New Chhattisgarhi Translation (नवां नियम छत्तीसगढ़ी)

मत्ती 26:1-75

यीसू के बिरोध म साजिस

(मरकुस 14:1-2; लूका 22:1-2; यूहन्ना 11:45-53)

1ए जम्मो बात ला कहे के बाद, यीसू ह चेलामन ला कहिस, 2“जइसने तुमन जानथव कि दू दिन के बाद फसह के तिहार मनाय जाही। तब कुरुस ऊपर चघाय बर मनखे के बेटा ह पकड़वाय जाही।”

3तब काइफा नांव के महा पुरोहित के महल म मुखिया पुरोहित अऊ मनखेमन के अगुवामन जुरिन। 4अऊ ओमन ए बिचार करिन कि कइसने ओमन छल कपट करके यीसू ला पकड़ेंय अऊ ओला मार डारेंय। 5ओमन कहिन, “तिहार के समय नइं। कहूं अइसने झन होवय कि मनखेमन म दंगा हो जावय।”

बैतनियाह गांव म यीसू के अभिसेक

(मरकुस 14:3-9; यूहन्ना 12:1-8)

6जब यीसू ह बैतनियाह गांव म सिमोन कोढ़ी के घर म रिहिस, 7त एक झन माईलोगन संगमरमर के बरतन म बहुंत मंहगा इतर तेल लेके आईस, अऊ जब यीसू ह खाना खावत रहय, त ओ माईलोगन ह यीसू के मुड़ी ऊपर इतर ला उंड़ेर दीस। 8एला देखके चेलामन नाराज होईन अऊ कहिन, “एला काबर बरबाद करिस? 9ए इतर ला बने दाम म बेंचके, ओ रूपिया ला गरीबमन म बांटे जा सकत रिहिस।” 10एला जानके यीसू ह ओमन ला कहिस, “तुमन ए माईलोगन ला काबर परेसान करत हवव? ओह मोर बर सुघर काम करे हवय। 11गरीब मनखेमन तुम्‍हर संग हमेसा रहिहीं, पर मेंह तुम्‍हर संग हमेसा नइं रहंव। 12ओह मोर देहें ऊपर जऊन इतर उंड़ेरिस, त ओह एला मोर गड़ियाय जाय के तियारी म करिस।26:12 मरकुस 16:1 13मेंह तुमन ला सच कहथंव कि जम्मो संसार म जिहां कहूं ए सुघर संदेस के परचार करे जाही, उहां ए माईलोगन के ए काम ला घलो ओकर सुरता म बताय जाही।”

यहूदा ह यीसू के संग बिस‍वासघात करथे

(मरकुस 14:10-11; लूका 22:3-6)

14तब यहूदा इस्करियोती जऊन ह बारह चेलामन ले एक झन रिहिस, मुखिया पुरोहितमन करा गीस, 15अऊ ओमन ला कहिस, “यदि मेंह यीसू ला तुम्‍हर हांथ म पकड़वा दूहूं, त तुमन मोला का दूहू?” अऊ ओमन यहूदा ला चांदी के तीस ठन सिक्‍का दीन। 16ओ समय ले यहूदा ह यीसू ला पकड़वाय बर मऊका खोजे लगिस।

परभू भोज या फसह तिहार के भोज

(मरकुस 14:12-21; लूका 22:7-13, 21-23; यूहन्ना 13:21-30)

17बिन खमीर रोटी के तिहार के पहिली दिन चेलामन यीसू करा आईन अऊ पुछिन, “तेंह फसह तिहार के भोज कहां खाय चाहथस? हमन उहां तियारी करबो।”

18यीसू ह कहिस, “सहर म ओ मनखे करा जावव अऊ ओला कहव, ‘गुरू ह कहिथे: मोर समय ह लकठा आ गे हवय। मेंह फसह के तिहार ला अपन चेलामन संग तोर घर म मनाय चाहथंव।’ ” 19जइसने यीसू ह हुकूम दे रिहिस, चेलामन वइसनेच करिन अऊ ओमन फसह तिहार के भोज तियार करिन। 20जब सांझ होईस, त यीसू अपन बारह चेलामन संग खाना खाय बर बईठिस। 21अऊ जब ओमन खावत रिहिन, त यीसू ह कहिस, “मेंह तुमन ला सच कहथंव तुमन म ले एक झन मोर संग बिस‍वासघात करही।”

22एला सुनके चेलामन बहुंत उदास होईन अऊ एक-एक करके ओकर ले पुछन लगिन, “का ओह में अंव, परभू?”

23यीसू ह जबाब दीस, “जऊन ह मोर संग कटोरा म अपन हांथ ला डारे हवय, ओहीच ह मोर संग बिस‍वासघात करही। 24मनखे के बेटा ह मरही, जइसने ओकर बारे म परमेसर के बचन म लिखे हवय। पर धिक्‍कार ए, ओ मनखे ऊपर, जऊन ह मनखे के बेटा के संग बिस‍वासघात करत हवय। ओ मनखे बर बने होतिस, यदि ओकर जनम ही नइं होय रहितिस।”

25तब यहूदा जऊन ह यीसू के संग बिस‍वासघात करइया रिहिस, यीसू ले कहिस, “हे गुरू! का ओ मनखे मेंह अंव?”

यीसू ह ओला कहिस, “हव, ओ मनखे तेंह अस।”

26जब ओमन खावत रिहिन, त यीसू ह रोटी ला लीस अऊ परमेसर ले आसिस मांग के ओला टोरिस अऊ अपन चेलामन ला देके कहिस, “लेवव अऊ खावव; एह मोर देहें अय।”

27तब ओह कटोरा ला लीस अऊ परमेसर ला धनबाद दीस अऊ चेलामन ला ए कहिके कटोरा ला दीस, “एम ले तुमन जम्मो झन पीयव। 28काबरकि एह करार के मोर लहू अय, जऊन ह एकरसेति ढारे जावत हे कि बहुंते मनखेमन ला पाप के छेमा मिलय। 29मेंह तुमन ला कहथंव कि मेंह ए अंगूर के रस ला ओ दिन तक नइं पीयंव, जब तक कि मेंह तुम्‍हर संग मोर ददा के राज म नवां अंगूर के रस ला नइं पी लंव।”

30अऊ जब यीसू अऊ ओकर चेलामन एक ठन भजन गा लीन, त ओमन जैतून पहाड़ ऊपर चल दीन।

पतरस ह यीसू के इनकार करथे

(मरकुस 14:27-31; लूका 22:31-34; यूहन्ना 13:36-38)

31तब यीसू ह चेलामन ला कहिस, “आज रात के तुमन जम्मो झन मोला छोंड़के भाग जाहू, काबरकि परमेसर के बचन म ए लिखे हवय, ‘मेंह चरवाहा ला मारहूं। अऊ झुंड के भेड़मन तितिर-बितिर हो जाहीं।’26:31 जकरयाह 13:7

32फेर मेंह जी उठे के बाद तुम्‍हर ले पहिली गलील प्रदेस जाहूं।”

33तब पतरस ह यीसू ला कहिस, “चाहे जम्मो झन तोला छोंड़के भाग जावंय त भाग जावंय, पर मेंह तोला कभू नइं छोड़ंव।”

34यीसू ह ओला जबाब दीस, “मेंह तोला सच कहथंव, आजेच रात के, कुकरा के बासे के पहिली तेंह मोर तीन बार इनकार करबे।”

35पर पतरस ह कहिस, “चाहे मोला तोर संग मरना घलो पड़य, तभो ले मेंह तोर कभू इनकार नइं करंव।” अऊ आने जम्मो चेलामन घलो अइसनेच कहिन।

गतसमनी म यीसू पराथना करथे

(मरकुस 14:32-42; लूका 22:39-46)

36तब यीसू ह अपन चेलामन संग गतसमनी नांव के एक ठऊर म गीस अऊ ओह ओमन ला कहिस, “तुमन इहां बईठव, जब तक कि मेंह उहां जाके पराथना करथंव।” 37ओह पतरस अऊ जबदी के दू झन बेटा ला अपन संग म लीस, अऊ यीसू के मन ह दुःखी अऊ बियाकुल होय लगिस। 38तब ओह ओमन ला कहिस, “मोर परान ह अब्‍बड़ बियाकुल होवत हवय, अइसने लगथे कि मोर परान निकर जाही। तुमन इहां ठहिरव अऊ मोर संग जागत रहव।”

39थोरकन आघू जाके, यीसू ह मुहूं के भार भुइयां म गिरिस अऊ ए पराथना करिस, “हे मोर ददा! कहूं हो सकय, त दुःख के ए कटोरा ला मोर म ले टार दे। तभो ले मोर नइं, फेर तोर ईछा पूरा होवय।”

40तब ओह अपन चेलामन करा आईस अऊ ओमन ला सुतत देखिस, त ओह पतरस ला कहिस, “का तुमन मोर संग घंटा भर घलो नइं जाग सकव? 41जागत रहव अऊ पराथना करव, ताकि तुमन परिछा म झन पड़व। आतमा त तियार हवय, फेर देहें ह दुरबल अय।”

42यीसू ह दूसर बार गीस अऊ ए पराथना करिस, “हे मोर ददा! कहूं दुःख के ए कटोरा ह मोर पीये बिगर नइं टर सकय, त फेर तोर ईछा पूरा होवय।”

43जब यीसू ह वापिस आईस, त ओह अपन चेलामन ला फेर सुतत पाईस, काबरकि ओमन के आंखीमन नींद ले भारी हो गे रहंय। 44एकरसेति ओह ओमन ला छोंड़के फेर एक बार गीस अऊ ओहीच बात ला कहिके, तीसरा बार पराथना करिस।

45तब ओह चेलामन करा आईस अऊ ओमन ला कहिस, “का तुमन अभी तक ले सुतत हव अऊ सुसतावत हव? देखव, ओ घरी ह लकठा आ गे हवय, अऊ मनखे के बेटा ह पापीमन के हांथ म पकड़वाय जवइया हे। 46उठव, हमन चली! देखव, मोर संग बिस‍वासघात करइया ह आवत हवय।”

यीसू ह पकड़वाय जाथे

(मरकुस 14:43-50; लूका 22:47-53; यूहन्ना 18:3-12)

47जब यीसू ह ए बात ला कहितेच रिहिस, त यहूदा जऊन ह बारह चेलामन ले एक झन रहय, आईस। ओकर संग म मनखेमन के एक बड़े भीड़ रहय अऊ मनखेमन तलवार अऊ लउठी धरे रहंय। एमन ला मुखिया पुरोहित अऊ मनखेमन के अगुवामन पठोय रिहिन। 48बिस‍वासघात करइया ह ओमन ला पहिली ले ए चिन्‍हां बता दे रिहिस, “जऊन ला मेंह चूमहूं, ओहीच मनखे अय; ओला पकड़ लूहू।” 49यहूदा ह तुरते यीसू करा आईस अऊ कहिस, “हे गुरू, जोहार!” अऊ ओह यीसू ला चूमिस।

50यीसू ह ओला कहिस, “संगवारी! जऊन काम बर तेंह आय हवस, ओला कर।” तब मनखेमन आघू म आईन अऊ यीसू ला पकड़के गिरफतार कर लीन। 51तब यीसू के संगवारीमन ले एक झन तलवार ला खींचके निकारिस अऊ महा पुरोहित के सेवक ऊपर चलाके ओकर कान ला काट दीस।

52यीसू ह ओला कहिस, “अपन तलवार ला मियान म रख, काबरकि जऊन मन तलवार चलाथें, ओमन तलवार ले मारे जाहीं। 53का तेंह नइं जानस कि मेंह अपन ददा ले बिनती कर सकथंव अऊ ओह मोर बर तुरते स्वरगदूतमन के बारह ठन बड़े-बड़े सैनिक दल ले घलो जादा पठो दिही। 54पर तब परमेसर के ओ बचन ह पूरा नइं होवय, जऊन ह ए कहिथे कि ए बात ला ए किसम ले होना जरूरी अय।”26:54 यसायाह 53:12

55ओतकीच बेरा यीसू ह मनखे के भीड़ ला कहिस, “का तुमन मोला डाकू समझथव कि तलवार अऊ लउठी धरके मोला पकड़े बर आय हवव? हर दिन मेंह मंदिर म बईठके उपदेस देवत रहेंव अऊ तुमन मोला नइं पकड़ेव। 56पर ए जम्मो बात एकरसेति होईस कि अगमजानीमन के लिखे बचन ह पूरा होवय।” तब जम्मो चेलामन यीसू ला छोंड़के भाग गीन।

यीसू ह धरम महासभा के आघू म

(मरकुस 14:53-65; लूका 22:54-55, 63-71; यूहन्ना 18:13-14, 19-24)

57जऊन मन यीसू ला गिरफतार करे रिहिन, ओमन ओला महा पुरोहित काइफा करा ले गीन, जिहां कानून के गुरू अऊ अगुवामन जुरे रहंय। 58पर पतरस ह दूरिहा ले यीसू के पाछू-पाछू गीस। ओह महा पुरोहित के घर के अंगना तक गीस अऊ ए देखे बर कि का होवइया ह – ओह भीतर जाके पहरेदारमन संग बईठ गीस।

59मुखिया पुरोहितमन अऊ धरम महासभा के जम्मो मनखेमन यीसू के बिरोध म लबरा गवाही खोजत रहंय ताकि ओमन ओला मार डारंय। 60पर ओमन ला कुछू नइं मिलिस, हालाकि कतको लबरा गवाहमन आईन। 61आखिर म दू झन गवाह आईन अऊ कहिन, “ए मनखे ह कहे हवय, ‘मेंह परमेसर के मंदिर ला गिरा सकथंव अऊ तीन दिन म ओला फेर बना सकथंव।’26:61 यूहन्ना 2:19-22

62तब महा पुरोहित ह ठाढ़ होईस अऊ यीसू ला कहिस, “ए मनखेमन तोर बिरोध म जऊन गवाही देवत हवंय, का तेंह ओकर जबाब नइं देवस?” 63पर यीसू ह चुपेचाप रिहिस।

महा पुरोहित ह यीसू ला कहिस, “मेंह तोला जीयत परमेसर के कसम देवत हंव: कहूं तेंह परमेसर के बेटा मसीह अस, त हमन ला बता।”

64यीसू ह ओला कहिस, “हव जी। जइसने कि तेंह कहय। पर मेंह तुमन जम्मो झन ला कहत हंव कि एकर बाद तुमन मनखे के बेटा ला सर्वसक्तिमान परमेसर के जेवनी हांथ कोति बईठे अऊ अकास के बादर ऊपर आवत देखहू।”26:64 दानिएल 7:13-14

65तब महा पुरोहित ह अपन कपड़ा ला चीरिस अऊ कहिस, “एह परमेसर के निन्दा करे हवय। हमन ला अऊ कोनो गवाह के जरूरत नइं ए। देखव! तुमन अभीच परमेसर के निन्दा सुने हवव। 66तुम्‍हर का बिचार हवय?”

ओमन जबाब दीन, “एह मिरतू दंड के लइक अय।”

67तब ओमन यीसू के मुहूं ऊपर थूकिन अऊ ओला घूंसा मारिन। आने मनखेमन ओला थपरा मारके कहिन, 68“हे मसीह, अगमबानी करके हमन ला बता कि तोला कोन मारिस?”

पतरस ह यीसू के इनकार करथे

(मरकुस 14:66-72; लूका 22:56-62; यूहन्ना 18:15-18, 25-27)

69ओ बखत पतरस ह बाहिर अंगना म बईठे रिहिस, तब एक नौकरानी टूरी ओकर करा आईस अऊ कहिस, “तेंह घलो गलील के रहइया यीसू के संग रहय।”

70पर ओह ओ जम्मो झन के आघू म इनकार करिस अऊ कहिस, “मेंह नइं जानंव कि तेंह का कहत हवस?”

71तब पतरस ह बाहिर दुवारी करा गीस, उहां एक आने नौकरानी टूरी ओला देखिस अऊ उहां मनखेमन ला कहिस, “ए मनखे ह नासरत के यीसू संग रिहिस।”

72पतरस ह कसम खाके फेर इनकार करिस अऊ कहिस, “मेंह ओ मनखे ला नइं जानंव।”

73एकर थोरकन देर बाद, जऊन मन उहां ठाढ़े रहंय, ओमन पतरस करा आईन अऊ कहिन, “सही म तेंह घलो ओ मनखेमन ले एक झन अस, काबरकि तोर बोली ले, ए बात के पता चलथे।”

74तब पतरस ह अपन-आप ला कोसन लगिस अऊ कसम खाके कहिस, “मेंह ओ मनखे ला नइं जानंव।”

अऊ तुरते कुकरा ह बासिस। 75तब पतरस ला यीसू के कहे ए बात सुरता आईस: “कुकरा बासे के पहिली, तेंह तीन बार मोर इनकार करबे।” अऊ ओह बाहिर जाके फूट-फूट के रोईस।

New Serbian Translation

Матеј 26:1-75

Завера против Исуса

1Кад је Исус изрекао све ово, рекао је својим ученицима: 2„Знате да је за два дана Пасха, и тада ће Сина Човечијег предати да га разапну.“

3Тада се сабраше водећи свештеници и старешине народа у двору Првосвештеника по имену Кајафа. 4Договорили су се да ухвате Исуса на превару и да га убију. 5Али говорили су: „Само не за време празника, да се народ не би побунио.“

Помазање у Витанији

6А када је Исус био у Витанији, у кући Симона губавца, 7пришла му је нека жена с посудом од алабастра, пуном скупоценог мирисног уља, и излила је на његову главу док је он обедовао. 8Када су то видели његови ученици, наљутише се и рекоше: „Чему ово расипање? 9Ово је могло да се прода за велики износ и да се да̂ сиромасима.“

10Али Исус је разумео, па им је рекао: „Зашто јој стварате непријатности? Она ми је учинила добро дело. 11Јер сиромахе ћете увек имати са собом, а мене нећете имати увек. 12Она је излила ово мирисно уље на моје тело ради мог погреба. 13Заиста вам кажем, где год се широм света буде проповедала ова Радосна вест, рећи ће се и ово што је она учинила, за сећање на њу.“

Јудина издаја

14Тада један од Дванаесторице, по имену Јуда Искариот, оде водећим свештеницима, 15и рече: „Колико ћете ми платити ако вам га предам?“ Они одредише износ од тридесет сребрњака. 16Отада је он тражио прилику да га изда.

Последња вечера

17А на први дан празника Бесквасних хлебова приступе ученици Исусу питајући га: „Где желиш да ти припремимо пасхалну вечеру?“ 18Он рече: „Идите у град до тога и тога и реците му: ’Учитељ пита: „Моје време се примакло; код тебе ћу славити пасхалну вечеру са својим ученицима.“’“ 19Ученици учине како им је Исус наложио, те припреме за Пасху.

20Увече је Исус са Дванаесторицом био за столом. 21И док су вечерали, Исус рече: „Заиста вам кажем да ће ме издати један од вас.“

22Ученици су се веома ожалостили, па су почели да питају један за другим: „Да нисам ја, Господе?“

23А он им одговори: „Издаће ме онај који је са мном умакао хлеб у зделу. 24Додуше, Син Човечији одлази у смрт као што је у Светом писму написано за њега, али тешко оном човеку који га издаје! Том човеку би било боље да се није ни родио.“

25А Јуда, издајник, упита: „Да нисам ја, учитељу?“ Исус му одговори: „Са̂м си рекао.“

Вечера Господња (причест)

26Док су јели, Исус узе хлеб, изрече благослов, разломи га и даде ученицима и рече: „Узмите и једите, ово је моје тело.“

27Затим је узео чашу, захвалио Богу, пружио им је и рекао: „Пијте из ње сви. 28Ово је крв моја, крв Новог савеза, која се пролива за многе ради опроштења греха. 29А ја вам кажем: нећу више пити вина од рода лозе, до онога дана када ћу пити са вама ново вино у Царству мога Оца.“

30Затим су отпевали хвалоспеве и запутили се ка Маслинској гори.

Пророштво о Петровом одрицању

31Тада им Исус рече: „Сви ћете се ви окренути од мене још ове ноћи, јер је написано:

’Ударићу пастира,

и овце ће се разбежати од стада.’

32Али када ускрснем, отићи ћу пре вас у Галилеју.“

33Петар му рече: „Ако се и сви окрену од тебе, ја те никада нећу напустити.“

34А Исус му рече: „Заиста ти кажем да ћеш ме се три пута одрећи ове ноћи пре но што се петао огласи.“

35Петар му рече: „Ако треба и да умрем са тобом, нећу те се одрећи!“ Тако су рекли и сви ученици.

Молитва у Гетсиманији

36Тада Исус оде са њима на место које се зове Гетсиманија и рече ученицима: „Седите овде док ја одем онамо да се помолим.“ 37Повео је са собом Петра и двојицу Заведејевих синова. Уто га обузе жалост и тескоба. 38Тада им рече: „Душа ми је насмрт тужна. Останите овде и бдите са мном.“

39Онда оде мало даље и паде ничице молећи се: „Оче мој, ако је могуће, нека ме мимоиђе ова чаша. Али нека не буде како ја хоћу, него како ти хоћеш.“

40Када се вратио к ученицима, нашао их је како спавају. Зато је рекао Петру: „Зар ни један сат нисте могли пробдети са мном? 41Бдите и молите се да не паднете у искушење; дух је, наиме, вољан, али је тело слабо.“

42Исус по други пут оде да се моли и рече: „Оче мој, ако није могуће да ме мимоиђе ова чаша, да је не испијем, онда нека буде твоја воља.“

43Кад се вратио, поново их је затекао како спавају, јер су им се очи склапале. 44Онда их је оставио, па је по трећи пут отишао да се помоли, изговарајући исте речи.

45Тада се вратио к ученицима и рекао: „Стално спавате и почивате. Дошао је час! Ево, Син Човечији ће бити предат у руке грешницима. 46Устаните! Хајдемо! Ево, приближио се мој издајник.“

Исуса хватају

47Док је Исус још говорио, дошао је Јуда, један од Дванаесторице, и са њим велика руља са мачевима и тољагама. Њих су послали водећи свештеници и народне старешине. 48Исусов издајник им је дао знак: „Кога пољубим, тај је. Ухватите га!“ 49Он одмах приђе Исусу и рече: „Здраво, учитељу!“ И пољуби га.

50А Исус му рече: „Пријатељу, уради оно због чега си дошао.“ Тада они људи приступе и ухвате Исуса. 51Уто, један од оних који су били са Исусом, трже свој мач и удари Првосвештениковог слугу, те му одсече ухо.

52Исус му тада рече: „Врати свој мач у корице, јер сви који се лате мача – од мача ће и погинути. 53Или, зар не мислиш да могу да замолим свога Оца, и он ће ми одмах послати више од дванаест легија анђела? 54Јер, како би се иначе испунило Писмо које каже да тако мора да буде?“

55У тај час Исус рече мноштву: „Зар сам ја одметник, па сте са мачевима и тољагама изашли да ме ухватите? Сваки дан сам седео у храму и поучавао, и нисте ме ухватили. 56Све се то догодило да се испуне Пророци.“ Тада су га сви ученици оставили и побегли.

Исус пред Великим већем

57Кад су они људи ухватили Исуса, одвели су га пред Првосвештеника Кајафу. Тамо су већ били окупљени зналци Светога писма и старешине. 58Петар га је пратио издалека до Првосвештениковог двора. Затим је ушао унутра и сео са стражарима да види како ће се то завршити. 59А водећи свештеници и цело Велико веће тражили су какво лажно сведочанство против Исуса, да би могли да га погубе. 60И нису могли да нађу, иако су приступили многи лажни сведоци. Најзад приступише двојица 61и рекоше: „Овај је рекао: ’Ја могу да срушим храм Божији и да га за три дана поново саградим.’“

62Тада уста Првосвештеник и рече: „Зар ништа не одговараш на то што ови сведоче против тебе?“ 63Исус је ћутао. Тада му Првосвештеник рече: „Живим те Богом заклињем: реци нам јеси ли ти Христос, Син Божији?“

64Исус му одговори: „Са̂м си то рекао. Шта више, кажем вам да ћете од сада видети Сина Човечијег како седи с десне стране Свесилнога и долази на облацима небеским.“

65Тада Првосвештеник раздера своју одећу и рече: „Вређао је Бога! Зар су нам потребни други сведоци? Ево, сад сте чули богохуљење! 66Како вам се то чини?“ Они одговорише: „Заслужио је смрт!“ 67Тада су му пљували у лице и ударали га песницама, а други су га шамарали, 68говорећи: „Прореци, Христе, ко те је ударио?“

Петар се одриче Исуса

69А Петар је седео напољу, у дворишту. Нека слушкиња му приступи и рече му: „И ти си био са Исусом Галилејцем!“ 70А он порече пред свима, говорећи: „Не знам о чему говориш!“ 71Кад је изашао у предворје, видела га је друга слушкиња, те је рекла онима који су били тамо: „И овај је био са Исусом Назарећанином!“

72Петар поново порече заклињући се: „Не познајем тог човека!“ 73Мало касније, приђу му неки који су ту стајали, па му и они рекоше: „Заиста, и ти си један од њих! Чак те и твој нагласак одаје!“ 74Тада Петар стаде да се проклиње и куне: „Не познајем тог човека!“ У исти час се огласи петао. 75Онда се Петар сетио речи које је Исус изрекао: „Пре него што се петао огласи, три пута ћеш ме се одрећи.“ Изашао је и горко заплакао.