New Chhattisgarhi Translation (नवां नियम छत्तीसगढ़ी)

मत्ती 26:1-75

यीसू के बिरोध म साजिस

(मरकुस 14:1-2; लूका 22:1-2; यूहन्ना 11:45-53)

1ए जम्मो बात ला कहे के बाद, यीसू ह चेलामन ला कहिस, 2“जइसने तुमन जानथव कि दू दिन के बाद फसह के तिहार मनाय जाही। तब कुरुस ऊपर चघाय बर मनखे के बेटा ह पकड़वाय जाही।”

3तब काइफा नांव के महा पुरोहित के महल म मुखिया पुरोहित अऊ मनखेमन के अगुवामन जुरिन। 4अऊ ओमन ए बिचार करिन कि कइसने ओमन छल कपट करके यीसू ला पकड़ेंय अऊ ओला मार डारेंय। 5ओमन कहिन, “तिहार के समय नइं। कहूं अइसने झन होवय कि मनखेमन म दंगा हो जावय।”

बैतनियाह गांव म यीसू के अभिसेक

(मरकुस 14:3-9; यूहन्ना 12:1-8)

6जब यीसू ह बैतनियाह गांव म सिमोन कोढ़ी के घर म रिहिस, 7त एक झन माईलोगन संगमरमर के बरतन म बहुंत मंहगा इतर तेल लेके आईस, अऊ जब यीसू ह खाना खावत रहय, त ओ माईलोगन ह यीसू के मुड़ी ऊपर इतर ला उंड़ेर दीस। 8एला देखके चेलामन नाराज होईन अऊ कहिन, “एला काबर बरबाद करिस? 9ए इतर ला बने दाम म बेंचके, ओ रूपिया ला गरीबमन म बांटे जा सकत रिहिस।” 10एला जानके यीसू ह ओमन ला कहिस, “तुमन ए माईलोगन ला काबर परेसान करत हवव? ओह मोर बर सुघर काम करे हवय। 11गरीब मनखेमन तुम्‍हर संग हमेसा रहिहीं, पर मेंह तुम्‍हर संग हमेसा नइं रहंव। 12ओह मोर देहें ऊपर जऊन इतर उंड़ेरिस, त ओह एला मोर गड़ियाय जाय के तियारी म करिस।26:12 मरकुस 16:1 13मेंह तुमन ला सच कहथंव कि जम्मो संसार म जिहां कहूं ए सुघर संदेस के परचार करे जाही, उहां ए माईलोगन के ए काम ला घलो ओकर सुरता म बताय जाही।”

यहूदा ह यीसू के संग बिस‍वासघात करथे

(मरकुस 14:10-11; लूका 22:3-6)

14तब यहूदा इस्करियोती जऊन ह बारह चेलामन ले एक झन रिहिस, मुखिया पुरोहितमन करा गीस, 15अऊ ओमन ला कहिस, “यदि मेंह यीसू ला तुम्‍हर हांथ म पकड़वा दूहूं, त तुमन मोला का दूहू?” अऊ ओमन यहूदा ला चांदी के तीस ठन सिक्‍का दीन। 16ओ समय ले यहूदा ह यीसू ला पकड़वाय बर मऊका खोजे लगिस।

परभू भोज या फसह तिहार के भोज

(मरकुस 14:12-21; लूका 22:7-13, 21-23; यूहन्ना 13:21-30)

17बिन खमीर रोटी के तिहार के पहिली दिन चेलामन यीसू करा आईन अऊ पुछिन, “तेंह फसह तिहार के भोज कहां खाय चाहथस? हमन उहां तियारी करबो।”

18यीसू ह कहिस, “सहर म ओ मनखे करा जावव अऊ ओला कहव, ‘गुरू ह कहिथे: मोर समय ह लकठा आ गे हवय। मेंह फसह के तिहार ला अपन चेलामन संग तोर घर म मनाय चाहथंव।’ ” 19जइसने यीसू ह हुकूम दे रिहिस, चेलामन वइसनेच करिन अऊ ओमन फसह तिहार के भोज तियार करिन। 20जब सांझ होईस, त यीसू अपन बारह चेलामन संग खाना खाय बर बईठिस। 21अऊ जब ओमन खावत रिहिन, त यीसू ह कहिस, “मेंह तुमन ला सच कहथंव तुमन म ले एक झन मोर संग बिस‍वासघात करही।”

22एला सुनके चेलामन बहुंत उदास होईन अऊ एक-एक करके ओकर ले पुछन लगिन, “का ओह में अंव, परभू?”

23यीसू ह जबाब दीस, “जऊन ह मोर संग कटोरा म अपन हांथ ला डारे हवय, ओहीच ह मोर संग बिस‍वासघात करही। 24मनखे के बेटा ह मरही, जइसने ओकर बारे म परमेसर के बचन म लिखे हवय। पर धिक्‍कार ए, ओ मनखे ऊपर, जऊन ह मनखे के बेटा के संग बिस‍वासघात करत हवय। ओ मनखे बर बने होतिस, यदि ओकर जनम ही नइं होय रहितिस।”

25तब यहूदा जऊन ह यीसू के संग बिस‍वासघात करइया रिहिस, यीसू ले कहिस, “हे गुरू! का ओ मनखे मेंह अंव?”

यीसू ह ओला कहिस, “हव, ओ मनखे तेंह अस।”

26जब ओमन खावत रिहिन, त यीसू ह रोटी ला लीस अऊ परमेसर ले आसिस मांग के ओला टोरिस अऊ अपन चेलामन ला देके कहिस, “लेवव अऊ खावव; एह मोर देहें अय।”

27तब ओह कटोरा ला लीस अऊ परमेसर ला धनबाद दीस अऊ चेलामन ला ए कहिके कटोरा ला दीस, “एम ले तुमन जम्मो झन पीयव। 28काबरकि एह करार के मोर लहू अय, जऊन ह एकरसेति ढारे जावत हे कि बहुंते मनखेमन ला पाप के छेमा मिलय। 29मेंह तुमन ला कहथंव कि मेंह ए अंगूर के रस ला ओ दिन तक नइं पीयंव, जब तक कि मेंह तुम्‍हर संग मोर ददा के राज म नवां अंगूर के रस ला नइं पी लंव।”

30अऊ जब यीसू अऊ ओकर चेलामन एक ठन भजन गा लीन, त ओमन जैतून पहाड़ ऊपर चल दीन।

पतरस ह यीसू के इनकार करथे

(मरकुस 14:27-31; लूका 22:31-34; यूहन्ना 13:36-38)

31तब यीसू ह चेलामन ला कहिस, “आज रात के तुमन जम्मो झन मोला छोंड़के भाग जाहू, काबरकि परमेसर के बचन म ए लिखे हवय, ‘मेंह चरवाहा ला मारहूं। अऊ झुंड के भेड़मन तितिर-बितिर हो जाहीं।’26:31 जकरयाह 13:7

32फेर मेंह जी उठे के बाद तुम्‍हर ले पहिली गलील प्रदेस जाहूं।”

33तब पतरस ह यीसू ला कहिस, “चाहे जम्मो झन तोला छोंड़के भाग जावंय त भाग जावंय, पर मेंह तोला कभू नइं छोड़ंव।”

34यीसू ह ओला जबाब दीस, “मेंह तोला सच कहथंव, आजेच रात के, कुकरा के बासे के पहिली तेंह मोर तीन बार इनकार करबे।”

35पर पतरस ह कहिस, “चाहे मोला तोर संग मरना घलो पड़य, तभो ले मेंह तोर कभू इनकार नइं करंव।” अऊ आने जम्मो चेलामन घलो अइसनेच कहिन।

गतसमनी म यीसू पराथना करथे

(मरकुस 14:32-42; लूका 22:39-46)

36तब यीसू ह अपन चेलामन संग गतसमनी नांव के एक ठऊर म गीस अऊ ओह ओमन ला कहिस, “तुमन इहां बईठव, जब तक कि मेंह उहां जाके पराथना करथंव।” 37ओह पतरस अऊ जबदी के दू झन बेटा ला अपन संग म लीस, अऊ यीसू के मन ह दुःखी अऊ बियाकुल होय लगिस। 38तब ओह ओमन ला कहिस, “मोर परान ह अब्‍बड़ बियाकुल होवत हवय, अइसने लगथे कि मोर परान निकर जाही। तुमन इहां ठहिरव अऊ मोर संग जागत रहव।”

39थोरकन आघू जाके, यीसू ह मुहूं के भार भुइयां म गिरिस अऊ ए पराथना करिस, “हे मोर ददा! कहूं हो सकय, त दुःख के ए कटोरा ला मोर म ले टार दे। तभो ले मोर नइं, फेर तोर ईछा पूरा होवय।”

40तब ओह अपन चेलामन करा आईस अऊ ओमन ला सुतत देखिस, त ओह पतरस ला कहिस, “का तुमन मोर संग घंटा भर घलो नइं जाग सकव? 41जागत रहव अऊ पराथना करव, ताकि तुमन परिछा म झन पड़व। आतमा त तियार हवय, फेर देहें ह दुरबल अय।”

42यीसू ह दूसर बार गीस अऊ ए पराथना करिस, “हे मोर ददा! कहूं दुःख के ए कटोरा ह मोर पीये बिगर नइं टर सकय, त फेर तोर ईछा पूरा होवय।”

43जब यीसू ह वापिस आईस, त ओह अपन चेलामन ला फेर सुतत पाईस, काबरकि ओमन के आंखीमन नींद ले भारी हो गे रहंय। 44एकरसेति ओह ओमन ला छोंड़के फेर एक बार गीस अऊ ओहीच बात ला कहिके, तीसरा बार पराथना करिस।

45तब ओह चेलामन करा आईस अऊ ओमन ला कहिस, “का तुमन अभी तक ले सुतत हव अऊ सुसतावत हव? देखव, ओ घरी ह लकठा आ गे हवय, अऊ मनखे के बेटा ह पापीमन के हांथ म पकड़वाय जवइया हे। 46उठव, हमन चली! देखव, मोर संग बिस‍वासघात करइया ह आवत हवय।”

यीसू ह पकड़वाय जाथे

(मरकुस 14:43-50; लूका 22:47-53; यूहन्ना 18:3-12)

47जब यीसू ह ए बात ला कहितेच रिहिस, त यहूदा जऊन ह बारह चेलामन ले एक झन रहय, आईस। ओकर संग म मनखेमन के एक बड़े भीड़ रहय अऊ मनखेमन तलवार अऊ लउठी धरे रहंय। एमन ला मुखिया पुरोहित अऊ मनखेमन के अगुवामन पठोय रिहिन। 48बिस‍वासघात करइया ह ओमन ला पहिली ले ए चिन्‍हां बता दे रिहिस, “जऊन ला मेंह चूमहूं, ओहीच मनखे अय; ओला पकड़ लूहू।” 49यहूदा ह तुरते यीसू करा आईस अऊ कहिस, “हे गुरू, जोहार!” अऊ ओह यीसू ला चूमिस।

50यीसू ह ओला कहिस, “संगवारी! जऊन काम बर तेंह आय हवस, ओला कर।” तब मनखेमन आघू म आईन अऊ यीसू ला पकड़के गिरफतार कर लीन। 51तब यीसू के संगवारीमन ले एक झन तलवार ला खींचके निकारिस अऊ महा पुरोहित के सेवक ऊपर चलाके ओकर कान ला काट दीस।

52यीसू ह ओला कहिस, “अपन तलवार ला मियान म रख, काबरकि जऊन मन तलवार चलाथें, ओमन तलवार ले मारे जाहीं। 53का तेंह नइं जानस कि मेंह अपन ददा ले बिनती कर सकथंव अऊ ओह मोर बर तुरते स्वरगदूतमन के बारह ठन बड़े-बड़े सैनिक दल ले घलो जादा पठो दिही। 54पर तब परमेसर के ओ बचन ह पूरा नइं होवय, जऊन ह ए कहिथे कि ए बात ला ए किसम ले होना जरूरी अय।”26:54 यसायाह 53:12

55ओतकीच बेरा यीसू ह मनखे के भीड़ ला कहिस, “का तुमन मोला डाकू समझथव कि तलवार अऊ लउठी धरके मोला पकड़े बर आय हवव? हर दिन मेंह मंदिर म बईठके उपदेस देवत रहेंव अऊ तुमन मोला नइं पकड़ेव। 56पर ए जम्मो बात एकरसेति होईस कि अगमजानीमन के लिखे बचन ह पूरा होवय।” तब जम्मो चेलामन यीसू ला छोंड़के भाग गीन।

यीसू ह धरम महासभा के आघू म

(मरकुस 14:53-65; लूका 22:54-55, 63-71; यूहन्ना 18:13-14, 19-24)

57जऊन मन यीसू ला गिरफतार करे रिहिन, ओमन ओला महा पुरोहित काइफा करा ले गीन, जिहां कानून के गुरू अऊ अगुवामन जुरे रहंय। 58पर पतरस ह दूरिहा ले यीसू के पाछू-पाछू गीस। ओह महा पुरोहित के घर के अंगना तक गीस अऊ ए देखे बर कि का होवइया ह – ओह भीतर जाके पहरेदारमन संग बईठ गीस।

59मुखिया पुरोहितमन अऊ धरम महासभा के जम्मो मनखेमन यीसू के बिरोध म लबरा गवाही खोजत रहंय ताकि ओमन ओला मार डारंय। 60पर ओमन ला कुछू नइं मिलिस, हालाकि कतको लबरा गवाहमन आईन। 61आखिर म दू झन गवाह आईन अऊ कहिन, “ए मनखे ह कहे हवय, ‘मेंह परमेसर के मंदिर ला गिरा सकथंव अऊ तीन दिन म ओला फेर बना सकथंव।’26:61 यूहन्ना 2:19-22

62तब महा पुरोहित ह ठाढ़ होईस अऊ यीसू ला कहिस, “ए मनखेमन तोर बिरोध म जऊन गवाही देवत हवंय, का तेंह ओकर जबाब नइं देवस?” 63पर यीसू ह चुपेचाप रिहिस।

महा पुरोहित ह यीसू ला कहिस, “मेंह तोला जीयत परमेसर के कसम देवत हंव: कहूं तेंह परमेसर के बेटा मसीह अस, त हमन ला बता।”

64यीसू ह ओला कहिस, “हव जी। जइसने कि तेंह कहय। पर मेंह तुमन जम्मो झन ला कहत हंव कि एकर बाद तुमन मनखे के बेटा ला सर्वसक्तिमान परमेसर के जेवनी हांथ कोति बईठे अऊ अकास के बादर ऊपर आवत देखहू।”26:64 दानिएल 7:13-14

65तब महा पुरोहित ह अपन कपड़ा ला चीरिस अऊ कहिस, “एह परमेसर के निन्दा करे हवय। हमन ला अऊ कोनो गवाह के जरूरत नइं ए। देखव! तुमन अभीच परमेसर के निन्दा सुने हवव। 66तुम्‍हर का बिचार हवय?”

ओमन जबाब दीन, “एह मिरतू दंड के लइक अय।”

67तब ओमन यीसू के मुहूं ऊपर थूकिन अऊ ओला घूंसा मारिन। आने मनखेमन ओला थपरा मारके कहिन, 68“हे मसीह, अगमबानी करके हमन ला बता कि तोला कोन मारिस?”

पतरस ह यीसू के इनकार करथे

(मरकुस 14:66-72; लूका 22:56-62; यूहन्ना 18:15-18, 25-27)

69ओ बखत पतरस ह बाहिर अंगना म बईठे रिहिस, तब एक नौकरानी टूरी ओकर करा आईस अऊ कहिस, “तेंह घलो गलील के रहइया यीसू के संग रहय।”

70पर ओह ओ जम्मो झन के आघू म इनकार करिस अऊ कहिस, “मेंह नइं जानंव कि तेंह का कहत हवस?”

71तब पतरस ह बाहिर दुवारी करा गीस, उहां एक आने नौकरानी टूरी ओला देखिस अऊ उहां मनखेमन ला कहिस, “ए मनखे ह नासरत के यीसू संग रिहिस।”

72पतरस ह कसम खाके फेर इनकार करिस अऊ कहिस, “मेंह ओ मनखे ला नइं जानंव।”

73एकर थोरकन देर बाद, जऊन मन उहां ठाढ़े रहंय, ओमन पतरस करा आईन अऊ कहिन, “सही म तेंह घलो ओ मनखेमन ले एक झन अस, काबरकि तोर बोली ले, ए बात के पता चलथे।”

74तब पतरस ह अपन-आप ला कोसन लगिस अऊ कसम खाके कहिस, “मेंह ओ मनखे ला नइं जानंव।”

अऊ तुरते कुकरा ह बासिस। 75तब पतरस ला यीसू के कहे ए बात सुरता आईस: “कुकरा बासे के पहिली, तेंह तीन बार मोर इनकार करबे।” अऊ ओह बाहिर जाके फूट-फूट के रोईस।

Persian Contemporary Bible

متی‌ٰ 26:1‏-75

توطئه قتل عيسی

1‏-2چون عيسی سخنان خود را به پايان رساند، به شاگردانش گفت: «همانطور كه می‌دانيد، دو روز ديگر عيد پِسَح آغاز می‌شود. در اين عيد مرا دستگير كرده، بر صليب خواهند كشت.»

3در اين هنگام، روحانيون و مشايخ قوم در خانهٔ قيافا، كاهن اعظم، گرد آمدند، 4و با يكديگر مشورت كردند كه با چه حيله‌ای عيسی را دستگير كرده، بكشند؛ 5ولی تصميم گرفتند اين كار را به هنگام عيد نكنند تا آشوبی به راه نيفتد.

تدهين عيسی در بيت‌عنيا

6اما عيسی به بيت‌عنيا، به خانهٔ شمعون كه قبلاً جذامی بود، رفت. 7سر سفره، زنی با يک شيشه عطر گرانبها وارد شد و عطر را بر سر عيسی ريخت.

8‏-9شاگردانش وقتی اين عمل را ديدند، اوقاتشان تلخ شد و گفتند: «حيف از اين عطر كه تلف شد. او می‌توانست آن را به قيمت خوبی بفروشد و پولش را به فقرا بدهد.»

10عيسی كه می‌دانست به يكديگر چه می‌گويند، فرمود: «چرا از اين زن ايراد می‌گيريد؟ او خدمت بزرگی به من كرد. 11فقرا هميشه دور و بر شما هستند، ولی من هميشه با شما نمی‌باشم. 12اين زن در واقع با ريختن عطر روی من، بدن مرا برای دفن آماده كرد. 13باور كنيد در هر نقطهٔ جهان كه انجيل موعظه شود، خدمتی نيز كه اين زن به من كرد، ذكر خواهد شد.»

خيانت يهودا به عيسی

14آنگاه يهودا اسخريوطی كه يكی از دوازده شاگرد عيسی بود، نزد كاهنان اعظم رفت 15و گفت: «چقدر به من می‌دهيد تا عيسی را به شما تحويل دهم؟» آنان سی سكهٔ نقره به او دادند. 16از آن هنگام، او به دنبال فرصت مناسبی بود تا عيسی را به ايشان تسليم كند.

آخرين شام عيسی با شاگردان

17روز اول عيد كه طی آن همهٔ يهوديان نانهای غير فطير را از خانه‌های خود دور می‌كردند، فرا رسيد. شاگردان عيسی نزد او آمده، پرسيدند: «شام مخصوص عيد را كجا آماده كنيم و بخوريم؟»

18او در جواب گفت كه به شهر نزد فلان شخص رفته، بگويند: «استاد ما می‌گويد وقت من رسيده است، و من و شاگردانم در منزل شما شام مخصوص عيد را خواهيم خورد.» 19شاگردان اطاعت كردند و شام را در آنجا تدارک ديدند.

20‏-21شب، عيسی با دوازده شاگرد خود سر ميز نشست. هنگام خوردن شام او به ايشان گفت: «يكی از شما به من خيانت می‌كند.»

22همه از اين سخن غمگين شدند، و هر يک با اندوه زياد پرسيدند: «آيا من اين كار را خواهم كرد؟»

23او جواب داد: «آنكه دستش را اول با دست من به سوی بشقاب دراز كرد، همان كسی است كه به من خيانت می‌كند. 24البته من بايد مطابق پيشگويی‌ها رحلت كنم، اما وای به حال كسی كه مرا به مرگ تسليم كند. بهتر بود كه اصلاً اين شخص به دنیا نمی‌آمد.»

25يهودا نيز كه بعداً به او خيانت كرد، از او پرسيد: «استاد، آيا آن شخص منم؟» عيسی جواب داد: «بلی، خودت گفتی!»

26وقتی شام می‌خوردند، عيسی يک تكه نان برداشت و شكر نمود؛ سپس آن را تكه‌تكه كرد و به شاگردان داد و فرمود: «بگيريد بخوريد، اين بدن من است.» 27پس از آن، جام را برداشت و شكر كرد، و به آنها داده، فرمود: «هر يک از شما از اين جام بنوشيد. 28چون اين خون من است كه با آن، اين پيمان جديد را مهر می‌كنم. خون من ريخته می‌شود تا گناهان بسياری بخشيده شود. 29اين سخن مرا فراموش نكنيد: من ديگر از اين محصول انگور نخواهم نوشيد تا روزی كه آن را تازه با شما در ملكوت پدرم بنوشم.»

30پس از آن، سرود مخصوص عيد را خواندند و به سوی كوه زيتون رفتند.

عيسی انکار پطرس را پيشگويی می‌کند

31آنگاه عيسی به ايشان فرمود: «امشب همهٔ شما مرا تنها می‌گذاريد. چون در كتاب آسمانی نوشته شده كه خدا چوپان را می‌زند و گوسفندان گله پراكنده می‌شوند. 32ولی پس از آن كه زنده شدم، به جليل خواهم رفت و شما را در آنجا خواهم ديد.»

33پطرس گفت: «اگر همه، شما را تنها بگذارند، من از كنار شما دور نخواهم شد.» 34عيسی به او فرمود: «باور كن كه همين امشب، پيش از آنكه خروس بخواند، تو سه بار مرا انكار كرده، خواهی گفت كه مرا نمی‌شناسی!»

35ولی پطرس گفت: «حتی اگر لازم باشد، با شما خواهم مرد، ولی هرگز شما را انكار نخواهم كرد!» بقيه شاگردان نيز چنين گفتند.

آخرين دعا در باغ جتسيمانی

36پس عيسی ايشان را به بيشه‌ای آورد كه آن را جتسيمانی می‌ناميدند. او به ايشان فرمود: «بنشينيد و منتظر باشيد تا من كمی دورتر رفته، دعا كنم.» 37پطرس و دو پسر زبدی يعنی يعقوب و يوحنا را نيز با خود برد. در حالی که غم و اندوه تمام وجود او را فرا گرفته بود، 38رو به ايشان كرد و فرمود: «من از شدت حزن و غم، در آستانهٔ مرگ می‌باشم. شما اينجا بمانيد و با من بيدار باشيد.»

39سپس كمی دورتر رفت و بر زمين افتاد و چنين دعا كرد: «پدر، اگر ممكن است، اين جام رنج و عذاب را از مقابل من بردار؛ اما نه به خواهش من بلكه به خواست تو.»

40آنگاه نزد آن سه شاگرد برگشت و ديد كه در خوابند. گفت: «پطرس نتوانستی حتی يک ساعت با من بيدار بمانی؟ 41بيدار بمانيد و دعا كنيد تا وسوسه بر شما غلبه نكند. روح انسان می‌خواهد آنچه درست است انجام دهد، اما طبع بشری او ضعيف است.»

42باز ايشان را گذاشت و رفت و چنين دعا كرد: «پدر، اگر ممكن نيست اين جام از مقابل من برداشته شود، پس آن را می‌نوشم. آنچه خواست توست بشود.»

43باز برگشت و ديد كه در خوابند، چون پلكهای ايشان سنگين شده بود. 44پس برای بار سوم رفت و همان دعا را كرد.

45سپس، نزد شاگردان بازگشت و گفت: «حالا ديگر بخوابيد و استراحت كنيد… اما نه، حالا زمان آن است كه در چنگ بدكاران گرفتار شوم. 46برخيزيد و برويم. نگاه كنيد، اين هم شاگرد خائن من!»

دستگيری و محاكمهٔ عيسی

47سخن عيسی هنوز به پايان نرسيده بود كه يهودا، از راه رسيد. همراه او عده‌ای با شمشير و چوب و چماق نيز آمده بودند. آنان از سوی سران قوم يهود فرستاده شده بودند. 48شاگرد خائن به همراهان خود گفته بود: «هر كه را ببوسم، همان است؛ او را بگيريد.» 49پس يهودا مستقيم به سوی عيسی رفت و گفت: «سلام استاد!» و صورت استاد خود را بوسيد.

50عيسی گفت: «دوست من، كار خود را زودتر انجام بده!» پس آن عده جلو رفتند و عيسی را گرفتند.

51در اين لحظه يكی از همراهان عيسی شمشير خود را كشيد و با يک ضربه، گوش غلام كاهن اعظم را بريد.

52عيسی به او فرمود: «شمشيرت را غلاف كن. هر كه شمشير بكشد، با شمشير نيز كشته خواهد شد. 53مگر نمی‌دانی كه من می‌توانم از پدرم درخواست كنم تا در يک لحظه، هزاران فرشته به كمک ما بفرستد؟ 54ولی اگر چنين كنم، پيشگويی‌های كتاب آسمانی دربارهٔ من چگونه جامهٔ عمل خواهند پوشيد؟»

55آنگاه رو به آن عده كرد و گفت: «مگر من دزد فراری هستم كه با چوب و چماق و شمشير به سراغم آمده‌ايد؟ من هر روز در برابر چشمانتان در خانهٔ خدا بودم و به مردم تعليم می‌دادم؛ چرا در آنجا مرا نگرفتيد؟ 56بلی، می‌بايست اينطور می‌شد، چون تمام اين وقايع را انبیا در كتاب آسمانی پيشگويی كرده‌اند.»

در اين گيرودار، تمام شاگردان، او را تنها گذاشته، فرار كردند.

عيسی در برابر شورای يهود

57پس آن گروه، عيسی را به خانهٔ قيافا، كاهن اعظم بردند. در آنجا تمام سران يهود جمع بودند. 58در ضمن، پطرس هم از دور به دنبال عيسی می‌آمد تا وارد حياط خانهٔ كاهن اعظم شد و كنار سربازان نشست تا ببيند بر سر عيسی چه می‌آيد.

59كاهنان اعظم، و در واقع، تمام اعضای شورای عالی يهود جمع شده بودند و به دنبال شاهدانی می‌گشتند كه به دروغ به عيسی تهمت بزنند، تا بتوانند به مرگ محكومش كنند. 60‏-61ولی با اين كه چند نفر را يافتند و آنان نيز شهادت دروغ دادند، ولی سخنان ايشان با هم يكی نبود.

سرانجام دو نفر را پيدا كردند كه می‌گفتند: «اين مرد می‌گفت من می‌توانم خانهٔ خدا را خراب كنم، و آن را ظرف سه روز باز بنا نمايم.»

62آنگاه كاهن اعظم برخاست و به عيسی گفت: «خوب، چه می‌گويی؟ آيا آنچه می‌گويند صحت دارد؟» 63ولی عيسی خاموش ماند.

كاهن اعظم به او گفت: «به نام خدای زنده از تو می‌خواهم جواب بدهی. آيا تو مسيح، فرزند خدا هستی يا نه؟»

64عيسی جواب داد: «بلی، هستم؛ و يک روز مرا خواهيد ديد كه در دست راست خدا نشسته‌ام و بر ابرهای آسمان به زمين باز می‌گردم.»

65‏-66ناگهان كاهن اعظم لباس خود را دريد و فرياد زد: «كفر گفت! كفر گفت! ديگر چه احتياجی به شاهد داريم؟ همه شنيديد چه گفت! چه رأی می‌دهيد؟»

همه فرياد زدند: «بايد بميرد!»

67آنگاه به صورتش آب دهان انداخته، او را زدند. بعضی نيز به او سيلی زده، 68با ريشخند می‌گفتند: «ای مسيح تو كه پيغمبری، بگو ببينم چه كسی تو را زد؟»

پطرس عيسی را انکار می‌کند

69اما پطرس هنوز در حياط نشسته بود كه يكی از كنيزان كاهن اعظم نزد او آمد و گفت: «به گمانم تو نيز همراه با عيسای جليلی بودی!»

70ولی پطرس در حضور همه منكر شد و گفت: «من اصلاً از گفته‌هايت سر در نمی‌آورم!»

71اندكی بعد، در كنار در، كنيز ديگری به او برخورد و به آنانی كه در آنجا بودند گفت: «اين مرد نيز با عيسای ناصری بود.»

72پطرس دوباره انكار كرد، و حتی اين بار قسم خورده، گفت: «من اصلاً اين مرد را نمی‌شناسم.»

73ولی كمی بعد، كسانی كه آنجا ايستاده بودند پيش پطرس آمده، به او گفتند: «تو حتماً يكی از شاگردان او هستی، چون لهجه‌ات جليلی است!»

74پطرس اين بار شروع كرد به لعنت كردن و قسم خوردن و گفت: «من اصلاً اين مرد را نمی‌شناسم.»

درست در همين هنگام خروس بانگ زد، 75و پطرس گفتهٔ عيسی را به خاطر آورد كه گفته بود: «پيش از اينكه خروس بخواند، تو سه بار مرا انكار خواهی كرد.» پس بيرون رفت و زارزار گريست.