New Chhattisgarhi Translation (नवां नियम छत्तीसगढ़ी)

मत्ती 21:1-46

बिजय उल्लास के संग यीसू के यरूसलेम म प्रवेस

(मरकुस 11:1-11; लूका 19:28-40; यूहन्ना 12:12-19)

1जब ओमन यरूसलेम सहर के लकठा म हबरिन अऊ जैतून पहाड़ ऊपर बैतफगे गांव करा आईन, त यीसू ह दू झन चेलामन ला ए कहिके पठोईस, 2“आघू के गांव म जावव। जइसने ही तुमन उहां हबरहू, तुमन ला एक गदही खूंटा म बंधाय मिलही अऊ ओकर संग म ओकर बछरू घलो होही। ओमन ला ढिल के मोर करा ले आवव। 3अऊ यदि कोनो तुमन ला कुछू कहिथे, त ओला कहव कि परभू ला एमन के जरूरत हवय। तब ओह तुरते ओमन ला पठो दिही।”

4एह एकरसेति होईस ताकि अगमजानी के दुवारा कहे गय ए बात ह पूरा होवय:

5“सियोन के बेटी ले कहव, देख, तोर राजा ह तोर करा आवत हवय। ओह नम्र अय अऊ गदही ऊपर बईठे हवय, ओह गदही के बछरू ऊपर बईठे हवय21:5 पद 5 म “सियोन के बेटी” के मतलब यरूसलेम सहर अय।।”21:5 जकरयाह 9:9

6तब दूनों चेलामन गीन, अऊ जइसने यीसू ह ओमन ला करे बर कहे रिहिस, वइसनेच करिन। 7ओमन गदही अऊ ओकर बछरू ला लानिन अऊ ओमन के ऊपर अपन कपड़ा ला दसा दीन; तब यीसू ह ओमन ऊपर बईठ गीस। 8भीड़ के बहुंत मनखेमन अपन-अपन कपड़ा ला सड़क म दसा दीन अऊ दूसर मनखेमन रूख के डारामन ला काटके सड़क ऊपर बगरा दीन। 9भीड़ के मनखेमन यीसू के आघू-आघू अऊ पाछू-पाछू घलो चलत रहंय अऊ ओमन चिचिया-चिचियाके कहत रहंय, “दाऊद के संतान के होसाना! धइन ए ओ, जऊन ह परभू के नांव म आथे!21:9 भजन-संहिता 118:25-26 ऊंच स्‍वरग म होसाना!21:9 “होसाना” (इबरानी) के मतलब होथे “बचा” या “उद्धार कर”, पर बाद म ए सबद के उपयोग “परसंसा” या “इस्तुति” के रूप म करे गीस।10जब यीसू ह यरूसलेम म आईस, त जम्मो सहर म हलचल मच गीस अऊ मनखेमन पुछन लगिन, “एह कोन ए?”

11भीड़ के मनखेमन कहिन, “एह अगमजानी यीसू ए, अऊ गलील प्रदेस के नासरत के रहइया ए।”

मंदिर म यीसू

(मरकुस 11:15-19; लूका 19:45-48; यूहन्ना 2:13-22)

12यीसू ह मंदिर म गीस, अऊ ओ जम्मो मनखेमन ला निकार दीस, जऊन मन मंदिर म लेन-देन करत रिहिन। ओह साहूकारमन के मेज अऊ परेवा बेचइयामन के बेंचमन ला खपल दीस। 13अऊ ओह ओमन ला कहिस, “परमेसर के बचन म ए लिखे हवय कि मोर घर ह पराथना के घर कहे जाही, पर तुमन एला डाकूमन के अड्डा बनावत हवव।”

14अंधरा अऊ खोरवामन यीसू करा मंदिर म आईन अऊ ओह ओमन ला चंगा करिस। 15पर जब मुखिया पुरोहित अऊ मूसा के कानून के गुरू मन ओकर अद्भूत काम ला देखिन अऊ लइकामन ला मंदिर के इलाका म चिचियाके ए कहत सुनिन – “दाऊद के संतान के होसाना” त ओमन नाराज होईन।

16ओमन यीसू ला कहिन, “का तेंह सुनत हवस कि ए लइकामन का कहत हवंय?” यीसू ह कहिस, “हव, का तुमन परमेसर के बचन म ए कभू नइं पढ़ेव – ‘लइका अऊ छोटे लइकामन के मुहूं ले तेंह इस्तुति करवाय।’21:16 भजन-संहिता 8:2

17तब यीसू ह ओमन ला छोंड़के सहर के बाहिर बैतनियाह गांव म गीस अऊ उहां रात बिताईस।

अंजीर के रूख ह सूख जाथे

(मरकुस 11:12-14, 20-24)

18बिहनियां, जब यीसू ह सहर ला वापिस जावत रिहिस, त ओला भूख लगिस। 19सड़क के तीर म एक ठन अंजीर के रूख ला देखके, ओह उहां गीस, पर ओला पान के छोंड़ ओम अऊ कुछू नइं मिलिस। तब यीसू ह ओ रूख ला कहिस, “अब ले तोर म फेर कभू फर झन लगय।” अऊ तुरते ओ अंजीर के रूख ह सूख गीस।

20जब चेलामन एला देखिन, त ओमन अचम्भो करिन अऊ कहिन, “अंजीर के रूख ह तुरते कइसने सूख गीस?”

21यीसू ह ओमन ला जबाब दीस, “मेंह तुमन ला सच कहत हंव, यदि तुमन बिसवास करव अऊ संका झन करव, त तुमन न सिरिप ए करहू, जऊन ह में ए अंजीर के रूख के संग करे हवंव, पर यदि तुमन ए पहाड़ ले कहिहू, ‘जा अऊ समुंदर म गिर जा।’ अऊ एह हो जाही। 22यदि तुमन बिसवास करथव, त जऊन कुछू तुमन पराथना म मांगव, ओह तुमन ला मिल जाही।”

यीसू के अधिकार ऊपर सवाल

(मरकुस 11:27-33; लूका 20:1-8)

23यीसू ह मंदिर म गीस, अऊ जब ओह उपदेस देवत रिहिस, त मुखिया पुरोहित अऊ मनखेमन के अगुवामन ओकर करा आईन अऊ पुछिन, “तेंह कोन अधिकार ले ए काममन ला करत हवस? अऊ तोला कोन ह ए अधिकार दे हवय?”

24यीसू ह ओमन ला जबाब दीस, “मेंह घलो तुमन ला एक सवाल पुछत हंव, यदि तुमन मोला जबाब दूहू, त मेंह घलो तुमन ला बताहूं कि कोन अधिकार ले मेंह ए काममन ला करत हवंव। 25यूहन्ना के बतिसमा ह कहां ले रिहिस? स्‍वरग ले रिहिस या फेर मनखेमन के तरफ ले?”

ओमन आपस म बिचार करिन अऊ कहिन, “यदि हमन कहन – ‘स्‍वरग ले’ त ओह हमन ला कहिही, ‘तब तुमन यूहन्ना ऊपर बिसवास काबर नइं करेव?’ 26पर यदि हमन कहन – ‘मनखेमन के तरफ ले,’ त हमन ला मनखेमन के डर हवय, काबरकि ओ जम्मो झन बिसवास करथें कि यूहन्ना ह एक अगमजानी रिहिस।”

27एकरसेति ओमन यीसू ला जबाब दीन, “हमन नइं जानन।”

तब यीसू ह ओमन ला कहिस, “त मेंह घलो नइं बतावंव कि कोन अधिकार ले मेंह ए काममन ला करत हवंव।”

दू बेटामन के पटं‍तर

28“तुमन का सोचथव? एक मनखे रिहिस, जेकर दू झन बेटा रिहिन। ओह पहिला करा गीस अऊ कहिस, ‘बेटा, जा अऊ आज अंगूर के बारी म काम कर।’

29ओह जबाब दीस, ‘मेंह नइं जावंव।’ पर बाद म ओह पछताईस अऊ गीस।

30तब ददा ह दूसर बेटा करा गीस अऊ ओहीच बात कहिस। ओह जबाब दीस, ‘हव ददा, मेंह जावत हंव।’ पर ओह नइं गीस।

31ए दूनों बेटा म ले कोन ह अपन ददा के ईछा ला पूरा करिस?”

ओमन कहिन, “पहिला ह।”

यीसू ह ओमन ला कहिस, “मेंह तुमन ला सच कहत हंव कि लगान लेवइया अऊ बेस्‍यामन तुम्‍हर ले आघू परमेसर के राज म जावत हवंय। 32काबरकि यूहन्ना ह तुमन ला धरमीपन के रसता देखाय बर आईस, अऊ तुमन ओकर ऊपर बिसवास नइं करेव, पर लगान लेवइया अऊ बेस्‍यामन ओकर ऊपर बिसवास करिन। एला देखे के बाद घलो, तुमन पछताप नइं करेव अऊ न ही ओकर ऊपर बिसवास करेव।”

दुस्‍ट किसानमन के पटं‍तर

(मरकुस 12:1-12; लूका 20:9-19)

33एक अऊ पटं‍तर सुनव: “एक जमींदार रिहिस, अऊ ओह एक अंगूर के बारी लगाईस। ओह बारी के चारों खूंट ला बाड़ा म घेरिस। ओह ओम एक ठन रस के कुन्‍ड खनवाईस अऊ एक ठन मचान बनाईस। तब ओह ओ अंगूर के बारी ला कुछू किसानमन ला रेगहा म देके आने देस चल दीस। 34जब फर के समय ह आईस, त ओह अपन सेवकमन ला किसानमन करा पठोईस ताकि ओमन ओकर बांटा के फर ला लानय।

35पर किसानमन ओकर सेवकमन ला पकड़ लीन, अऊ ओमन कोनो ला मारिन-पीटिन, कोनो ला जान सहित मार डारिन अऊ काकरो ऊपर पथरा फेंकिन। 36तब जमींदार ह आने सेवकमन ला पठोईस, जऊन मन संख्‍या म पहिली ले जादा रिहिन; पर किसानमन ओमन के संग घलो वइसनेच करिन। 37आखिरी म, ओह ए सोचके अपन बेटा ला पठोईस कि ओमन मोर बेटा के आदर करहीं।

38पर जब किसानमन जमींदार के बेटा ला देखिन, त एक-दूसर ला कहिन, ‘एह तो अंगूर के बारी के वारिस अय। आवव, हमन एला मार डारन अऊ एकर पुरखउती संपत्ति ला ले लेवन।’ 39ओमन ओला पकड़िन अऊ अंगूर के बारी के बाहिर ले जाके ओला मार डारिन।

40एकरसेति जब अंगूर के बारी के मालिक ह आही, त ओह ओ किसानमन के संग का करही?”

41ओमन ह यीसू ला कहिन, “ओह ओ दुस्‍टमन ला पूरा-पूरी नास कर दिही, अऊ अंगूर के बारी के रेगहा आने किसानमन ला दे दिही, जऊन मन समय म ओकर बांटा के फसल ओला दिहीं।”

42यीसू ह ओमन ला कहिस, “का तुमन परमेसर के बचन म ए बात कभू नइं पढ़ेव: ‘जऊन पथरा ला घर के बनइयामन बेकार समझे रिहिन, ओह कोना के मुख पथरा हो गीस; परभू ह ए काम ला करे हवय, अऊ हमर नजर म एह अचम्भो के बात अय।’21:42 भजन-संहिता 118:22-23

43एकरसेति मेंह तुमन ला कहत हंव कि परमेसर के राज ह तुम्‍हर ले लिये जाही, अऊ ओ मनखेमन ला दिये जाही, जऊन मन परमेसर बर फर पैदा करहीं। 44जऊन ह ए पथरा ऊपर गिरही, ओह चूर-चूर हो जाही, पर जेकर ऊपर ए पथरा ह गिरही, ओह पीसा जाही।”

45यीसू के पटं‍तर ला सुनके मुखिया पुरोहित अऊ फरीसी मन समझ गीन कि ओह ओमन के बारे म गोठियावत हवय। 46ओमन ओला पकड़े चाहत रिहिन, पर ओमन ला मनखेमन के डर रहय, काबरकि मनखेमन यीसू ला एक अगमजानी मानत रिहिन।

Tagalog Contemporary Bible

Mateo 21:1-46

Ang Matagumpay na Pagpasok ni Jesus sa Jerusalem

(Mar. 11:1-11; Luc. 19:28-40; Juan 12:12-19)

1Malapit na sina Jesus sa Jerusalem. Pagdating nila sa nayon ng Betfage na nasa Bundok ng mga Olibo, pinauna ni Jesus ang dalawa niyang tagasunod 2at sinabi, “Pumunta kayo sa susunod na nayon. Makikita ninyo roon ang isang asno na nakatali, kasama ang bisiro nito. Kalagan ninyo ang mga ito at dalhin dito sa akin. 3Kapag may sumita sa inyo, sabihin ninyong kailangan ng Panginoon, at hahayaan na niya kayo.” 4Nangyari ito upang matupad ang sinabi ng propeta:

5“Sabihin ninyo sa mga naninirahan sa Zion na paparating na ang kanilang hari!

Mapagpakumbaba siya, at nakasakay sa asno, sa isang bisirong asno.”21:5 Zac. 9:9.

6Lumakad nga ang mga tagasunod at ginawa ang iniutos ni Jesus. 7Dinala nila ang asno at ang bisiro nito kay Jesus. Sinapinan nila ang mga ito ng kanilang mga balabal at sumakay si Jesus. 8Maraming tao ang naglatag ng kanilang mga balabal sa daan. Ang iba naman ay pumutol ng mga sanga ng kahoy at inilatag din sa daan. 9Ang mga tao sa unahan ni Jesus at ang mga nasa hulihan ay sumisigaw, “Purihin ang Anak ni David!21:9 Anak ni David: Ito ang tawag ng mga Judio sa Mesias o Cristo dahil sa paniniwalang siyaʼy mula sa angkan ni David. Pagpalain ang dumarating sa pangalan ng Panginoon! Purihin ang Dios!”21:9 Salmo 118:26. 10Nang pumasok si Jesus sa Jerusalem, nagkagulo ang buong lungsod, at nagtanungan ang mga tao, “Sino ang taong iyan?” 11Sumagot ang mga kasama ni Jesus, “Siya ang propetang si Jesus na taga-Nazaret, na sakop ng Galilea.”

Ang Pagmamalasakit ni Jesus sa Templo

(Mar. 11:15-19; Luc. 19:45-48; Juan 2:13-22)

12Pumunta si Jesus sa templo at itinaboy niya ang mga nagtitinda at namimili roon. Itinaob niya ang mga mesa ng mga nagpapalit ng pera at ang mga upuan ng mga nagtitinda ng mga kalapating inihahandog sa templo. 13Sinabi niya sa kanila, “Sinasabi ng Dios sa Kasulatan, ‘Ang bahay ko ay bahay-panalanginan.’21:13 Isa. 56:7. Pero ginawa ninyong pugad ng mga tulisan!”21:13 Jer. 7:11.

14May mga bulag at pilay na lumapit kay Jesus doon sa templo, at pinagaling niya silang lahat. 15Nagalit ang mga namamahalang pari at mga tagapagturo ng Kautusan nang makita nila ang mga himalang ginawa ni Jesus, at nang marinig nila ang mga batang sumisigaw doon sa templo ng “Purihin ang Anak ni David!”21:15 Anak ni David: Ito ang tawag ng mga Judio sa Mesias o Cristo dahil sa paniniwalang siyaʼy mula sa angkan ni David. 16Sinabi nila kay Jesus, “Naririnig mo ba ang sinasabi nila?” Sumagot si Jesus, “Oo. Hindi ba ninyo nabasa ang sinabi sa Kasulatan na kahit ang maliliit na bata ay tinuruan ng Dios na magpuri sa kanya?”21:16 Salmo 8:2. 17Pagkatapos, iniwan sila ni Jesus. Lumabas siya ng lungsod at nagpunta sa Betania, at doon siya nagpalipas ng gabi.

Isinumpa ni Jesus ang Puno ng Igos

(Mar. 11:12-14, 20-24)

18Kinaumagahan, nang pabalik na sina Jesus sa lungsod ng Jerusalem, nagutom siya. 19May nakita siyang puno ng igos sa tabi ng daan, kaya nilapitan niya ito. Pero wala siyang nakitang bunga kundi puro mga dahon. Kaya sinabi niya sa puno, “Hindi ka na mamumunga pang muli!” At agad na natuyo ang puno. 20Namangha ang mga tagasunod ni Jesus nang makita nila iyon. Sinabi nila, “Paanong natuyo kaagad ang puno?” 21Sumagot si Jesus, “Sinasabi ko sa inyo ang totoo, kung may pananampalataya kayo at walang pag-aalinlangan, magagawa rin ninyo ang ginawa ko sa puno ng igos. At hindi lang iyan, maaari rin ninyong sabihin sa bundok, ‘Lumipat ka sa dagat!’ at lilipat nga ito. 22Anumang hilingin ninyo sa Dios sa panalangin ay matatanggap ninyo kung sumasampalataya kayo.”

Ang Tanong tungkol sa Awtoridad ni Jesus

(Mar. 11:27-33; Luc. 20:1-8)

23Bumalik sa templo si Jesus, at habang nagtuturo siya, nilapitan siya ng mga namamahalang pari at ng mga pinuno ng mga Judio at tinanong, “Ano ang awtoridad mong gumawa ng mga bagay na ginagawa mo? Sino ang nagbigay sa iyo ng awtoridad na iyan?” 24Sumagot si Jesus, “Tatanungin ko rin kayo. At kapag sinagot ninyo, sasabihin ko kung ano ang awtoridad ko na gumawa ng mga bagay na ito. 25Kanino galing ang awtoridad ni Juan para magbautismo, sa Dios21:25 sa Dios: sa literal, sa langit. o sa tao?” Nag-usap-usap sila, “Kung sasabihin nating mula sa Dios, sasabihin niya, ‘Bakit hindi kayo naniwala kay Juan?’ 26Pero kung sasabihin nating mula sa tao, magagalit sa atin ang mga tao, dahil naniniwala silang si Juan ay propeta ng Dios.” 27Kaya sumagot sila, “Hindi namin alam.” At sinabi ni Jesus sa kanila, “Kung ganoon, hindi ko rin sasabihin sa inyo kung saan nagmula ang awtoridad ko na gumawa ng mga bagay na ito.”

Ang Talinghaga tungkol sa Dalawang Anak

28Sinabi pa ni Jesus sa kanila, “Ano sa palagay ninyo ang kahulugan ng talinghagang ito? May isang tao na may dalawang anak na lalaki. Lumapit siya sa panganay at sinabi, ‘Anak, pumunta ka ngayon sa ating ubasan at magtrabaho.’ 29Sumagot siya, ‘Ayaw ko po.’ Pero maya-maya ay nagbago ang isip niya at pumunta rin. 30Lumapit din ang ama sa bunso at ganoon din ang sinabi. Sumagot ang bunso, ‘Opo,’ pero hindi naman siya pumunta. 31Sino ngayon sa dalawa ang sumunod sa kalooban ng kanilang ama?” Sumagot sila, “Ang panganay.” Sinabi ni Jesus sa kanila, “Sinasabi ko sa inyo ang totoo, ang mga maniningil ng buwis at ang mga babaeng bayaran ay nauuna pa sa inyo na mapabilang sa kaharian ng Dios. 32Sapagkat dumating sa inyo si Juan na tagapagbautismo, at itinuro sa inyo ang tamang daan sa matuwid na pamumuhay, pero hindi kayo naniwala. Pero ang mga maniningil ng buwis at ang mga babaeng bayaran ay naniwala sa kanya. At kahit na nakita ninyo ito, hindi pa rin kayo nagsisi sa mga kasalanan ninyo at naniwala sa kanya.”

Ang Talinghaga tungkol sa Masasamang Magsasaka

(Mar. 12:1-12; Luc. 20:9-19)

33Muling nagsalita si Jesus sa kanila, “Makinig kayo sa isa pang talinghaga: May isang taong may bukid na pinataniman niya ng ubas. Pinabakuran niya ito at nagpagawa ng pisaan ng ubas. Nagtayo rin siya ng isang bantayang tore. At pagkatapos ay pinaupahan niya ang kanyang ubasan sa mga magsasaka at pumunta sa malayong lugar. 34Nang panahon na ng pamimitas ng ubas, pinapunta niya ang kanyang mga alipin sa mga magsasakang umuupa sa ubasan niya para kunin ang kanyang parte. 35Pero sinunggaban ng mga magsasaka ang mga alipin. Binugbog nila ang isa, pinatay ang isa at binato naman ang isa pa. 36Nagsugo ulit ang may-ari ng mas maraming alipin, at ganoon din ang ginawa ng mga magsasaka sa kanila. 37Nang bandang huli, pinapunta ng may-ari ang kanyang anak. Ang akala niyaʼy igagalang nila ito. 38Pero nang makita ng mga magsasaka ang anak ng may-ari, sinabi nila, ‘Narito na ang tagapagmana. Halikayo, patayin natin siya para mapasaatin ang lupang mamanahin niya.’ 39Kaya sinunggaban nila ang anak, dinala sa labas ng ubasan at pinatay.”

40Pagkatapos, nagtanong si Jesus, “Ano kaya ang gagawin ng may-ari sa mga magsasakang iyon sa kanyang pagbabalik?” 41Sumagot ang mga tao, “Tiyak na papatayin niya ang masasamang taong iyon, at pauupahan niya ang kanyang ubasan sa ibang magsasakang magbibigay sa kanya ng parte niya sa bawat panahon ng pamimitas.” 42Sinabi sa kanila ni Jesus, “Hindi ba ninyo nabasa ang talatang ito sa Kasulatan?

‘Ang batong tinanggihan ng mga tagapagtayo ng bahay

ang siyang naging batong pundasyon.21:42 batong pundasyon: sa literal, batong panulukan.

Gawa ito ng Panginoon

at kahanga-hanga ito sa atin!’21:42 Salmo 118:22-23.

43“Kaya tandaan ninyo: hindi na kayo ang paghaharian ng Dios kundi ang mga taong sumusunod sa kanyang kalooban. [44Ang sinumang mahulog sa batong ito ay magkakabali-bali, ngunit ang mahulugan nito ay madudurog.]”

45Nang marinig ng mga namamahalang pari at ng mga Pariseo ang talinghagang iyon, alam nilang sila ang tinutukoy ni Jesus. 46Kaya gusto nilang dakpin si Jesus, pero natatakot sila sa mga tao na naniniwalang si Jesus ay isang propeta.