New Chhattisgarhi Translation (नवां नियम छत्तीसगढ़ी)

लूका 1:1-80

1मयारू थियुफिलुस! बहुंत झन ओ घटना के बारे म लिखे बर मदद करे हवंय जऊन ह हमर बीच म घटे हवय। 2ओमन सुरू ले ए घटनामन ला अपन आंखी ले देखे रिहिन अऊ ओमन परमेसर के बचन के सेवक रिहिन। ओमन ए घटनामन ला लिखके हमन ला सऊंप दीन। 3एकरसेति, मेंह खुद सुरू ले हर एक बात ला धियान से जांच परताल करेंव अऊ मोला ए बने लगिस कि मेंह लाइन से ए बातमन ला तोर बर घलो लिखंव, 4ताकि तेंह ओ बातमन के सच्‍चई ला जान सकस जेकर सिकछा तोला मिले हवय।

यूहन्ना बतिसमा देवइया के जनम के बारे म अगमबानी

5यहूदिया प्रदेस के राजा हेरोदेस के समय म एक पुरोहित रिहिस, जेकर नांव जकरयाह रिहिस; ओह अबियाह के पुरोहिती दल के रिहिस; ओकर घरवाली घलो हारून के बंस के रिहिस जेकर नांव इलीसिबा रिहिस। 6ओ दूनों झन परमेसर के नजर म धरमी रिहिन, अऊ ओमन परभू के जम्मो हुकूम अऊ नियम मन ला साफ मन ले मानत रिहिन। 7पर ओमन के कोनो लइका नइं रिहिस, काबरकि इलीसिबा ह बांझ रिहिस अऊ ओ दूनों डोकरा-डोकरी हो गे रिहिन।

8एक बार जब जकरयाह ह अपन दल के पारी म परमेसर के आघू म पुरोहित के काम करत रिहिस। 9तब पुरोहितमन के रीति के मुताबिक चिट्ठी निकारे गीस अऊ चिट्ठी ह ओकर नांव म निकरिस कि ओह परभू के मंदिर म जाके धूप जलावय। 10अऊ धूप जलाय के समय म, मनखेमन के जम्मो भीड़ ह बाहिर म पराथना करत रहय।

11तब उहां परभू के एक स्‍वरगदूत ह ओकर करा परगट होईस अऊ ओ स्‍वरगदूत ह धूप के बेदी के जेवनी कोति ठाढ़े रहय। 12जकरयाह ह ओला देखके घबरा गीस अऊ ओह डर्रा गीस। 13पर स्‍वरगदूत ह ओला कहिस, “हे जकरयाह, झन डर! तोर पराथना ह सुने गे हवय। तोर घरवाली इलीसिबा तोर बर एक बेटा जनमही, अऊ तें ओकर नांव यूहन्ना रखबे। 14अऊ तोला आनंद अऊ खुसी होही, अऊ बहुंत झन ओकर जनम के खातिर आनंद मनाहीं, 15काबरकि ओह परभू के नजर म एक महान मनखे होही। ओह अंगूर के मंद या आने किसम के मंद कभू नइं पीही, अऊ ओह अपन दाई के पेट ले ही पबितर आतमा ले भरे होही। 16इसरायली मनखेमन ले बहुंते झन ला, ओह ओमन के परभू परमेसर करा लहुंटाके लानही। 17अऊ ओह अगमजानी एलियाह के आतमा अऊ सामरथ म, परभू के आघू-आघू चलही ताकि ओह ददामन के हिरदय ला ओमन के लइकामन कोति करय अऊ हुकूम नइं मनइयामन ला धरमी जन के बुद्धि कोति करय, अऊ ए किसम ले ओह परभू खातिर एक काबिल परजा तियार करय।”

18जकरयाह ह स्‍वरगदूत ले पुछिस, “मेंह एला कइसने मान लेवंव? काबरकि मेंह एक डोकरा मनखे अंव अऊ मोर घरवाली ह घलो डोकरी हो गे हवय।”

19स्‍वरगदूत ह ओला जबाब दीस, “मेंह जिब्राईल अंव, अऊ मेंह परमेसर के आघू म ठाढ़े रहिथंव। मोला एकर बर पठोय गे हवय कि मेंह तोर ले गोठियावंव अऊ तोला ए सुघर संदेस सुनावंव। 20देख! जब तक ए बात पूरा नइं हो जाही, तब तक तेंह कोंदा रहिबे, अऊ गोठियाय नइं सकबे; काबरकि तेंह मोर बात ला बिसवास नइं करय, जऊन ह अपन सही समय म पूरा होही।”

21अऊ मनखेमन जकरयाह के बाट जोहत रहंय अऊ अचम्भो करत रहंय कि ओह काबर अतेक बेर तक मंदिर म रूके हवय। 22जब ओह बाहिर आईस, त ओमन ले गोठियाय नइं सकिस। तब ओमन समझ गीन कि ओह मंदिर म कोनो दरसन देखे हवय, काबरकि ओह ओमन ला इसारा करत रहय, पर गोठियाय नइं सकय।

23जब ओकर सेवा के समय ह पूरा हो गीस, त ओह अपन घर वापिस चल दीस। 24एकर बाद ओकर घरवाली इलीसिबा ह देहें म होईस, अऊ ओह पांच महिना तक अपन-आप ला मनखेमन ले छिपाय रखिस। 25ओह कहिस, “परभू ह मोर बर ए करे हवय। ए दिन म, ओह अपन दया देखाके मनखेमन के बीच ले मोर कलंक ला दूर करे हवय।”

यीसू के जनम के अगमबानी

26इलीसिबा के देहें म रहे के छठवां महिना म, परमेसर ह जिब्राईल स्‍वरगदूत ला गलील प्रदेस के नासरत सहर म एक कुवांरी टूरी करा पठोईस। 27ओ टूरी के मंगनी यूसुफ नांव के एक मनखे संग होय रिहिस, जऊन ह दाऊद राजा के बंस के रिहिस। ओ कुवांरी के नांव मरियम रिहिस। 28स्‍वरगदूत ह ओकर करा आके ओला कहिस, “जोहार लागी! तोर ऊपर बहुंत किरपा होय हवय। परभू ह तोर संग हवय।”

29मरियम ह स्‍वरगदूत के बात ले बहुंत घबरा गीस अऊ सोचे लगिस कि ओकर बात के का मतलब हो सकथे। 30पर स्‍वरगदूत ह ओला कहिस, “हे मरियम, झन डर्रा! काबरकि परमेसर के दया तोर ऊपर होय हवय। 31देख, तेंह देहें म होबे अऊ एक बेटा ला जनम देबे, अऊ तेंह ओकर नांव यीसू रखबे। 32ओह महान होही अऊ परम परधान परमेसर के बेटा कहाही। परभू परमेसर ह ओला ओकर पुरखा दाऊद राजा के सिंघासन दिही, 33अऊ ओह याकूब के बंस ऊपर सदाकाल तक राज करही; ओकर राज के अंत कभू नइं होही।”

34मरियम ह स्‍वरगदूत ले पुछिस, “मेंह तो एक कुवांरी टूरी अंव। एह कइसने हो सकथे?”

35स्‍वरगदूत ह जबाब दीस, “पबितर आतमा ह तोर ऊपर उतरही, अऊ परम परधान परमेसर के सक्ति ह तोर ऊपर छइहां करही। एकरसेति ओ पबितर जन जऊन ह जनमही, ओह परमेसर के बेटा कहाही। 36अऊ त अऊ तोर रिस्तेदार इलीसिबा के ओकर बुढ़त काल म एक लइका होवइया हवय, ओला ठड़गी कहे जावत रिहिस; छठवां महिना हो गे, ओह देहें म हवय। 37काबरकि परमेसर बर कोनो काम असंभव नो हय।”

38मरियम ह कहिस, “देख, मेंह परभू के दासी अंव। तोर कहे मुताबिक होवय।” तब स्‍वरगदूत ह ओकर करा ले चले गीस।

मरियम ह इलीसिबा ले भेंट करे जाथे

39कुछू समय के बाद, मरियम ह तियार होईस अऊ जल्दी-जल्दी यहूदा प्रदेस के पहाड़ी इलाका के एक सहर म गीस, 40अऊ ओह उहां जकरयाह के घर म जाके इलीसिबा ला जोहार करिस। 41जब इलीसिबा ह मरियम के जोहार ला सुनिस, त लइका ह ओकर पेट म उछल पड़िस, अऊ इलीसिबा ह पबितर आतमा ले भर गीस, 42अऊ ओह चिचियाके कहिस, “माईलोगन म तेंह धइन (आसिसित) अस, अऊ तोर पेट के लइका ह धइन ए! 43पर अतेक जादा किरपा मोर ऊपर काबर होईस कि मोर परभू के दाई ह मोर करा आईस? 44जइसने मेंह तोर जोहार के सबद ला सुनेंव, लइका ह मोर पेट म आनंद के मारे उछल पड़िस। 45धइन अस तेंह, काबरकि तेंह बिसवास करय कि जऊन कुछू परभू ह तोला कहे हवय, ओह पूरा होही।”

मरियम के इस्तुति के गीत

46तब मरियम ह कहिस:

“मोर मन ह परभू के बड़ई करत हवय;

47अऊ मोर आतमा ह मोर उद्धार करइया परमेसर म आनंद मनावत हवय,

48काबरकि ओह अपन दासी के दीन-हीन दसा ऊपर धियान दे हवय।

अब ले जम्मो पीढ़ी के मनखेमन मोला धइन कहिहीं,

49काबरकि सामरथी परमेसर ह मोर बर बड़े-बड़े काम करे हवय –

ओकर नांव पबितर ए।

50ओकर दया ओमन ऊपर,

जऊन मन ओकर भय मानथें, पीढ़ी-पीढ़ी तक बने रहिथे।

51ओह अपन हांथ ले बड़े-बड़े काम करे हवय;

ओह ओमन ला तितिर-बितिर कर दे हवय, जऊन मन अपन मन म घमंड करथें।

52ओह सक्तिसाली राजामन ला ओमन के सिंघासन ले उतार दे हवय,

पर दीन-हीन मन ला ऊपर उठाय हवय।

53ओह भुखहा मनखेमन ला सुघर चीज ले भर दे हवय,

पर धनवानमन ला जुछा हांथ निकार दे हवय।

54अपन दया ला सुरता करके,

ओह अपन सेवक इसरायल के मदद करे हवय,

55जइसने ओह हमर पुरखामन ले कहे रिहिस कि ओह अब्राहम अऊ

ओकर बंस ऊपर सदा-काल तक दया करही।”

56मरियम ह इलीसिबा के संग करीब तीन महिना रिहिस अऊ तब अपन घर वापिस चल दीस।

यूहन्ना बतिसमा देवइया के जनम

57इलीसिबा के लइका जनमे के समय होईस अऊ ओह एक बेटा ला जनम दीस। 58जब ओकर पड़ोसी अऊ रिस्तेदार मन सुनिन कि परभू ह ओकर ऊपर बड़े दया करे हवय, त ओमन ओकर संग आनंद मनाईन।

59आठवां दिन म, ओमन लइका के खतना करे बर आईन अऊ ओमन ओकर नांव ओकर ददा के नांव जकरयाह रखे बर चाहत रिहिन, 60पर ओकर दाई ह कहिस, “नइं! ओकर नांव यूहन्ना होही।”

61ओमन ओला कहिन, “पर तोर रिस्तेदारमन म काकरो ए नांव नइं ए।”

62तब ओमन लइका के ददा ले इसारा करके पुछिन कि ओह लइका के का नांव रखे चाहथे। 63ओह लिखे के एक सिलेट लाने बर कहिस अऊ ओम लिखिस, “एकर नांव यूहन्ना ए।” एला देखके ओ जम्मो झन अचम्भो करिन। 64अऊ तुरते जकरयाह के मुहूं ह खुल गे अऊ ओह गोठियाय अऊ परमेसर के इस्तुति करे लगिस। 65जम्मो पड़ोसीमन ऊपर डर हमा गे अऊ ए जम्मो बात यहूदिया प्रदेस के जम्मो पहाड़ी इलाका म फइल गीस। 66अऊ ए बात के जम्मो सुनइयामन अपन-अपन मन म सोचिन अऊ कहिन, “ए लइका ह का बनही?” काबरकि परभू के हांथ ओकर संग रहय।

जकरयाह के गीत

67यूहन्ना के ददा जकरयाह ह पबितर आतमा ले भर गीस अऊ ए कहिके अगमबानी करिस:

68“इसरायल के परभू परमेसर के इस्तुति होवय,

काबरकि ओह आय हवय अऊ अपन मनखेमन के उद्धार करे हवय।

69ओह अपन सेवक दाऊद के बंस म हमर बर एक

सामरथी उद्धार करइया दे हवय,

70(जइसने ओह अपन पबितर अगमजानीमन के दुवारा बहुंत पहिली ले कहत आय हवय),

71कि ओह हमर बईरीमन ले अऊ जऊन मन हमन ले घिन करथें,

ओमन ले हमन ला बचाही।

72ओह हमर पुरखामन ऊपर दया करही

अऊ अपन पबितर करार ला सुरता करही।

73ओह किरिया खाके हमर पुरखा अब्राहम ले कहे रिहिस:

74कि ओह हमन ला हमर बईरीमन के हांथ ले बचाही,

75ताकि हमन निडर होके जिनगी भर पबितर अऊ धरमी बनके ओकर आघू म ओकर सेवा कर सकन।

76अऊ ए मोर लइका! तेंह परम परधान परमेसर के अगमजानी कहाबे,

काबरकि तेंह परभू के रसता तियार करे बर ओकर आघू-आघू जाबे,

77अऊ ओकर मनखेमन ला तेंह बताबे कि ओमन के पाप छेमा होय के दुवारा ओमन के उद्धार होही।

78एह हमर परमेसर के बड़े दया के कारन होही,

जब स्‍वरग ले बिहनियां के अंजोर हमर करा आही,

79अऊ ओमन ऊपर चमकही जऊन मन अंधियार अऊ मिरतू के छइहां म रहत हवंय,

अऊ हमर गोड़ ला सांति के रसता म ले चलही।”

80अऊ ओ लइका ह बढ़त अऊ आतमा म मजबूत होवत गीस अऊ ओह तब तक निरजन ठऊर म रिहिस, जब तक ओह इसरायली मनखेमन के आघू म खुले-आम नइं आईस।

Vietnamese Contemporary Bible

Lu-ca 1:1-80

Giới Thiệu

1Thưa ngài Thê-ô-phi-lơ thân kính,1:1 Nt Theophilus quyền quý trước đây đã có nhiều người ghi chép những sự việc đã hoàn thành giữa chúng ta. 2Họ biên soạn theo lời tường thuật của các môn đệ đầu tiên và của nhiều nhân chứng. 3Do đó, tôi đã sưu tầm, kiểm chứng tất cả sử liệu và viết lại theo thứ tự để kính gửi ngài xem. 4Ước mong công trình khảo cứu này chứng tỏ những điều ngài đã học hỏi là chính xác.

Sự Ra Đời của Giăng Báp-tít Được Báo Trước

5Thời Vua Hê-rốt cai trị xứ Giu-đê, Thầy Tế lễ Xa-cha-ri, thuộc ban A-bi-gia, lo việc tế lễ trong Đền Thờ. Vợ là Ê-li-sa-bét cũng thuộc dòng họ A-rôn. 6Ông bà là người công chính trước mặt Đức Chúa Trời, vâng giữ trọn vẹn điều răn và luật lệ của Ngài. 7Họ không có con vì Ê-li-sa-bét hiếm muộn, và cả hai đều đã cao tuổi.

8Một hôm, Xa-cha-ri vào Đền Thờ lo việc tế lễ theo phiên thứ. 9Ông bắt thăm nhằm phần việc dâng hương cho Chúa trong Đền Thờ. 10Lúc ông dâng hương, dân chúng cầu nguyện ngoài sân.

11Thình lình, một thiên sứ của Chúa hiện đến với ông, đứng bên phải bàn thờ dâng hương. 12Xa-cha-ri nhìn thấy, giật mình hoảng sợ. 13Thiên sứ nói: “Xa-cha-ri, đừng sợ! Tôi đến báo tin Đức Chúa Trời đã nghe lời ông cầu nguyện. Ê-li-sa-bét, vợ ông sẽ sinh con trai, hãy đặt tên con trẻ ấy là Giăng. 14Con trẻ sẽ là niềm vui lớn cho ông bà, và nhiều người cũng sẽ hân hoan khi nó ra đời, 15vì con trẻ sẽ được quý trọng trước mặt Chúa. Con trẻ ấy sẽ không bao giờ uống rượu nhưng được đầy dẫy Chúa Thánh Linh từ khi còn trong lòng mẹ. 16Con trẻ sẽ dìu dắt nhiều người Ít-ra-ên trở về với Chúa là Đức Chúa Trời của họ. 17Con trẻ sẽ có tinh thần và khí lực dũng mãnh như Tiên tri Ê-li thời xưa. Con trẻ sẽ dọn đường cho Chúa, chuẩn bị dân chúng sẵn sàng đón tiếp Ngài. Con trẻ sẽ hòa giải cha với con, làm cho kẻ bội nghịch trở nên khôn ngoan như người công chính.”

18Xa-cha-ri nói với thiên sứ: “Việc đó làm sao thực hiện được? Vì tôi đã già, vợ tôi cũng đã cao tuổi lắm rồi!”

19Thiên sứ đáp: “Tôi là Gáp-ri-ên! Tôi thường đứng trước mặt Đức Chúa Trời. Chính Ngài sai tôi đến báo tin mừng cho ông. 20Ông không tin lời tôi, nên sẽ bị câm cho đến khi đứa trẻ ra đời. Nhưng lời tôi nói, đến đúng kỳ sẽ thành sự thật.”

21Dân chúng đứng bên ngoài chờ Xa-cha-ri, ngạc nhiên vì ông ở quá lâu trong Đền Thờ. 22Lúc trở ra, Xa-cha-ri không nói được, phải dùng tay ra dấu, nên họ biết ông vừa thấy khải tượng trong Đền Thờ.

23Khi mãn phiên phục vụ, Xa-cha-ri về nhà. 24Sau đó, Ê-li-sa-bét có thai, sống ẩn dật trong năm tháng. 25Bà tự nhủ: “Chúa thật nhân từ, Ngài đã xóa bỏ sự nhục nhã cho ta rồi!”

Sự Giáng Sinh của Chúa Giê-xu Được Báo Trước

26Qua tháng thứ sáu, Đức Chúa Trời sai Thiên sứ Gáp-ri-ên đến thành Na-xa-rét, xứ Ga-li-lê, 27đến thăm Ma-ri là một trinh nữ đã hứa hôn với Giô-sép, thuộc dòng Vua Đa-vít. 28Thiên sứ nói: “Chào cô, người được ơn của Chúa! Chúa ở với cô!”

29Ma-ri bối rối, tự hỏi lời chào ấy có nghĩa gì. 30Thiên sứ giải thích: “Đừng sợ, vì Đức Chúa Trời đã ban đặc ân cho cô. 31Cô sắp có thai, sinh con trai, và đặt tên là Giê-xu. 32Con Trai đó rất cao quý, sẽ được xưng là Con của Đấng Chí Cao. Chúa là Đức Chúa Trời sẽ ban cho Ngài ngôi vua của Đa-vít. 33Ngài sẽ cai trị Ít-ra-ên1:33 Nt nhà Gia-cốp mãi mãi; nước Ngài tồn tại đời đời.”

34Ma-ri hỏi thiên sứ: “Tôi là trinh nữ, làm sao có con được?”

35Thiên sứ đáp: “Chúa Thánh Linh sẽ giáng trên cô, quyền năng Đấng Chí Cao sẽ bao phủ cô, cho nên Con Thánh sinh ra sẽ được gọi là Con Đức Chúa Trời. 36Như trường hợp Ê-li-sa-bét, bà con của cô là người đã già, quá tuổi sinh nở, mà cũng có thai được sáu tháng rồi. 37Vì chẳng có việc gì Đức Chúa Trời không làm được.”

38Ma-ri thưa: “Tôi là đầy tớ Chúa, sẵn sàng vâng theo ý muốn Chúa. Xin Chúa thực hiện mọi điều ông nói.” Sau đó thiên sứ rời khỏi cô.

Ma-ri Viếng Thăm Ê-li-sa-bét

39Mấy ngày sau, Ma-ri vội vã lên đường, đến một thành phố miền đồi núi xứ Giu-đê, 40nơi Xa-cha-ri sinh sống. Cô vào nhà và chào thăm Ê-li-sa-bét. 41Vừa nghe tiếng Ma-ri chào, thai trong bụng Ê-li-sa-bét liền nhảy mừng, Ê-li-sa-bét được đầy dẫy Chúa Thánh Linh.

42Ê-li-sa-bét vui mừng và nói lớn với Ma-ri: “Cô là người được phước nhất trong giới phụ nữ! Thai trong lòng cô thật phước hạnh lớn lao! 43Thật vinh dự cho tôi vì được mẹ Chúa tôi đến thăm! 44Vừa nghe cô chào hỏi, thai trong bụng tôi đã nhảy mừng. 45Đức Chúa Trời ban phước cho cô, vì cô tin lời Ngài hứa sẽ thành sự thật.”

Bài Ca Chúc Tụng Chúa của Ma-ri

46Ma-ri đáp: “Tâm hồn tôi ca ngợi Chúa.

47Tâm linh tôi hân hoan vì Đức Chúa Trời, Đấng Cứu Rỗi tôi.

48Chúa đã lưu ý đến nô tỳ hèn mọn của Ngài,

và từ nay, mọi thế hệ sẽ khen tôi là người được phước.

49Đấng Toàn Năng đã làm những việc lớn cho tôi

Danh Ngài là Thánh.

50Ngài thương xót người kính sợ Ngài từ đời này sang đời khác.

51Khi cánh tay Ngài đưa ra thể hiện quyền năng,

mưu trí người kiêu ngạo liền tan biến.

52Ngài truất phế các vua chúa xuống

và cất nhắc người thấp hèn lên.

53Ngài cho người đói được no nê

và đuổi người giàu về tay không.

54Ngài nhớ lại sự thương xót,

nên cứu giúp Ít-ra-ên, đầy tớ Ngài.

55Vì Ngài đã hứa với tổ phụ chúng ta,

với Áp-ra-ham và cả dòng dõi người đến muôn đời.”

56Ma-ri ở lại với Ê-li-sa-bét độ ba tháng rồi trở về nhà mình.

Giăng Báp-tít Ra Đời

57Đến ngày mãn nguyệt, Ê-li-sa-bét sinh được một con trai. 58Bà con láng giềng đều hoan hỉ khi nghe tin Chúa thương xót bà cách đặc biệt.

59Được tám ngày, họ đến làm lễ cắt bì cho đứa bé. Và định đặt tên nó là Xa-cha-ri, theo tên cha, 60nhưng mẹ đứa bé quả quyết: “Không! Tên nó là Giăng!”

61Họ nói: “Họ hàng ta đâu có ai mang tên đó?” 62Rồi ra dấu hỏi Xa-cha-ri muốn đặt tên gì cho đứa bé? 63Ông sai lấy bảng viết: “Tên nó là Giăng!” Mọi người đều kinh ngạc. 64Ngay lúc ấy, Xa-cha-ri nói được, và ca ngợi Đức Chúa Trời.

65Hàng xóm láng giềng đều kinh sợ, đồn việc ấy khắp miền đồi núi xứ Giu-đê. 66Mọi người nghe chuyện đều ngẫm nghĩ: “Không biết tương lai đứa bé sẽ ra sao? Vì rõ ràng tay Chúa phù hộ nó.”

Xa-cha-ri Nói Tiên Tri

67Xa-cha-ri được đầy dẫy Chúa Thánh Linh, liền nói tiên tri:

68“Tôn ngợi Chúa là Đức Chúa Trời của Ít-ra-ên,

vì Ngài đã thăm viếng và cứu chuộc dân Ngài.

69Ngài sai Đấng Cứu Rỗi đến với chúng tôi,

sinh ra trong dòng họ Đa-vít, đầy tớ Ngài,

70đúng theo lời hứa của Ngài

qua môi miệng các tiên tri thánh ngày xưa.

71Ngài sẽ giải cứu chúng tôi khỏi kẻ thù nghịch

và người ghen ghét chúng tôi.

72Ngài bày tỏ lòng thương xót tổ phụ chúng tôi,

nhớ lại giao ước thánh của Ngài—

73giao ước Ngài đã thề với Áp-ra-ham,

tổ phụ chúng tôi.

74Chúng tôi được giải thoát khỏi kẻ thù nghịch,

cho chúng tôi được mạnh dạn phụng sự Đức Chúa Trời,

75và mãi mãi sống thánh thiện,

công chính trước mặt Ngài.

76Còn con, con trai bé nhỏ của ta,

sẽ được xưng là tiên tri của Đấng Chí Cao,

vì con sẽ dọn đường cho Chúa.

77Con sẽ chỉ cho dân Ngài biết con đường cứu rỗi

nhờ sự tha tội.

78Bởi lòng thương xót của Đức Chúa Trời,

mà ánh bình minh sắp chiếu trên chúng ta,

79soi sáng người ngồi trong cõi tối tăm và dưới bóng tử vong,

dìu dắt chúng ta vào nẻo an lành.”

80Giăng lớn lên, có ý chí mạnh mẽ. Ông sống trong hoang mạc cho đến khi công khai tỏ mình trước người Ít-ra-ên.