New Chhattisgarhi Translation (नवां नियम छत्तीसगढ़ी)

मत्ती 2:1-23

जोतिसीमन के आगमन

1जब हेरोदेस राजा ह राज करत रिहिस, त यहूदिया प्रदेस के बैतलहम गांव म यीसू के जनम होईस, तब पूरब दिग के देस म ले कुछू जोतिसीमन यरूसलेम सहर म आईन2:1 यरूसलेम ह यहूदी मनखेमन के खास सहर अय।, 2अऊ मनखेमन ले पुछिन, “ओ लइका के जनम कहां होईस हवय, जऊन ह यहूदीमन के राजा अय? हमन पूरब दिग म ओकर तारा देखे हवन अऊ ओकर अराधना करे बर आय हवन।”2:2 गिनती 24:17

3ए सुनके हेरोदेस राजा अऊ यरूसलेम सहर के जम्मो मनखेमन घबरा गीन। 4राजा ह जम्मो मुखिया पुरोहित अऊ कानून के गुरूमन ला एक जगह म बलाईस अऊ ओमन ले पुछिस, “मसीह के जनम कहां होना चाही?” 5ओमन कहिन, “यहूदिया प्रदेस के बैतलहम गांव म,” काबरकि अगमजानी ह अइसने लिखे हवय:

6“हे यहूदा प्रदेस के बैतलहम गांव,

तेंह यहूदा प्रदेस के बड़े सहरमन ले कोनो भी किसम ले छोटे नो हस,

काबरकि तोर म ले एक झन सासन करइया निकरही,

जऊन ह मोर परजा इसरायल के ऊपर राज करही।”2:6 मीका 5:2

7तब हेरोदेस राजा ह जोतिसीमन ला चुपेचाप बलाईस अऊ ओमन ले पता लगाईस कि तारा ह ठोका का बेरा म दिखे रिहिस। 8तब ओह ओमन ला ए कहिके बैतलहम पठोईस, “जावव अऊ ओ लइका के बारे म सही-सही पता मालूम करव। अऊ जब ओह तुमन ला मिल जावय, त मोला खबर भिजवाव, ताकि महूं घलो जाके ओकर अराधना करंव।”

9जोतिसीमन राजा के बात ला सुने के पाछू अपन डहार म चल दीन, अऊ जऊन तारा ला ओमन पूरब दिग म देखे रिहिन, ओह ओमन के आघू-आघू गीस अऊ ओ ठऊर के ऊपर जाके ठहर गीस, जिहां लइका ह रहय। 10जब ओमन ओ तारा ला देखिन, त अब्‍बड़ खुस होईन। 11घर भीतरी जाके, ओमन लइका ला ओकर दाई मरियम के संग देखिन अऊ भुइयां म गिरके ओला दंडवत करिन। तब ओमन अपन-अपन झोला ला खोलके ओला सोना, लोबान अऊ गंधरस के भेंट चघाईन। 12अऊ परमेसर ह ओमन ला सपना म चेतउनी दीस कि ओमन हेरोदेस करा झन जावंय, एकरसेति, ओमन आने डहार ले अपन देस लहुंट गीन।

मिसर देस जवई

13जब जोतिसीमन चले गीन, त परभू के एक स्‍वरगदूत ह सपना म यूसुफ ला दिखाई दीस अऊ ओला कहिस, “उठ, लइका अऊ ओकर दाई ला लेके मिसर देस भाग जा। अऊ जब तक मेंह नइं कहंव, तब तक तें उहेंच रह, काबरकि हेरोदेस राजा ह ए लइका ला मरवाय खातिर खोजवइया हवय।”

14तब यूसुफ ह उठिस अऊ रतिहाच, ओह लइका अऊ ओकर दाई ला लेके, मिसर देस चल दीस, 15अऊ ओह उहां हेरोदेस के मिरतू तक रिहिस, ताकि जऊन बात परभू ह अगमजानी के दुवारा कहे रिहिस, ओह पूरा होवय: “मेंह अपन बेटा ला मिसर देस ले बलाएंव।”2:15 होसे 11:1; निरगमन 4:22-23

16जब हेरोदेस राजा ए देखिस कि जोतिसीमन ओकर संग धोखा करे हवंय, त ओह बहुंत नाराज होईस, अऊ ओह ए हुकूम दीस कि बैतलहम अऊ ओकर आस पास के गांव के दू बछर या ओकर ले छोटे जम्मो लइकामन ला मार डारे जावय। काबरकि एह जोतिसीमन के बताय गय समय के मुताबिक रिहिस। 17तब जऊन बात यरमियाह अगमजानी कहे रिहिस, ओह पूरा होईस:

18“रामाह म रोए अऊ बहुंते दुःख के अवाज सुनई दीस,

राहेल ह अपन लइकामन खातिर रोवत रिहिस,

अऊ ओह नइं चाहत रिहिस कि कोनो ओला सांतना देवंय,

काबरकि ओकर लइकामन मर गे रिहिन2:18 इहां “राहेल” ह “इसरायल के मनखेमन” ला दरसाथे, जऊन मन बहुंत दुःख सहिन।।”2:18 यिरमियाह 31:15

मिसर देस ले नासरत वापिस अवई

19हेरोदेस राजा के मरे के पाछू, परभू के एक स्‍वरगदूत ह मिसर देस म यूसुफ ला सपना म दिखाई दीस, 20अऊ यूसुफ ले कहिस, “उठ! लइका अऊ ओकर दाई ला लेके इसरायल देस चले जा, काबरकि जऊन मन ए लइका ला मार डारे के कोसिस करत रिहिन, ओमन मर गे हवंय।”

21तब यूसुफ ह उठिस, अऊ लइका अऊ ओकर दाई ला लेके इसरायल देस चल दीस। 22पर जब ओह ए सुनिस कि अरखिलाउस ह अपन ददा हेरोदेस के जगह म यहूदिया प्रदेस म राज करत हवय, त ओह उहां जाय बर डराईस। सपना म चेतउनी पाके, ओह गलील प्रदेस चले गीस, 23अऊ ओह उहां जाके नासरत नांव के एक नगर म निवास करिस। तब अगमजानीमन के दुवारा कहे गे ए बात ह पूरा होईस: “ओला नासरी कहे जाही2:23 नासरत ह यूसुफ अऊ मरियम के गांव रिहिस। लूका 1:26-27; 2:4, 39।”

King James Version

Matthew 2:1-23

1Now when Jesus was born in Bethlehem of Judaea in the days of Herod the king, behold, there came wise men from the east to Jerusalem, 2Saying, Where is he that is born King of the Jews? for we have seen his star in the east, and are come to worship him. 3When Herod the king had heard these things, he was troubled, and all Jerusalem with him. 4And when he had gathered all the chief priests and scribes of the people together, he demanded of them where Christ should be born. 5And they said unto him, In Bethlehem of Judaea: for thus it is written by the prophet, 6And thou Bethlehem, in the land of Juda, art not the least among the princes of Juda: for out of thee shall come a Governor, that shall rule my people Israel. 7Then Herod, when he had privily called the wise men, enquired of them diligently what time the star appeared. 8And he sent them to Bethlehem, and said, Go and search diligently for the young child; and when ye have found him, bring me word again, that I may come and worship him also. 9When they had heard the king, they departed; and, lo, the star, which they saw in the east, went before them, till it came and stood over where the young child was. 10When they saw the star, they rejoiced with exceeding great joy.

11¶ And when they were come into the house, they saw the young child with Mary his mother, and fell down, and worshipped him: and when they had opened their treasures, they presented unto him gifts; gold, and frankincense, and myrrh. 12And being warned of God in a dream that they should not return to Herod, they departed into their own country another way. 13And when they were departed, behold, the angel of the Lord appeareth to Joseph in a dream, saying, Arise, and take the young child and his mother, and flee into Egypt, and be thou there until I bring thee word: for Herod will seek the young child to destroy him. 14When he arose, he took the young child and his mother by night, and departed into Egypt: 15And was there until the death of Herod: that it might be fulfilled which was spoken of the Lord by the prophet, saying, Out of Egypt have I called my son.

16¶ Then Herod, when he saw that he was mocked of the wise men, was exceeding wroth, and sent forth, and slew all the children that were in Bethlehem, and in all the coasts thereof, from two years old and under, according to the time which he had diligently enquired of the wise men. 17Then was fulfilled that which was spoken by Jeremy the prophet, saying, 18In Rama was there a voice heard, lamentation, and weeping, and great mourning, Rachel weeping for her children, and would not be comforted, because they are not.

19¶ But when Herod was dead, behold, an angel of the Lord appeareth in a dream to Joseph in Egypt, 20Saying, Arise, and take the young child and his mother, and go into the land of Israel: for they are dead which sought the young child’s life. 21And he arose, and took the young child and his mother, and came into the land of Israel. 22But when he heard that Archelaus did reign in Judaea in the room of his father Herod, he was afraid to go thither: notwithstanding, being warned of God in a dream, he turned aside into the parts of Galilee: 23And he came and dwelt in a city called Nazareth: that it might be fulfilled which was spoken by the prophets, He shall be called a Nazarene.