New Chhattisgarhi Translation (नवां नियम छत्तीसगढ़ी)

मत्ती 26:1-75

यीसू के बिरोध म साजिस

(मरकुस 14:1-2; लूका 22:1-2; यूहन्ना 11:45-53)

1ए जम्मो बात ला कहे के बाद, यीसू ह चेलामन ला कहिस, 2“जइसने तुमन जानथव कि दू दिन के बाद फसह के तिहार मनाय जाही। तब कुरुस ऊपर चघाय बर मनखे के बेटा ह पकड़वाय जाही।”

3तब काइफा नांव के महा पुरोहित के महल म मुखिया पुरोहित अऊ मनखेमन के अगुवामन जुरिन। 4अऊ ओमन ए बिचार करिन कि कइसने ओमन छल कपट करके यीसू ला पकड़ेंय अऊ ओला मार डारेंय। 5ओमन कहिन, “तिहार के समय नइं। कहूं अइसने झन होवय कि मनखेमन म दंगा हो जावय।”

बैतनियाह गांव म यीसू के अभिसेक

(मरकुस 14:3-9; यूहन्ना 12:1-8)

6जब यीसू ह बैतनियाह गांव म सिमोन कोढ़ी के घर म रिहिस, 7त एक झन माईलोगन संगमरमर के बरतन म बहुंत मंहगा इतर तेल लेके आईस, अऊ जब यीसू ह खाना खावत रहय, त ओ माईलोगन ह यीसू के मुड़ी ऊपर इतर ला उंड़ेर दीस। 8एला देखके चेलामन नाराज होईन अऊ कहिन, “एला काबर बरबाद करिस? 9ए इतर ला बने दाम म बेंचके, ओ रूपिया ला गरीबमन म बांटे जा सकत रिहिस।” 10एला जानके यीसू ह ओमन ला कहिस, “तुमन ए माईलोगन ला काबर परेसान करत हवव? ओह मोर बर सुघर काम करे हवय। 11गरीब मनखेमन तुम्‍हर संग हमेसा रहिहीं, पर मेंह तुम्‍हर संग हमेसा नइं रहंव। 12ओह मोर देहें ऊपर जऊन इतर उंड़ेरिस, त ओह एला मोर गड़ियाय जाय के तियारी म करिस।26:12 मरकुस 16:1 13मेंह तुमन ला सच कहथंव कि जम्मो संसार म जिहां कहूं ए सुघर संदेस के परचार करे जाही, उहां ए माईलोगन के ए काम ला घलो ओकर सुरता म बताय जाही।”

यहूदा ह यीसू के संग बिस‍वासघात करथे

(मरकुस 14:10-11; लूका 22:3-6)

14तब यहूदा इस्करियोती जऊन ह बारह चेलामन ले एक झन रिहिस, मुखिया पुरोहितमन करा गीस, 15अऊ ओमन ला कहिस, “यदि मेंह यीसू ला तुम्‍हर हांथ म पकड़वा दूहूं, त तुमन मोला का दूहू?” अऊ ओमन यहूदा ला चांदी के तीस ठन सिक्‍का दीन। 16ओ समय ले यहूदा ह यीसू ला पकड़वाय बर मऊका खोजे लगिस।

परभू भोज या फसह तिहार के भोज

(मरकुस 14:12-21; लूका 22:7-13, 21-23; यूहन्ना 13:21-30)

17बिन खमीर रोटी के तिहार के पहिली दिन चेलामन यीसू करा आईन अऊ पुछिन, “तेंह फसह तिहार के भोज कहां खाय चाहथस? हमन उहां तियारी करबो।”

18यीसू ह कहिस, “सहर म ओ मनखे करा जावव अऊ ओला कहव, ‘गुरू ह कहिथे: मोर समय ह लकठा आ गे हवय। मेंह फसह के तिहार ला अपन चेलामन संग तोर घर म मनाय चाहथंव।’ ” 19जइसने यीसू ह हुकूम दे रिहिस, चेलामन वइसनेच करिन अऊ ओमन फसह तिहार के भोज तियार करिन। 20जब सांझ होईस, त यीसू अपन बारह चेलामन संग खाना खाय बर बईठिस। 21अऊ जब ओमन खावत रिहिन, त यीसू ह कहिस, “मेंह तुमन ला सच कहथंव तुमन म ले एक झन मोर संग बिस‍वासघात करही।”

22एला सुनके चेलामन बहुंत उदास होईन अऊ एक-एक करके ओकर ले पुछन लगिन, “का ओह में अंव, परभू?”

23यीसू ह जबाब दीस, “जऊन ह मोर संग कटोरा म अपन हांथ ला डारे हवय, ओहीच ह मोर संग बिस‍वासघात करही। 24मनखे के बेटा ह मरही, जइसने ओकर बारे म परमेसर के बचन म लिखे हवय। पर धिक्‍कार ए, ओ मनखे ऊपर, जऊन ह मनखे के बेटा के संग बिस‍वासघात करत हवय। ओ मनखे बर बने होतिस, यदि ओकर जनम ही नइं होय रहितिस।”

25तब यहूदा जऊन ह यीसू के संग बिस‍वासघात करइया रिहिस, यीसू ले कहिस, “हे गुरू! का ओ मनखे मेंह अंव?”

यीसू ह ओला कहिस, “हव, ओ मनखे तेंह अस।”

26जब ओमन खावत रिहिन, त यीसू ह रोटी ला लीस अऊ परमेसर ले आसिस मांग के ओला टोरिस अऊ अपन चेलामन ला देके कहिस, “लेवव अऊ खावव; एह मोर देहें अय।”

27तब ओह कटोरा ला लीस अऊ परमेसर ला धनबाद दीस अऊ चेलामन ला ए कहिके कटोरा ला दीस, “एम ले तुमन जम्मो झन पीयव। 28काबरकि एह करार के मोर लहू अय, जऊन ह एकरसेति ढारे जावत हे कि बहुंते मनखेमन ला पाप के छेमा मिलय। 29मेंह तुमन ला कहथंव कि मेंह ए अंगूर के रस ला ओ दिन तक नइं पीयंव, जब तक कि मेंह तुम्‍हर संग मोर ददा के राज म नवां अंगूर के रस ला नइं पी लंव।”

30अऊ जब यीसू अऊ ओकर चेलामन एक ठन भजन गा लीन, त ओमन जैतून पहाड़ ऊपर चल दीन।

पतरस ह यीसू के इनकार करथे

(मरकुस 14:27-31; लूका 22:31-34; यूहन्ना 13:36-38)

31तब यीसू ह चेलामन ला कहिस, “आज रात के तुमन जम्मो झन मोला छोंड़के भाग जाहू, काबरकि परमेसर के बचन म ए लिखे हवय, ‘मेंह चरवाहा ला मारहूं। अऊ झुंड के भेड़मन तितिर-बितिर हो जाहीं।’26:31 जकरयाह 13:7

32फेर मेंह जी उठे के बाद तुम्‍हर ले पहिली गलील प्रदेस जाहूं।”

33तब पतरस ह यीसू ला कहिस, “चाहे जम्मो झन तोला छोंड़के भाग जावंय त भाग जावंय, पर मेंह तोला कभू नइं छोड़ंव।”

34यीसू ह ओला जबाब दीस, “मेंह तोला सच कहथंव, आजेच रात के, कुकरा के बासे के पहिली तेंह मोर तीन बार इनकार करबे।”

35पर पतरस ह कहिस, “चाहे मोला तोर संग मरना घलो पड़य, तभो ले मेंह तोर कभू इनकार नइं करंव।” अऊ आने जम्मो चेलामन घलो अइसनेच कहिन।

गतसमनी म यीसू पराथना करथे

(मरकुस 14:32-42; लूका 22:39-46)

36तब यीसू ह अपन चेलामन संग गतसमनी नांव के एक ठऊर म गीस अऊ ओह ओमन ला कहिस, “तुमन इहां बईठव, जब तक कि मेंह उहां जाके पराथना करथंव।” 37ओह पतरस अऊ जबदी के दू झन बेटा ला अपन संग म लीस, अऊ यीसू के मन ह दुःखी अऊ बियाकुल होय लगिस। 38तब ओह ओमन ला कहिस, “मोर परान ह अब्‍बड़ बियाकुल होवत हवय, अइसने लगथे कि मोर परान निकर जाही। तुमन इहां ठहिरव अऊ मोर संग जागत रहव।”

39थोरकन आघू जाके, यीसू ह मुहूं के भार भुइयां म गिरिस अऊ ए पराथना करिस, “हे मोर ददा! कहूं हो सकय, त दुःख के ए कटोरा ला मोर म ले टार दे। तभो ले मोर नइं, फेर तोर ईछा पूरा होवय।”

40तब ओह अपन चेलामन करा आईस अऊ ओमन ला सुतत देखिस, त ओह पतरस ला कहिस, “का तुमन मोर संग घंटा भर घलो नइं जाग सकव? 41जागत रहव अऊ पराथना करव, ताकि तुमन परिछा म झन पड़व। आतमा त तियार हवय, फेर देहें ह दुरबल अय।”

42यीसू ह दूसर बार गीस अऊ ए पराथना करिस, “हे मोर ददा! कहूं दुःख के ए कटोरा ह मोर पीये बिगर नइं टर सकय, त फेर तोर ईछा पूरा होवय।”

43जब यीसू ह वापिस आईस, त ओह अपन चेलामन ला फेर सुतत पाईस, काबरकि ओमन के आंखीमन नींद ले भारी हो गे रहंय। 44एकरसेति ओह ओमन ला छोंड़के फेर एक बार गीस अऊ ओहीच बात ला कहिके, तीसरा बार पराथना करिस।

45तब ओह चेलामन करा आईस अऊ ओमन ला कहिस, “का तुमन अभी तक ले सुतत हव अऊ सुसतावत हव? देखव, ओ घरी ह लकठा आ गे हवय, अऊ मनखे के बेटा ह पापीमन के हांथ म पकड़वाय जवइया हे। 46उठव, हमन चली! देखव, मोर संग बिस‍वासघात करइया ह आवत हवय।”

यीसू ह पकड़वाय जाथे

(मरकुस 14:43-50; लूका 22:47-53; यूहन्ना 18:3-12)

47जब यीसू ह ए बात ला कहितेच रिहिस, त यहूदा जऊन ह बारह चेलामन ले एक झन रहय, आईस। ओकर संग म मनखेमन के एक बड़े भीड़ रहय अऊ मनखेमन तलवार अऊ लउठी धरे रहंय। एमन ला मुखिया पुरोहित अऊ मनखेमन के अगुवामन पठोय रिहिन। 48बिस‍वासघात करइया ह ओमन ला पहिली ले ए चिन्‍हां बता दे रिहिस, “जऊन ला मेंह चूमहूं, ओहीच मनखे अय; ओला पकड़ लूहू।” 49यहूदा ह तुरते यीसू करा आईस अऊ कहिस, “हे गुरू, जोहार!” अऊ ओह यीसू ला चूमिस।

50यीसू ह ओला कहिस, “संगवारी! जऊन काम बर तेंह आय हवस, ओला कर।” तब मनखेमन आघू म आईन अऊ यीसू ला पकड़के गिरफतार कर लीन। 51तब यीसू के संगवारीमन ले एक झन तलवार ला खींचके निकारिस अऊ महा पुरोहित के सेवक ऊपर चलाके ओकर कान ला काट दीस।

52यीसू ह ओला कहिस, “अपन तलवार ला मियान म रख, काबरकि जऊन मन तलवार चलाथें, ओमन तलवार ले मारे जाहीं। 53का तेंह नइं जानस कि मेंह अपन ददा ले बिनती कर सकथंव अऊ ओह मोर बर तुरते स्वरगदूतमन के बारह ठन बड़े-बड़े सैनिक दल ले घलो जादा पठो दिही। 54पर तब परमेसर के ओ बचन ह पूरा नइं होवय, जऊन ह ए कहिथे कि ए बात ला ए किसम ले होना जरूरी अय।”26:54 यसायाह 53:12

55ओतकीच बेरा यीसू ह मनखे के भीड़ ला कहिस, “का तुमन मोला डाकू समझथव कि तलवार अऊ लउठी धरके मोला पकड़े बर आय हवव? हर दिन मेंह मंदिर म बईठके उपदेस देवत रहेंव अऊ तुमन मोला नइं पकड़ेव। 56पर ए जम्मो बात एकरसेति होईस कि अगमजानीमन के लिखे बचन ह पूरा होवय।” तब जम्मो चेलामन यीसू ला छोंड़के भाग गीन।

यीसू ह धरम महासभा के आघू म

(मरकुस 14:53-65; लूका 22:54-55, 63-71; यूहन्ना 18:13-14, 19-24)

57जऊन मन यीसू ला गिरफतार करे रिहिन, ओमन ओला महा पुरोहित काइफा करा ले गीन, जिहां कानून के गुरू अऊ अगुवामन जुरे रहंय। 58पर पतरस ह दूरिहा ले यीसू के पाछू-पाछू गीस। ओह महा पुरोहित के घर के अंगना तक गीस अऊ ए देखे बर कि का होवइया ह – ओह भीतर जाके पहरेदारमन संग बईठ गीस।

59मुखिया पुरोहितमन अऊ धरम महासभा के जम्मो मनखेमन यीसू के बिरोध म लबरा गवाही खोजत रहंय ताकि ओमन ओला मार डारंय। 60पर ओमन ला कुछू नइं मिलिस, हालाकि कतको लबरा गवाहमन आईन। 61आखिर म दू झन गवाह आईन अऊ कहिन, “ए मनखे ह कहे हवय, ‘मेंह परमेसर के मंदिर ला गिरा सकथंव अऊ तीन दिन म ओला फेर बना सकथंव।’26:61 यूहन्ना 2:19-22

62तब महा पुरोहित ह ठाढ़ होईस अऊ यीसू ला कहिस, “ए मनखेमन तोर बिरोध म जऊन गवाही देवत हवंय, का तेंह ओकर जबाब नइं देवस?” 63पर यीसू ह चुपेचाप रिहिस।

महा पुरोहित ह यीसू ला कहिस, “मेंह तोला जीयत परमेसर के कसम देवत हंव: कहूं तेंह परमेसर के बेटा मसीह अस, त हमन ला बता।”

64यीसू ह ओला कहिस, “हव जी। जइसने कि तेंह कहय। पर मेंह तुमन जम्मो झन ला कहत हंव कि एकर बाद तुमन मनखे के बेटा ला सर्वसक्तिमान परमेसर के जेवनी हांथ कोति बईठे अऊ अकास के बादर ऊपर आवत देखहू।”26:64 दानिएल 7:13-14

65तब महा पुरोहित ह अपन कपड़ा ला चीरिस अऊ कहिस, “एह परमेसर के निन्दा करे हवय। हमन ला अऊ कोनो गवाह के जरूरत नइं ए। देखव! तुमन अभीच परमेसर के निन्दा सुने हवव। 66तुम्‍हर का बिचार हवय?”

ओमन जबाब दीन, “एह मिरतू दंड के लइक अय।”

67तब ओमन यीसू के मुहूं ऊपर थूकिन अऊ ओला घूंसा मारिन। आने मनखेमन ओला थपरा मारके कहिन, 68“हे मसीह, अगमबानी करके हमन ला बता कि तोला कोन मारिस?”

पतरस ह यीसू के इनकार करथे

(मरकुस 14:66-72; लूका 22:56-62; यूहन्ना 18:15-18, 25-27)

69ओ बखत पतरस ह बाहिर अंगना म बईठे रिहिस, तब एक नौकरानी टूरी ओकर करा आईस अऊ कहिस, “तेंह घलो गलील के रहइया यीसू के संग रहय।”

70पर ओह ओ जम्मो झन के आघू म इनकार करिस अऊ कहिस, “मेंह नइं जानंव कि तेंह का कहत हवस?”

71तब पतरस ह बाहिर दुवारी करा गीस, उहां एक आने नौकरानी टूरी ओला देखिस अऊ उहां मनखेमन ला कहिस, “ए मनखे ह नासरत के यीसू संग रिहिस।”

72पतरस ह कसम खाके फेर इनकार करिस अऊ कहिस, “मेंह ओ मनखे ला नइं जानंव।”

73एकर थोरकन देर बाद, जऊन मन उहां ठाढ़े रहंय, ओमन पतरस करा आईन अऊ कहिन, “सही म तेंह घलो ओ मनखेमन ले एक झन अस, काबरकि तोर बोली ले, ए बात के पता चलथे।”

74तब पतरस ह अपन-आप ला कोसन लगिस अऊ कसम खाके कहिस, “मेंह ओ मनखे ला नइं जानंव।”

अऊ तुरते कुकरा ह बासिस। 75तब पतरस ला यीसू के कहे ए बात सुरता आईस: “कुकरा बासे के पहिली, तेंह तीन बार मोर इनकार करबे।” अऊ ओह बाहिर जाके फूट-फूट के रोईस।

En Levende Bok

Matteus 26:1-75

Planer om å drepe Jesus

1Da Jesus hadde avsluttet denne talen, sa han til disiplene: 2”Som dere vet, begynner påskehøytiden26:2 ”Påske” kommer fra hebraisk ”pésach” eller ”pasách” som betyr ”gå forbi” eller ”skåne”. Jødene sin påske feires til minne om hvordan Gud reddet dem ut av slaveriet i Egypt. Se Andre Mosebok 12:1-27. om to dager. Da skal jeg, Menneskesønnen26:2 ”Menneskesønnen” er et hebraisk ord for å si ”av mennesker”. Det var en tittel på Messias, den lovede kongen, hentet fra Daniel 7:13-14., bli utlevert og spikret fast til et kors.”

3I mens samlet øversteprestene og folkets ledere seg i palasset til øverstepresten Kaifas 4for å diskutere hvordan de i hemmelighet kunne arrestere Jesus og drepe han. 5”Men”, sa de til hverandre, ”ikke under selve påskehøytiden, for da kan det lede til oppløp og demonstrasjoner.”

En kvinne salver Jesus med kostbar olje

6Jesus var en dag i Betania for å hilse på Simon, som før hadde vært spedalsk. 7Mens de satt sammen og spiste, kom en kvinne bort til Jesus med en flaske kostbar olje, som hun helte over hodet hans.

8-9Disiplene ble opprørt og sa: ”Hvilket sløseri med pengene! Oljen er jo verd en formue. Hun kunne heller ha solgt den og gitt pengene til de fattige!”

10Jesus merket hva de snakket om og sa: ”Hvorfor kritiserer dere henne? Hun har gjort en god gjerning mot meg. 11De fattige kommer dere alltid til å ha iblant dere, men meg kommer dere ikke til å ha hos dere særlig lenge til. 12Ved å helle denne oljen over meg har hun forberedt begravelsen min. 13Faktum er at over alt i verden der budskapet om meg blir gjort kjent, vil de også fortelle om dette som hun gjorde. På den måten vil alltid historien huske henne.”

Judas bestemmer seg for å forråde Jesus

14Etter denne hendelsen gikk Judas Iskariot, en av Jesus sine tolv disipler, til øversteprestene 15og spurte: ”Hvor mye vil dere betale meg dersom jeg overgir Jesus til dere?” Øversteprestene ga ham da 30 sølvmynter. 16Fra da av søkte Judas etter en passende anledning til å forråde Jesus.

Disiplene forbereder påskemåltidet

17På den første dagen i påskehøytiden26:17 I grunnteksten: De usyrede brøds høytid. Jødene spiser under påskeuken bare brød som har blitt bakt uten gjær. kom disiplene og spurte Jesus: ”Hvor vil du at vi skal ordne med påskemåltidet?”

18Jesus svarte: ”Gå inn i Jerusalem og let opp en spesiell mann og si til ham: ’Vår Mester sier: Den tiden Gud har bestemt for meg, har nå kommet. Nå vil jeg spise påskemåltidet i ditt hus sammen med disiplene mine.’ ” 19Disiplene hans gjorde da som han hadde sagt, og ordnet med påskemåltidet der.

Jesus og disiplene spiser det siste måltidet

20Da kvelden kom, slo Jesus og disiplene hans seg ned ved bordet. 21Mens de spiste, sa han: ”Jeg skal si som sannheten er: En av dere kommer til å forråde meg.”

22Da ble de svært bedrøvet, og en etter en spurte de: ”Det er vel ikke jeg, Herre?”

23Han svarte: ”Den som dypper sitt brød i fatet sammen med meg, han er det.26:23 Se Salmenes bok 41:10. 24For jeg, Menneskesønnen26:24 ”Menneskesønnen” er et hebraisk ord for å si ”av mennesker”. Det var en tittel på Messias, den lovede kongen, hentet fra Daniel 7:13-14., må dø, akkurat som Gud har forutsagt i Skriften26:24 ”Skriften” for jødene er Bibelens første del, den som vi kaller Det gamle testamente.. Men ulykken skal ramme det menneske som forråder meg. Det hadde vært bedre for den personen om han aldri var blitt født.”

25Da spurte Judas, han som skulle forråde ham: ”Mester, det er vel ikke meg du mener?” Jesus svarte: ”Du har selv sagt det.”

26Mens de spiste, tok Jesus et brød, takket Gud for det, brøt det i biter, ga det til disiplene og sa: ”Ta dette og spis, for dette er kroppen min.” 27Etterpå tok han et beger vin, takket Gud, ga begeret til dem og sa: ”Drikk av dette alle sammen, 28for dette er blodet mitt, som bekrefter den nye pakten mellom Gud og mennesker. Mitt blod skal bli ofret slik at mange kan få tilgivelse for syndene sine. 29Jeg forsikrer dere at fra og med nå av skal jeg ikke drikke vin igjen, før den dagen min Far i himmelen regjerer, og jeg drikker den nye vinen i hans kommende verden.26:29 På gresk: når jeg drikker den nye vinen med dere i min Fars rike.

Jesus forutsier at Peter skal fornekte ham

30Da de til slutt hadde sunget lovsangen26:30 Ved slutten av påskemåltidet sang de alltid Salmenes bok 115–118. sammen, gikk de ut til Oljeberget.

31Der sa Jesus til dem: ”I natt kommer dere alle til å forlate meg, for Gud sier i Skriften26:31 ”Skriften” for jødene er Bibelens første del, den som vi kaller Det gamle testamente.:

’Jeg skal drepe gjeteren,

og sauene i flokken skal bli spredd.’26:31 Se Sakarja 13:7.

32Men når jeg har stått opp fra de døde, skal jeg gå foran dere til Galilea og treffe dere der.”

33Peter innvendte og sa: ”Selv om alle andre forlater deg, så skal aldri jeg gjøre det.” 34Men Jesus sa til ham: ”Jeg forsikrer deg, allerede før hanen rekker å gale i morgen tidlig, skal du tre ganger ha fornektet at du kjenner meg.”

35Da sa Peter: ”Om jeg så må dø med deg, skal jeg aldri fornekte deg!” Og alle de andre disiplene sa det samme.

Jesus ber i Getsemane

36Deretter gikk Jesus med disiplene til et sted som ble kalt Getsemane. Der sa han til dem: ”Sett dere her mens jeg går et stykke bort og ber.” 37Han tok bare med seg Peter og Sebedeus sine to sønner, som het Jakob og Johannes.

Jesus ble nå grepet av fortvilelse og dødsangst. 38Han sa til dem: ”Jeg er nær ved å bryte sammen av fortvilelse. Bli her og våk sammen med meg.” 39Så gikk han litt lengre bort, kastet seg ned på jorden og ba: ”Far i himmelen, om det er mulig, så la meg slippe de lidelsene som venter. Men la det bli som du vil, ikke som jeg vil.”

40Etter en tid gikk han tilbake til sine tre disipler og fant dem sovende. Da sa han til Peter: ”Klarte dere ikke å holde dere våkne en eneste time for min skyld? 41Våk og be, så ikke fristelsene skal vinne seier over dere. Dere vil så gjerne, men menneskelig begrensning gjør det vanskelig for dere.”

42Så gikk han fra dem og ba samme bønnen for andre gangen: ”Far i himmelen, dersom det er mulig, så la meg slippe lidelsene som venter, men la din vilje skje, ikke min.”

43Da han kom tilbake til disiplene, så han at de igjen hadde sovnet. Det var umulig for dem å holde øynene åpne. 44Han lot de derfor være, gikk bort og ba for tredje gangen med de samme ordene.

45Så gikk han tilbake til disiplene og sa: ”Ja, dere sover og hviler dere fortsatt. Men nå har tidspunktet kommet som Gud har bestemt at jeg, Menneskesønnen26:45 ”Menneskesønnen” er et hebraisk ord for å si ”av mennesker”. Det var en tittel på Messias, den lovede kongen, hentet fra Daniel 7:13-14., skal bli utlevert til onde mennesker. 46Reis dere opp, nå går vi herfra! Her kommer han som skal forråde meg.”

Jesus blir forrådt og arrestert

47Mens Jesus snakket, kom Judas, en av Jesu disipler, sammen med en stor flokk menn som var bevæpnet med sverd og køller. De var sendt ut av øversteprestene og folkets ledere. 48Forræderen hadde kommet overens med dem om et tegn og sagt: ”Den mannen som jeg hilser med et kyss, han er det, han skal dere fange.” 49Judas gikk rett bort til Jesus og sa: ”God kveld, Mester!” og ga ham et velkomstkyss.

50Jesus svarte: ”Min venn, gjør det du har kommet for å gjøre.” Og straks stormet de andre fram og grep Jesus og holdt ham fast.

51En av de mennene som var med Jesus, trakk da sverdet sitt og hogg øret av tjeneren til øverstepresten. 52Men Jesus sa til ham: ”Stikk sverdet tilbake i sliren. De som bruker vold, kommer selv til å falle som offer for vold. 53Innser du ikke at jeg kunne be min Far i himmelen om å sende mer enn tolv armeer med engler for å beskytte oss, og han ville straks gjøre det? 54Men hvordan skulle det som Gud har forutsagt i Skriften26:54 ”Skriften” for jødene er Bibelens første del, den som vi kaller Det gamle testamente. da kunne bli virkelighet? Han har jo sagt at alt dette må skje.”

55Så vendte Jesus seg til flokken og sa: ”Er jeg en så farlig forbryter at dere er tvunget til å bevæpne dere med sverd og køller for å fange meg? Hvorfor arresterte dere meg ikke på tempelplassen? Hver dag satt jeg der og underviste uten at dere grep meg. 56Men alt dette har skjedd for at det som Gud har forutsagt i skriftene til profetene,26:56 Profetenes skrifter finnes i Bibelens første del, den som vi kaller Det gamle testamente. skal bli virkelighet.26:56 Se Sakarja 13:7.

I samme øyeblikket løp alle disiplene fra ham og flyktet.

Jesus blir forhørt av Det jødiske rådet

57-58De som hadde arrestert Jesus, førte ham nå til øverstepresten Kaifas sitt palass. Der hadde de skriftlærde26:57-58 Fariseerne var eksperter på loven, som er et annet navn for hele den jødiske Skriften, det vil si Bibelens første del, den som vi kaller Det gamle testamente. og folkets ledere samlet seg. Peter fulgte etter på avstand og klarte å ta seg helt inn på gårdsplassen. Han slo seg ned sammen med tjenerne for å se hva som skjedde med Jesus.

59Inne i huset forsøkte øversteprestene og hele Det jødiske rådet26:59 Det jødiske rådet hadde omkring 70 medlemmer, og besto av alle de religiøse og politiske lederne i Israel. Rådet fungerte under den romerske okkupasjonen som domstol, men hadde også rett til å bestemme i enkelte politiske spørsmål. å finne falske vitneforklaringer som kunne felle Jesus og holde som bevis for å få ham dømt til døden. 60-61Til tross for at det var det mange som var villige til å vitne falskt, kunne de ikke finne noe å anklage ham for.

Til slutt presterte to menn å fortelle: ”Vi har hørt denne mannen si: ’Jeg kan rive ned Guds tempel og bygge det opp igjen på tre dager.’ ”

62Da reiste øverstepresten seg og sa til Jesus: ”Vil du ikke svare? Har du sagt dette eller ikke?” 63Men Jesus tidde.

Da sa øverstepresten: ”Innfor den levende Gud krever jeg at du snakker ut med oss om du er Messias, den lovede kongen, Guds sønn.”

64Jesus svarte: ”Det er du selv som kaller meg dette. Men jeg forsikrer dere at etter dette skal dere få se meg, Menneskesønnen26:64 ”Menneskesønnen” er et hebraisk ord for å si ”av mennesker”. Det var en tittel på Messias, den lovede kongen, hentet fra Daniel 7:13-14., sitte på Guds høyre side og regjere, og dere skal få se meg komme på himmelens skyer.26:64 Se Salmenes bok 110:1 og Daniel 7:13. Den som sitter på Guds høyre side deler hans makt og regjerer sammen med ham.

65Da slet øverstepresten i stykker klærne sine og ropte: ”Han har spottet Gud! Vi trenger ingen flere vitner. Dere har selv hørt ham spotte. 66Hvilken dom skal han få?”

De ropte tilbake: ”Han må dø!”

67De begynte å spytte Jesus i ansiktet og slo ham med knyttede never. Noen ga ham også ørefiker og sa: 68”Du som er Messias, den lovede kongen, vis nå at du er en profet. Avslør med Guds hjelp hvem av oss som slo deg.”

Peter fornekter at han kjenner Jesus

69Mens alt dette pågikk, satt Peter ute på gårdsplassen. En tjenestejente kom da bort til han og sa: ”Du var vel også sammen med denne Jesus fra Galilea!” 70Peter protesterte for alle og sa: ”Jeg vet ikke en gang hva du prater om.”

71Så gikk han ut i porten. Der fikk en annen tjenestejente øye på han. ”Denne mannen var sammen med Jesus fra Nasaret”, sa hun til dem som sto rundt dem. 72Peter nektet igjen, ja, han til og med bannet og sa: ”Jeg kjenner ikke denne mannen.”

73Etter en stund kom noen bort til ham og sa: ”Vi vet at du er en av disiplene. Det kan vi høre på dialekten din, du må jo komme fra Galilea.” 74Peter bannet igjen og forsikret dyrt og hellig: ”Jeg kjenner ikke denne mannen.” I samme øyeblikk gol hanen.

75Plutselig kom Peter til å huske på det Jesus hadde sagt: ”Før hanen galer har du fornektet meg tre ganger.” Og han gikk ut og gråt i bitter fortvilelse.