New Chhattisgarhi Translation (नवां नियम छत्तीसगढ़ी)

मत्ती 26:1-75

यीसू के बिरोध म साजिस

(मरकुस 14:1-2; लूका 22:1-2; यूहन्ना 11:45-53)

1ए जम्मो बात ला कहे के बाद, यीसू ह चेलामन ला कहिस, 2“जइसने तुमन जानथव कि दू दिन के बाद फसह के तिहार मनाय जाही। तब कुरुस ऊपर चघाय बर मनखे के बेटा ह पकड़वाय जाही।”

3तब काइफा नांव के महा पुरोहित के महल म मुखिया पुरोहित अऊ मनखेमन के अगुवामन जुरिन। 4अऊ ओमन ए बिचार करिन कि कइसने ओमन छल कपट करके यीसू ला पकड़ेंय अऊ ओला मार डारेंय। 5ओमन कहिन, “तिहार के समय नइं। कहूं अइसने झन होवय कि मनखेमन म दंगा हो जावय।”

बैतनियाह गांव म यीसू के अभिसेक

(मरकुस 14:3-9; यूहन्ना 12:1-8)

6जब यीसू ह बैतनियाह गांव म सिमोन कोढ़ी के घर म रिहिस, 7त एक झन माईलोगन संगमरमर के बरतन म बहुंत मंहगा इतर तेल लेके आईस, अऊ जब यीसू ह खाना खावत रहय, त ओ माईलोगन ह यीसू के मुड़ी ऊपर इतर ला उंड़ेर दीस। 8एला देखके चेलामन नाराज होईन अऊ कहिन, “एला काबर बरबाद करिस? 9ए इतर ला बने दाम म बेंचके, ओ रूपिया ला गरीबमन म बांटे जा सकत रिहिस।” 10एला जानके यीसू ह ओमन ला कहिस, “तुमन ए माईलोगन ला काबर परेसान करत हवव? ओह मोर बर सुघर काम करे हवय। 11गरीब मनखेमन तुम्‍हर संग हमेसा रहिहीं, पर मेंह तुम्‍हर संग हमेसा नइं रहंव। 12ओह मोर देहें ऊपर जऊन इतर उंड़ेरिस, त ओह एला मोर गड़ियाय जाय के तियारी म करिस।26:12 मरकुस 16:1 13मेंह तुमन ला सच कहथंव कि जम्मो संसार म जिहां कहूं ए सुघर संदेस के परचार करे जाही, उहां ए माईलोगन के ए काम ला घलो ओकर सुरता म बताय जाही।”

यहूदा ह यीसू के संग बिस‍वासघात करथे

(मरकुस 14:10-11; लूका 22:3-6)

14तब यहूदा इस्करियोती जऊन ह बारह चेलामन ले एक झन रिहिस, मुखिया पुरोहितमन करा गीस, 15अऊ ओमन ला कहिस, “यदि मेंह यीसू ला तुम्‍हर हांथ म पकड़वा दूहूं, त तुमन मोला का दूहू?” अऊ ओमन यहूदा ला चांदी के तीस ठन सिक्‍का दीन। 16ओ समय ले यहूदा ह यीसू ला पकड़वाय बर मऊका खोजे लगिस।

परभू भोज या फसह तिहार के भोज

(मरकुस 14:12-21; लूका 22:7-13, 21-23; यूहन्ना 13:21-30)

17बिन खमीर रोटी के तिहार के पहिली दिन चेलामन यीसू करा आईन अऊ पुछिन, “तेंह फसह तिहार के भोज कहां खाय चाहथस? हमन उहां तियारी करबो।”

18यीसू ह कहिस, “सहर म ओ मनखे करा जावव अऊ ओला कहव, ‘गुरू ह कहिथे: मोर समय ह लकठा आ गे हवय। मेंह फसह के तिहार ला अपन चेलामन संग तोर घर म मनाय चाहथंव।’ ” 19जइसने यीसू ह हुकूम दे रिहिस, चेलामन वइसनेच करिन अऊ ओमन फसह तिहार के भोज तियार करिन। 20जब सांझ होईस, त यीसू अपन बारह चेलामन संग खाना खाय बर बईठिस। 21अऊ जब ओमन खावत रिहिन, त यीसू ह कहिस, “मेंह तुमन ला सच कहथंव तुमन म ले एक झन मोर संग बिस‍वासघात करही।”

22एला सुनके चेलामन बहुंत उदास होईन अऊ एक-एक करके ओकर ले पुछन लगिन, “का ओह में अंव, परभू?”

23यीसू ह जबाब दीस, “जऊन ह मोर संग कटोरा म अपन हांथ ला डारे हवय, ओहीच ह मोर संग बिस‍वासघात करही। 24मनखे के बेटा ह मरही, जइसने ओकर बारे म परमेसर के बचन म लिखे हवय। पर धिक्‍कार ए, ओ मनखे ऊपर, जऊन ह मनखे के बेटा के संग बिस‍वासघात करत हवय। ओ मनखे बर बने होतिस, यदि ओकर जनम ही नइं होय रहितिस।”

25तब यहूदा जऊन ह यीसू के संग बिस‍वासघात करइया रिहिस, यीसू ले कहिस, “हे गुरू! का ओ मनखे मेंह अंव?”

यीसू ह ओला कहिस, “हव, ओ मनखे तेंह अस।”

26जब ओमन खावत रिहिन, त यीसू ह रोटी ला लीस अऊ परमेसर ले आसिस मांग के ओला टोरिस अऊ अपन चेलामन ला देके कहिस, “लेवव अऊ खावव; एह मोर देहें अय।”

27तब ओह कटोरा ला लीस अऊ परमेसर ला धनबाद दीस अऊ चेलामन ला ए कहिके कटोरा ला दीस, “एम ले तुमन जम्मो झन पीयव। 28काबरकि एह करार के मोर लहू अय, जऊन ह एकरसेति ढारे जावत हे कि बहुंते मनखेमन ला पाप के छेमा मिलय। 29मेंह तुमन ला कहथंव कि मेंह ए अंगूर के रस ला ओ दिन तक नइं पीयंव, जब तक कि मेंह तुम्‍हर संग मोर ददा के राज म नवां अंगूर के रस ला नइं पी लंव।”

30अऊ जब यीसू अऊ ओकर चेलामन एक ठन भजन गा लीन, त ओमन जैतून पहाड़ ऊपर चल दीन।

पतरस ह यीसू के इनकार करथे

(मरकुस 14:27-31; लूका 22:31-34; यूहन्ना 13:36-38)

31तब यीसू ह चेलामन ला कहिस, “आज रात के तुमन जम्मो झन मोला छोंड़के भाग जाहू, काबरकि परमेसर के बचन म ए लिखे हवय, ‘मेंह चरवाहा ला मारहूं। अऊ झुंड के भेड़मन तितिर-बितिर हो जाहीं।’26:31 जकरयाह 13:7

32फेर मेंह जी उठे के बाद तुम्‍हर ले पहिली गलील प्रदेस जाहूं।”

33तब पतरस ह यीसू ला कहिस, “चाहे जम्मो झन तोला छोंड़के भाग जावंय त भाग जावंय, पर मेंह तोला कभू नइं छोड़ंव।”

34यीसू ह ओला जबाब दीस, “मेंह तोला सच कहथंव, आजेच रात के, कुकरा के बासे के पहिली तेंह मोर तीन बार इनकार करबे।”

35पर पतरस ह कहिस, “चाहे मोला तोर संग मरना घलो पड़य, तभो ले मेंह तोर कभू इनकार नइं करंव।” अऊ आने जम्मो चेलामन घलो अइसनेच कहिन।

गतसमनी म यीसू पराथना करथे

(मरकुस 14:32-42; लूका 22:39-46)

36तब यीसू ह अपन चेलामन संग गतसमनी नांव के एक ठऊर म गीस अऊ ओह ओमन ला कहिस, “तुमन इहां बईठव, जब तक कि मेंह उहां जाके पराथना करथंव।” 37ओह पतरस अऊ जबदी के दू झन बेटा ला अपन संग म लीस, अऊ यीसू के मन ह दुःखी अऊ बियाकुल होय लगिस। 38तब ओह ओमन ला कहिस, “मोर परान ह अब्‍बड़ बियाकुल होवत हवय, अइसने लगथे कि मोर परान निकर जाही। तुमन इहां ठहिरव अऊ मोर संग जागत रहव।”

39थोरकन आघू जाके, यीसू ह मुहूं के भार भुइयां म गिरिस अऊ ए पराथना करिस, “हे मोर ददा! कहूं हो सकय, त दुःख के ए कटोरा ला मोर म ले टार दे। तभो ले मोर नइं, फेर तोर ईछा पूरा होवय।”

40तब ओह अपन चेलामन करा आईस अऊ ओमन ला सुतत देखिस, त ओह पतरस ला कहिस, “का तुमन मोर संग घंटा भर घलो नइं जाग सकव? 41जागत रहव अऊ पराथना करव, ताकि तुमन परिछा म झन पड़व। आतमा त तियार हवय, फेर देहें ह दुरबल अय।”

42यीसू ह दूसर बार गीस अऊ ए पराथना करिस, “हे मोर ददा! कहूं दुःख के ए कटोरा ह मोर पीये बिगर नइं टर सकय, त फेर तोर ईछा पूरा होवय।”

43जब यीसू ह वापिस आईस, त ओह अपन चेलामन ला फेर सुतत पाईस, काबरकि ओमन के आंखीमन नींद ले भारी हो गे रहंय। 44एकरसेति ओह ओमन ला छोंड़के फेर एक बार गीस अऊ ओहीच बात ला कहिके, तीसरा बार पराथना करिस।

45तब ओह चेलामन करा आईस अऊ ओमन ला कहिस, “का तुमन अभी तक ले सुतत हव अऊ सुसतावत हव? देखव, ओ घरी ह लकठा आ गे हवय, अऊ मनखे के बेटा ह पापीमन के हांथ म पकड़वाय जवइया हे। 46उठव, हमन चली! देखव, मोर संग बिस‍वासघात करइया ह आवत हवय।”

यीसू ह पकड़वाय जाथे

(मरकुस 14:43-50; लूका 22:47-53; यूहन्ना 18:3-12)

47जब यीसू ह ए बात ला कहितेच रिहिस, त यहूदा जऊन ह बारह चेलामन ले एक झन रहय, आईस। ओकर संग म मनखेमन के एक बड़े भीड़ रहय अऊ मनखेमन तलवार अऊ लउठी धरे रहंय। एमन ला मुखिया पुरोहित अऊ मनखेमन के अगुवामन पठोय रिहिन। 48बिस‍वासघात करइया ह ओमन ला पहिली ले ए चिन्‍हां बता दे रिहिस, “जऊन ला मेंह चूमहूं, ओहीच मनखे अय; ओला पकड़ लूहू।” 49यहूदा ह तुरते यीसू करा आईस अऊ कहिस, “हे गुरू, जोहार!” अऊ ओह यीसू ला चूमिस।

50यीसू ह ओला कहिस, “संगवारी! जऊन काम बर तेंह आय हवस, ओला कर।” तब मनखेमन आघू म आईन अऊ यीसू ला पकड़के गिरफतार कर लीन। 51तब यीसू के संगवारीमन ले एक झन तलवार ला खींचके निकारिस अऊ महा पुरोहित के सेवक ऊपर चलाके ओकर कान ला काट दीस।

52यीसू ह ओला कहिस, “अपन तलवार ला मियान म रख, काबरकि जऊन मन तलवार चलाथें, ओमन तलवार ले मारे जाहीं। 53का तेंह नइं जानस कि मेंह अपन ददा ले बिनती कर सकथंव अऊ ओह मोर बर तुरते स्वरगदूतमन के बारह ठन बड़े-बड़े सैनिक दल ले घलो जादा पठो दिही। 54पर तब परमेसर के ओ बचन ह पूरा नइं होवय, जऊन ह ए कहिथे कि ए बात ला ए किसम ले होना जरूरी अय।”26:54 यसायाह 53:12

55ओतकीच बेरा यीसू ह मनखे के भीड़ ला कहिस, “का तुमन मोला डाकू समझथव कि तलवार अऊ लउठी धरके मोला पकड़े बर आय हवव? हर दिन मेंह मंदिर म बईठके उपदेस देवत रहेंव अऊ तुमन मोला नइं पकड़ेव। 56पर ए जम्मो बात एकरसेति होईस कि अगमजानीमन के लिखे बचन ह पूरा होवय।” तब जम्मो चेलामन यीसू ला छोंड़के भाग गीन।

यीसू ह धरम महासभा के आघू म

(मरकुस 14:53-65; लूका 22:54-55, 63-71; यूहन्ना 18:13-14, 19-24)

57जऊन मन यीसू ला गिरफतार करे रिहिन, ओमन ओला महा पुरोहित काइफा करा ले गीन, जिहां कानून के गुरू अऊ अगुवामन जुरे रहंय। 58पर पतरस ह दूरिहा ले यीसू के पाछू-पाछू गीस। ओह महा पुरोहित के घर के अंगना तक गीस अऊ ए देखे बर कि का होवइया ह – ओह भीतर जाके पहरेदारमन संग बईठ गीस।

59मुखिया पुरोहितमन अऊ धरम महासभा के जम्मो मनखेमन यीसू के बिरोध म लबरा गवाही खोजत रहंय ताकि ओमन ओला मार डारंय। 60पर ओमन ला कुछू नइं मिलिस, हालाकि कतको लबरा गवाहमन आईन। 61आखिर म दू झन गवाह आईन अऊ कहिन, “ए मनखे ह कहे हवय, ‘मेंह परमेसर के मंदिर ला गिरा सकथंव अऊ तीन दिन म ओला फेर बना सकथंव।’26:61 यूहन्ना 2:19-22

62तब महा पुरोहित ह ठाढ़ होईस अऊ यीसू ला कहिस, “ए मनखेमन तोर बिरोध म जऊन गवाही देवत हवंय, का तेंह ओकर जबाब नइं देवस?” 63पर यीसू ह चुपेचाप रिहिस।

महा पुरोहित ह यीसू ला कहिस, “मेंह तोला जीयत परमेसर के कसम देवत हंव: कहूं तेंह परमेसर के बेटा मसीह अस, त हमन ला बता।”

64यीसू ह ओला कहिस, “हव जी। जइसने कि तेंह कहय। पर मेंह तुमन जम्मो झन ला कहत हंव कि एकर बाद तुमन मनखे के बेटा ला सर्वसक्तिमान परमेसर के जेवनी हांथ कोति बईठे अऊ अकास के बादर ऊपर आवत देखहू।”26:64 दानिएल 7:13-14

65तब महा पुरोहित ह अपन कपड़ा ला चीरिस अऊ कहिस, “एह परमेसर के निन्दा करे हवय। हमन ला अऊ कोनो गवाह के जरूरत नइं ए। देखव! तुमन अभीच परमेसर के निन्दा सुने हवव। 66तुम्‍हर का बिचार हवय?”

ओमन जबाब दीन, “एह मिरतू दंड के लइक अय।”

67तब ओमन यीसू के मुहूं ऊपर थूकिन अऊ ओला घूंसा मारिन। आने मनखेमन ओला थपरा मारके कहिन, 68“हे मसीह, अगमबानी करके हमन ला बता कि तोला कोन मारिस?”

पतरस ह यीसू के इनकार करथे

(मरकुस 14:66-72; लूका 22:56-62; यूहन्ना 18:15-18, 25-27)

69ओ बखत पतरस ह बाहिर अंगना म बईठे रिहिस, तब एक नौकरानी टूरी ओकर करा आईस अऊ कहिस, “तेंह घलो गलील के रहइया यीसू के संग रहय।”

70पर ओह ओ जम्मो झन के आघू म इनकार करिस अऊ कहिस, “मेंह नइं जानंव कि तेंह का कहत हवस?”

71तब पतरस ह बाहिर दुवारी करा गीस, उहां एक आने नौकरानी टूरी ओला देखिस अऊ उहां मनखेमन ला कहिस, “ए मनखे ह नासरत के यीसू संग रिहिस।”

72पतरस ह कसम खाके फेर इनकार करिस अऊ कहिस, “मेंह ओ मनखे ला नइं जानंव।”

73एकर थोरकन देर बाद, जऊन मन उहां ठाढ़े रहंय, ओमन पतरस करा आईन अऊ कहिन, “सही म तेंह घलो ओ मनखेमन ले एक झन अस, काबरकि तोर बोली ले, ए बात के पता चलथे।”

74तब पतरस ह अपन-आप ला कोसन लगिस अऊ कसम खाके कहिस, “मेंह ओ मनखे ला नइं जानंव।”

अऊ तुरते कुकरा ह बासिस। 75तब पतरस ला यीसू के कहे ए बात सुरता आईस: “कुकरा बासे के पहिली, तेंह तीन बार मोर इनकार करबे।” अऊ ओह बाहिर जाके फूट-फूट के रोईस।

New Russian Translation

Матфея 26:1-75

Религиозные вожди замышляют убить Иисуса

(Мк. 14:1-2; Лк. 22:1-2; Ин. 11:45-53)

1Закончив говорить это, Иисус сказал ученикам:

2– Вы знаете, что через два дня будет Пасха и Сына Человеческого отдадут на распятие.

3А во дворце первосвященника Кайафы26:3 Кайафа занимал пост верховного священника с 18 по 36 гг. в это время собрались первосвященники и старейшины народа. 4Они решили хитростью схватить Иисуса и убить.

5– Только не во время праздника, – говорили они, – иначе народ может взбунтоваться.

Женщина помазывает Иисуса драгоценным благовонием

(Мк. 14:3-9; Лк. 7:37-38; Ин. 12:1-8)

6Иисус находился в Вифании, в доме Симона прокаженного. 7И когда Он возлежал за столом, к Нему подошла женщина с алебастровым кувшином, в котором было очень дорогое ароматическое масло, и возлила это масло Ему на голову. 8Увидев это, ученики рассердились:

– Зачем такая трата? 9Ведь это ароматическое масло можно было продать за большую сумму, а деньги раздать нищим.

10Но Иисус, зная, что они говорят, сказал им:

– Что вы упрекаете женщину? Ведь она сделала для Меня доброе дело. 11Потому что нищие всегда с вами, а Я не всегда буду с вами. 12Вылив на Меня это масло, она тем самым приготовила Меня к погребению. 13Говорю вам истину: во всем мире, везде, где будет возвещена эта Радостная Весть, там в память об этой женщине будет рассказано и о том, что она сделала.

Иуда Искариот решает предать Иисуса

(Мк. 14:10-11; Лк. 22:3-6)

14Затем Иуда Искариот, один из двенадцати, пошел к первосвященникам 15с предложением.

– Что вы мне дадите, если я предам вам Иисуса? – спросил он их.

Те отсчитали ему тридцать серебряных монет26:15 См. Зах. 11:12. Здесь, по всей вероятности, говорится о тетрадрахмах – древнегреческих монетах, каждая из которых равнялась заработку 4 дней наемного работника.. 16И с того момента Иуда стал искать удобного случая, чтобы предать Его.

Ученики готовятся к пасхальному ужину

(Мк. 14:12-16; Лк. 22:7-13)

17В первый день праздника Пресных хлебов ученики спросили Иисуса:

– Где нам приготовить Тебе пасхальный ужин?

18Иисус ответил:

– Идите в город к такому-то и скажите ему: «Учитель говорит, что Его время уже подошло, и Он хочет в твоем доме отпраздновать пасхальный ужин со Своими учениками».

19Ученики сделали все, как им велел Иисус, и приготовили пасхальный ужин.

Последний ужин Иисуса с учениками

(Мк. 14:17-25; Лк. 22:17-23; 1 Кор. 11:23-25)

20Вечером Иисус и двенадцать учеников возлегли у стола. 21Когда они ели, Иисус сказал:

– Говорю вам истину: один из вас предаст Меня.

22Ученики сильно опечалились и один за другим стали спрашивать Его:

– Не я ли, Господи?

23А Иисус ответил:

– Тот, кто опустил руку в блюдо вместе со Мной, тот предаст Меня. 24Да, Сын Человеческий уходит так, как о Нем сказано в Писании, но горе тому человеку, который предает Сына Человеческого! Лучше бы ему вообще не родиться.

25Тогда Иуда, предатель, тоже спросил:

– Не я ли, Рабби?

– Ты сам это сказал, – ответил Иисус.

26Когда они ели, Иисус взял хлеб и, благословив, разломил его, дал Своим ученикам со словами:

– Возьмите и ешьте, это Мое тело.

27Затем Он взял чашу, поблагодарил за нее Бога и, подав им, сказал:

– Пейте из нее все. 28Это Моя кровь завета26:28 Кровь завета – ср. Исх. 24:8; Евр. 9:18-20., проливаемая за многих людей для прощения грехов. 29Говорю вам, что Я уже не буду пить от плода виноградного до того дня, когда Я буду пить с вами новое вино в Царстве Моего Отца.

Иисус предсказывает отречение Петра

(Мк. 14:26-31; Лк. 22:33-34; Ин. 13:37-38)

30Они спели26:30 Традиционно на этом празднике иудеи пели Псалмы с 112 по 117 и 135. и пошли на Оливковую гору.

31Тогда Иисус сказал им:

– В эту ночь вы все отступитесь от Меня, ведь написано:

«Я поражу Пастуха,

и разбегутся овцы стада»26:31 Зах. 13:7..

32Но когда Я воскресну, то пойду в Галилею и буду ждать вас там.

33Петр ответил:

– Даже если все Тебя оставят, я этого никогда не сделаю.

34– Говорю тебе истину, – сказал ему Иисус, – в эту ночь, прежде чем пропоет петух, ты трижды отречешься от Меня.

35Но Петр уверял:

– Даже если мне придется умереть с Тобой, я никогда не откажусь от Тебя.

И все ученики говорили то же.

Молитва Иисуса в Гефсиманском саду

(Мк. 14:32-42; Лк. 22:39-46)

36Иисус пришел с ними на место, называемое Гефсимания, и сказал ученикам:

– Посидите здесь, а Я пойду и помолюсь.

37Он взял с Собой Петра и двух сыновей Зеведея. Его охватили тоска и тревога. 38Тогда Он сказал им:

– Душа Моя объята смертельной печалью. Побудьте здесь и бодрствуйте со Мной.

39Отойдя немного, Он пал на лицо Свое и молился:

– Отец Мой, если возможно, то пусть минует Меня эта чаша, но пусть будет все не как Я хочу, а как Ты хочешь.

40Затем Он возвратился к ученикам и нашел их спящими.

– Неужели вы даже часу не могли пободрствовать вместе со Мной? – спросил Он Петра. – 41Бодрствуйте и молитесь, чтобы вам не поддаться искушению. Дух бодр, но тело слабо.

42И во второй раз Он ушел и молился:

– Отец Мой, если невозможно, чтобы эта чаша миновала Меня и чтобы Мне не пить из нее, то пусть все будет по Твоей воле.

43Когда Он вернулся, ученики опять спали, потому что их веки отяжелели. 44И, оставив их, Иисус отошел и стал молиться в третий раз теми же словами. 45Затем Он возвратился к ученикам и сказал им:

– Вы все спите и отдыхаете? Вот, время настало, и Сын Человеческий предается в руки грешников. 46Вставайте, идем. Вот уже и Мой предатель приблизился.

Иисус предан и арестован

(Мк. 14:43-50; Лк. 22:47-53; Ин. 18:3-11)

47Он еще говорил, как подошел Иуда, один из двенадцати учеников, и с ним большая толпа, вооруженная мечами и кольями. Их послали первосвященники и старейшины народа. 48Предатель так условился с ними:

– Хватайте Того, Кого я поцелую.

49Иуда сразу же подошел к Иисусу и сказал:

– Здравствуй, Рабби! – и поцеловал Его.

50Иисус же сказал ему:

– Друг, делай то, для чего пришел.

Тут подошли люди и, схватив Иисуса, взяли Его под стражу. 51Тогда один из тех, кто был с Иисусом, вытащил меч, ударил слугу первосвященника и отсек ему ухо.

52– Верни свой меч на место, – сказал ему Иисус. – Все, кто берется за меч, от меча и погибнут. 53Неужели ты думаешь, что Я не мог бы упросить Моего Отца немедленно прислать Мне более двенадцати легионов ангелов?26:53 Легион – воинское соединение в римской армии, численностью до 6 000 солдат. 54Но как же тогда исполнится Писание, что все это должно произойти?

55Затем Иисус обратился к толпе:

– Что Я, разбойник26:55 Или: «мятежник»., что вы пришли с мечами и кольями, чтобы арестовать Меня? Каждый день Я сидел и учил в храме, и вы не арестовали Меня. 56Но все произошло именно так, чтобы исполнились писания пророков.

Тогда все ученики оставили Его и убежали.

Иисус на допросе у Кайафы

(Мк. 14:53-65; Лк. 22:54-55, 63-71; Ин. 18:12-13, 19-24)

57Арестовавшие Иисуса привели Его к первосвященнику Кайафе, у которого уже собрались учители Закона и старейшины. 58Петр, держась поодаль, следовал за Иисусом и прошел прямо во двор первосвященника. Войдя внутрь, он сел со стражниками, чтобы увидеть, чем все кончится. 59Первосвященники и весь Высший Совет искали ложных показаний против Иисуса, чтобы приговорить Его к смерти, 60но они ничего не могли найти, хотя и пришло много лжесвидетелей. Наконец вышли два человека 61и заявили:

– Этот человек говорил: «Я могу разрушить Божий храм и восстановить его за три дня».

62Потом первосвященник встал и спросил Иисуса:

– Тебе нечего ответить на эти свидетельства против Тебя?

63Иисус молчал. Первосвященник сказал Ему:

– Я заклинаю Тебя живым Богом, скажи нам: Ты – Христос, Сын Божий?

64– Ты сам так сказал, – ответил Иисус, – но говорю вам, что отныне вы увидите Сына Человеческого, сидящим по правую руку от Всемогущего и идущим на облаках небесных26:64 См. Пс. 109:1; Дан. 7:13..

65Тогда первосвященник разорвал на себе одежды и сказал:

– Он кощунствует! Какие нам еще нужны свидетели?! Вы теперь сами слышали кощунство! 66Каково ваше решение?

Они ответили:

– Он виновен и заслуживает смерти.

67Тогда Иисусу стали плевать в лицо и бить Его кулаками, некоторые же били Его по щекам и 68спрашивали:

– Пророчествуй нам, Христос, кто Тебя ударил?

Отречение Петра

(Мк. 14:66-72; Лк. 22:54-62; Ин. 18:16-18, 25-27)

69Петр же сидел снаружи, во дворе, когда к нему подошла служанка.

– Ты тоже был с Иисусом Галилеянином, – сказала она.

70Но Петр отрицал перед всеми:

– Я не знаю, о чем ты говоришь.

71Когда он отошел к воротам, его увидела другая служанка. Она сказала стоявшим рядом:

– Этот человек был с Иисусом Назарянином.

72Петр снова все отрицал, поклявшись, что он не знает Этого Человека. 73Но спустя немного времени стоявшие там люди подошли и сказали ему:

– Точно, ты тоже один из них, тебя и говор твой выдает.

74Тогда Петр начал клясться и божиться:

– Я не знаю Этого Человека!

И тотчас пропел петух. 75И тогда Петр вспомнил слова Иисуса: «Прежде чем пропоет петух, ты трижды отречешься от Меня».

И, выйдя наружу, он горько заплакал.