New Amharic Standard Version

ዮሐንስ 19:1-42

ኢየሱስ እንዲሰቀል ተፈረደበት

19፥1-16 ተጓ ምብ – ማቴ 27፥27-31፤ ማር 15፥16-20

1ጲላጦስም ኢየሱስን ወስዶ አስገረፈው። 2ወታደሮችም የእሾህ አክሊል ጐንጒነው በራሱ ላይ አደረጉ፤ ሐምራዊ ልብስም አለበሱት፤ 3እየተመላለሱም፣ “የአይሁድ ንጉሥ ሆይ፤ ሰላም ለአንተ ይሁን” አያሉ በጥፊ ይመቱት ነበር።

4ጲላጦስም እንደ ገና ወደ ውጭ ወጥቶ፣ “እንግዲህ ወደ እናንተ ያወጣሁት ለክስ የሚያደርስ ወንጀል እንዳላገኘሁበት እንድታውቁ ነው” አላቸው። 5ኢየሱስ የእሾህ አክሊል ደፍቶ ሐምራዊ ልብስም ለብሶ ወጣ፤ ጲላጦስም፣ “እነሆ፤ ሰውየው!” አላቸው።

6የካህናት አለቆችና ሎሌዎቻቸውም ባዩት ጊዜ፣ “ስቀለው! ስቀለው!” እያሉ ጮኹ።

ጲላጦስ ግን፣ “እናንተ ወስዳችሁ ስቀሉት፤ በእኔ በኩል ለክስ የሚያደርስ ወንጀል አላገኘሁበትም” አላቸው።

7አይሁድም፣ “እኛ ሕግ አለን፤ ራሱን የእግዚአብሔር ልጅ ስላደረገ በሕጋችን መሠረት መሞት አለበት” አሉ።

8ጲላጦስ ይህን ሲሰማ የባሰውኑ ፈራ፤ 9ወደ ግቢው ተመልሶ ኢየሱስን፣ “ከየት ነው የመጣኸው?” በማለት ጠየቀው፤ ኢየሱስ ግን ምንም አልመለሰለትም። 10ጲላጦስም፣ “አታናግረኝምን? ልፈታህ ወይም ልሰቅልህ ሥልጣን እንዳለኝ አታውቅም?” አለው።

11ኢየሱስም፣ “ከላይ ባይሰጥህ ኖሮ በእኔ ላይ ሥልጣን ባልኖረህ ነበር፤ ስለዚህ ለአንተ አሳልፎ የሰጠኝ ሰው የባሰ ኀጢአት አለበት” አለው።

12ከዚያ በኋላ ጲላጦስ ኢየሱስን ሊፈታው ፈለገ፤ አይሁድ ግን፣ “ይህን ሰው ብትፈታው የቄሣር ወዳጅ አይደለህም፤ ራሱን ንጉሥ የሚያደርግ የቄሣር ተቃዋሚ ነው” በማለት ጩኸታቸውን ቀጠሉ።

13ጲላጦስም ይህን ሲሰማ ኢየሱስን ወደ ውጭ አወጣው፤ ‘የድንጋይ ንጣፍ’ በተባለ፣ በአራማይክ ቋንቋ ‘ገበታ’ ብለው በሚጠሩት ስፍራ፣ በፍርድ ወንበር ላይ ተቀመጠ። 14ቀኑ የፋሲካ በዓል መዘጋጃ፣ ጊዜውም ከቀኑ ስድስት ሰዓት ያህል ነበር።

ጲላጦስም አይሁድን፣ “እነሆ፤ ንጉሣችሁ” አላቸው።

15እነርሱ ግን፣ “አስወግደው! አስወግደው! ስቀለው!” እያሉ ጮኹ።

ጲላጦስም፣ “ንጉሣችሁን ልስቀለውን?” አለ።

የካህናት አለቆችም፣ “ከቄሣር በቀር ሌላ ንጉሥ የለንም” ብለው መለሱለት።

16በመጨረሻም ጲላጦስ እንዲሰቅሉት አሳልፎ ሰጣቸው።

ስቅለት

19፥17-24 ተጓ ምብ – ማቴ 27፥33-44፤ ማር 15፥22-32፤ ሉቃ 23፥33-43

ወታደሮቹም ኢየሱስን ይዘው ወሰዱት፤ 17እርሱም የራሱን መስቀል ተሸክሞ በአራማይክ ‘ጎልጎታ’ ተብሎ ወደሚጠራው ‘የራስ ቅል’ ወደተባለው ቦታ ወጣ። 18በዚያም ሰቀሉት፤ ከእርሱም ጋር ሁለት ሰዎች፣ አንዱን በዚህ በኩል፣ ሌላውን በዚያ በኩል፣ ኢየሱስንም በመካከል አድርገው ሰቀሉ።

19ጲላጦስም ጽሑፍ ጽፎ በመስቀሉ ላይ አንጠለጠለው፤ ጽሑፉም፣ ‘የናዝሬቱ ኢየሱስ፣ የአይሁድ ንጉሥ’ የሚል ነበር። 20ኢየሱስ የተሰቀለበት ቦታ ከከተማው አጠገብ ስለ ነበር ብዙዎቹ አይሁድ ጽሑፉን አነበቡት፤ ጽሑፉም፣ በአራማይክና በላቲን፣ በግሪክም ነበር። 21የአይሁድ የካህናት አለቆች ጲላጦስን በመቃወም፣ “እርሱ፣ ‘የአይሁድ ንጉሥ ነኝ’ እንዳለ ጻፍ እንጂ ‘የአይሁድ ንጉሥ’ ብለህ አትጻፍ” አሉት።

22ጲላጦስም፣ “በቃ፤ የጻፍሁትን ጽፌአለሁ” ብሎ መለሰ።

23ወታደሮቹ ኢየሱስን ከሰቀሉ በኋላ፣ እጀ ጠባቡ ሲቀር፣ ልብሱን ወስደው ለእያንዳንዱ አንድ አንድ እንዲዳረስ ለአራት ተከፋፈሉት፤ እጀ ጠባቡም ከላይ እስከ ታች አንድ ወጥ ሆኖ ያለ ስፌት የተሠራ ነበር።

24ስለዚህ፣ “ዕጣ ተጣጥለን ለሚደርሰው ይድረስ እንጂ አንቅደደው” ተባባሉ። ይህም የሆነው፣

“ልብሴን ተከፋፈሉት፤

በእጀ ጠባቤም ላይ ዕጣ ተጣጣሉ” የሚለው የመጽሐፍ ቃል እንዲፈጸም ነው።

ወታደሮቹ ያደረጉትም ይህንኑ ነው።

25በኢየሱስ መስቀል አጠገብ እናቱና የእናቱ እኅት፣ እንዲሁም የቀልዮጳ ሚስት ማርያምና መግደላዊት ማርያም ቆመው ነበር። 26በዚያም ኢየሱስ እናቱንና የሚወደውም ደቀ መዝሙር አጠገቧ ቆሞ ሲያያቸው እናቱን፣ “አንቺ ሴት ሆይ፤ ልጅሽ ይኸው” አላት፤ 27ደቀ መዝሙሩንም፣ “እናትህ ይህችው” አለው። ከዚያን ጊዜ ጀምሮ ይህ ደቀ መዝሙር ወደ ቤቱ ወሰዳት።

የኢየሱስ መሞት

19፥29-30 ተጓ ምብ – ማቴ 27፥48-50፤ ማር 15፥36-37፤ ሉቃ 23፥36

28ከዚያም ኢየሱስ ሁሉ ነገር እንደ ተፈጸመ ዐውቆ፣ የመጽሐፍ ቃል እንዲፈጸም፣ “ተጠማሁ” አለ። 29በዚያም የሆመጠጠ ወይን የሞላበት ዕቃ ተቀምጦ ነበር፤ እነርሱም ሰፍነግ በወይን ጠጅ ነክረው፣ በሂሶጵ ዘንግ ወደ አፉ አቀረቡለት፤ 30ኢየሱስም ሆምጤውን ከተቀበለ በኋላ፣ “ተፈጸመ” አለ፤ ራሱን አዘንብሎ፣ መንፈሱን አሳልፎ ሰጠ።

31ዕለቱ ለሰንበት መዘጋጃ ቀን ነበር። አይሁድ፣ የተሰቀሉት ሰዎች ሬሳ በሰንበት ቀን በመስቀል ላይ እንዳይውል ስለ ፈለጉና ያም የተለየ ሰንበት ስለ ነበር፣ የተሰቀሉት ሰዎች ጭናቸው ተሰብሮ በድናቸው እንዲወርድ ጲላጦስን ለመኑት። 32ስለዚህም ወታደሮቹ መጥተው ከክርስቶስ ጋር ተሰቅሎ የነበረውን የመጀመሪያውን ሰው ጭን ሰበሩ፤ ደግሞም የሌላውን ጭን ሰበሩ። 33ወደ ኢየሱስ በመጡ ጊዜ ግን ሞቶ ስላገኙት ጭኖቹን አልሰበሩም፤ 34ነገር ግን ከወታደሮቹ አንዱ የኢየሱስን ጐን በጦር ወጋው፤ ወዲያውም ደምና ውሃ ፈሰሰ። 35ይህን ያየው ሰው ምስክርነቱን ሰጥቶአል፤ ምስክርነቱም እውነት ነው፤ እውነትን እንደሚናገርም ያውቃል፤ እናንተም እንድታምኑ ይመሰክራል። 36ይህም የሆነው፣ መጽሐፍ፣ “ከአጥንቱ አንድም አይሰበርም” ያለው እንዲፈጸም፣ 37ሌላውም መጽሐፍ፣ “የወጉትም ያዩታል” ስለሚል ነው።

የኢየሱስ መቀበር

19፥38-42 ተጓ ምብ – ማቴ 27፥57-61፤ ማር 15፥42-47፤ ሉቃ 23፥50-56

38ከዚህ በኋላ የአርማትያሱ ዮሴፍ የኢየሱስን በድን ለመውሰድ ጲላጦስን ለመነው፤ ዮሴፍም አይሁድን ስለ ፈራ በስውር የኢየሱስ ደቀ መዝሙር ነበር። እርሱም ጲላጦስን ካስፈቀደ በኋላ መጥቶ በድኑን ወሰደ። 39ከዚህ ቀደም በሌሊት ወደ ኢየሱስ መጥቶ የነበረው ኒቆዲሞስ አንድ መቶ ሊትር19፥39 ሠላሳ አራት ኪሎ ግራም ያህል ነው ያህል የሚመዝን የከርቤና የእሬት ቅልቅል ይዞ መጣ። 40እነርሱም የኢየሱስን በድን ወስደው እንደ አይሁድ አገናነዝ ልማድ ከሽቱ ጋር ከተልባ እግር በተሠራ ጨርቅ ከፈኑት። 41ኢየሱስ በተሰቀለበት ቦታም የአትክልት ስፍራ ነበር፤ በአትክልቱም ስፍራ ማንም ያልተቀበረበት አዲስ መቃብር ነበር። 42ዕለቱ ለአይሁድ የሰንበት መዘጋጃ ቀን ስለ ነበርና መቃብሩም ቅርብ ስለ ሆነ ኢየሱስን በዚያ ቀበሩት።

Hindi Contemporary Version

योहन 19:1-42

मसीह येशु का क्रूस-मृत्युदंड

1इसलिये पिलातॉस ने मसीह येशु को भीतर ले जाकर उन्हें कोड़े लगवाए. 2सैनिकों ने कांटों का एक मुकुट गूंथकर उनके सिर पर रखा और उनके ऊपर एक बैंगनी वस्त्र डाल दिया 3और वे एक-एक कर उनके सामने आकर उनके मुख पर प्रहार करते हुए कहने लगे, “यहूदियों के राजा की जय!”

4पिलातॉस ने दोबारा आकर भीड़ से कहा, “देखो, मैं उसे तुम्हारे लिए बाहर ला रहा हूं कि तुम जान लो कि मुझे उसमें कोई दोष नहीं मिला.” 5तब कांटों का मुकुट व बैंगनी वस्त्र धारण किए हुए मसीह येशु को बाहर लाया गया और पिलातॉस ने लोगों से कहा, “देखो, इसे!”

6जब प्रधान पुरोहितों और सेवकों ने मसीह येशु को देखा तो चिल्लाकर कहने लगे, “क्रूसदंड! क्रूसदंड!”

पिलातॉस ने उनसे कहा, “इसे ले जाओ और तुम ही दो इसे मृत्यु दंड क्योंकि मुझे तो इसमें कोई दोष नहीं मिला.”

7यहूदियों ने उत्तर दिया, “हमारा एक नियम है. उस नियम के अनुसार इस व्यक्ति को मृत्यु दंड ही मिलना चाहिए क्योंकि यह स्वयं को परमेश्वर का पुत्र बताता है.”

8जब पिलातॉस ने यह सुना तो वह और अधिक भयभीत हो गया. 9तब उसने दोबारा राजभवन में जाकर मसीह येशु से पूछा, “तुम कहां के हो?” किंतु मसीह येशु ने उसे कोई उत्तर नहीं दिया. 10इसलिये पिलातॉस ने उनसे कहा, “तुम बोलते क्यों नहीं? क्या तुम नहीं जानते कि मुझे यह अधिकार है कि मैं तुम्हें मुक्त कर दूं और यह भी कि तुम्हें मृत्यु दंड दूं?”

11मसीह येशु ने उत्तर दिया, “आपका मुझ पर कोई अधिकार न होता यदि वह आपको ऊपर से न दिया गया होता. अत्यंत नीच है उसका पाप, जिसने मुझे आपके हाथ सौंपा है.”

12परिणामस्वरूप पिलातॉस ने उन्हें मुक्त करने के यत्न किए किंतु यहूदियों ने चिल्ला-चिल्लाकर कहा, “यदि आपने इस व्यक्ति को मुक्त किया तो आप कयसर के मित्र नहीं हैं. हर एक, जो स्वयं को राजा दर्शाता है, वह कयसर का विरोधी है.”

13ये सब सुनकर पिलातॉस मसीह येशु को बाहर लाया और न्याय आसन पर बैठ गया, जो उस स्थान पर था, (जिसे इब्री भाषा में गब्बथा अर्थात चबूतरा कहा जाता है). 14यह फ़सह की तैयारी के दिन का छठा घंटा था. पिलातॉस ने यहूदियों से कहा.

“यह लो, तुम्हारा राजा.”

15इस पर वे चिल्लाने लगे, “इसे यहां से ले जाओ! ले जाओ इसे यहां से और मृत्यु दंड दो!”

पिलातॉस ने उनसे पूछा, “क्या मैं तुम्हारे राजा को मृत्यु दंड दूं?”

प्रधान पुरोहितों ने कहा, “कयसर के अतिरिक्त हमारा कोई राजा नहीं है.”

16तब पिलातॉस ने क्रूस-मृत्युदंड के लिए मसीह येशु को उनके हाथ सौंप दिया.

क्रूस-मार्ग पर मसीह येशु

तब सैनिक मसीह येशु को उस स्थान को ले गए. 17मसीह येशु अपना क्रूस स्वयं उठाए हुए, उस जगह गये जो इब्री भाषा में गोलगोथा कहलाता है, जिसका अर्थ है खोपड़ी का स्थान. 18वहां उन्होंने मसीह येशु को अन्य दो व्यक्तियों के साथ उनके मध्य क्रूस पर चढ़ाया.

19पिलातॉस ने एक पटल पर लिखकर क्रूस पर लगवा दिया.

नाज़रेथ का येशु, यहूदियों का राजा

20यह अनेक यहूदियों ने पढ़ा क्योंकि मसीह येशु को क्रूस पर चढ़ाए जाने का स्थान नगर के समीप ही था. यह इब्री, लातीनी और यूनानी भाषाओं में लिखा था. 21इस पर यहूदियों के प्रधान पुरोहितों ने पिलातॉस से कहा, “यहूदियों का राजा मत लिखिए परंतु वह लिखिए, जो उसने कहा था: ‘मैं यहूदियों का राजा हूं.’ ”

22पिलातॉस ने उत्तर दिया, “अब मैंने जो लिख दिया, वह लिख दिया.”

23सैनिकों ने मसीह येशु को क्रूसित करने के बाद उनके बाहरी कपड़े लेकर चार भाग किए और आपस में बांट लिए. उनके अंदर का वस्त्र जोड़ रहित ऊपर से नीचे तक बुना हुआ था.

24इसलिये सैनिकों ने विचार किया, “इसे फाड़ें नहीं परंतु इस पर पासा फेंककर निर्णय कर लें कि यह किसको मिलेगा.”19:24 स्तोत्र 22:18

सैनिकों ने ठीक वही किया जैसा पवित्र शास्त्र में लिखा है:

“उन्होंने मेरा बाहरी कपड़ा आपस में बांट लिया,

और मेरे अंदर के वस्त्र के लिए पासा फेंका.”

25मसीह येशु के क्रूस के समीप उनकी माता, उनकी माता की बहन, क्लोपस की पत्नी मरियम और मगदालावासी मरियम खड़ी हुई थी. 26जब मसीह येशु ने अपनी माता और उस शिष्य को, जो उनका प्रियजन था, वहां खड़े देखा तो अपनी माता से बोले, “हे स्त्री! यह आपका पुत्र है.” 27और उस शिष्य से बोले, “यह तुम्हारी माता है.” उस दिन से वह शिष्य मरियम का रखवाला बन गया.

मसीह येशु की मृत्यु

28इसके बाद मसीह येशु ने यह जानते हुए कि अब सब कुछ पूरा हो चुका है, पवित्र शास्त्र का लेख पूरा करने के लिए कहा, “मैं प्यासा हूं.” 29वहां दाखरस के सिरके से भरा एक बर्तन रखा था. लोगों ने उसमें स्पंज भिगो जूफ़ा पौधे की टहनी पर रखकर उनके मुख तक पहुंचाया. 30उसे चखकर मसीह येशु ने कहा, “अब सब पूरा हो गया” और सिर झुकाकर प्राण त्याग दिए.

31वह फ़सह की तैयारी का दिन था. इसलिये यहूदियों ने पिलातॉस से निवेदन किया कि उन लोगों की टांगें तोड़कर उन्हें क्रूस से उतार लिया जाए जिससे वे शब्बाथ पर क्रूस पर न रहें क्योंकि वह एक विशेष महत्व का शब्बाथ था. 32इसलिये सैनिकों ने मसीह येशु के संग क्रूस पर चढ़ाए गए एक व्यक्ति की टांगें पहले तोड़ीं और तब दूसरे की. 33जब वे मसीह येशु के पास आए तो उन्हें मालूम हुआ कि उनके प्राण पहले ही निकल चुके थे. इसलिये उन्होंने उनकी टांगें नहीं तोड़ीं 34किंतु एक सैनिक ने उनकी पसली को भाले से बेधा और वहां से तुरंत लहू व जल बह निकले. 35वह, जिसने यह देखा, उसने गवाही दी है और उसकी गवाही सच्ची है—वह जानता है कि वह सच ही कह रहा है, कि तुम भी विश्वास कर सको. 36यह इसलिये हुआ कि पवित्र शास्त्र का यह लेख पूरा हो: उसकी एक भी हड्डी तोड़ी न जाएगी.19:36 निर्ग 12:46; गण 9:12; स्तोत्र 34:20 37पवित्र शास्त्र का एक अन्य लेख भी इस प्रकार है: वे उसकी ओर देखेंगे, जिसे उन्होंने बेधा है.19:37 ज़कर 12:10

मसीह येशु को कब्र में रखा जाना

38अरिमथियावासी योसेफ़ यहूदियों के भय के कारण मसीह येशु का गुप्त शिष्य था. उसने पिलातॉस से मसीह येशु का शव ले जाने की अनुमति चाही. पिलातॉस ने स्वीकृति दे दी और वह आकर मसीह येशु का शव ले गया. 39तब निकोदेमॉस भी, जो पहले मसीह येशु से भेंट करने रात के समय आए थे, लगभग तैंतीस किलो गन्धरस और अगरू का मिश्रण लेकर आए. 40इन लोगों ने मसीह येशु का शव लिया और यहूदियों की अंतिम संस्कार की रीति के अनुसार उस पर यह मिश्रण लगाकर कपड़े की पट्टियों में लपेट दिया. 41मसीह येशु को क्रूसित किए जाने के स्थान के पास एक उपवन था, जिसमें एक नई कब्र की गुफ़ा थी. उसमें अब तक कोई शव नहीं रखा गया था. 42इसलिये उन्होंने मसीह येशु के शव को उसी कब्र की गुफ़ा में रख दिया क्योंकि वह पास थी और वह यहूदियों के शब्बाथ की तैयारी का दिन भी था.