीर तथा हरमोन के शिखर से,

शेरों की गुफाओं से,

तेंदुओं के पर्वतों से.

9मेरी बहन, मेरी दुल्हिन, तुमने तो मेरी हृदय गति तेज कर दी है;

तुम्हारे गले के हार के एक ही हीरे से,

तुम्हारी आंखों के एक ही चितवन से,

तुमने तो मेरी हृदय गति तेज कर दी है!

10मेरी बहन, मेरी दुल्हिन, कैसा मनोहर है तुम्हारा प्रेम!

दाखमधु से भी उत्तम है तुम्हारा प्रेम,

तथा तुम्हारे ईत्रों की सुगंध भी उत्तमोत्तर है

सभी मसालों की सुगंध से!

11मेरी दुल्हिन, तुम्हारे ओंठ मधु टपकाते हैं;

तुम्हारी जीभ के नीचे दूध और मधु रहता है,

तुम्हारे वस्त्रों से उठती सुगंध

लबानोन की सुगंध के समान है.

12मेरी बहन, मेरी दुल्हिन एक गुप्‍त निजी बगीचा है;

चारदीवारी में बंद तथा निजी झरने वाला बगीचा.

13तुम तो अनार के पेड़ों की बारी हो, जिसमें सबसे अच्छे फल लगे हुए हैं

तथा जिसमें मेंहदी

तथा जटामांसी के पौधे लगे हुए हैं.

14जटामांसी एवं केसर,

नरकुल तथा दालचीनी,

ये सभी गन्धरस,

लोबान तथा अगर

तथा इनके सारे मुख्य मसालों के मिश्रण के साथ.

15तुम तो बगीचे के बीच का सोता हो,

सुखदायी जल का कुंआ,

वे नदियां, जो लबानोन से निकली हैं.

नायिका

16उत्तरी वायु, जागो,

दक्षिण वायु! आ जाओ;

मेरे बगीचे के ऊपर से बहो,

इसके मसालों के मिश्रण उड़कर दूर चले जाएं.

कैसा हो यदि मेरा प्रेमी अपने बगीचे में आ जाए

तथा इसके उत्तम-उत्तम फलों को खाए.