New International Version

Romans 9:1-33

Paul’s Anguish Over Israel

1I speak the truth in Christ—I am not lying, my conscience confirms it through the Holy Spirit— 2I have great sorrow and unceasing anguish in my heart. 3For I could wish that I myself were cursed and cut off from Christ for the sake of my people, those of my own race, 4the people of Israel. Theirs is the adoption to sonship; theirs the divine glory, the covenants, the receiving of the law, the temple worship and the promises. 5Theirs are the patriarchs, and from them is traced the human ancestry of the Messiah, who is God over all, forever praised!9:5 Or Messiah, who is over all. God be forever praised! Or Messiah. God who is over all be forever praised! Amen.

God’s Sovereign Choice

6It is not as though God’s word had failed. For not all who are descended from Israel are Israel. 7Nor because they are his descendants are they all Abraham’s children. On the contrary, “It is through Isaac that your offspring will be reckoned.”9:7 Gen. 21:12 8In other words, it is not the children by physical descent who are God’s children, but it is the children of the promise who are regarded as Abraham’s offspring. 9For this was how the promise was stated: “At the appointed time I will return, and Sarah will have a son.”9:9 Gen. 18:10,14

10Not only that, but Rebekah’s children were conceived at the same time by our father Isaac. 11Yet, before the twins were born or had done anything good or bad—in order that God’s purpose in election might stand: 12not by works but by him who calls—she was told, “The older will serve the younger.”9:12 Gen. 25:23 13Just as it is written: “Jacob I loved, but Esau I hated.”9:13 Mal. 1:2,3

14What then shall we say? Is God unjust? Not at all! 15For he says to Moses,

“I will have mercy on whom I have mercy,

and I will have compassion on whom I have compassion.”9:15 Exodus 33:19

16It does not, therefore, depend on human desire or effort, but on God’s mercy. 17For Scripture says to Pharaoh: “I raised you up for this very purpose, that I might display my power in you and that my name might be proclaimed in all the earth.”9:17 Exodus 9:16 18Therefore God has mercy on whom he wants to have mercy, and he hardens whom he wants to harden.

19One of you will say to me: “Then why does God still blame us? For who is able to resist his will?” 20But who are you, a human being, to talk back to God? “Shall what is formed say to the one who formed it, ‘Why did you make me like this?’ ”9:20 Isaiah 29:16; 45:9 21Does not the potter have the right to make out of the same lump of clay some pottery for special purposes and some for common use?

22What if God, although choosing to show his wrath and make his power known, bore with great patience the objects of his wrath—prepared for destruction? 23What if he did this to make the riches of his glory known to the objects of his mercy, whom he prepared in advance for glory— 24even us, whom he also called, not only from the Jews but also from the Gentiles? 25As he says in Hosea:

“I will call them ‘my people’ who are not my people;

and I will call her ‘my loved one’ who is not my loved one,”9:25 Hosea 2:23


“In the very place where it was said to them,

‘You are not my people,’

there they will be called ‘children of the living God.’ ”9:26 Hosea 1:10

27Isaiah cries out concerning Israel:

“Though the number of the Israelites be like the sand by the sea,

only the remnant will be saved.

28For the Lord will carry out

his sentence on earth with speed and finality.”9:28 Isaiah 10:22,23 (see Septuagint)

29It is just as Isaiah said previously:

“Unless the Lord Almighty

had left us descendants,

we would have become like Sodom,

we would have been like Gomorrah.”9:29 Isaiah 1:9

Israel’s Unbelief

30What then shall we say? That the Gentiles, who did not pursue righteousness, have obtained it, a righteousness that is by faith; 31but the people of Israel, who pursued the law as the way of righteousness, have not attained their goal. 32Why not? Because they pursued it not by faith but as if it were by works. They stumbled over the stumbling stone. 33As it is written:

“See, I lay in Zion a stone that causes people to stumble

and a rock that makes them fall,

and the one who believes in him will never be put to shame.”9:33 Isaiah 8:14; 28:16

New Chhattisgarhi Translation (नवां नियम छत्तीसगढ़ी)

रोमीमन 9:1-33

परमेसर अऊ ओकर चुने मनखेमन

1मेंह मसीह म होके सच कहत हंव; मेंह लबारी नइं मारत हंव। मोर बिवेक घलो पबितर आतमा म होके गवाही देवत हवय – 2कि मोला बहुंते दुःख हवय अऊ मोर हिरदय ह हमेसा दुःख ले भरे हवय। 3मेंह चाहत रहेंव कि मोर भाईमन बर जऊन मन मोर खुद के बंस के अंय, ओमन के हित म मेंह खुदे सरापित हो जातेंव अऊ मसीह ले अलग हो जातेंव। 4ओमन इसरायली मनखे अंय। परमेसर ह ओमन ला गोद लेके बेटा बनाईस; ओमन के ऊपर महिमा परगट करिस; ओमन के संग करार करिस; ओमन ला मूसा के कानून दीस। ओमन ला बताईस कि मंदिर म ओकर अराधना कइसने करे जावय अऊ ओह ओमन ले परतिगियां करिस। 5कुल के मुखियामन एमन के पुरखा रिहिन अऊ मसीह ह मनखे के रूप म एमन के बंस ले आईस, जऊन ह जम्मो के ऊपर परमेसर अय, ओकर परसंसा सदा होवय! आमीन।

6अइसने नो हय कि परमेसर के बचन ह सच नइं होईस। काबरकि ओ जम्मो, जऊन मन इसरायल के बंस म जनम ले हवंय, जम्मो के जम्मो इसरायली नो हंय, 7अऊ ओ जम्मो अब्राहम के संतान नो हंय, जऊन मन ओकर बंस म जनम लीन, काबरकि परमेसर के बचन ह कहिथे, “इसहाक के जरिये तोर बंस चलही।”9:7 उतपत्ती 21:12 8एकर मतलब ए अय कि मनखे के ईछा के मुताबिक जनमे लइकामन परमेसर के संतान नो हंय, पर परमेसर के परतिगियां के मुताबिक जनमे लइकामन सही बंसज समझे जाथें। 9काबरकि परमेसर के बचन म ए किसम ले परतिगियां के बचन कहे गे हवय, “सही समय म, मेंह फेर आहूं, अऊ सारा ह एक बेटा ला जनम दिही।”9:9 उतपत्ती 18:10

10अऊ सिरिप अतका ही नइं, पर रिबिका के दूनों लइकामन के एके ददा रिहिस, याने कि हमर पुरखा इसहाक। 11पर जब ओ जुड़वां लइकामन जनमे घलो नइं रिहिन अऊ कुछू भला-बुरा घलो नइं करे रिहिन, तभे रिबिका ला ए कहे गीस, “बड़े ह छोटे के सेवा करही।” एह एकरसेति होईस ताकि परमेसर के चुनाव के उदेस्य ह बने रहय, 12अऊ एह ओमन के कुछू करम के कारन नइं, पर परमेसर के बुलाहट के कारन होईस। 13जइसने कि परमेसर के बचन म लिखे हवय, “याकूब ले मेंह मया करेंव पर एसाव ला अप्रिय जानेंव।”9:13 मलाकी 1:2, 3

14तब हमन का कहन? का परमेसर ह अनियाय करथे? बिलकुल नइं! 15काबरकि ओह मूसा ले कहिस,

“जेकर ऊपर मेंह दया करे चाहंव,

ओकर ऊपर दया करहूं, अऊ जेकर ऊपर मेंह तरस खाय चाहंव, ओकर ऊपर तरस खाहूं।”9:15 निरगमन 33:19

16एकरसेति एह मनखे के ईछा या काम के ऊपर निरभर नइं करय, पर परमेसर के दया ऊपर निरभर करथे। 17काबरकि परमेसर के बचन म फिरौन राजा ला ए कहे गे हवय, “मेंह तोला एकरसेति राजा बनाय हवंव कि मेंह तोर ऊपर अपन सक्ति ला देखावंव अऊ धरती के जम्मो मनखेमन मोला जानंय।”9:17 निरगमन 9:16 18एकरसेति परमेसर ह जेकर ऊपर दया करे चाहथे, ओकर ऊपर दया करथे, अऊ जेकर हिरदय ला कठोर करे चाहथे, ओला कठोर कर देथे।

19तब तुमन ह मोला कहिहू, “त फेर परमेसर ह मनखे ऊपर काबर दोस लगाथे? कोन ह ओकर ईछा के बिरोध कर सकथे?” 20हे मनखे! तेंह कोन अस कि परमेसर ला जबाब देथस? का गढ़े गे चीज ह अपन गढ़इया ला कहे सकथे, “तेंह मोला अइसने काबर बनाय हवस?”9:20 यसायाह 29:16 21का कुम्‍हार ला ए अधिकार नइं ए कि माटी के एके लोंदा ले, ओह एक बरतन ला बिसेस उपयोग खातिर अऊ दूसर बरतन ला सधारन उपयोग खातिर बनावय?

22एह कोनो अचरज के बात नो हय, यदि परमेसर ह अपन कोरोध अऊ सक्ति देखाय के ईछा करिस अऊ ओमन ला बड़े धीर धरके सहिस जऊन मन कोरोध के पात्र रिहिन अऊ बिनास खातिर बनाय गे रिहिन। 23एह कोनो अचरज के बात नो हय, यदि परमेसर ह ए करे के दुवारा, अपन बड़े महिमा ओमन ला देखाय चाहिस, जऊन मन दया के पात्र रिहिन अऊ महिमा के खातिर पहिली ले तियार करे गे रिहिन। 24अऊ त अऊ हमन ला घलो ओह बलाईस, न सिरिप यहूदी जात म ले, पर आनजात म ले घलो बलाईस। 25जइसने कि ओह होसे के किताब म कहिथे:

“जऊन मन मोर मनखे नो हंय, ओमन ला मेंह अपन मनखे कहिहूं;

अऊ जऊन ह मोर मयारू नो हय, ओला मेंह अपन मयारू कहिहूं,”9:25 होसे 2:23


“जऊन जगह म ओमन ला ए कहे गे रिहिस,

‘तुमन मोर मनखे नो हव, ओही जगह म,

ओमन ला जीयत परमेसर के संतान कहे जाही।’ ”9:26 होसे 1:10

27यसायाह अगमजानी ह इसरायलीमन के बारे म पुकारके कहिथे,

“हालाकि इसरायलीमन के गनती ह समुंदर के बालू सहीं होही,

पर ओम ले थोरकन मनखे ही बंचाय जाहीं।

28काबरकि परभू ह अपन फैसला ला

धरती म जल्दी अऊ कड़ई से लागू करही।”9:28 यसायाह 10:22-23

29जइसने कि यसायाह अगमजानी ह पहिली कहे रिहिस:

“यदि सर्वसक्तिमान परभू ह हमर बर बंस ला नइं छोंड़े होतिस,

त हमन सदोम अऊ अमोरा सहर मन सहीं पूरापूरी नास हो गे रहितेन।”9:29 यसायाह 1:9

इसरायलीमन के अबिसवास

30तब, हमन का कहन? कि आनजात के मनखे जऊन मन परमेसर के धरमीपन के खोज नइं करत रिहिन, ओमन धरमीपन ला पा गीन, याने कि ओ धरमीपन जऊन ह बिसवास करे के दुवारा मिलथे। 31इसरायलीमन ओ धरमीपन के खोज मूसा के कानून ला माने के आधार म करिन, पर ओ धरमीपन ओमन ला नइं मिलिस। 32ओमन ला काबर नइं मिलिस? काबरकि ओमन ओ धरमीपन के खोज बिसवास के दुवारा नइं, पर अपन काम के आधार म करिन। ओमन “ठोकर के पथरा” म हपट के गिरिन9:32 ए पद म “ठोकर के पथरा” के मतलब अय – यीसू मसीह।33जइसने कि परमेसर के बचन म लिखे हवय:

“देखव, मेंह सियोन म एक पथरा मंढ़ावत हवंव,

जऊन ह मनखे के ठोकर खाय के अऊ गिरे के कारन होही।

पर जऊन ह ओकर ऊपर बिसवास करथे, ओकर ऊपर कभू कलंक नइं लगय9:33 यरूसलेम ह यहूदी राज के खास सहर ए। ए सहर ह सियोन पहाड़ ऊपर बसे हवय। यरूसलेम सहर म परमेसर के मंदिर रिहिस। परमेसर के बचन म “सियोन” के मतलब कभू “यरूसलेम”, त कभू “इसरायल के मनखे” हो सकथे। इहां, ए पद म सियोन के मतलब “इसरायल के मनखे” अय।।”9:33 यसायाह 8:14; 28:16