New Chhattisgarhi Translation (नवां नियम छत्तीसगढ़ी)

मत्ती 9:1-38

यीसू ह लकवा के मारे एक झन मनखे ला चंगा करथे

(मरकुस 2:1-12; लूका 5:17-26)

1यीसू ह डोंगा म चघिस अऊ झील ला पार करके अपन सहर म आईस9:1 इहां अपन सहर के मतलब कफरनहूम ए। यीसू ह नासरत ला छोंड़े के बाद कफरनहूम म रिहिस।2कुछू मनखेमन लकवा के मारे एक मनखे ला ओकर करा लानिन; ओ मनखे ह खटिया म पड़े रहय। जब यीसू ह ओमन के बिसवास ला देखिस, त ओह लकवा के मारे मनखे ला कहिस, “बेटा, खुसी मना! तोर पाप ह छेमा हो गीस।”

3एला सुनके, मूसा के कानून के कुछू गुरूमन अपन मन म कहिन, “ए मनखे ह परमेसर के निन्दा करत हवय।”

4ओमन के मन के बात ला जानके यीसू ह कहिस, “तुमन अपन मन म काबर अइसने खराप बात सोचत हवव? 5कते बात ह सरल ए? ए कहई, ‘तोर पाप ह छेमा हो गीस,’ या फेर ए कहई, ‘उठ, अऊ चल फिर।’ 6पर ए कि तुमन जान लेवव कि मनखे के बेटा ला धरती म पाप छेमा करे के अधिकार हवय।” तब ओह लकवा के मारे मनखे ला कहिस, “उठ, अपन खटिया उठा अऊ घर जा।” 7अऊ ओ मनखे ह उठिस अऊ अपन घर चल दीस। 8जब भीड़ के मनखेमन एला देखिन, त ओमन डर्रा गीन, अऊ ओमन परमेसर के महिमा करन लगिन, जऊन ह मनखेमन ला अइसने अधिकार दे हवय।

यीसू ह मत्ती ला बलाथे

(मरकुस 2:13-17; लूका 5:27-32)

9जब यीसू ह उहां ले आघू बढ़िस, त ओह मत्ती नांव के एक झन मनखे ला लगान पटाय के चौकी म बईठे देखिस, त ओह ओला कहिस, “मोर पाछू आ।” अऊ मत्ती ह उठके ओकर पाछू हो लीस।

10जब यीसू ह मत्ती के घर म खाना खाय बर बईठिस, त कतको लगान लेवइया अधिकारी अऊ पापी मनखेमन आईन अऊ ओमन घलो यीसू अऊ ओकर चेलामन संग खाना खाय बर बईठिन। 11एला देखके फरीसीमन यीसू के चेलामन ले पुछिन, “तुम्‍हर गुरू ह लगान लेवइया अधिकारी अऊ पापी मन संग काबर खावत हवय?”

12एला सुनके, यीसू ह कहिस, “बईद के जरूरत भला चंगा मनखेमन ला नइं, पर बेमरहामन ला पड़थे। 13जावव अऊ सिखव कि परमेसर के ए बचन के का मतलब होथे: ‘मेंह बलिदान नइं, पर दया चाहथंव।’9:13 होसे 6:6; लूका 5:32 काबरकि मेंह धरमीमन ला नइं, पर पापीमन ला बलाय बर आय हवंव।”

उपास के बारे म सवाल

(मरकुस 2:18-22; लूका 5:33-39)

14तब यूहन्ना के चेलामन यीसू करा आईन अऊ पुछिन, “का कारन ए कि हमन अऊ फरीसीमन उपास करथन, पर तोर चेलामन उपास नइं करंय?”

15यीसू ह ओमन ला ए जबाब दीस, “का बरातीमन दुःख मनाथें, जब दुल्‍हा ह ओमन के संग म रहिथे? पर ओ समय ह आही जब दुल्‍हा ह ओमन ले अलग करे जाही; तब ओमन उपास करहीं।

16जुन्ना कपड़ा म नवां कपड़ा के खाप कोनो नइं लगावंय, काबरकि ओ खाप ह जुन्ना कपड़ा ला तीरके अऊ चीर दिही। 17वइसने ही मनखेमन जुन्ना चमड़ा के थैली म नवां अंगूर के मंद ला नइं भरंय। यदि ओमन अइसने करथें, त ओ चमड़ा के थैली फट जाही, अऊ अंगूर के मंद ह बोहा जाही अऊ चमड़ा के थैली नास हो जाही। पर मनखेमन नवां मंद ला नवां चमड़ा के थैली म भरथें, अऊ ए किसम ले दूनों चीज सही-सलामत रहिथे।”9:17 मत्ती 12:6, 41-42

मरे छोकरी अऊ बेमरहा माईलोगन

(मरकुस 5:21-43; लूका 8:40-56)

18जब यीसू ह ओमन ला ए कहत रिहिस, तभे यहूदीमन के सभा घर के अधिकारी आईस अऊ यीसू के आघू म माड़ी टेकके कहिस, “मोर बेटी ह अभीच मरे हवय। पर तेंह चल अऊ अपन हांथ ला ओकर ऊपर रख, अऊ ओह जी जाही।” 19यीसू ह उठिस अऊ ओकर संग गीस। यीसू के चेलामन घलो ओकर संग गीन।

20तभे एक माईलोगन जऊन ला बारह बछर ले लहू बोहाय के रोग रिहिस, यीसू के पाछू ले आईस अऊ ओकर कपड़ा के छोर ला छू लीस। 21काबरकि ओह अपन मन म सोचत रिहिस, “यदि मेंह ओकर कपड़ा ला ही छू लूहूं, त चंगा हो जाहूं।”

22यीसू ह पाछू कोति मुड़ के ओला देखिस अऊ कहिस, “हिम्मत रख, बेटी। तोर बिसवास ह तोला चंगा करे हवय।” अऊ ओहीच घरी ओ माईलोगन ह बने हो गीस।

23जब यीसू ह ओ अधिकारी के घर के भीतर गीस अऊ बांसुरी बजइयामन ला अऊ मनखेमन ला रोवत-पीटत देखिस9:23 ओ समय जब कोनो मर जावय, त माटी देय के बेरा बांसुरी बजावंय।, 24त ओह कहिस, “घुंच जावव! ए टूरी ह मरे नइं ए, पर सुतत हवय।” पर ओमन ओकर हंसी उड़ाय लगिन। 25जब मनखेमन ला घर के बाहिर कर दिये गीस, त यीसू ह भीतर गीस अऊ टूरी के हांथ ला धरके उठाईस, अऊ ओ टूरी ह उठ बईठिस। 26ए बात के चरचा ओ जम्मो इलाका म फइल गीस।

यीसू ह अंधरा अऊ कोंदा मन ला चंगा करथे

27यीसू ह उहां ले आघू बढ़िस, त दू झन अंधरा मनखे ए गोहारत ओकर पाछू हो लीन, “हे दाऊद के संतान, हमर ऊपर दया कर।”

28जब यीसू ह घर के भीतर गीस, त ओ अंधरा मनखेमन ओकर करा आईन। यीसू ह ओमन ले पुछिस, “का तुमन ला बिसवास हवय कि मेंह ए काम कर सकत हंव।”

ओमन ओला कहिन, “हव परभू।”

29तब यीसू ह ओमन के आंखी ला छुईस अऊ कहिस, “तुम्‍हर बिसवास के मुताबिक तुम्‍हर बर होवय।” 30अऊ ओमन के आंखीमन देखे लगिन। यीसू ह ओमन ला बहुंत चेताके कहिस, “देखव, ए बात ला अऊ कोनो ला झन बतावव।” 31पर बाहिर निकरके, ओमन ओ जम्मो इलाका म यीसू के जस ला फइला दीन।

32जब ओमन बाहिर निकरत रिहिन, त कुछू मनखेमन भूत धरे एक कोंदा मनखे ला यीसू करा लानिन। 33अऊ जब यीसू ह भूत ला निकार दीस, त ओ कोंदा मनखे ह गोठियाय लगिस। मनखेमन अचम्भो करत कहे लगिन, “हमन इसरायल देस म अइसने बात कभू नइं देखे रहेंन।” 34पर फरीसीमन कहिन, “एह भूतमन के सरदार के दुवारा भूतमन ला निकारथे।”

बनिहार थोरकन हवंय

35यीसू ह जम्मो नगर अऊ गांव म होवत गीस, अऊ ओह यहूदीमन के सभा घर म सिकछा दीस, परमेसर के राज के सुघर संदेस के परचार करिस अऊ जम्मो किसम के रोग अऊ बेमारी ला बने करिस। 36जब यीसू ह मनखेमन के भीड़ ला देखिस, त ओला ओमन के ऊपर तरस आईस, काबरकि ओमन परेसान अऊ बिन सहारा के रिहिन। ओमन बिन चरवाहा के भेड़ सहीं रिहिन।9:36 गिनती 27:16-17 37तब ओह अपन चेलामन ला कहिस, “खेत म फसल तो बहुंते हवय, पर बनिहारमन थोरकन हवंय। 38एकरसेति, फसल के मालिक ले बिनती करव कि ओह अपन फसल ला लुए बर बनिहार पठोवय।”

Ketab El Hayat

إنجيل متى 9:1-38

يسوع يشفي مشلولًا

1ثُمَّ رَكِبَ يَسُوعُ الْقَارِبَ، وَعَبَرَ الْبُحَيْرَةَ رَاجِعاً إِلَى بَلْدَتِهِ (كَفْرَنَاحُومَ)، 2فَجَاءَهُ بَعْضُهُمْ يَحْمِلُونَ مَشْلُولاً مَطْرُوحاً عَلَى فِرَاشٍ. فَلَمَّا رَأَى يَسُوعُ إِيمَانَهُمْ، قَالَ لِلْمَشْلُولِ: «اِطْمَئِنَّ يَا بُنَيَّ! قَدْ غُفِرَتْ لَكَ خَطَايَاكَ» 3فَقَالَ بَعْضُ الْكَتَبَةِ فِي أَنْفُسِهِمْ: «إِنَّهُ يُجَدِّفُ!» 4وَأَدْرَكَ يَسُوعُ مَا يُفَكِّرُونَ فِيهِ، فَسَأَلَهُمْ: «لِمَاذَا تُفَكِّرُونَ بِالشَّرِّ فِي قُلُوبِكُمْ؟ 5أَيُّهُمَا الأَسْهَلُ: أَنْ يُقَالَ: قَدْ غُفِرَتْ لَكَ خَطَايَاكَ، أَمْ أَنْ يُقَالَ: قُمْ وَامْشِ؟ 6وَلَكِنِّي (قُلْتُ ذَلِكَ) لِكَيْ تَعْلَمُوا أَنَّ لابْنِ الإِنْسَانِ عَلَى الأَرْضِ سُلْطَةَ غُفْرَانِ الْخَطَايَا». عِنْدَئِذٍ قَالَ لِلْمَشْلُولِ: «قُمِ احْمِلْ فِرَاشَكَ، وَاذْهَبْ إِلَى بَيْتِكَ!» 7فَقَامَ، وَذَهَبَ إِلَى بَيْتِهِ. 8فَلَمَّا رَأَتِ الْجُمُوعُ ذَلِكَ، اسْتَوْلَى عَلَيْهِمِ الْخَوْفُ، وَمَجَّدُوا اللهَ الَّذِي أَعْطَى النَّاسَ مِثْلَ هَذِهِ السُّلْطَةِ.

دعوة متى

9وَفِيمَا كَانَ يَسُوعُ مَارّاً بِالْقُرْبِ مِنْ مَكْتَبِ جِبَايَةِ الضَّرَائِبِ، رَأَى جَابِياً اسْمُهُ مَتَّى جَالِساً هُنَاكَ. فَقَالَ لَهُ: «اتْبَعْنِي!» فَقَامَ وَتَبِعَهُ. 10وَبَيْنَمَا كَانَ يَسُوعُ مُتَّكِئاً فِي بَيْتِ مَتَّى، حَضَرَ كَثِيرُونَ مِنَ جُبَاةِ الْضَرَائِبِ وَالْخَاطِئِينَ، وَاتَّكَأُوا مَعَ يَسُوعَ وَتَلامِيذِهِ. 11وَعِنْدَمَا رَأَى الْفَرِّيسِيُّونَ ذَلِكَ، قَالُوا لِتَلامِيذِهِ: «لِمَاذَا يَأْكُلُ مُعَلِّمُكُمْ مَعَ جُبَاةِ الْضَرَائِبِ وَالْخَاطِئِينَ؟» 12وَإِذْ سَمِعَ يَسُوعُ كَلامَهُمْ، قَالَ: «لا يَحْتَاجُ الأَصِحَّاءُ إِلَى الطَّبِيبِ، بَلِ الْمَرْضَى! 13اِذْهَبُوا وَتَعَلَّمُوا مَعْنَى الْقَوْلِ: إِنِّي أَطْلُبُ رَحْمَةً لَا ذَبِيحَةً. فَإِنِّي مَا جِئْتُ لأَدْعُوَ صَالِحِينَ بَلْ خَاطِئِينَ!»

الحوار حول الصوم

14ثُمَّ تَقَدَّمَ تَلامِيذُ يُوحَنَّا إِلَى يَسُوعَ يَسْأَلُونَهُ: «لِمَاذَا نَصُومُ نَحْنُ وَالْفَرِّيسِيُّونَ، وَلا يَصُومُ تَلامِيذُكَ؟» 15فَقَالَ لَهُمْ يَسُوعُ: «هَلْ يَقْدِرُ أَهْلُ الْعُرْسِ أَنْ يَحْزَنُوا مَادَامَ الْعَرِيسُ بَيْنَهُمْ؟ وَلَكِنْ، سَتَأْتِي أَيَّامٌ يَكُونُ فِيهَا الْعَرِيسُ قَدْ رُفِعَ مِنْ بَيْنِهِمْ، فَعِنْدَئِذٍ يَصُومُونَ! 16لَا أَحَدَ يَرْقَعُ ثَوْباً عَتِيقاً بِقُمَاشٍ جَدِيدٍ، لأَنَّ الرُّقْعَةَ الْجَدِيدَةَ تَنْكَمِشُ، فَتَأْكُلُ مِنَ الثَّوْبِ الْعَتِيقِ، وَيَصِيرُ الْخَرْقُ أَسْوَأَ! 17وَلا يَضَعُ النَّاسُ الْخَمْرَ الْجَدِيدَةَ فِي قِرَبٍ عَتِيقَةٍ؛ وَإلَّا، فَإِنَّ الْقِرَبَ تَنْفَجِرُ، فَتُرَاقُ الْخَمْرُ وَتَتْلَفُ الْقِرَبُ. وَلَكِنَّهُمْ يَضَعُونَ الْخَمْرَ الْجَدِيدَةَ فِي قِرَبٍ جَدِيدَةٍ، فَتُحْفَظُ الْخَمْرُ وَالْقِرَبُ مَعاً!»

طفلة ميتة وامرأة مريضة

18وَبَيْنَمَا كَانَ يَقُولُ هَذَا، إِذَا رَئِيسٌ لِلْمَجْمَعِ قَدْ تَقَدَّمَ وَسَجَدَ لَهُ قَائِلاً: 19«ابْنَتِي الْآنَ مَاتَتْ. وَلَكِنْ تَعَالَ وَالْمُسْهَا بِيَدِكَ فَتَحْيَا» فَقَامَ يَسُوعُ وَتَبِعَهُ وَمَعَهُ تَلامِيذُهُ.

20وَإذَا امْرَأَةٌ مُصَابَةٌ بِنَزِيفٍ دَمَوِيٍّ مُنْذُ اثْنَتَيْ عَشَرَةَ سَنَةً، قَدْ تَقَدَّمَتْ إِلَيْهِ مِنْ خَلْفٍ، وَلَمَسَتْ طَرَفَ رِدَائِهِ، 21لأَنَّهَا قَالَتْ فِي نَفْسِهَا: «يَكْفِي أَنْ أَلْمَسَ وَلَوْ ثِيَابَهُ لأُشْفَى!» 22فَالْتَفَتَ يَسُوعُ وَرَآهَا، فَقَالَ: «اطْمَئِنِّي يَا ابْنَةُ. إِيمَانُكِ قَدْ شَفَاكِ!» فَشُفِيَتِ الْمَرْأَةُ مِنْ تِلْكَ السَّاعَةِ. 23وَلَمَّا دَخَلَ يَسُوعُ بَيْتَ رَئِيسِ الْمَجْمَعِ، وَرَأَى النَّادِبِينَ بِالْمِزْمَارِ وَالْجَمْعَ فِي اضْطِرَابٍ، 24قَالَ: «انْصَرِفُوا! فَالصَّبِيَّةُ لَمْ تَمُتْ، وَلكِنَّهَا نَائِمَةٌ!» فَضَحِكُوا مِنْهُ. 25فَلَمَّا أُخْرِجَ الْجَمْعُ، دَخَلَ وَأَمْسَكَ بِيَدِ الصَّبِيَّةِ، فَنَهَضَتْ. 26وَذَاعَ خَبَرُ ذَلِكَ فِي تِلْكَ الْبِلادِ كُلِّهَا.

يسوع يشفي أعميين وأخرس

27وَفِيمَا كَانَ يَسُوعُ رَاحِلاً مِنْ هُنَاكَ، تَبِعَهُ أَعْمَيَانِ يَصْرُخَانِ قَائِلَيْنِ: «ارْحَمْنَا يَا ابْنَ دَاوُدَ!» 28وَعِنْدَ دُخُولِهِ الْبَيْتَ تَقَدَّمَا إِلَيْهِ. فَسَأَلَهُمَا يَسُوعُ: «أَتُؤْمِنَانِ بِأَنِّي أَقْدِرُ أَنْ أَفْعَلَ هَذَا؟» أَجَابَا: «نَعَمْ يَا سَيِّدُ!» 29فَلَمَسَ أَعْيُنَهُمَا قَائِلاً: «لِيَكُنْ لَكُمَا بِحَسَبِ إِيمَانِكُمَا!» 30فَانْفَتَحَتْ أَعْيُنُهُمَا. وَأَنْذَرَهُمَا يَسُوعُ بِشِدَّةٍ قَائِلاً: «اِنْتَبِهَا! لَا تُخْبِرَا أَحَداً!» 31وَلَكِنَّهُمَا انْطَلَقَا وَأَذَاعَا صِيتَهُ فِي تِلْكَ الْبِلادِ كُلِّهَا.

32وَمَا إِنْ خَرَجَا، حَتَّى جَاءَهُ بَعْضُهُمْ بِأَخْرَسَ يَسْكُنُهُ شَيْطَانٌ. 33فَلَمَّا طُرِدَ الشَّيْطَانُ، تَكَلَّمَ الأَخْرَسُ. فَتَعَجَّبَتِ الْجُمُوعُ، وَقَالُوا: «لَمْ نُشَاهِدْ مِثْلَ هَذَا قَطُّ فِي إِسْرَائِيلَ». 34أَمَّا الْفَرِّيسِيُّونَ فَقَالُوا: «إِنَّهُ يَطْرُدُ الشَّيَاطِينَ بِرَئِيسِ الشَّيَاطِينِ!».

العمال قليلون

35وَأَخَذَ يَسُوعُ يَتَنَقَّلُ فِي الْمُدُنِ وَالْقُرَى كُلِّهَا، يُعَلِّمُ فِي مَجَامِعِ الْيَهُودِ وَيُنَادِي بِبِشَارَةِ الْمَلَكُوتِ، وَيَشْفِي كُلَّ مَرَضٍ وَعِلَّةٍ. 36وَعِنْدَمَا رَأَى الْجُمُوعَ، أَخَذَتْهُ الشَّفَقَةُ عَلَيْهِمْ، إِذْ كَانُوا مُعَذَّبِينَ وَمُشَرَّدِينَ كَغَنَمٍ لَا رَاعِيَ لَهَا. 37عِنْدَئِذٍ قَالَ لِتَلامِيذِهِ: «الْحَصَادُ كَثِيرٌ، وَالْعُمَّالُ قَلِيلُونَ. 38فَاطْلُبُوا مِنْ رَبِّ الْحَصَادِ أَنْ يُرْسِلَ عُمَّالاً إِلَى حَصَادِهِ!»