New International Version

Galatians 4:1-31

1What I am saying is that as long as an heir is underage, he is no different from a slave, although he owns the whole estate. 2The heir is subject to guardians and trustees until the time set by his father. 3So also, when we were underage, we were in slavery under the elemental spiritual forces4:3 Or under the basic principles of the world. 4But when the set time had fully come, God sent his Son, born of a woman, born under the law, 5to redeem those under the law, that we might receive adoption to sonship.4:5 The Greek word for adoption to sonship is a legal term referring to the full legal standing of an adopted male heir in Roman culture. 6Because you are his sons, God sent the Spirit of his Son into our hearts, the Spirit who calls out, “Abba,4:6 Aramaic for Father Father.” 7So you are no longer a slave, but God’s child; and since you are his child, God has made you also an heir.

Paul’s Concern for the Galatians

8Formerly, when you did not know God, you were slaves to those who by nature are not gods. 9But now that you know God—or rather are known by God—how is it that you are turning back to those weak and miserable forces4:9 Or principles? Do you wish to be enslaved by them all over again? 10You are observing special days and months and seasons and years! 11I fear for you, that somehow I have wasted my efforts on you.

12I plead with you, brothers and sisters, become like me, for I became like you. You did me no wrong. 13As you know, it was because of an illness that I first preached the gospel to you, 14and even though my illness was a trial to you, you did not treat me with contempt or scorn. Instead, you welcomed me as if I were an angel of God, as if I were Christ Jesus himself. 15Where, then, is your blessing of me now? I can testify that, if you could have done so, you would have torn out your eyes and given them to me. 16Have I now become your enemy by telling you the truth?

17Those people are zealous to win you over, but for no good. What they want is to alienate you from us, so that you may have zeal for them. 18It is fine to be zealous, provided the purpose is good, and to be so always, not just when I am with you. 19My dear children, for whom I am again in the pains of childbirth until Christ is formed in you, 20how I wish I could be with you now and change my tone, because I am perplexed about you!

Hagar and Sarah

21Tell me, you who want to be under the law, are you not aware of what the law says? 22For it is written that Abraham had two sons, one by the slave woman and the other by the free woman. 23His son by the slave woman was born according to the flesh, but his son by the free woman was born as the result of a divine promise.

24These things are being taken figuratively: The women represent two covenants. One covenant is from Mount Sinai and bears children who are to be slaves: This is Hagar. 25Now Hagar stands for Mount Sinai in Arabia and corresponds to the present city of Jerusalem, because she is in slavery with her children. 26But the Jerusalem that is above is free, and she is our mother. 27For it is written:

“Be glad, barren woman,

you who never bore a child;

shout for joy and cry aloud,

you who were never in labor;

because more are the children of the desolate woman

than of her who has a husband.”4:27 Isaiah 54:1

28Now you, brothers and sisters, like Isaac, are children of promise. 29At that time the son born according to the flesh persecuted the son born by the power of the Spirit. It is the same now. 30But what does Scripture say? “Get rid of the slave woman and her son, for the slave woman’s son will never share in the inheritance with the free woman’s son.”4:30 Gen. 21:10 31Therefore, brothers and sisters, we are not children of the slave woman, but of the free woman.

New Chhattisgarhi Translation (नवां नियम छत्तीसगढ़ी)

गलातिया 4:1-31

1मोर कहे के मतलब ए कि जब तक वारिस ह नबालिक हवय, तब तक ओम अऊ गुलाम म कोनो अंतर नइं ए, हालाकि ओह जम्मो संपत्ति के मालिक ए। 2ओह अपन ददा के ठहिराय समय तक अविभावक अऊ संपत्ति के देख-रेख करइयामन के अधीन रहिथे। 3ओही किसम ले जब हमन लइका रहेंन, त हमन संसार के अंधियार के सक्ति के गुलाम रहेंन। 4पर जब आखिर म सही समय आईस, त परमेसर ह अपन बेटा ला पठोईस, जऊन ह एक माईलोगन ले जनमिस अऊ ओह मूसा के कानून के अधीन पैदा होईस, 5ताकि जऊन मन मूसा के कानून के अधीन हवंय, ओमन ला दाम देके छोंड़ावय अऊ हमन ला बेटा के पूरा अधिकार मिलय। 6काबरकि तुमन ह बेटा अव, परमेसर ह अपन बेटा के आतमा ला हमर हिरदय म पठोय हवय अऊ ए आतमा ह ऊंचहा अवाज म कहिथे, “हे अब्बा, हे ददा।” 7एकरसेति अब तुमन गुलाम नो हव, पर तुमन बेटा अव, अऊ जब तुमन बेटा अव, त परमेसर ह तुमन ला वारिस घलो बनाय हवय।

गलातीमन बर पौलुस के फिकर

8पहिली जब तुमन परमेसर ला नइं जानत रहेव, त तुमन ओमन के गुलाम रहेव, जऊन मन बिलकुल ही परमेसर नो हंय। 9पर अब तुमन परमेसर ला जानथव, या फेर मोला ए कहना चाही कि परमेसर ह तुमन ला जानथे, त का बात ए कि तुमन ओ निरबल अऊ दयनीय अंधियार के सक्तिमन कोति फेर वापिस लहुंटत हवव? का तुमन ओमन के फेर गुलाम बने चाहथव? 10तुमन बिसेस दिन, महिना, मौसम अऊ साल मन ला मानथव। 11मेंह तुम्‍हर बारे म डरत हवंव कि तुम्‍हर बर जऊन मिहनत मेंह करे हवंव, ओह बेकार झन हो जावय।

12हे भाईमन हो, तुमन मोर सहीं बन जावव, काबरकि मेंह तुम्‍हर सहीं बन गे हवंव। तुमन मोर कुछू गलत नइं करे हवव। 13जइसने कि तुमन जानथव कि पहिली बार एक बेमारी के कारन, मेंह तुमन ला सुघर संदेस सुनाय रहेंव। 14हालाकि मोर बेमारी ह तुम्‍हर बर एक परिछा के बेरा रिहिस, फेर तुमन मोर अनादर या अपमान नइं करेव। एकर बदले, तुमन मोर अइसने सुवागत करेव जइसने कि मेंह परमेसर के एक स्‍वरगदूत रहेंव या फेर मेंह खुद मसीह यीसू रहेंव। 15तुम्‍हर ओ जम्मो आनंद ला का होईस? मेंह तुम्‍हर बर गवाही दे सकथंव कि यदि संभव होतिस, त तुमन अपन आंखी निकारके मोला दे देतेव। 16तुमन ला सच कहे के कारन, का अब मेंह तुम्‍हर बईरी हो गे हवंव?

17ओ आने मनखेमन तुम्‍हर बर बहुंत लगाव रखथें, पर ओमन के मनसा ठीक नइं ए। ओमन तुमन ला हमर ले अलग करे चाहथें, ताकि तुमन ओमन के प्रति लगाव बनाय रखव। 18कहूं मनसा ह सही हवय, त लगाव रखई हमेसा बने बात होथे, अऊ हमेसा अइसने होना चाही, ए नइं कि जब मेंह तुम्‍हर संग रहिथंव, सिरिप ओही समय तुमन लगाव बनाय रखव। 19हे मोर मयारू लइकामन हो, जब तक मसीह के सुभाव ह तुमन म नइं बन जावय, मेंह फेर ओ पीरा ला सहथंव, जइसने एक दाई ह लइका जनमे के बेरा सहथे। 20मोर बहुंत ईछा हवय कि अब मेंह तुम्‍हर संग रहंव अऊ तुम्‍हर बर अपन बोले के ढंग ला बदलंव, काबरकि मेंह तुम्‍हर बारे म दुबिधा म हवंव।

हाजिरा अऊ सारा

21जऊन मन मूसा के कानून के अधीन रहे चाहथव, मोला बतावव, का तुमन नइं जानव कि मूसा के कानून ह का कहिथे? 22ओम ए लिखे हवय कि अब्राहम के दू झन बेटा रिहिन; एक झन ह गुलाम माईलोगन हाजिरा ले अऊ दूसर झन ह सुतंतर माईलोगन सारा ले4:22 अब्राहम ह परमेसर के मनखे रिहिस। ओकर घरवाली सारा के कोनो लइका नइं रिहिस। सारा करा मिसर देस के एक सेविका रिहिस, जेकर नांव हाजिरा रहय। सारा ह अपन घरवाला ला कहिस कि ओह हाजिरा के जरिये लइका जनमावय, अऊ हाजिरा ला अब्राहम कोति ले एक बेटा होईस, जेकर नांव इसमायल रिहिस। बाद म सारा ला घलो अब्राहम कोति के एक बेटा होईस, जेकर नांव इसहाक रिहिस। इसहाक ह परमेसर के परतिगियां के मुताबिक जनमिस।23गुलाम माईलोगन ले ओकर बेटा ह सधारन तरिका ले जनमे रिहिस, पर सुतंतर माईलोगन ले ओकर बेटा ह परमेसर के परतिगियां के मुताबिक जनमे रिहिस।

24ए बातमन ला एक पटं‍तर के रूप म लिये जा सकथे, ए माईलोगनमन दू ठन करार सहीं अंय। एक करार ह सीनै पहाड़ ले अय, जेकर ले गुलाम लइकामन पैदा होथें, अऊ एह हाजिरा ए। 25हाजिरा ह अरब देस के सीनै पहाड़ सहीं अय अऊ एह अभी के यरूसलेम सहर ला दरसाथे, काबरकि ओह अपन लइकामन संग गुलामी म हवय। 26पर जऊन यरूसलेम स्‍वरग म हवय, ओह सुतंतर हवय अऊ ओह हमर दाई ए। 27काबरकि परमेसर के बचन म ए लिखे हवय:

“हे ठड़गी माईलोगन, तेंह लइका नइं जनमस,

तें आनंद मना; तोला लइका जनमे के पीरा नइं होवय,

तेंह चिचिया अऊ आनंद मना;

काबरकि तियागे माईलोगन के लइकामन बिहाता माईलोगन के लइकामन ले जादा हवंय।”4:27 यसायाह 54:1

28अब, हे भाईमन हो, तुमन इसहाक के सहीं परमेसर के परतिगियां के संतान अव। 29ओ समय, सधारन तरिका ले जनमे बेटा ह परमेसर के आतमा के मुताबिक जनमे बेटा ऊपर अतियाचार करत रिहिस, अऊ अभी घलो वइसनेच होवत हवय। 30पर परमेसर के बचन ह का कहिथे? “गुलाम माईलोगन अऊ ओकर बेटा ला घर ले निकार दे, काबरकि गुलाम माईलोगन के बेटा ह सुतंतर नारी के बेटा संग पुरखा के संपत्ति म कभू भागी नइं होही।”4:30 उतपत्ती 21:10 31एकरसेति, हे भाईमन हो, हमन गुलाम माईलोगन के संतान नो हन, पर हमन सुतंतर माईलोगन के संतान अन।