New Chhattisgarhi Translation (नवां नियम छत्तीसगढ़ी)

मत्ती 10:1-42

यीसू के बारह चेलामन

(मरकुस 3:13-19; लूका 6:12-16)

1यीसू ह अपन बारह चेलामन ला अपन करा बलाईस अऊ ओमन ला परेत आतमामन ला निकारे अऊ हर एक किसम के रोग अऊ बेमारी ला बने करे के अधिकार दीस।

2बारह प्रेरितमन के नांव ए अय: पहिला सिमोन, जऊन ला पतरस कहे जाथे अऊ ओकर भाई अन्द्रियास; जबदी के बेटा याकूब अऊ ओकर भाई यूहन्ना; 3फिलिप्पुस अऊ बरतुलमै; थोमा अऊ लगान लेवइया मत्ती; हलफई के बेटा याकूब अऊ तद्दै; 4सिमोन कनानी अऊ यहूदा इस्करियोती जऊन ह यीसू के संग बिस‍वासघात करिस।

5ए बारहों झन ला, यीसू ह ए हुकूम देके पठोईस, “आनजातमन इहां झन जावव अऊ न ही सामरीमन के कोनो सहर म जावव। 6एकर बदले, इसरायल के घराना के गवांय भेड़मन करा जावव।10:6 मत्ती 15:24 7जब तुमन जावव, त ए संदेस के परचार करव: ‘स्‍वरग के राज ह लकठा म आ गे हवय।’ 8बेमरहामन ला चंगा करव, मरे मनखेमन ला जीयावव, कोढ़ी मनखेमन ला सुध करव, परेतमन ला निकारव। मुफत म तुमन ला मिले हवय, एकरसेति मुफत म देवव। 9अपन जेब म सोना या चांदी या तांबा झन रखव। 10रसता बर झोला या अतकिहा कुरता या पनही या लउठी झन रखव, काबरकि बनिहार ला ओकर जरूरत के चीज दिये जाना चाही।10:10 मत्ती 9:37

11जऊन कोनो सहर या गांव म तुमन जावव, त उहां कोनो काबिल मनखे के पता लगावव अऊ उहां ले बिदा होवत तक ओकरे घर म ठहिरव। 12जऊन घर म तुमन जावव, त ओ घर ला आसिस देवव। 13यदि ओ घर के मनखेमन काबिल होहीं, त तुम्‍हर सांति ह उहां ठहरही, पर यदि ओमन काबिल नो हंय, त तुम्‍हर सांति ह तुम्‍हर करा लहुंट आही। 14यदि कोनो तुमन ला गरहन नइं करय या तुम्‍हर गोठ ला नइं सुनय, त ओ घर या सहर ले निकरत बेरा अपन गोड़ के धूर्रा ला झर्रा देवव। 15मेंह तुमन ला सच कहत हंव कि नियाय के दिन म, ए सहर के मनखेमन ले सदोम अऊ अमोरा सहर के मनखेमन के दसा ह जादा सहे के लइक होही।

16देखव! मेंह तुमन ला भेड़ियामन के बीच म भेड़मन सहीं पठोवत हवंव। एकरसेति, सांप के सहीं चतुरा अऊ परेवा के सहीं निरदोस बनव। 17मनखेमन ले सचेत रहव। ओमन ह तुमन ला धरम-सभा ला सऊंप दिहीं अऊ अपन सभा के घर म तुमन ला कोर्रा म मारहीं। 18मोर कारन, तुमन ला हाकिम अऊ राजामन के आघू म लाने जाही कि तुमन मोर बिसय म ओमन ला अऊ आनजातमन ला गवाही देवव। 19जब ओमन तुमन ला पकड़थें, त एकर चिंता झन करव कि तुमन ला का कहना हे या कइसने कहना हे, काबरकि ओहीच बखत तुमन ला बताय जाही कि का कहना हे। 20काबरकि बोलइया तुमन नइं, पर तुम्‍हर ददा परमेसर के आतमा ह तुमन म होके बोलही।

21भाई ह अपन भाई ला अऊ ददा ह अपन लइका ला मार डारे बर सऊंप दिहीं। लइकामन ह अपन दाई-ददा के बिरोध म खड़े होहीं अऊ ओमन ला मरवा डारहीं। 22मोर कारन, जम्मो मनखेमन तुम्‍हर ले नफरत करहीं, पर जऊन ह आखिरी तक सहत रहिही, ओह उद्धार पाही। 23जब ओमन तुमन ला एक सहर म सताथें, त तुमन आने सहर म भाग जावव। मेंह तुमन ला सच कहत हंव कि मनखे के बेटा के आय के पहिली, तुमन इसरायल के जम्मो सहर म नइं जा सके होहू।10:23 दानिएल 7:13 24चेला ह अपन गुरू ले बड़े नइं होवय अऊ न ही सेवक ह अपन मालिक ले बड़े होथे। 25चेला ह अपन गुरू सहीं अऊ सेवक ह अपन मालिक सहीं बन जाना ही बहुंत अय। जब ओमन घर के मुखिया ला बालजबूल (सैतान) कहिन, त फेर ओमन ओकर घर के सदस्यमन ला का कुछू नइं कहिहीं।

26एकरसेति, ओमन ले झन डर्रावव। काबरकि हर एक ढंके चीज ह उघारे जाही या हर एक छिपे चीज ह उजागर करे जाही। 27जऊन बात मेंह तुमन ला अंधियार म कहत हंव, ओला तुमन अंजोर म कहव। जऊन बात, तुमन ला कान म फुसफुसा के कहे जाथे, ओला तुमन घर के छानी ऊपर ले चिचिया-चिचियाके बतावव। 28ओमन ले झन डर्रावव, जऊन मन सरीर ला मार डारथें, पर आतमा ला नइं मार सकंय। पर ओकर ले डर्रावव, जऊन ह आतमा अऊ सरीर दूनों ला नरक म नास कर सकथे। 29एक पईसा म दू ठन गौरइया चिरई बिकथे, तभो ले तुम्‍हर ददा परमेसर के बिगर ईछा के ओम ले एको ठन घलो धरती ऊपर नइं गिरय। 30अऊ त अऊ तुम्‍हर मुड़ी के जम्मो चुंदी ह घलो गनाय हवय। 31एकरसेति झन डर्रावव, तुम्‍हर महत्‍व गौरइया चिरईमन ले बहुंत जादा हवय।

32जऊन कोनो मोला मनखेमन के आघू म स्वीकार करथे, ओला मेंह घलो स्‍वरग म अपन ददा के आघू म स्वीकार करहूं। 33पर जऊन कोनो मोला मनखेमन के आघू म इनकार करथे, त ओला मेंह घलो स्‍वरग म अपन ददा के आघू म इनकार करहूं।

34ए झन सोचव कि मेंह धरती म सांति स्‍थापना करे बर आय हवंव। मेंह सांति स्‍थापना करे बर नइं, पर तलवार चलवाय बर आय हवंव।

35मेंह बेटा ला ओकर ददा के बिरोध म,

बेटी ला ओकर दाई के बिरोध

म अऊ बहू ला ओकर सास के बिरोध म करे बर आय हवंव।

36मनखे के बईरी ओकर खुद परिवार के मनखेमन होहीं।

37जऊन ह अपन ददा या दाई ला मोर ले जादा मया करथे, ओह मोर लइक नो हय। जऊन ह अपन बेटा या बेटी ला मोर ले जादा मया करथे, ओह मोर लइक नो हय; 38अऊ जऊन ह अपन कुरुस ला उठाके मोर पाछू नइं आवय, ओह मोर लइक नो हय। 39जऊन ह अपन परान ला बचाथे, ओह ओला गंवाही, अऊ जऊन ह मोर कारन अपन परान ला गंवाथे, ओह ओला बचाही।

40जऊन ह तुमन ला गरहन करथे, ओह मोला गरहन करथे, अऊ जऊन ह मोला गरहन करथे, ओह ओला गरहन करथे जऊन ह मोला पठोय हवय। 41जऊन ह एक अगमजानी ला अगमजानी जानके गरहन करथे, त ओह एक अगमजानी के इनाम पाही, अऊ जऊन ह धरमी मनखे ला धरमी मनखे जानके गरहन करथे, ओह एक धरमी मनखे के इनाम पाही। 42अऊ जऊन ह ए छोटे मन म ले कोनो ला मोर चेला जानके एक गिलास ठंडा पानी पीये बर देथे, त मेंह तुमन ला सच कहत हंव कि ओह अपन इनाम जरूर पाही।”

Chinese Contemporary Bible (Simplified)

马太福音 10:1-42

差遣使徒

1耶稣叫了十二位门徒来,将权柄赐给他们,使他们能够赶出污鬼、医治各样的疾病。 2以下是这十二位使徒的名字:

首先是西门,又名彼得,还有彼得的兄弟安得烈西庇太的儿子雅各雅各的兄弟约翰3腓力巴多罗买多马、税吏马太亚勒腓的儿子雅各达太4激进党人10:4 激进党人”指当时激进的犹太民族主义者,常以行动反抗统治他们的罗马政府。西门和出卖耶稣的加略犹大

5耶稣差遣这十二个人出去,嘱咐他们:“外族人的地方不要去,撒玛利亚人的城镇也不要进, 6要到以色列人当中寻找迷失的羊。

7“你们要边走边传,‘天国临近了!’ 8要医好病人,叫死人复活,使麻风病人痊愈,赶走邪灵。你们白白地得来,也应当白白地给人。 9出门时钱袋里不要带金、银、铜币, 10不要带行李、备用的衣服、鞋子或手杖,因为做工的理应得到供应。 11你们无论到哪座城、哪个村,要在那里寻找愿意接待你们的人,然后住在他家,一直住到离开。 12你们进他家的时候,要为他们祝福。 13如果那家配得福气,你们的祝福必临到他们;如果那家不配蒙福,祝福仍归给你们。 14如果有人不接待你们,不听你们传的信息,你们离开那家或那城时,就把脚上的尘土跺掉作为对他们的警告。 15我实在告诉你们,在审判之日,他们所受的痛苦比所多玛蛾摩拉所受的还大!

将临的迫害

16“听着,我差你们出去,就好像使羊走进狼群一般。所以,你们要像蛇一样机灵,像鸽子一样驯良。

17“你们要小心谨慎,因为人们要把你们送上法庭,也要在会堂里鞭打你们。 18你们要因我的缘故被带到官长和君王面前,在他们和外族人面前为我做见证。 19当你们被押送公堂时,不用顾虑如何应对,或说什么话,那时必会赐给你们当说的话。 20因为那时候说话的不是你们自己,乃是你们父的灵借着你们说话。

21“那时,人必把自己的弟兄置于死地,父亲必把儿子置于死地,儿女必反叛父母,置他们于死地。 22你们将为我的名而被众人憎恨,但坚忍到底的必定得救。 23如果你们在一个地方遭迫害,就避到另一个地方。我实在告诉你们,没等你们走遍以色列的城镇,人子就来了。

24“学生不能高过老师,奴仆也不能大过主人。 25学生顶多和老师一样,奴仆顶多和主人一样。连一家之主都被骂成是别西卜10:25 别西卜”是鬼王的名字。,更何况祂的家人呢?

26“不要害怕那些迫害你们的人。因为掩盖的事终会暴露出来,隐藏的秘密终会被人知道。 27你们要把我私下告诉你们的当众讲出来,你们要在屋顶上把听到的悄悄话宣告出来。 28那些只能杀害身体,不能毁灭灵魂的人,不用怕他们。但要畏惧那位有权将身体和灵魂一同毁灭在地狱里的上帝。 29两只麻雀不是只卖一个铜钱吗?然而没有天父的许可,一只也不会掉在地上。 30就连你们的头发都被数过了。 31所以不要害怕,你们比许多麻雀更贵重!

32“凡公开承认我的,我在天父面前也必承认他; 33凡公开不承认我的,我在天父面前也必不承认他。

跟从主的代价

34“不要以为我来了会让天下太平,我并非带来和平,乃是带来刀剑。 35因为我来是要叫儿子与父亲作对,女儿与母亲作对,媳妇与婆婆作对, 36家人之间反目成仇。

37“爱父母过于爱我的人不配做我的门徒;爱儿女过于爱我的人不配做我的门徒; 38不肯背起他的十字架跟从我的人不配做我的门徒。 39试图保全自己生命的反而会失去生命,但为我舍弃生命的反而会得到生命。

得赏赐

40“人接待你们就是接待我,接待我就是接待差我来的那位。 41因为某人是先知而接待他的,必得到和先知一样的赏赐;因为某人是义人而接待他的,必得到和义人一样的赏赐。 42人若接待我门徒中最卑微的人,并因为他是我的门徒而给他一杯凉水喝,我实在告诉你们,那人必得到赏赐。”