Ketab El Hayat

التكوين 14:1-24

أبرام ينقذ لوطاً

1وَحَدَثَ فِي زَمَانِ أَمْرَافَلَ مَلِكِ شِنْعَارَ وَأَرْيُوكَ مَلِكِ أَلاسَارَ وَكَدَرْلَعَوْمَرَ مَلِكِ عِيلامَ وَتِدْعَالَ مَلِكِ جُويِيمَ، 2أَنَّ حَرْباً نَشَبَتْ بَيْنَهُمْ وَبَيْنَ بَارَعَ مَلِكِ سَدُومَ وَبِرْشَاعَ مَلِكِ عَمُورَةَ وَشِنْآبَ مَلِكِ أَدْمَةَ وَشِمْئِيبَرَ مَلِكِ صَبُويِيمَ، وَمَلِكِ بَالَعَ الْمَعْرُوفَةِ بِصُوغَرَ. 3هَؤُلاءِ جَمِيعُهُمُ احْتَشَدُوا فِي وَادِي السِّدِّيمِ (وَهُوَ بَحْرُ الْمِلْحِ؛ الْبَحْرُ الْمَيِّتُ) 4وَكَانَ كَدَرْلَعَوْمَرُ قَدِ اسْتَعْبَدَهُمْ طَوَالَ اثْنَتَيْ عَشْرَةَ سَنَةً، وَفِي السَّنَةِ الثَّالِثَةَ عَشْرَةَ تَمَرَّدُوا عَلَيْهِ. 5وَفِي السَّنَةِ الرَّابِعَةَ عَشْرَةَ اجْتَمَعَ كَدَرْلَعَوْمَرُ وَحُلَفَاؤُهُ الْمُلُوكُ وَقَهَرُوا الرَّفَائِيِّينَ فِي عَشْتَارُوثَ قَرْنَايِمَ، وَالزُّوزِيِّينَ فِي هَامَ، وَالإِيمِيِّينَ فِي سَهْلِ قَرْيَتَايِمَ، 6وَالْحُورِيِّينَ فِي جَبَلِهِمْ سَعِيرَ حَتَّى بُطْمَةِ فَارَانَ عَلَى حُدُودِ الصَّحْرَاءِ. 7ثُمَّ اسْتَدَارُوا حَتَّى أَقْبَلُوا عَلَى عَيْنِ مِشْفَاطَ، الَّتِي هِيَ قَادِشُ، فَهَزَمُوا بِلادَ الْعَمَالِقَةِ كُلَّهَا وَالأَمُورِيِّينَ السَّاكِنِينَ فِي حَصُّونَ تَامَارَ.

8فَخَرجَ مَلِكُ سَدُومَ وَمَلِكُ عَمُورَةَ وَمَلِكُ أَدْمَةَ وَمَلِكُ صَبُويِيمَ وَمَلِكُ بَالَعَ، الَّتِي هِيَ صُوغَرُ، فِي عُمْقِ السِّدِّيمِ وَخَاضُوا حَرْباً 9مَعْ كَدَرْلَعَوْمَرَ مَلِكِ عِيلامَ وَتِدْعَالَ مَلِكِ جُويِيمَ وَأَمْرَافَلَ مَلِكِ شِنْعَارَ وَأَرْيُوكَ مَلِكِ أَلاسَارَ، فَكَانُوا أَرْبَعَةَ مُلوكٍ ضِدَّ خَمْسَةٍ. 10وَكَانَ وَادِي السِّدِّيمِ مَلِيئاً بِآبَارِ الزِّفْتِ، فَانْدَحَرَ مَلِكَا سَدُومَ وَعَمُورَةَ وَسَقَطَا بَيْنَهَا، أَمَّا الْبَاقُونَ فَهَرَبُوا إِلَى الْجِبَالِ. 11فَغَنِمَ الْمُنْتَصِرُونَ جَمِيعَ مَا فِي سَدُومَ وَعَمُورَةَ مِنْ مُمْتَلَكَاتٍ وَمُؤَنٍ وَمَضَوْا. 12وَأَسَرُوا لُوطاً ابْنَ أَخِي أَبْرَامَ الْمُقِيمَ فِي سَدُومَ، وَنَهَبُوا أَمْلاكَهُ ثُمَّ ذَهَبُوا.

إنقاذ لوط من الأسر

13وَجَاءَ أَحَدُ النَّاجِينَ إِلَى أَبْرَامَ الْعِبْرَانِيِّ، الَّذِي كَانَ مُقِيماً حَتَّى ذَلِكَ الْوَقْتِ عِنْدَ بَلُّوطَاتِ مَمْرَا أَخِي أَشْكُولَ وَعَانِرَ حُلَفَاءِ أَبْرَامَ، وَأَبْلَغَهُ بِمَا جَرَى. 14فَلَمَّا سَمِعَ أَبْرَامُ أَنَّ ابْنَ أَخِيهِ قَدْ أُسِرَ، جَرَّدَ ثَلاثَ مِئَةٍ وَثَمَانِيَةَ عَشَرَ مِنْ غِلْمَانِهِ الْمُدَرَّبِينَ الْمَوْلُودِينَ فِي بَيْتِهِ وَتَعَقَّبَهُمْ حَتَّى بَلَغَ دَانَ 15وَفِي أَثْنَاءِ اللَّيْلِ قَسَّمَ رِجَالَهُ، وَهَاجَمَهُمْ وَقَهَرَهُمْ، ثُمَّ طَارَدَهُمْ حَتَّى حُوبَةَ شَمَالِيَّ دِمَشْقَ. 16وَاسْتَرَدَّ كُلَّ الْغَنَائِمِ، وَاسْتَرْجَعَ ابْنَ أَخِيهِ لُوطاً وَأَمْلاكَهُ، وَالنِّسَاءَ أَيْضاً وَسِوَاهُمْ مِنَ الأَسْرَى.

ملكيصادق يبارك أبرام

17وَجَاءَ مَلِكُ سَدُومَ لِلِقَاءِ أَبْرَامَ فِي وَادِي شَوَى الْمَعْرُوفِ بِوَادِي الْمَلِكِ، بَعْدَ عَوْدَتِهِ مِنْ كَسْرَةِ كَدَرْلَعَوْمَرَ وَالْمُلُوكِ حُلَفَائِهِ. 18وَكَذَلِكَ حَمَلَ إِلَيْهِ مَلْكِي صَادِقُ مَلِكُ شَالِيمَ، الَّذِي كَانَ كَاهِناً لِلهِ الْعَلِيِّ، خُبْزاً وَخَمْراً، 19وَبَارَكَهُ قَائِلاً: «لِتَكُنْ عَلَيْكَ يَا أَبْرَامُ بَرَكَةُ اللهِ الْعَلِيِّ، مَالِكِ السَّمَاوَاتِ وَالأَرْضِ. 20وَتَبَارَكَ اللهُ الْعَلِيُّ الَّذِي دَفَعَ أَعْدَاءَكَ إِلَى يَدَيْكَ». فَأَعْطَاهُ أَبْرَامُ عُشْرَ الْغَنَائِمِ كُلِّهَا. 21وَقَالَ مَلِكُ سَدُومَ لأَبْرَامَ: «أَعْطِنِي الأَسْرَى الْمَعْتُوقِينَ أَمَّا الْغَنَائِمُ فَاحْتَفِظْ بِها لِنَفْسِكَ». 22فَأَجَابَهُ أَبْرَامُ: «لَقَدْ أَقْسَمْتُ بِالرَّبِّ الإِلَهِ الْعَلِيِّ، مَالِكِ السَّمَاوَاتِ وَالأَرْضِ، 23وَعَاهَدْتُهُ أَلّا آخُذَ شَيْئاً مِمَّا هُوَ لَكَ، وَلَوْ كَانَ خَيْطاً أَوْ شَرِيطَ حِذَاءٍ، لِئَلّا تَقُولَ: أَنَا أَغْنَيْتُ أَبْرَامَ 24لَنْ آخُذَ غَيْرَ مَا أَكَلَهُ الْغِلْمَانُ. أَمَّا نَصِيبُ الرِّجَالِ الَّذِينَ ذَهَبُوا مَعِي: عَانِرَ وَأَشْكُولَ وَمَمْرَا، فَإِنَّهُمْ يَأْخُذُونَهُ».

Hindi Contemporary Version

उत्पत्ति 14:1-24

राजाओं के मध्य संग्राम

1शीनार देश के राजा अमराफेल, एलासार के राजा आरिओख, एलाम के राजा खेदोरलाओमर और गोईम के राजा तिदाल ने अपने शासनकाल में, 2एकजुट होकर सोदोम के राजा बेरा, अमोराह के राजा बिरशा, अदमाह के राजा शीनाब, ज़ेबोईम के राजा शेमेबेर तथा बेला (अर्थात ज़ोअर) के राजा के विरुद्ध युद्ध छेड़ दिया. 3ये सभी एक साथ होकर सिद्दिम घाटी (अर्थात लवण-सागर) के पास इकट्ठे हो गए. 4बारह वर्ष तक तो वे खेदोरलाओमर के अधीन रहे, किंतु तेरहवें वर्ष में उन्होंने विरोध किया.

5चौदहवें वर्ष में खेदोरलाओमर तथा उसके मित्र राजाओं ने आकर अश्तेरोथ-करनाइम में रेफाइम को, हाम में ज़ुज़ीम को शेवेह-किरयथियों में एमियों को, 6सेईर पर्वत में निर्जन प्रदेश के पास एल-पारान तक, होरियों को हरा दिया. 7इसके बाद वे मुड़े और एन-मिशपत (अर्थात कादेश) आ गए और पूरे अमालेकियों को तथा हज़ज़ोन-तामार में रह रहे अमोरियों को भी हरा दिया.

8तब सोदोम, अमोराह, अदमाह, ज़ेबोईम तथा बेला (अर्थात ज़ोअर) के राजा बाहर निकल गए और उन्होंने सिद्दिम की घाटी में उनके विरुद्ध युद्ध किया. 9यह लड़ाई एलाम के राजा खेदोरलाओमर, गोईम के राजा तिदाल, शीनार के राजा अमराफेल तथा एलासार के राजा आरिओख—ये चार राजा उन पांच राजाओं से लड़ रहे थे. 10सिद्दिम घाटी में सब जगह गड्ढे थे. जब सोदोम तथा अमोराह के राजा युद्ध से भाग रहे थे, तो कुछ लोग गड्ढों में जा गिरे और बाकी बचे लोग पर्वत पर की बस्ती में भाग गए. 11तब चारों राजाओं ने सोदोम तथा अमोराह से सब कुछ ले लिया और खाने का सब सामान भी ले गए. 12वे अपने साथ अब्राम के भतीजे लोत एवं उसकी पूरी संपत्ति भी ले गए, क्योंकि लोत उस समय सोदोम में रह रहा था.

13और युद्ध क्षेत्र से भागकर एक व्यक्ति ने इब्री अब्राम को ये बातें बताई. अब्राम तो ममरे नामक व्यक्ति, जो अमोरी जाति का था, उसके बड़े बलूत पेड़ों के पास रहता था. ममरे, एशकोल एवं ऐनर का भाई था; और इन्होंने अब्राम से वाचा बांधी थी. 14जब अब्राम को यह पता चला कि लोत को बंदी बना लिया गया है, तो उसने अपने पूरे परिवार को इकट्ठा किया और 318 जो युद्ध सीखे हुए वीर थे, साथ लेकर दान नामक स्थान तक उनका पीछा किया. 15रात्रि में अब्राम ने अपने लोगों को उनके ऊपर हमला करने के लिये बांट दिया और अब्राम तथा उनके सेवकों ने मिलकर उन्हें पराजित कर दिया तथा उनका दमेशेक के उत्तर में स्थित नगर होबाह तक पीछा किया. 16अब्राम ने उन लोगों से सब सामान वापस ले लिया और लोत, उसके सभी लोग और उसकी संपत्ति भी उनसे ले ली.

अब्राम से परमेश्वर की प्रतिज्ञा

17जब अब्राम खेदोरलाओमर तथा उनके मित्र राजाओं को हरा कर लौट रहे थे, सोदोम का राजा, शावेह घाटी (जिसे राजा की घाटी भी कहा जाता है) में अब्राम से मिलने आया.

18शालेम के राजा मेलखीज़ेदेक, जो परमेश्वर के पुरोहित थे, भोजन एवं दाखरस लेकर आये. 19उन्होंने अब्राम को आशीष देते हुए कहा,

“स्वर्ग और पृथ्वी को बनानेवाले,

परम प्रधान परमेश्वर की ओर से तुम धन्य हो,

20धन्य हैं परम प्रधान परमेश्वर,

जिन्होंने आपके शत्रुओं को आपके अधीन कर दिया है.”

अब्राम ने मेलखीत्सेदेक को सबका दशमांश दिया.

21सोदोम के राजा ने अब्राम से कहा, “मुझे इन्सानों को दे दीजिए, सामान सब आप रख लीजिए.”

22सोदोम के राजा को अब्राम ने उत्तर दिया, “मैंने स्वर्ग और पृथ्वी के अधिकारी, याहवेह परमेश्वर के सामने शपथ ली है, 23कि मैं आपकी संपत्ति में से एक भी वस्तु, यहां तक कि एक धागा या जूती का बंधन तक न लूंगा, ताकि इन चीज़ों को देकर आप यह न कहने लगें, ‘मैंने अब्राम को धनी बनाया है.’ 24मैं आप से कुछ नहीं लूंगा पर सिर्फ खाना, जिसे मेरे लोगों ने खा लिया है और उनका हिस्सा, जो मेरे साथ गये थे याने कि ऐनर, एशकोल तथा ममरे का हिस्सा, मैं आपको नहीं लौटाऊंगा. उन्हें अपना हिस्सा रखने दीजिये.”