New Chhattisgarhi Translation (नवां नियम छत्तीसगढ़ी)

मत्ती 26:1-75

यीसू के बिरोध म साजिस

(मरकुस 14:1-2; लूका 22:1-2; यूहन्ना 11:45-53)

1ए जम्मो बात ला कहे के बाद, यीसू ह चेलामन ला कहिस, 2“जइसने तुमन जानथव कि दू दिन के बाद फसह के तिहार मनाय जाही। तब कुरुस ऊपर चघाय बर मनखे के बेटा ह पकड़वाय जाही।”

3तब काइफा नांव के महा पुरोहित के महल म मुखिया पुरोहित अऊ मनखेमन के अगुवामन जुरिन। 4अऊ ओमन ए बिचार करिन कि कइसने ओमन छल कपट करके यीसू ला पकड़ेंय अऊ ओला मार डारेंय। 5ओमन कहिन, “तिहार के समय नइं। कहूं अइसने झन होवय कि मनखेमन म दंगा हो जावय।”

बैतनियाह गांव म यीसू के अभिसेक

(मरकुस 14:3-9; यूहन्ना 12:1-8)

6जब यीसू ह बैतनियाह गांव म सिमोन कोढ़ी के घर म रिहिस, 7त एक झन माईलोगन संगमरमर के बरतन म बहुंत मंहगा इतर तेल लेके आईस, अऊ जब यीसू ह खाना खावत रहय, त ओ माईलोगन ह यीसू के मुड़ी ऊपर इतर ला उंड़ेर दीस। 8एला देखके चेलामन नाराज होईन अऊ कहिन, “एला काबर बरबाद करिस? 9ए इतर ला बने दाम म बेंचके, ओ रूपिया ला गरीबमन म बांटे जा सकत रिहिस।” 10एला जानके यीसू ह ओमन ला कहिस, “तुमन ए माईलोगन ला काबर परेसान करत हवव? ओह मोर बर सुघर काम करे हवय। 11गरीब मनखेमन तुम्‍हर संग हमेसा रहिहीं, पर मेंह तुम्‍हर संग हमेसा नइं रहंव। 12ओह मोर देहें ऊपर जऊन इतर उंड़ेरिस, त ओह एला मोर गड़ियाय जाय के तियारी म करिस।26:12 मरकुस 16:1 13मेंह तुमन ला सच कहथंव कि जम्मो संसार म जिहां कहूं ए सुघर संदेस के परचार करे जाही, उहां ए माईलोगन के ए काम ला घलो ओकर सुरता म बताय जाही।”

यहूदा ह यीसू के संग बिस‍वासघात करथे

(मरकुस 14:10-11; लूका 22:3-6)

14तब यहूदा इस्करियोती जऊन ह बारह चेलामन ले एक झन रिहिस, मुखिया पुरोहितमन करा गीस, 15अऊ ओमन ला कहिस, “यदि मेंह यीसू ला तुम्‍हर हांथ म पकड़वा दूहूं, त तुमन मोला का दूहू?” अऊ ओमन यहूदा ला चांदी के तीस ठन सिक्‍का दीन। 16ओ समय ले यहूदा ह यीसू ला पकड़वाय बर मऊका खोजे लगिस।

परभू भोज या फसह तिहार के भोज

(मरकुस 14:12-21; लूका 22:7-13, 21-23; यूहन्ना 13:21-30)

17बिन खमीर रोटी के तिहार के पहिली दिन चेलामन यीसू करा आईन अऊ पुछिन, “तेंह फसह तिहार के भोज कहां खाय चाहथस? हमन उहां तियारी करबो।”

18यीसू ह कहिस, “सहर म ओ मनखे करा जावव अऊ ओला कहव, ‘गुरू ह कहिथे: मोर समय ह लकठा आ गे हवय। मेंह फसह के तिहार ला अपन चेलामन संग तोर घर म मनाय चाहथंव।’ ” 19जइसने यीसू ह हुकूम दे रिहिस, चेलामन वइसनेच करिन अऊ ओमन फसह तिहार के भोज तियार करिन। 20जब सांझ होईस, त यीसू अपन बारह चेलामन संग खाना खाय बर बईठिस। 21अऊ जब ओमन खावत रिहिन, त यीसू ह कहिस, “मेंह तुमन ला सच कहथंव तुमन म ले एक झन मोर संग बिस‍वासघात करही।”

22एला सुनके चेलामन बहुंत उदास होईन अऊ एक-एक करके ओकर ले पुछन लगिन, “का ओह में अंव, परभू?”

23यीसू ह जबाब दीस, “जऊन ह मोर संग कटोरा म अपन हांथ ला डारे हवय, ओहीच ह मोर संग बिस‍वासघात करही। 24मनखे के बेटा ह मरही, जइसने ओकर बारे म परमेसर के बचन म लिखे हवय। पर धिक्‍कार ए, ओ मनखे ऊपर, जऊन ह मनखे के बेटा के संग बिस‍वासघात करत हवय। ओ मनखे बर बने होतिस, यदि ओकर जनम ही नइं होय रहितिस।”

25तब यहूदा जऊन ह यीसू के संग बिस‍वासघात करइया रिहिस, यीसू ले कहिस, “हे गुरू! का ओ मनखे मेंह अंव?”

यीसू ह ओला कहिस, “हव, ओ मनखे तेंह अस।”

26जब ओमन खावत रिहिन, त यीसू ह रोटी ला लीस अऊ परमेसर ले आसिस मांग के ओला टोरिस अऊ अपन चेलामन ला देके कहिस, “लेवव अऊ खावव; एह मोर देहें अय।”

27तब ओह कटोरा ला लीस अऊ परमेसर ला धनबाद दीस अऊ चेलामन ला ए कहिके कटोरा ला दीस, “एम ले तुमन जम्मो झन पीयव। 28काबरकि एह करार के मोर लहू अय, जऊन ह एकरसेति ढारे जावत हे कि बहुंते मनखेमन ला पाप के छेमा मिलय। 29मेंह तुमन ला कहथंव कि मेंह ए अंगूर के रस ला ओ दिन तक नइं पीयंव, जब तक कि मेंह तुम्‍हर संग मोर ददा के राज म नवां अंगूर के रस ला नइं पी लंव।”

30अऊ जब यीसू अऊ ओकर चेलामन एक ठन भजन गा लीन, त ओमन जैतून पहाड़ ऊपर चल दीन।

पतरस ह यीसू के इनकार करथे

(मरकुस 14:27-31; लूका 22:31-34; यूहन्ना 13:36-38)

31तब यीसू ह चेलामन ला कहिस, “आज रात के तुमन जम्मो झन मोला छोंड़के भाग जाहू, काबरकि परमेसर के बचन म ए लिखे हवय, ‘मेंह चरवाहा ला मारहूं। अऊ झुंड के भेड़मन तितिर-बितिर हो जाहीं।’26:31 जकरयाह 13:7

32फेर मेंह जी उठे के बाद तुम्‍हर ले पहिली गलील प्रदेस जाहूं।”

33तब पतरस ह यीसू ला कहिस, “चाहे जम्मो झन तोला छोंड़के भाग जावंय त भाग जावंय, पर मेंह तोला कभू नइं छोड़ंव।”

34यीसू ह ओला जबाब दीस, “मेंह तोला सच कहथंव, आजेच रात के, कुकरा के बासे के पहिली तेंह मोर तीन बार इनकार करबे।”

35पर पतरस ह कहिस, “चाहे मोला तोर संग मरना घलो पड़य, तभो ले मेंह तोर कभू इनकार नइं करंव।” अऊ आने जम्मो चेलामन घलो अइसनेच कहिन।

गतसमनी म यीसू पराथना करथे

(मरकुस 14:32-42; लूका 22:39-46)

36तब यीसू ह अपन चेलामन संग गतसमनी नांव के एक ठऊर म गीस अऊ ओह ओमन ला कहिस, “तुमन इहां बईठव, जब तक कि मेंह उहां जाके पराथना करथंव।” 37ओह पतरस अऊ जबदी के दू झन बेटा ला अपन संग म लीस, अऊ यीसू के मन ह दुःखी अऊ बियाकुल होय लगिस। 38तब ओह ओमन ला कहिस, “मोर परान ह अब्‍बड़ बियाकुल होवत हवय, अइसने लगथे कि मोर परान निकर जाही। तुमन इहां ठहिरव अऊ मोर संग जागत रहव।”

39थोरकन आघू जाके, यीसू ह मुहूं के भार भुइयां म गिरिस अऊ ए पराथना करिस, “हे मोर ददा! कहूं हो सकय, त दुःख के ए कटोरा ला मोर म ले टार दे। तभो ले मोर नइं, फेर तोर ईछा पूरा होवय।”

40तब ओह अपन चेलामन करा आईस अऊ ओमन ला सुतत देखिस, त ओह पतरस ला कहिस, “का तुमन मोर संग घंटा भर घलो नइं जाग सकव? 41जागत रहव अऊ पराथना करव, ताकि तुमन परिछा म झन पड़व। आतमा त तियार हवय, फेर देहें ह दुरबल अय।”

42यीसू ह दूसर बार गीस अऊ ए पराथना करिस, “हे मोर ददा! कहूं दुःख के ए कटोरा ह मोर पीये बिगर नइं टर सकय, त फेर तोर ईछा पूरा होवय।”

43जब यीसू ह वापिस आईस, त ओह अपन चेलामन ला फेर सुतत पाईस, काबरकि ओमन के आंखीमन नींद ले भारी हो गे रहंय। 44एकरसेति ओह ओमन ला छोंड़के फेर एक बार गीस अऊ ओहीच बात ला कहिके, तीसरा बार पराथना करिस।

45तब ओह चेलामन करा आईस अऊ ओमन ला कहिस, “का तुमन अभी तक ले सुतत हव अऊ सुसतावत हव? देखव, ओ घरी ह लकठा आ गे हवय, अऊ मनखे के बेटा ह पापीमन के हांथ म पकड़वाय जवइया हे। 46उठव, हमन चली! देखव, मोर संग बिस‍वासघात करइया ह आवत हवय।”

यीसू ह पकड़वाय जाथे

(मरकुस 14:43-50; लूका 22:47-53; यूहन्ना 18:3-12)

47जब यीसू ह ए बात ला कहितेच रिहिस, त यहूदा जऊन ह बारह चेलामन ले एक झन रहय, आईस। ओकर संग म मनखेमन के एक बड़े भीड़ रहय अऊ मनखेमन तलवार अऊ लउठी धरे रहंय। एमन ला मुखिया पुरोहित अऊ मनखेमन के अगुवामन पठोय रिहिन। 48बिस‍वासघात करइया ह ओमन ला पहिली ले ए चिन्‍हां बता दे रिहिस, “जऊन ला मेंह चूमहूं, ओहीच मनखे अय; ओला पकड़ लूहू।” 49यहूदा ह तुरते यीसू करा आईस अऊ कहिस, “हे गुरू, जोहार!” अऊ ओह यीसू ला चूमिस।

50यीसू ह ओला कहिस, “संगवारी! जऊन काम बर तेंह आय हवस, ओला कर।” तब मनखेमन आघू म आईन अऊ यीसू ला पकड़के गिरफतार कर लीन। 51तब यीसू के संगवारीमन ले एक झन तलवार ला खींचके निकारिस अऊ महा पुरोहित के सेवक ऊपर चलाके ओकर कान ला काट दीस।

52यीसू ह ओला कहिस, “अपन तलवार ला मियान म रख, काबरकि जऊन मन तलवार चलाथें, ओमन तलवार ले मारे जाहीं। 53का तेंह नइं जानस कि मेंह अपन ददा ले बिनती कर सकथंव अऊ ओह मोर बर तुरते स्वरगदूतमन के बारह ठन बड़े-बड़े सैनिक दल ले घलो जादा पठो दिही। 54पर तब परमेसर के ओ बचन ह पूरा नइं होवय, जऊन ह ए कहिथे कि ए बात ला ए किसम ले होना जरूरी अय।”26:54 यसायाह 53:12

55ओतकीच बेरा यीसू ह मनखे के भीड़ ला कहिस, “का तुमन मोला डाकू समझथव कि तलवार अऊ लउठी धरके मोला पकड़े बर आय हवव? हर दिन मेंह मंदिर म बईठके उपदेस देवत रहेंव अऊ तुमन मोला नइं पकड़ेव। 56पर ए जम्मो बात एकरसेति होईस कि अगमजानीमन के लिखे बचन ह पूरा होवय।” तब जम्मो चेलामन यीसू ला छोंड़के भाग गीन।

यीसू ह धरम महासभा के आघू म

(मरकुस 14:53-65; लूका 22:54-55, 63-71; यूहन्ना 18:13-14, 19-24)

57जऊन मन यीसू ला गिरफतार करे रिहिन, ओमन ओला महा पुरोहित काइफा करा ले गीन, जिहां कानून के गुरू अऊ अगुवामन जुरे रहंय। 58पर पतरस ह दूरिहा ले यीसू के पाछू-पाछू गीस। ओह महा पुरोहित के घर के अंगना तक गीस अऊ ए देखे बर कि का होवइया ह – ओह भीतर जाके पहरेदारमन संग बईठ गीस।

59मुखिया पुरोहितमन अऊ धरम महासभा के जम्मो मनखेमन यीसू के बिरोध म लबरा गवाही खोजत रहंय ताकि ओमन ओला मार डारंय। 60पर ओमन ला कुछू नइं मिलिस, हालाकि कतको लबरा गवाहमन आईन। 61आखिर म दू झन गवाह आईन अऊ कहिन, “ए मनखे ह कहे हवय, ‘मेंह परमेसर के मंदिर ला गिरा सकथंव अऊ तीन दिन म ओला फेर बना सकथंव।’26:61 यूहन्ना 2:19-22

62तब महा पुरोहित ह ठाढ़ होईस अऊ यीसू ला कहिस, “ए मनखेमन तोर बिरोध म जऊन गवाही देवत हवंय, का तेंह ओकर जबाब नइं देवस?” 63पर यीसू ह चुपेचाप रिहिस।

महा पुरोहित ह यीसू ला कहिस, “मेंह तोला जीयत परमेसर के कसम देवत हंव: कहूं तेंह परमेसर के बेटा मसीह अस, त हमन ला बता।”

64यीसू ह ओला कहिस, “हव जी। जइसने कि तेंह कहय। पर मेंह तुमन जम्मो झन ला कहत हंव कि एकर बाद तुमन मनखे के बेटा ला सर्वसक्तिमान परमेसर के जेवनी हांथ कोति बईठे अऊ अकास के बादर ऊपर आवत देखहू।”26:64 दानिएल 7:13-14

65तब महा पुरोहित ह अपन कपड़ा ला चीरिस अऊ कहिस, “एह परमेसर के निन्दा करे हवय। हमन ला अऊ कोनो गवाह के जरूरत नइं ए। देखव! तुमन अभीच परमेसर के निन्दा सुने हवव। 66तुम्‍हर का बिचार हवय?”

ओमन जबाब दीन, “एह मिरतू दंड के लइक अय।”

67तब ओमन यीसू के मुहूं ऊपर थूकिन अऊ ओला घूंसा मारिन। आने मनखेमन ओला थपरा मारके कहिन, 68“हे मसीह, अगमबानी करके हमन ला बता कि तोला कोन मारिस?”

पतरस ह यीसू के इनकार करथे

(मरकुस 14:66-72; लूका 22:56-62; यूहन्ना 18:15-18, 25-27)

69ओ बखत पतरस ह बाहिर अंगना म बईठे रिहिस, तब एक नौकरानी टूरी ओकर करा आईस अऊ कहिस, “तेंह घलो गलील के रहइया यीसू के संग रहय।”

70पर ओह ओ जम्मो झन के आघू म इनकार करिस अऊ कहिस, “मेंह नइं जानंव कि तेंह का कहत हवस?”

71तब पतरस ह बाहिर दुवारी करा गीस, उहां एक आने नौकरानी टूरी ओला देखिस अऊ उहां मनखेमन ला कहिस, “ए मनखे ह नासरत के यीसू संग रिहिस।”

72पतरस ह कसम खाके फेर इनकार करिस अऊ कहिस, “मेंह ओ मनखे ला नइं जानंव।”

73एकर थोरकन देर बाद, जऊन मन उहां ठाढ़े रहंय, ओमन पतरस करा आईन अऊ कहिन, “सही म तेंह घलो ओ मनखेमन ले एक झन अस, काबरकि तोर बोली ले, ए बात के पता चलथे।”

74तब पतरस ह अपन-आप ला कोसन लगिस अऊ कसम खाके कहिस, “मेंह ओ मनखे ला नइं जानंव।”

अऊ तुरते कुकरा ह बासिस। 75तब पतरस ला यीसू के कहे ए बात सुरता आईस: “कुकरा बासे के पहिली, तेंह तीन बार मोर इनकार करबे।” अऊ ओह बाहिर जाके फूट-फूट के रोईस।

New Amharic Standard Version

ማቴዎስ 26:1-75

አይሁድ በኢየሱስ ላይ መዶለታቸው

26፥2-5 ተጓ ምብ – ማር 14፥1፡2፤ ሉቃ 22፥1፡2

1ኢየሱስ እነዚህን ነገሮች ተናግሮ ከጨረሰ በኋላ፣ ደቀ መዛሙርቱን፣ 2“ከሁለት ቀን በኋላ ፋሲካ እንደሚሆን ታውቃላችሁ፤ የሰው ልጅም ሊሰቀል አልፎ ይሰጣል” አላቸው።

3ከዚህ በኋላ የካህናት አለቆችና የሕዝብ ሽማግሌዎች ቀያፋ በተባለ ሊቀ ካህን ግቢ ውስጥ ተሰብስበው፤ 4በረቀቀ መንገድ ኢየሱስን ለማስያዝና ለማስገደል ተማከሩ። 5ነገር ግን፣ “በሕዝቡ መካከል ረብሻ እንዳይነሣ በበዓል ቀን አይሁን” በማለት ተስማሙ።

ኢየሱስን ሽቶ የቀባችው ሴት

26፥6-13 ተጓ ምብ – ማር 14፥3-9

26፥6-13 ተጓ ምብ – ሉቃ 7፥37፡38፤ ዮሐ 12፥1-8

6ኢየሱስ በቢታንያ በለምጻሙ በስምዖን ቤት ሳለ፣ 7አንዲት ሴት ዋጋው እጅግ ውድ የሆነ አንድ ብልቃጥ የአልባስጥሮስ ሽቶ ይዛ ወደ እርሱ ቀረበች፤ በማእድ ላይ ተቀምጦ ሳለም በራሱ ላይ አፈሰሰችው።

8ደቀ መዛሙርቱ ይህንን በተመለከቱ ጊዜ ተቈጥተው እንዲህ አሉ፤ “ይህ ሁሉ ብክነት ለምንድ ነው? 9ሽቶው በብዙ ዋጋ ተሽጦ ገንዘቡን ለድኾች መስጠት ሲቻል!”

10ኢየሱስ ይህን ዐውቆ እንዲህ አላቸው፤ “ይህችን ሴት ለምን ታስቸግሯታላችሁ? መልካም ነገር አድርጋልኛለች፤ 11ድኾች ምንጊዜም ከእናንተ ጋር ናቸው፤ እኔ ግን ሁል ጊዜ ከእናንተ ጋር አልሆንም። 12ሽቶውን በሰውነቴ ላይ በማፍሰሷ፣ እኔን ለቀብር ለማዘጋጀት ነው፤ 13እውነት እላችኋለሁ፤ ይህ ወንጌል በሚሰበክበት በዓለም ዙሪያ ሁሉ፣ በየትኛውም ስፍራ እርሷ ያደረገችው በመታሰቢያነት ይነገርላታል።”

ይሁዳ ኢየሱስን አሳልፎ ለመስጠት ተስማማ

26፥14-16 ተጓ ምብ – ማር 14፥10፡11፤ ሉቃ 22፥3-6

14ከዚህ በኋላ ከዐሥራ ሁለቱ አንዱ የነበረውና የአስቆሮቱ ይሁዳ የተባለው ወደ ካህናት አለቆች ሄዶ፣ 15“እርሱን አሳልፌ ብሰጣችሁ እናንተስ ምን ትሰጡኛላችሁ?” አላቸው። እነርሱም ሠላሳ ጥሬ ብር ቈጥረው ሰጡት። 16ከዚያን ጊዜ ጀምሮ ይሁዳ፣ ኢየሱስን አሳልፎ የሚሰጥበትን አመቺ ጊዜ ይፈልግ ነበር።

የጌታ ራት

26፥17-19 ተጓ ምብ – ማር 14፥12-16፤ ሉቃ 22፥7-13

26፥20-24 ተጓ ምብ – ማር 14፥17-21

26፥26-29 ተጓ ምብ – ማር 14፥22-25፤ ሉቃ 22፥17-20፤ 1ቆሮ 11፥23-25

17በቂጣ በዓል የመጀመሪያ ቀን ደቀ መዛሙርቱ ወደ ኢየሱስ ቀርበው፣ “ፋሲካን እንድትበላ የት እንድናዘጋጅልህ ትፈልጋለህ?” አሉት።

18እርሱም፣ “ወደ ከተማ ሄዳችሁ እገሌ የተባለውን ሰው፣ ‘መምህር ጊዜዬ ተቃርቦአልና ከደቀ መዛሙርቴ ጋር ፋሲካን በቤትህ አከብራለሁ ብሏል’ በሉት” አላቸው። 19ደቀ መዛሙርቱም ኢየሱስ ባዘዛቸው መሠረት የፋሲካን ራት አዘጋጁ።

20በመሸም ጊዜ ኢየሱስ ከዐሥራ ሁለቱ ጋር በማእድ ተቀመጠ፤ 21በመብላት ላይ ሳሉም፣ “እውነት እላችኋለሁ፣ ከእናንተ አንዱ አሳልፎ ይሰጠኛል” አላቸው።

22እነርሱም እጅግ አዝነው፣ ተራ በተራ፣ “ጌታ ሆይ፤ እኔ እሆን ይሆን?” አሉት።

23እርሱም መልሶ እንዲህ አላቸው፤ “አሳልፎ የሚሰጠኝ ከእኔ ጋር እጁን ከወጭቱ ውስጥ ያጠለቀው ነው፤ 24የሰው ልጅ ስለ እርሱ እንደ ተጻፈው ይሄዳል፤ ነገር ግን የሰውን ልጅ አሳልፎ ለሚሰጠው ለዚያ ሰው ወዮለት፤ ለዚያ ሰው ሳይወለድ ቢቀር ይሻለው ነበር።”

25አሳልፎ የሚሰጠው ይሁዳም፣ “መምህር ሆይ፣ እኔ እሆንን?” አለው።

እርሱም፣ “አንተ አልህ”26፥25 “ወይም አንተ ራስህ ተናገርህ” አለው።

26እየበሉ ሳሉ፣ ኢየሱስ እንጀራን አንሥቶ ባረከ፤ ቈርሶም ለደቀ መዛሙርቱ በመስጠት፣ “እንካችሁ ብሉ፤ ይህ ሥጋዬ ነው” አላቸው።

27ከዚያም ጽዋውን አንሥቶ አመሰገነ፤ ለደቀ መዛሙርቱም በመስጠት እንዲህ አላቸው፤ “ሁላችሁም ከዚህ ጠጡ፤ 28ስለ ብዙዎች የኀጢአት ይቅርታ የሚፈስ የአዲስ ኪዳን ደሜ ይህ ነው። 29እላችኋለሁ፤ በአባቴ መንግሥት ከእናንተ ጋር በአዲስ መልክ እስከምጠጣበት እስከዚያ ቀን ድረስ፣ ከእንግዲህ ከዚህ የወይን ፍሬ አልጠጣም።”

30መዝሙር ከዘመሩ በኋላ ወደ ደብረ ዘይት ተራራ ወጡ።

የጴጥሮስ ክህደት አስቀድሞ መነገሩ

26፥31-35 ተጓ ምብ – ማር 14፥27-31፤ ሉቃ 23፥31-34

31ቀጥሎም ኢየሱስ እንዲህ አላቸው፤ “ሁላችሁም በዚህች ሌሊት በእኔ ተሰናክላችሁ ትሄዳላችሁ፤ እንዲህ ተብሎ ተጽፎአልና፤

“ ‘እረኛውን እመታለሁ፤

የመንጋውም በጎች ይበተናሉ።’

32ነገር ግን ከተነሣሁ በኋላ ቀድሜአችሁ ወደ ገሊላ እሄዳለሁ።”

33ጴጥሮስም መልሶ፣ “ሌሎች በሙሉ ባንተ ምክንያት ቢሰናከሉ እንኳ እኔ በፍጹም አልሰናከልም!” አለው።

34ኢየሱስም፣ “እውነት እልሃለሁ፤ በዛሬዋ ሌሊት ዶሮ ከመጮኹ በፊት ሦስት ጊዜ ትክደኛለህ” አለው።

35ጴጥሮስ ግን “ከአንተ ጋር መሞት ቢያስፈልግ እንኳ ከቶ አልክድህም!” አለው። ሌሎቹም ደቀ መዛሙርት በሙሉ እንደዚሁ አሉ።

የኢየሱስ ጸሎት በጌቴሴማኒ

26፥36-46 ተጓ ምብ – ማር 14፥32-42፤ ሉቃ 22፥40-46

36ከዚህ በኋላ ኢየሱስ ከደቀ መዛሙርቱ ጋር ጌቴሴማኒ ወደሚባል ስፍራ ሄደ፤ እነርሱንም፣ “ወደዚያ ሄጄ በምጸልይበት ጊዜ እናንተ እዚህ ተቀመጡ” አላቸው። 37ከእርሱም ጋር ጴጥሮስንና ሁለቱን የዘብዴዎስ ልጆች ይዞ ሄዶ ይተክዝና ይጨነቅ ጀመር፤ 38ከዚያም፣ “ነፍሴ እስከ ሞት ድረስ እጅግ አዝናለች፤ ከእኔ ጋር በመትጋት እዚሁ ቈዩ” አላቸው።

39ጥቂት ዕልፍ ብሎ በግንባሩ በመደፋት፣ “አባቴ ሆይ፤ ቢቻል ይህ ጽዋ ከእኔ ይለፍ፤ ነገር ግን እኔ እንደምፈልገው ሳይሆን አንተ እንደምትፈልገው ይሁን” ብሎ ጸለየ።

40ከዚያም ተመልሶ ወደ ደቀ መዛሙርቱ ሲመጣ፣ ተኝተው አገኛቸው፤ ጴጥሮስንም እንዲህ አለው፤ “እንግዲህ፤ ከእኔ ጋር ለአንድ ሰዓት እንኳ መትጋት አቃታችሁን? 41ወደ ፈተና እንዳትገቡ ትጕና ጸልዩ፤ መንፈስ ዝግጁ ነው፤ ሥጋ ግን ደካማ ነው።”

42እንደ ገና ለሁለተኛ ጊዜ ሄዶ፣ “አባት ሆይ፤ ይህ ሳልጠጣው የማያልፍ ጽዋ ከሆነ፣ ፈቃድህ ይፈጸም” ብሎ ጸለየ።

43እንደ ገናም በመጣ ጊዜ ዐይኖቻቸው በእንቅልፍ ከብደው ስለ ነበር ተኝተው አገኛቸው። 44ትቶአቸውም እንደ ገና በመሄድ ለሦስተኛ ጊዜ ቀደም ብሎ የጸለየውን ጸሎት ደገመ።

45ከዚያም ወደ ደቀ መዛሙርቱ ተመልሶ እንዲህ አላቸው፤ “አሁንም ዐርፋችሁ ተኝታችኋል? እነሆ፣ ሰዓቱ ቀርቦአል፤ የሰው ልጅ በኀጢአተኞች እጅ ዐልፎ ይሰጣል፤ 46ተነሡ እንሂድ፤ አሳልፎ የሚሰጠኝም እየመጣ ነው።”

የኢየሱስ መያዝ

26፥47-56 ተጓ ምብ – ማር 14፥43-50፤ ሉቃ 22፥47-53

47በመናገር ላይ እያለ፣ ከዐሥራ ሁለቱ አንዱ ይሁዳ መጣ፤ ከካህናት አለቆችና ከሕዝቡ ሽማግሌዎች ዘንድ የተላኩ ሰይፍና ዱላ የያዙ ብዙ ሰዎችም አብረውት ነበሩ። 48ይሁዳም፣ “እኔ የምስመው እርሱ ነው፤ ያዙት” ብሎ ምልክት ሰጥቶአቸው ስለ ነበር፣ 49በቀጥታ ወደ ኢየሱስ ሄዶ፣ “መምህር ሆይ፤ ሰላም ለአንተ ይሁን” በማለት ሳመው።

50ኢየሱስም፣ “ወዳጄ ሆይ፤ የመጣህበትን ፈጽም”26፥50 ወይም “ወዳጄ ሆይ፤ ለምን መጣህ?” አለው።

በዚህ ጊዜ ሰዎቹ ቀርበው ኢየሱስን ያዙት፤ አሰሩትም። 51ከኢየሱስ ጋር ከነበሩት አንዱ እጁን ዘርግቶ ሰይፉን መዘዘና የሊቀ ካህናቱን አገልጋይ መትቶ ጆሮውን ቈረጠው።

52ኢየሱስም እንዲህ አለው፤ “በል ሰይፍህን ወደ ሰገባው መልስ፤ ሰይፍን የሚመዝዙ ሁሉ በሰይፍ ይጠፋሉ። 53ካስፈለገ አባቴን ብለምነው ከዐሥራ ሁለት ክፍለ ሰራዊት የሚበልጡ መላእክት የማይሰድልኝ ይመስልሃል? 54ይህ ቢሆን ደግሞ ቅዱሳት መጻሕፍት ይሆናል ያሉት ነገር እንዴት ይፈጸማል?”

55በዚያን ጊዜ ኢየሱስ ሕዝቡን እንዲህ አላቸው፤ “ወንበዴ እንደሚይዝ ሰው ሰይፍና ዱላ ይዛችሁ ልትይዙኝ መጣችሁ? በየዕለቱ በቤተ መቅደስ ተቀምጬ ሳስተምር አልያዛችሁኝም ነበር፤ 56ነገር ግን ይህ ሁሉ የሆነው ነቢያት በቅዱሳት መጻሕፍት የተናገሩት ይፈጸም ዘንድ ነው።” በዚያን ጊዜ ደቀ መዛሙርቱ ሁሉ ጥለውት ሸሹ።

ኢየሱስ በአይሁድ ሸንጎ ፊት

26፥57-68 ተጓ ምብ – ማር 14፥53-65፤ ዮሐ 18፥12፡13፡19-24

57በዚህ ጊዜ ኢየሱስን የያዙት ሰዎች፣ የኦሪት የሕግ መምህራንና የሕዝብ ሽማግሌዎች ተሰብስበው ወደነበሩበት፣ ወደ ሊቀ ካህናቱ ወደ ቀያፋ ወሰዱት። 58ነገር ግን ጴጥሮስ ከርቀት ሆኖ እስከ ሊቀ ካህናቱ ቅጥር ግቢ ይከተለው ነበር፤ ወደ ውስጥ ገብቶም የሁኔታውን መጨረሻ ለማየት ከጠባቂዎች ጋር ተቀመጠ።

59በዚህ ጊዜ የካህናት አለቆችና የአይሁድ ሸንጎ በሙሉ ኢየሱስን ለማስገደል የሐሰት ማስረጃ ይፈልጉ ነበር፤ 60ብዙ የሐሰት ምስክሮች ቢቀርቡም በቂ ማስረጃ አላገኙም፤ በኋላ ግን ሁለት ሰዎች ቀርበው፣ 61“ይህ ሰው፣ ‘የእግዚአብሔርን ቤተ መቅደስ አፍርሼ፣ በሦስት ቀን ውስጥ መልሼ ልሠራው እችላለሁ’ ብሎአል” በማለት ተናገሩ። 62በዚህ ጊዜ ሊቀ ካህናቱ ተነሥቶ በመቆም፣ “እነዚህ ሰዎች ለሚመሰክሩብህ ሁሉ ምንም መልስ አትሰጥምን?” አለው። 63ኢየሱስ ግን ዝም አለ።

ሊቀ ካህናቱም፣ “በሕያው እግዚአብሔር አምልሃለሁ፤ አንተ ክርስቶስ26፥63 ወይም “መሲሑ”፤ እንደዚሁም ቍ 68 የእግዚአብሔር ልጅ እንደሆንህ ንገረን” አለው።

64ኢየሱስም፣ “አንተው ራስህ ብለኸዋል፤ ነገር ግን ለሁላችሁም ልንገራችሁ፤ ወደ ፊት የሰው ልጅ በኀያሉ ቀኝ ተቀምጦ በሰማይ ደመና ሲመጣ ታዩታላችሁ” አለው።

65በዚህ ጊዜ ሊቀ ካህናቱ ልብሱን ቀዶ፣ “በእግዚአብሔር ላይ የስድብ ቃል ተናግሮአል፤ ከዚህ ሌላ ምን ምስክርነት ያስፈልገናል? በእግዚአብሔር ላይ የስድብ ቃል መናገሩን እናንተው ራሳችሁ ሰምታችኋአል፤ 66ምን ይመስላችኋል?” አላቸው።

እነርሱም፣ “ሞት ይገባዋል!” ብለው መለሱ።

67በዚህ ጊዜ ፊቱ ላይ እየተፉ በጡጫ መቱት፤ ሌሎቹም በጥፊ እየመቱት፣ 68“ክርስቶስ ሆይ፤ ማነው የመታህ? እስቲ ትንቢት ንገረን!” አሉት።

ጴጥሮስ ኢየሱስን ካደ

26፥69-75 ተጓ ምብ – ማር 14፥66-72፤ ሉቃ 22፥55-62፤ ዮሐ 18፥16-18፡25-27

69ከዚህ በኋላ ጴጥሮስ በሊቀ ካህናቱ ግቢ ውስጥ ተቀምጦ ሳለ አንዲት የቤት ሠራተኛ ወደ እርሱ ቀርባ፣ “አንተም ከገሊላው ኢየሱስ ጋር ነበርህ” አለችው።

70እርሱ ግን፣ “ምን እንደምትናገሪ አላውቅም” በማለት በሁላቸውም ፊት ካደ።

71ከግቢው መውጫ ወደ ሆነው በር ሲያመራ ሌላዋ ሠራተኛ ተመልክታው፣ በዚያ ለነበሩት ሰዎች፣ “ይህ ሰው ከናዝሬቱ ኢየሱስ ጋር ነበር” አለች።

72እርሱም በመሐላ ቃል፣ “ሰውየውን አላውቀውም!” ሲል ዳግመኛ ካደ።

73ከጥቂት ጊዜ በኋላ፣ በዚያ ቆመው የነበሩት ሰዎች ቀርበው ጴጥሮስን፣ “አነጋገርህ ስለሚያጋልጥህ፣ በርግጥ አንተም ከእነርሱ አንዱ ነህ!” አሉት።

74እርሱም እየማለና እየተገዘተ፣ “እኔ ሰውየውን አላውቀውም!” አላቸው።

ወዲያውም ዶሮ ጮኸ። 75በዚህ ጊዜ ጴጥሮስ፣ “ዶሮ ሳይጮህ ሦስት ጊዜ ትክደኛለህ” ብሎ ኢየሱስ የተናገረው ቃል ትዝ አለው፤ ጴጥሮስም ወደ ውጭ ወጥቶ መራራ ልቅሶ አለቀሰ።