New Chhattisgarhi Translation (नवां नियम छत्तीसगढ़ी)

दरसन 17:1-18

बहुंत खराप बेस्या

1तब जऊन सात स्वरगदूतमन सात ठन कटोरा धरे रिहिन, ओम के एक झन मोर करा आईस अऊ कहिस, “आ, मेंह तोला ओ बड़े बेस्या के दंड ला देखाहूं, जऊन ह कतको पानीमन ऊपर बईठे हवय। 2ओकर संग धरती के राजामन छिनारी करे हवंय अऊ धरती के मनखेमन ओकर छिनारीपन के मंद ला पीके मतवाला हो गे हवंय।”

3तब ओ स्‍वरगदूत ह मोला आतमा म एक ठन सुनसान जगह म ले गीस। उहां मेंह एक झन माईलोगन ला लाल रंग के एक पसु ऊपर बईठे देखेंव। पसु के जम्मो देहें म खराप नांवमन लिखाय रहय, अऊ ओकर सात ठन मुड़ी अऊ दस ठन सिंग रहय। 4ओ माईलोगन ह बैंजनी अऊ लाल रंग के कपड़ा पहिरे रहय अऊ सोन, कीमती पथरा अऊ मोती मन ले सजे रहय। ओह अपन हांथ म एक ठन सोन के कटोरा धरे रहय। ओ कटोरा ह घिन-घिन चीज अऊ ओकर छिनारीपन के गंदगी ले भरे रहय। 5अऊ ओकर माथा म एक भेद के नांव लिखाय रहय:

महान बाबूल,

धरती के बेस्‍यामन के

अऊ घिन-घिन चीजमन के दाई।

6मेंह देखेंव कि ओ माईलोगन ह पबितर मनखेमन के लहू अऊ यीसू के बिसवास लइक गवाहमन के लहू ला पीके माते हवय। जब मेंह ओला देखेंव, त बहुंत अचरज म पड़ गेंव। 7तब स्‍वरगदूत ह मोला कहिस, “तेंह काबर अचम्भो करत हवस? मेंह तोला ओ माईलोगन के भेद ला बताहूं अऊ ओ पसु के भेद ला घलो बताहूं, जेकर ऊपर ओ माईलोगन ह सवारी करे हवय अऊ जेकर सात ठन मुड़ी अऊ दस ठन सिंग हवय। 8जऊन पसु ला तेंह देखे, ओह पहिली रिहिस, पर अब नइं ए; ओह अथाह कुन्‍ड ले निकरके आही अऊ ओह नास हो जाही। धरती के ओ मनखेमन, जेकर नांव संसार के रचे के समय ले जिनगी के किताब म नइं लिखे हवय, ओमन पसु ला देखके अचम्भो करहीं, काबरकि ओह पहिली रिहिस, पर अब नइं ए, पर ओह फेर आही।”

9एला समझे बर बुद्धि के जरूरत हवय। ओ सात ठन मुड़ीमन सात ठन पहाड़ अंय, जेकर ऊपर ओ माईलोगन ह बईठे हवय। 10ओमन सात झन राजा घलो अंय। ओम ले पांच झन गिर गे हवंय; एक झन अभी राज करत हवय, अऊ दूसर ह अभी तक नइं आय हवय; पर जब ओह आही, त थोरकन समय तक राज करही। 11ओ पसु जऊन ह पहिली रिहिस, पर अब नइं ए, ओह आठवां राजा ए। असल म, ओह ओ सातों म ले अय अऊ ओह नास हो जाही।

12जऊन दस ठन सिंग तेंह देखे, ओमन दस राजा अंय। ओमन ला अभी तक राज नइं मिले हवय, पर ओमन ला एक घंटा बर पसु के संग म राजामन सहीं अधिकार मिलही। 13ओमन के एकेच उदेस्य हवय अऊ ओमन अपन सक्ति अऊ अधिकार पसु ला दे दिहीं। 14ओमन मेढ़ा-पीला के बिरोध म लड़ई करहीं, पर मेढ़ा-पीला ह ओमन ऊपर जय पाही, काबरकि ओह परभूमन के परभू अऊ राजामन के राजा ए, अऊ जऊन मन ओकर संग रहिहीं, ओमन बलाय गे हवंय अऊ चुने गे हवंय अऊ ओमन बिसवास लइक अंय।

15तब स्‍वरगदूत ह मोला कहिस, “जऊन पानी ला तेंह देखे, जिहां ओ बेस्या ह बईठे हवय, ओ पानी ह मनखेमन के भीड़, देस अऊ भासा मन अय। 16जऊन पसु अऊ दस सिंगमन ला तेंह देखे, ओमन ओ बेस्या ले घिन करहीं। ओमन ओला नंगरी करके अकेला छोंड़ दिहीं। ओमन ओकर मांस ला खाहीं अऊ ओला आगी म जला दिहीं। 17काबरकि परमेसर ह ओमन के मन म ए बात ला डाले हवय कि ओमन ओकर उदेस्य ला पूरा करंय अऊ जब तक परमेसर के बचन ह पूरा नइं हो जावय, तब तक ओमन एक मत होके अपन राज करे के अधिकार ला ओ पसु ला दे देवंय। 18जऊन माईलोगन ला तेंह देखे, ओह ओ महान सहर ए, जऊन ह धरती के राजामन ऊपर राज करथे।”

Священное Писание

Откровение 17:1-18

Суд над Вавилоном

1Один из семи ангелов, у которых было семь чаш, подошёл ко мне и сказал:

– Подойди, я покажу тебе, как будет наказана великая блудница, сидящая на многих водах17:1 См. Иер. 51:13.. 2С ней развратничали цари земли, и жители земли упивались вином её разврата.

3И он перенёс меня в Духе в пустыню, и я увидел женщину, сидящую на алом звере, который был исписан именами, оскорбляющими Всевышнего; у него было семь голов и десять рогов. 4Женщина была одета во всё пурпурное и алое, была украшена золотом, драгоценными камнями и жемчугом. В руке у неё была золотая чаша, наполненная мерзостью и нечистотами её разврата. 5На лбу у неё написано имя, имеющее тайное значение:

Великий Вавилон –

мать блудниц

и мерзостей земли.

6И я увидел, что женщина была пьяна от крови святого народа Всевышнего, от крови свидетелей Исы. Я был поражён, когда её увидел.

7Ангел сказал мне:

– Чему ты удивляешься? Я тебе скажу, в чём заключается тайна женщины и зверя с семью головами и десятью рогами, на котором она сидит. 8Зверь, которого ты видел, был, и нет его. Он выйдет из бездны и отправится в погибель. Жители земли, имена которых от начала мира не были записаны в книге жизни, удивятся, глядя на зверя, потому что он был, и нет его, и ещё придёт.

9Это требует понимания и мудрости. Семь голов – это семь гор17:9 Горы часто символизировали царства этого мира., на которых сидит женщина, 10и семь царей, пять из которых уже пали, один есть, а другой ещё не пришёл, а когда придёт – то ненадолго. 11Зверь, который был и которого нет, – это восьмой царь, и он из числа семи и идёт к погибели.

12Десять рогов, которые ты видел, – это десять царей, ещё не получивших своего царства, но вместе со зверем они на один час получат царскую власть17:12 См. Дан. 7:23-24.. 13У них одна общая цель, и они отдадут свою силу и власть зверю. 14Они будут сражаться с Ягнёнком, но Ягнёнок одержит над ними победу, потому что Он Владыка владык17:14 См. Втор. 10:17; Заб. 135:3. и Царь царей и с Ним – Его избранные, призванные и верные последователи.

15Потом ангел сказал мне:

– Воды, которые ты видел, там, где сидит блудница, – это народы, скопления людей, племена и языки. 16Зверь и десять рогов, которые ты видел, возненавидят блудницу. Они разорят её, оставят нагой, будут поедать её тело и жечь её в огне. 17Потому что Всевышний внушил этим десяти рогам желание исполнить Его волю и единодушно отдать зверю их царскую власть до тех пор, пока не исполнится сказанное Всевышним. 18Женщина, которую ты видел, – это великий город, царствующий над всеми царями земли.