New Chhattisgarhi Translation (नवां नियम छत्तीसगढ़ी)

मत्ती 12:1-50

बिसराम दिन के परभू

(मरकुस 2:23-28; लूका 6:1-5)

1ओ समय यीसू ह बिसराम के दिन गहूं के खेत म ले होके जावत रिहिस। ओकर चेलामन ला भूख लगिस, त ओमन गहूं के दाना ला टोर-टोरके खावन लगिन। 2एला देखके फरीसीमन यीसू ले कहिन, “देख! तोर चेलामन ओ काम करत हवंय, जऊन ला कानून के मुताबिक बिसराम के दिन करई मना अय।”

3यीसू ह कहिस, “का तुमन नइं पढ़े हवव कि जब दाऊद अऊ ओकर संग के मनखेमन ला भूख लगिस, त दाऊद ह का करिस? 4ओह परमेसर के घर म गीस, अऊ ओह अऊ ओकर संग के मनखेमन परमेसर ला चघाय रोटी ला खाईन, जऊन ला खाना, कानून के मुताबिक ओमन ला मना रिहिस। ओ रोटी ला सिरिप पुरोहितमन खा सकत रिहिन।12:4 लैब्यवस्था 24:9 5या का तुमन मूसा के कानून म नइं पढ़े हवव कि पुरोहितमन बिसराम के दिन मंदिर म बिसराम के कानून ला टोरथें, तभो ले ओमन दोसी नइं ठहरंय?12:5 गिनती 28:9-10 6मेंह तुमन ला कहथंव कि इहां एक झन हवय, जऊन ह मंदिर ले घलो बड़े अय। 7मेंह बलिदान नइं पर दया चाहथंव। परमेसर के बचन म लिखे ए बात ला यदि तुमन समझतेव,12:7 होसे 6:6 त तुमन निरदोसीमन ला दोसी नइं ठहिरातेव। 8मनखे के बेटा ह बिसराम दिन के परभू अय।”12:8 भजन-संहिता 8:4-8; मरकुस 2:28

9उहां ले चलके, यीसू ह यहूदीमन के सभा-घर म आईस। 10उहां एक झन मनखे रहय, जेकर एक हांथ ह सूख गे रहय। उहां कुछू मनखेमन यीसू ऊपर दोस लगाय बर बहाना खोजत रिहिन, एकरसेति ओमन यीसू ले पुछिन, “का बिसराम के दिन कोनो बेमरहा ला चंगा करई कानून के मुताबिक सही अय?”

11यीसू ह ओमन ला कहिस, “यदि तुमन के काकरो एक ठन भेड़ हवय अऊ ओह बिसराम के दिन खंचवा म गिर जावय, त का तुमन ओला पकड़के बाहिर नइं निकारहू? 12मनखे के कीमत ह एक ठन भेड़ ले बहुंत बढ़ के होथे। एकरसेति बिसराम के दिन म भलई करई कानून के मुताबिक सही अय।”

13तब यीसू ह ओ सूखा हांथवाले मनखे ले कहिस, “अपन हांथ ला लमा।” ओह अपन हांथ ला लमाईस अऊ ओ हांथ ह दूसर हांथ सहीं पूरा-पूरी बने हो गीस। 14पर फरीसीमन बाहिर निकरिन अऊ ओमन यीसू ला मार डारे के योजना बनाईन।

परमेसर के चुने सेवक

15एला जानके यीसू ह उहां ले चल दीस, अऊ बहुंत मनखेमन यीसू के पाछू हो लीन। ओह जम्मो बेमरहा मनखेमन ला चंगा करिस, 16अऊ ओमन ला चेताके कहिस, “कोनो ला झन बतावव कि मेंह कोन अंव।” 17ए किसम ले यसायाह अगमजानी के दुवारा कहे गे ए बचन ह पूरा होईस:

18“देखव, एह मोर सेवक ए, जऊन ला मेंह चुने हवंव,

एला मेंह मया करथंव, अऊ एकर ले मेंह बहुंत खुस हवंव।

एकर ऊपर मेंह अपन आतमा रखहूं,

अऊ एह जम्मो जात के मनखेमन ला नियाय के संदेस दिही।

19एह न तो झगरा करही अऊ न ही चिचियाही,

अऊ न ही गलीमन म कोनो एकर अवाज सुनहीं।

20एह न तो कुचरे सरकन्‍डा ला टोरही,

अऊ न ही बुथावत दीया ला बुथाही,

जब तक कि एह जीत ला नियाय नइं देवा दिही।

21जम्मो जात के मनखेमन एकर नांव म आसा रखहीं।”12:21 यसायाह 42:1-4

यीसू अऊ बालजबूल

(मरकुस 3:20-30; लूका 11:14-23)

22तब मनखेमन एक भूत धरे मनखे ला यीसू करा लानिन, जऊन ह अंधरा अऊ कोंदा रिहिस। यीसू ह ओला चंगा करिस अऊ ओ मनखे ह बोलन अऊ देखन लगिस। 23जम्मो मनखेमन चकित होके कहे लगिन, “कहूं एह दाऊद के संतान तो नो हय?”

24पर जब फरीसीमन ए बात ला सुनिन, त ओमन कहिन, “ए मनखे ह परेतमन के सरदार – बालजबूल के मदद ले परेतमन ला निकारथे।”

25यीसू ह ओमन के मन के बात ला जानके ओमन ला कहिस, “जऊन राज म फूट पड़ जाथे, ओह टिके नइं रहय। 26यदि सैतान ह सैतान ला निकारथे, त ओह अपन खुद के बिरोधी हो गे हवय। तब ओकर राज ह कइसने टिके रह सकथे? 27यदि मेंह बालजबूल के मदद ले परेतमन ला निकारथंव, त फेर तुम्‍हर मनखेमन काकर मदद ले ओमन ला निकारथें? एकरसेति, ओही मन तुम्‍हर नियाय करहीं। 28पर यदि मेंह परमेसर के आतमा के मदद ले परेतमन ला निकारथंव, तब परमेसर के राज ह तुम्‍हर करा आ गे हवय।

29या कोन ह कोनो बलवान मनखे के घर म घुसर के ओकर संपत्ति ला लूट सकथे, जब तक कि पहिली ओह ओ बलवान मनखे ला नइं बांध लेवय? एकर बाद ही ओह ओकर घर ला लूट सकही।

30जऊन ह मोर संग नइं ए, ओह मोर बिरोध म हवय, अऊ जऊन ह मोर संग नइं संकेलय, ओह बगराथे। 31एकरसेति, मेंह तुमन ला कहथंव कि मनखेमन के हर एक पाप अऊ निन्दा ला छेमा करे जाही, पर पबितर आतमा के निन्दा ला छेमा नइं करे जावय। 32जऊन कोनो मनखे के बेटा के बिरोध म कुछू कहिही, त ओला छेमा करे जाही, पर जऊन ह पबितर आतमा के बिरोध म बोलही, ओला छेमा नइं करे जावय, न तो ए समय म अऊ न ही अवइया समय म।12:32 मरकुस 3:29

33बने रूख ला लगाहू, त ओम सुघर फर धरही; यदि खराप रूख लगाहू, त ओम खराप फर धरही; काबरकि रूख ह अपन फर ले चिनहे जाथे। 34हे जहरिला सांप के लइकामन हो! तुमन खराप मनखे अव अऊ सुघर गोठ कइसने कह सकथव? काबरकि जऊन बात ह हिरदय म भरे होथे, ओहीच ह मुहूं ले निकरथे। 35बने मनखे ह अपन हिरदय म भरे सुघर भंडार ले सुघर बात निकारथे, अऊ खराप मनखे ह अपन हिरदय म भरे खराप भंडार ले खराप बात निकारथे। 36पर मेंह तुमन ला कहथंव कि नियाय के दिन मनखेमन ला ओमन के मुहूं ले निकरे हर एक बेकार बात के हिसाब देय पड़ही। 37काबरकि तुमन अपन गोठ के दुवारा निरदोस ठहरहू अऊ अपन गोठ के दुवारा ही दोसी ठहरहू।”

योना अगमजानी के चिन्‍हां

(मरकुस 8:11-12; लूका 11:29-32)

38तब कुछू फरीसी अऊ कानून के गुरू मन यीसू ले कहिन, “हे गुरू! हमन तोर ले कोनो अचरज के चिन्‍हां देखे चाहत हन।”

39यीसू ह ओमन ला जबाब दीस, “ए दुस्‍ट अऊ बेभिचारी पीढ़ी के मनखेमन चिन्‍हां देखाय बर कहत हवंय! पर योना अगमजानी के चिन्‍हां ला छोंड़ एमन ला अऊ कोनो चिन्‍हां नइं दिये जावय। 40जइसने योना ह तीन दिन अऊ तीन रात एक ठन बड़े मछरी के पेट म रिहिस, वइसने मनखे के बेटा ह घलो तीन दिन अऊ तीन रात धरती के भीतर म रहिही।12:40 योना 1:17; 1 कुरिन्थ 15:4 41नियाय के दिन नीनवे सहर के मनखेमन, ए पीढ़ी के मनखेमन संग ठाढ़ होहीं, अऊ एमन ऊपर दोस लगाहीं, काबरकि ओमन योना के संदेस ला सुनके मन फिराईन। पर देखव!12:41 योना 3:4-5 इहां एक झन हवय, जऊन ह योना ले घलो बड़के अय। 42नियाय के दिन दक्खिन दिग के रानी ह ए पीढ़ी के मनखेमन संग ठाढ़ होही अऊ एमन ऊपर दोस लगाही, काबरकि ओ रानी ह राजा सुलेमान के गियान के बात ला सुने बर धरती के छोर ले आय रिहिस। पर देखव!12:42 1राजा 10:1-7 इहां एक झन हवय, जऊन ह राजा सुलेमान ले घलो बड़के अय।

43जब एक परेत आतमा ह कोनो मनखे म ले बाहिर निकरथे, त ओह सुसताय के ठिकाना खोजे बर सुक्‍खा ठऊर म जाथे, पर ओला कोनो जगह नइं मिलय। 44तब ओह कहिथे, ‘जऊन घर ला मेंह छोंड़के आय रहेंव, मेंह ओहीच घर म लहुंट जाहूं।’ अऊ जब ओह लहुंटके आथे, त ओह ओ घर ला सूना, झाड़े-बहारे अऊ सही ढंग म पाथे। 45तब ओह जाथे अऊ अपन ले घलो अऊ खराप सात आतमामन ला अपन संग म ले आथे, अऊ ओमन घुसर के उहां बस जाथें। अऊ ओ मनखे के आखिरी दसा ह पहिली ले अऊ खराप हो जाथे। अइसनेच ए दुस्‍ट पीढ़ी के मनखेमन के दसा घलो होही।”

यीसू के दाई अऊ भाईमन

(मरकुस 3:31-35; लूका 8:19-21)

46जब यीसू ह मनखेमन ले गोठियावत रिहिस, त ओकर दाई अऊ भाईमन आके बाहिर खड़े रिहिन अऊ ओमन ओकर ले बात करे चाहत रिहिन। 47मनखेमन ले एक झन ह यीसू ला कहिस, “तोर दाई अऊ भाईमन बाहिर म खड़े हवंय अऊ तोर ले बात करे चाहत हवंय।”

48पर यीसू ह ओ मनखे ला कहिस, “कोन ह मोर दाई अय, अऊ कोन मन मोर भाई अंय?” 49अऊ यीसू ह अपन चेलामन कोति अपन हांथ ला देखाके कहिस, “एमन अंय मोर दाई अऊ मोर भाई। 50काबरकि जऊन ह मोर स्‍वरग के ददा के ईछा मुताबिक चलथे, ओहीच ह मोर भाई, मोर बहिनी अऊ मोर दाई अय।”

Slovo na cestu

Matouš 12:1-50

Učedníci vymílají v sobotu obilí

1Jednou v sobotu, sváteční den židů, procházel Ježíš se svými učedníky obilným polem. Učedníci měli hlad, trhali klasy a jedli zrní. 2Farizejové to viděli a žalovali Ježíšovi: „Podívej se, tvoji žáci dělají, co je v sobotu zakázáno!“

3Ježíš na to: „Cožpak jste nečetli, co učinil král David, když on a jeho družina byli hladoví? 4Jak vešli do chrámu a jedli posvátné chleby, které směli jíst jen kněží? 5Nebo jste nečetli v Mojžíšově zákoně, že kněží v chrámu pracují v sobotu? Porušují sobotní klid, a přesto jsou bez hříchu. 6Ale říkám vám, že je tu někdo, kdo je víc než chrám. 7Kdybyste rozuměli biblickému slovu ‚Nejde mi o oběti, ale chci, abyste byli milosrdní!‘ pak byste nikoho neodsuzovali neprávem. 8Kristus je pánem i nad sobotou.“

Ježíš v sobotu uzdravuje muže s ochrnutou rukou

9Odtud šel do synagogy. 10Tam byl člověk s ochrnutou rukou. Farizejové hledali nějakou záminku, aby mohli Ježíše obžalovat, a proto se ho otázali: „Je dovoleno v sobotu uzdravovat?“ 11On jim na to řekl: „Kdyby někdo z vás měl jedinou ovci a ta by spadla v sobotu do rokle, nepodnikli byste vše, abyste ji vytáhli? 12Oč cennější je člověk! Proto je správné dělat dobro i v sobotu.“ 13Obrátil se k postiženému a řekl mu: „Natáhni ruku!“ On to udělal a byla zdravá jako ta druhá. 14Farizejové odešli a radili se, jak by Ježíše zneškodnili.

Velké zástupy následují Ježíše

15Ježíš to poznal a odešel odtud. Mnozí ho však následovali a on uzdravil všechny nemocné. 16Ale přikázal jim, aby o něm moc nemluvili. 17Tak se naplnilo Izajášovo proroctví:

18„To je můj služebník,

ten, pro kterého jsem se rozhodl,

můj milovaný, potěšení mé duše.

Dám mu svého Ducha a bude soudit národy.

19Nebude se přít, ani nikoho překřikovat,

nebude dělat hluk na ulicích,

20nalomené stéblo nedolomí,

doutnající knot neuhasí,

dokud všechno nenapraví.

21Stane se nadějí všech národů.“

Náboženští vůdcové obviňují Ježíše z posedlosti

22Pak přivedli k Ježíšovi slepého a němého člověka. Ježíš ho uzdravil, takže viděl a mluvil. 23Lidé užasli a říkali: „On je snad opravdu Boží král z rodu Davidova!“ 24Ale slyšeli to farizejové a namítali: „Vždyť neuzdravuje jinak než s pomocí temných sil!“

25Ježíš však poznal, co si myslí, a proto řekl: „Rozdělené království končí v ruinách a žádné město nebo domov vnitřně rozdvojené neobstojí. 26Tak nemůže satan vyhánět satana. Jak by pak obstálo jeho království? 27Já, podle vás, odstraňuji temnotu ve jménu duchovní tmy. I mezi vámi jsou lidé, kteří bojují proti temným silám. Zeptejte se jich, jakou mocí to činí. 28Jestliže já ovšem vyháním zlo v moci Božího Ducha, pak už k vám přišlo Boží království. 29Když chce někdo ukrást věci z domu silného člověka, musí ho nejdříve svázat, a pak si to může odnést. Tak i ze satanovy moci může vysvobodit jen ten, kdo je silnější než on.

30Kdo není se mnou, je proti mně, kdo se mnou neshromažďuje, rozhazuje.

31-32Co mluvíte proti mně, to vám může být odpuštěno. Ale pozor – nemluvte proti moci Ducha, který působí skrze mne. To vám Bůh nikdy neodpustí.

33Jaký strom vypěstujete, takové ponese ovoce. Dobrý dobré, planý plané. 34Vy podvodníci! Jak byste mohli mluvit dobré, když jste zlí? Čím srdce oplývá, tím ústa přetékají. 35Dobrý člověk rozdává z dobrého pokladu svého srdce a zlý člověk ze zlého. 36Počítejte s tím, že budete skládat účty z každého neupřímného slova. 37Vaše slova o vás rozhodnou: buď vás ospravedlní, nebo odsoudí.“

Náboženští vůdcové žádají, aby Ježíš učinil zázrak

38Potom žádali farizejové a učitelé zákona Ježíše, aby se prokázal nějakým zázrakem. 39On jim však odpověděl: „Vězíte v hříchu a zatvrzelosti, a proto vyžadujete další důkazy. Nedostanete je! 40Tak jako věříte, že byl Jonáš tři dny a tři noci v útrobách mořského živočicha, tak budete muset uvěřit, že Syn člověka třetí den vstane z hrobu.

41Lidé z Ninive vystoupí na soudu proti vám a usvědčí vás, protože oni vzali vážně Jonášovu zvěst. A k vám mluví ten, kdo je víc než Jonáš.

42Královna ze Sáby vystoupí na soudu jako další svědek proti vám. Neváhala přijet z daleké země, aby poznala Šalomounovu moudrost. A tady je někdo větší než Šalomoun.

43-45Když je z člověka vyhnán nečistý duch, hledá, kde jinde by se zabydlel. Ale nechce se snadno vzdát prvního hostitele. Když vidí, že srdce toho člověka je sice vyčištěné a upravené, ale zůstává prázdné, nastěhuje se tam zpět se sedmi společníky horšími, než je sám. Takový člověk je na tom potom hůř než předtím. To nebezpečí hrozí i vám.“

Ježíš říká, kdo tvoří jeho rodinu

46Ježíš ještě mluvil v přeplněném domě, když přišla jeho matka a bratři. Čekali venku, protože s ním chtěli mluvit. 47Když ho jeden z davu upozornil, že na něho čekají, 48řekl: „Kdo je má matka a moji bratři?“ 49Ukázal na své učedníky se slovy: „To je moje rodina. 50Každý, kdo poslouchá mého nebeského Otce, je můj bratr, sestra i matka!“