New Chhattisgarhi Translation (नवां नियम छत्तीसगढ़ी)

मत्ती 27:1-66

यहूदा ह अपन-आप ला फांसी लगा लेथे

(प्रेरितमन के काम 1:18-19)

1जब बिहनियां होईस, त जम्मो मुखिया पुरोहित अऊ मनखेमन के अगुवामन यीसू ला मार डारे के फैसला करिन। 2ओमन यीसू ला बांधिन अऊ ओला ले जाके राजपाल पीलातुस के हांथ म सऊंप दीन27:2 पीलातुस ह रोमी राजपाल रिहिस।

3यीसू के संग बिस‍वासघात करइया यहूदा ह जब देखिस कि यीसू ला दोसी ठहराय गे हवय, त ओह पछताईस अऊ ओह मुखिया पुरोहित अऊ अगुवामन ला चांदी के तीस सिक्‍का वापिस कर दीस, 4अऊ कहिस, “मेंह पाप करे हवंव काबरकि मेंह एक निरदोस मनखे ला मरवाय बर ओकर संग बिस‍वासघात करेंव।”

ओमन ह कहिन, “हमन ला एकर ले का मतलब! एला तें जान।”

5तब यहूदा ह ओ चांदी के सिक्‍कामन ला मंदिर म फटिक दीस अऊ उहां ले चले गीस अऊ जाके फांसी लगा लीस।

6मुखिया पुरोहितमन ओ सिक्‍कामन ला उठाईन अऊ कहिन, “ए पईसा ला खजाना म रखना कानून के मुताबिक सही नो हय, काबरकि एह लहू के कीमत अय।” 7एकरसेति ओमन ओ पईसा ले कुम्‍हार के खेत ला बिसोय के फैसला करिन ताकि ओ जगह ह परदेसीमन बर मसानघाट के रूप म काम आवय। 8एकरे कारन, ओ खेत ला आज तक ले लहू के खेत कहे जाथे। 9ए किसम ले यरमियाह अगमजानी के दुवारा कहे गय ए बचन ह पूरा होईस: “ओमन चांदी के तीस सिक्‍कामन ला ले लीन, जऊन ला इसरायली मनखेमन ओकर कीमत ठहराय रिहिन। 10अऊ ओमन ओ पईसा के उपयोग कुम्‍हार के खेत बिसोय म करिन जइसने परभू ह मोला हुकूम दे रिहिस।”27:10 जकरयाह 11:12-13; यिरमियाह 32:6-9

यीसू ह रोमन राजपाल पीलातुस के आघू म

(मरकुस 15:2-5; लूका 23:3-5; यूहन्ना 18:33-38)

11जब यीसू ह राजपाल के आघू म ठाढ़ होईस, त राजपाल ह ओकर ले पुछिस, “का तेंह यहूदीमन के राजा अस?”

यीसू ह ओला जबाब दीस, “हव जी, जइसने तेंह कहत हवस।”

12जब मुखिया पुरोहित अऊ अगुवामन यीसू ऊपर दोस लगाईन, त ओह कुछू जबाब नइं दीस। 13तब पीलातुस ह यीसू ला कहिस, “का तेंह नइं सुनत हवस कि ओमन तोर ऊपर कइसने दोस लगावत हवंय।” 14पर यीसू ह जबाब म एको सबद नइं कहिस। जेकर ले राजपाल ला बहुंत अचरज होईस।

15राजपाल के ए रीति रिहिस कि फसह तिहार के मऊका म, ओह एक झन कैदी ला छोंड़ देवय, जऊन ला मनखेमन चाहंय। 16ओ समय म बरब्‍बा नांव के एक बदनाम कैदी जेल म रिहिस। 17जब भीड़ ह जुरे रिहिस, त पीलातुस ह भीड़ के मनखेमन ले पुछिस, “तुमन कोन ला चाहत हव कि मेंह ओला तुम्‍हर बर छोंड़ देवंव – बरब्‍बा ला या यीसू ला, जऊन ला मसीह कहे जाथे?” 18काबरकि पीलातुस ह जानत रिहिस कि ओमन जलन के कारन यीसू ला ओकर हांथ म सऊंपे रिहिन।

19जब पीलातुस ह नियाय के आसन म बईठे रिहिस, त ओकर घरवाली ह ओकर करा ए संदेस पठोईस, “ओ धरमी मनखे संग कुछू झन कर, काबरकि मेंह आज सपना म ओकर कारन बहुंत दुःख उठाय हवंव।”

20पर मुखिया पुरोहित अऊ अगुवामन भीड़ के मनखेमन ला राजी कर लीन कि ओमन बरब्‍बा ला छोंड़े के अऊ यीसू ला मार डारे के मांग करंय।

21राजपाल ह ओमन ला फेर पुछिस, “ए दूनों म ले तुमन कोन ला चाहथव कि मेंह तुम्‍हर खातिर छोंड़ देवंव?”

ओमन कहिन, “बरब्‍बा ला।”

22पीलातुस ह ओमन ले पुछिस, “तब मेंह यीसू के का करंव, जऊन ला मसीह कहे जाथे।”

ओ जम्मो झन जबाब दीन, “एला कुरुस ऊपर चघाय जावय।”

23पीलातुस ह पुछिस, “काबर? ओह का अपराध करे हवय?” फेर ओमन अऊ चिचियाके कहिन, “एला कुरुस ऊपर चघाय जावय।”

24जब पीलातुस ह देखिस कि ओकर दुवारा कुछू नइं हो सकथे, पर हुल्‍लड़ होवत हवय, त ओह पानी लीस अऊ भीड़ के आघू म अपन हांथ ला धोके कहिस, “मेंह ए मनखे के मिरतू के दोसी नो हंव। एकर जिम्मेदार तुमन अव।”

25जम्मो मनखेमन जबाब दीन, “एकर मिरतू के दोस हमर अऊ हमर संतान ऊपर होवय।”

26तब पीलातुस ह ओमन खातिर बरब्‍बा ला छोंड़ दीस अऊ यीसू ला कोर्रा म पीटवाईस, अऊ ओला कुरुस ऊपर चघाय बर सैनिकमन के हांथ म सऊंप दीस।

सैनिकमन यीसू के हंसी उड़ाथें

(मरकुस 15:16-20; यूहन्ना 19:2-3)

27तब राजपाल के सैनिकमन यीसू ला राजपाल के महल म ले गीन अऊ सैनिकमन के पूरा दल ला यीसू करा संकेलिन। 28ओमन यीसू के कपड़ा ला उतारिन अऊ ओला लाल सिंदूरी रंग के चोगा पहिराईन, 29अऊ तब कांटा के एक मुकुट गुंथके ओकर मुड़ी ऊपर रखिन, अऊ ओकर जेवनी हांथ म एक ठन लउठी धरा दीन अऊ ओकर आघू म माड़ी टेकिन अऊ ए कहिके ओकर हंसी उड़ाईन, “हे यहूदीमन के राजा, तोला जोहार।” 30ओमन ओकर ऊपर थूकिन अऊ लउठी म ओकर मुड़ी ला मारिन। 31यीसू के हंसी उड़ाय के बाद, ओमन ओकर चोगा ला उतार लीन अऊ ओला ओकर खुद के कपड़ा पहिरा दीन। तब ओमन ओला कुरुस ऊपर चघाय बर ले गीन।

यीसू के कुरुस ऊपर चघाय जवई

(मरकुस 15:21-32; लूका 23:26-43; यूहन्ना 19:17-27)

32जब ओमन सहर ले बाहिर निकरत रिहिन, त ओमन ला कुरेन सहर के सिमोन नांव के एक झन मनखे मिलिस। ओमन ओकर ले जबरदस्‍ती कुरुस ला उठवाके ले गीन27:32 कुरेन ह आफ्रिका देस म एक सहर रिहिस।33ओमन “गुलगुता” नांव के जगह म आईन (गुलगुता के मतलब होथे – खोपड़ी के जगह)। 34उहां ओमन यीसू ला पित्त मिले अंगूर के मंद पीये बर दीन। यीसू ह ओला चखिस, पर ओला पीये बर नइं चाहिस। 35जब ओमन यीसू ला कुरुस ऊपर चघा लीन, त ओकर कपड़ा ला बांटा करे बर चिट्ठी डालिन अऊ चिट्ठी के मुताबिक कपड़ा ला बांट लीन। 36तब ओमन उहां बईठके ओकर पहरा देवन लगिन। 37अऊ ओकर मुड़ी ऊपर ओकर दोस पतर लिखके टांग दीन, जऊन म ए लिखाय रहय – “एह यहूदीमन के राजा यीसू अय।”27:37 यूहन्ना 19:19-22 38यीसू के संग दू झन डाकूमन घलो कुरुस ऊपर चघाय गे रिहिन, एक झन ओकर जेवनी कोति अऊ दूसर झन ओकर डेरी कोति। 39उहां ले अवइया-जवइयामन यीसू के ठट्ठा करंय अऊ अपन मुड़ी ला डोला-डोला के ए कहंय, 40“तेंह तो मंदिर ला गिराके ओला तीन दिन म बनवइया अस, अपन-आप ला बंचा ले। कहूं तेंह परमेसर के बेटा अस, त फेर कुरुस ऊपर ले उतर आ।”

41अइसनेच मुखिया पुरोहित, कानून के गुरू अऊ अगुवामन घलो ए कहिके ओकर ठट्ठा करत रिहिन, 42“एह आने मन ला बंचाईस, फेर एह अपन-आप ला नइं बंचा सकय। एह तो इसरायल के राजा अय। अब एह कुरुस ऊपर ले उतरके आवय, त हमन एकर ऊपर बिसवास करबो। 43एह परमेसर ऊपर भरोसा रखथे। यदि परमेसर एला चाहथे, त ओह एला छुड़ा ले, काबरकि एह कहे रिहिस, ‘मेंह परमेसर के बेटा अंव।’ ” 44अइसनेच ओ डाकूमन घलो जऊन मन ओकर संग कुरुस ऊपर चघाय गे रिहिन, ओकर ठट्ठा करिन।

यीसू के मिरतू

(मरकुस 15:33-41; लूका 23:44-49; यूहन्ना 19:28-30)

45ओ मंझनियां बारह बजे ले लेके तीन बजे तक जम्मो धरती ऊपर अंधियार छाय रिहिस। 46करीब तीन बजे यीसू ह जोर से नरियाके कहिस, “एली, एली, लमा सबकतनी?” – जेकर मतलब होथे, “हे मोर परमेसर, हे मोर परमेसर, तेंह मोला काबर तियाग देय?”

47जऊन मन उहां ठाढ़े रिहिन, ओम ले कुछू झन एला सुनके कहिन, “एह एलियाह ला बलावत हवय।”

48ओमन ले एक झन तुरते दऊड़के एक स्‍पंज ला लानिस, अऊ ओह ओला सिरका म बुड़ोईस अऊ एक ठन पातर लउठी म रखके यीसू ला पीये बर दीस। 49पर बाकि मनखेमन कहिन, “ओला रहन दे। आवव, हमन देखन, एलियाह ह एला बंचाय बर आथे कि नइं।”

50अऊ यीसू ह फेर जोर से गोहार पारिस अऊ अपन परान ला तियाग दीस।

51ओतकीच बेरा मंदिर के परदा ह ऊपर ले खाल्‍हे तक चीराके दू टुकड़ा हो गीस। धरती ह कांप उठिस अऊ चट्टानमन तड़क गीन। 52कबरमन उघर गीन अऊ कतको पबितर मनखे के मरे देहेंमन फेर जी उठिन। 53ओमन कबर म ले बाहिर निकरिन, अऊ यीसू के जी उठे के बाद, ओमन पबितर सहर म गीन अऊ कतको मनखेमन ला दिखिन।

54जब सूबेदार अऊ ओकर सैनिक जऊन मन यीसू के पहरा देवत रिहिन, भुइंडोल अऊ ओ जम्मो घटना ला देखिन, त अब्‍बड़ डर्रा गीन अऊ ओमन कहिन, “सही म एह परमेसर के बेटा रिहिस27:54 एक सूबेदार के अधीन एक सौ सैनिक रहंय।।”

55उहां कतको माईलोगन घलो रिहिन, जऊन मन दूरिहा ले यीसू ला देखत रिहिन। ओमन यीसू के सेवा करत गलील प्रदेस ले ओकर संगे-संग आय रिहिन। 56ओमन म मरियम मगदलिनी, याकूब अऊ यूसुफ के दाई मरियम अऊ जबदी के बेटामन के दाई रिहिन।

यीसू के दफनाय जवई

(मरकुस 15:42-47; लूका 23:50-56; यूहन्ना 19:38-42)

57जब संझा होईस, त अरमतिया सहर ले एक धनवान मनखे आईस। ओकर नांव यूसुफ रिहिस अऊ ओह खुदे यीसू के चेला रिहिस। 58ओह पीलातुस करा जाके यीसू के लास ला मांगिस अऊ पीलातुस ह यीसू के लास ला ओला सऊंप देय के हुकूम दीस। 59यूसुफ ह लास ला लीस अऊ ओला एक ठन साफ मलमल के कपड़ा म लपेटिस, 60अऊ ओला अपन खुद के नवां कबर म रखिस, जऊन ला ओह चट्टान ला काटके बनवाय रिहिस। तब ओह एक ठन बड़े पथरा ला कबर के मुंहाटी म टेका दीस अऊ उहां ले चले गीस। 61मरियम मगदलिनी अऊ दूसर मरियम उहां कबर के आघू म बईठे रिहिन।

कबर म पहरेदारी

62ओकर दूसर दिन, जऊन ह तियारी के दिन के बाद के दिन रिहिस, मुखिया पुरोहित अऊ फरीसी मन पीलातुस करा गीन27:62 बिसराम दिन के पहिली के दिन ला तियारी के दिन कहे जावय। 63अऊ कहिन, “महाराज, हमन ला सुरता हवय कि ओ धोखेबाज ह जब जीयत रिहिस, त कहे रिहिस, ‘तीन दिन के बाद मेंह फेर जी उठहूं।’ 64एकरसेति हुकूम दे कि तीसरा दिन तक ओ कबर के रखवारी करे जावय। अइसने झन होवय कि ओकर चेलामन आवंय अऊ ओकर लास ला चुरा के ले जावंय अऊ मनखेमन ला कहंय कि ओह मरे म ले जी उठे हवय। तब ए आखिरी धोखा ह पहिली ले घलो अऊ खराप होही।”

65पीलातुस ह ओमन ला कहिस, “तुम्‍हर करा पहरेदारमन हवंय। जावव, अऊ जइसने तुमन उचित समझथव, कबर के रखवारी के परबंध करव।” 66तब ओमन गीन अऊ कबर के पथरा ऊपर मुहर लगाईन अऊ उहां पहरेदार बईठाके ओमन कबर के रखवारी के परबंध करिन।

Священное Писание

Матай 27:1-66

Совет религиозных вождей осуждает Ису Масиха

(Мк. 15:1; Лк. 23:1; Ин. 18:28)

1Рано утром все главные священнослужители и старейшины народа вынесли Исе смертный приговор. 2Они, связав Его, отвели и передали римскому наместнику Пилату27:2 Понтий Пилат был римским наместником в Иудее с 26 по 36 гг..

Самоубийство Иуды

(Деян. 1:16-20)

3Когда Иуда, предавший Ису, увидел, что Тот осуждён, он раскаялся и вернул тридцать серебряных монет главным священнослужителям и старейшинам.

4– Я согрешил, – сказал он, – я предал на смерть невинного Человека.

– А нам-то что за дело? – ответили они. – Смотри сам.

5Бросив деньги в храме, Иуда ушёл и повесился. 6А главные священнослужители собрали деньги и сказали:

– Положить эти деньги в сокровищницу храма нельзя, так как это плата за кровь.

7И, посоветовавшись, они решили купить на них поле горшечника и использовать его под кладбище для чужеземцев. 8Поэтому то поле и называется до сегодняшнего дня «Полем Крови». 9Так исполнилось сказанное пророком Иеремией: «Они взяли тридцать серебряных монет – цену, назначенную Ему исраильским народом, 10и купили на них землю горшечника, как повелел мне Вечный»27:9-10 См. Иер. 19:1-13; 32:6-9; Зак. 11:12-13..

Иса Масих на допросе у Пилата

(Мк. 15:2-5; Лк. 23:2-5; Ин. 18:29-38)

11Тем временем Ису поставили перед наместником, и тот спросил Его:

– Ты Царь иудеев?

– Ты сам так говоришь, – отвечал Иса.

12Когда же Его обвиняли главные священнослужители и старейшины, Он ничего не отвечал.

13Пилат спросил:

– Ты что, не слышишь, сколько против Тебя обвинений?

14Но Иса, к удивлению наместника, не отвечал ни на одно из обвинений.

Пилат осуждает Ису Масиха на распятие

(Мк. 15:6-15; Лк. 23:13-25; Ин. 18:39–19:16)

15У наместника был обычай на праздник Освобождения отпускать одного из заключённых, по выбору народа. 16В то время под стражей находился известный узник по имени Иешуа Бар-Абба. 17Поэтому, когда собрался народ, Пилат спросил:

– Кого вы хотите, чтобы я вам отпустил: Иешуа Бар-Аббу или Ису, называемого Масихом?

18Он знал, что Ису предали ему из зависти. 19К тому же, когда Пилат сидел в судейском кресле, его жена послала сказать ему: «Не делай ничего этому праведнику, я сильно страдала сегодня во сне из-за Него».

20Но главные священнослужители и старейшины убедили толпу просить освобождения Бар-Аббы и казни Исы.

21– Так кого же из этих двоих вы хотите, чтобы я вам отпустил? – спросил наместник.

– Бар-Аббу! – сказали они.

22– Что же мне тогда делать с Исой, которого называют Масихом? – спросил Пилат.

Все в один голос закричали:

– Пусть Он будет распят!

23– За что? Какое зло сделал Он? – спросил Пилат.

Однако толпа кричала всё громче:

– Пусть Он будет распят!

24Когда Пилат увидел, что ничего не может сделать и что волнение в народе лишь нарастает, он взял воды, вымыл руки перед всем народом и сказал:

– Смотрите сами. Я же не виновен в крови Этого Человека.

25И весь народ сказал:

– Кровь Его на нас и на наших детях!

26Тогда Пилат освободил им Бар-Аббу, а Ису отдал на распятие, приказав сперва бичевать Его.

Римские солдаты издеваются над Исой Масихом

(Мк. 15:16-20; Ин. 19:2-3)

27Солдаты отвели Ису в резиденцию наместника и собрали вокруг Него весь полк. 28Они раздели Его и надели на Него алую мантию. 29И сплетя венок из терновника, надели Ему на голову, дали Ему в правую руку трость и стали насмехаться над Ним, становясь перед Ним на колени и говоря:

– Да здравствует Царь иудеев!

30И плевали на Него и, взяв трость, били Его по голове. 31Вдоволь наиздевавшись, они сняли с Него мантию, одели Ису в Его собственную одежду и повели на распятие.

Ису Масиха ведут на распятие

(Мк. 15:21-23; Лк. 23:26-31; Ин. 19:17)

32Когда они выходили, им повстречался человек из Кирены по имени Шимон, и солдаты заставили его нести крест Исы. 33Когда они пришли на место, называемое Голгофа (что означает «Лобное место»27:33 Букв.: «место черепа». Это был холм, который, по всей вероятности, имел такое название из-за своей формы, напоминавшей человеческий череп.), 34они дали Ему вино, смешанное с желчью. Попробовав, Он не стал пить27:34 См. Заб. 68:22..

Казнь Исы Масиха

(Мк. 15:24-32; Лк. 23:32-43; Ин. 19:18-24)

35Распяв Ису, солдаты по жребию разделили между собой Его одежду27:35 См. Заб. 21:19. 36и сели стеречь Его. 37Над головой Исы прибили табличку с указанием Его вины: Это Иса, Царь Иудеев. 38Вместе с Ним были распяты и два разбойника, один по правую, а другой по левую сторону от Него. 39Проходившие мимо бранили Его. Качая головами27:39 См. Заб. 21:8., 40они говорили:

– Ты ведь собирался разрушить храм и в три дня отстроить его! Спаси хотя бы Самого Себя, если Ты Сын Всевышнего (Царственный Спаситель)! Сойди с креста!

41Главные священнослужители, учители Таурата и старейшины тоже насмехались над Исой.

42– Спасал других, – говорили они, – а Себя спасти не может. Царь Исраила! Пусть Он сойдёт с креста, и тогда мы поверим в Него. 43Он полагался на Всевышнего, так пусть Всевышний теперь избавит Его, если Он Ему угоден27:43 Заб. 21:9.; ведь Он же называл Себя Сыном Всевышнего!

44Теми же словами оскорбляли Его и разбойники, распятые вместе с Ним.

Смерть Исы Масиха

(Мк. 15:33-41; Лк. 23:44-49; Ин. 19:28-30)

45В полдень по всей земле стало темно, и это продолжалось до трёх часов дня. 46Около трёх часов Иса громко крикнул:

– Эли, Эли, льма шбактани? – (что значит: «Бог Мой, Бог Мой, почему Ты Меня оставил?»)27:46 Заб. 21:2. 47Некоторые из стоявших поблизости, услышав это, сказали:

– Он зовёт пророка Ильяса27:47 На еврейском языке имя Ильяс и выражение «Бог мой» звучат очень похоже..

48Один из них тут же подбежал, взял губку, пропитал её кислым вином, насадил на палку и дал Исе пить. 49Другие же говорили:

– Подожди, давай посмотрим, придёт Ильяс спасти Его или нет.

50Иса снова громко закричал и испустил дух. 51И тут завеса храма разорвалась надвое сверху донизу27:51 Это была внутренняя завеса храма, которая отделяла «Святое» от «Святая Святых» (см. Исх. 26:31-35). Описанное событие символизирует открывшийся нам, благодаря жертве Исы, свободный доступ в присутствие Всевышнего (см. Евр. 10:19-22). А то, что завеса разорвалась сверху донизу, указывает на то, что это сделал Сам Всевышний.. Затряслась земля, и раскололись скалы. 52Раскрылись могилы, и многие умершие праведники воскресли. 53Они вышли из могил и, уже после того как воскрес Сам Иса, вошли в святой город Иерусалим, где их видело много людей. 54Римский офицер и те, кто вместе с ним стерегли Ису, увидев землетрясение и всё, что произошло, очень испугались и сказали:

– Он действительно был Сыном Всевышнего (Божественным Царём)!

55Там также было и много женщин, которые издали наблюдали за происходящим. Они следовали за Исой из самой Галилеи, помогая Ему. 56Среди них были Марьям из Магдалы, Марьям, мать Якуба и Иосии27:56 Или: «Юсуфа». Иосия – вариант имени Юсуф., и мать сыновей Завдая.

Погребение Исы Масиха

(Мк. 15:42-47; Лк. 23:50-56; Ин. 19:38-42)

57Вечером пришёл один богатый человек из Аримафеи по имени Юсуф. Он тоже был учеником Исы. 58Придя к Пилату, он попросил тело Исы. Пилат приказал, чтобы ему отдали тело. 59Юсуф взял его, обернул чистым льняным полотном 60и положил в свою новую могильную пещеру, которая была вырублена в скале. Привалив к входу большой камень, он ушёл. 61А Марьям из Магдалы и другая Марьям остались сидеть напротив могильной пещеры.

Стража у могилы

62На следующий день, это была суббота27:62 Это была суббота – букв.: «после дня приготовления к субботе»., главные священнослужители и блюстители Закона собрались у Пилата.

63– Господин, – обратились они к нему, – мы вспомнили, что когда этот обманщик ещё был жив, Он сказал: «Через три дня Я воскресну». 64Поэтому прикажи, чтобы могила три дня охранялась, иначе Его ученики могут прийти, выкрасть тело и сказать народу, что Он воскрес из мёртвых. Этот последний обман будет ещё хуже первого.

65– Возьмите стражу, – ответил Пилат, – идите и охраняйте, как знаете.

66Они пошли, опечатали камень и выставили у могильной пещеры стражу.