New Amharic Standard Version

ዘፀአት 9:1-35

የእንስሳት እልቂት

1ከዚያም እግዚአብሔር (ያህዌ) ሙሴን እንዲህ አለው፤ “ወደ ፈርዖን ሂድና እንዲህ በለው፤ ‘የዕብራውያን አምላክ (ኤሎሂም) እግዚአብሔር (ያህዌ) የሚለው ይህ ነው፤ “ያመልኩኝ ዘንድ ሕዝቤን ልቀቅ።” 2አሁንም እንዳይሄዱ ብታደርግና ብትከለክላቸው፣ 3የእግዚአብሔር (ያህዌ) እጅ በመስክ ላይ ባሉት እንስሳት፣ በፈረሶችህና በአህዮችህ፣ በግመሎችህና በቀንድ ከብቶችህ፣ በበጎችህና በፍየሎችህ ላይ አስከፊ መቅሠፍት ያመጣብሃል። 4ነገር ግን እግዚአብሔር (ያህዌ) በእስራኤልና በግብፅ እንስሳት መካከል ልዩነት ያደርጋል፤ ይኸውም የእስራኤል የሆነ ማንኛውም እንስሳ እንዳይሞት ነው።’ ”

5እግዚአብሔር (ያህዌ) ጊዜን ወስኖ፣ እንዲህ አለ፤ “በነገው ዕለት እግዚአብሔር (ያህዌ) በምድሪቱ ላይ ይህን ያደርጋል።” 6በማግሥቱም እግዚአብሔር (ያህዌ) ነገሩን ፈጸመው፤ የግብፃውያን እንስሳት በሙሉ አለቁ፤ ነገር ግን የእስራኤላውያን ከሆኑት እንስሳት አንድም አልሞተም። 7ፈርዖን ያጣሩ ዘንድ ሰዎች ልኮ ከእስራኤላውያኑ እንስሳት አንድም እንኳን አለመሞቱን ተገነዘበ። ያም ሆኖ ልቡ እንደ ደነደነ ስለ ነበር፣ ሕዝቡን አልለቀቀም።

የእባጭ መቅሠፍት

8ከዚያም እግዚአብሔር (ያህዌ) ሙሴንና አሮንን አላቸው፤ “ከምድጃው እፍኝ ዐመድ ወስዳችሁ፣ ሙሴ በፈርዖን ፊት ወደ ሰማይ ይበትነው። 9በግብፅ ምድር ሁሉ ትቢያ ይሆናል፤ በምድሪቱ ሁሉ በሚገኙት ሰዎችና እንስሳት ላይ መግል የያዘ እባጭ ይወጣል።”

10ስለዚህ ከምድጃው ዐመድ ወስደው በፈርዖን ፊት ቆሙ፤ ሙሴም ወደ ሰማይ በተነው፤ መግል የያዘ እባጭም በሰዎችና በእንስሳት ላይ ወጣ። 11በእነርሱና በግብፃውያን ሁሉ ላይ እባጭ ወጥቶ ስለ ነበር፣ አስማተኞቹ በሙሴ ፊት መቆም አልቻሉም። 12እግዚአብሔር (ያህዌ) ግን የፈርዖንን ልብ አደነደነ፤ እግዚአብሔር (ያህዌ) ለሙሴ እንደ ተናገረውም፣ ሙሴንና አሮንን መስማት አልፈለገም።

የበረዶ መቅሠፍት

13ከዚያም እግዚአብሔር (ያህዌ) ሙሴን እንዲህ አለው፤ “ማልደህ በጧት ተነሣ፤ ከፈርዖን ፊት ቀርበህ እንዲህ በለው፤ የዕብራውያን አምላክ እግዚአብሔር (ያህዌ ኤሎሂም) የሚለው ይህ ነው፤ ያመልኩኝ ዘንድ ሕዝቤን ልቀቅ፤ 14አለዚያ በአንተ በሹማምቶችህና በሕዝብህ ላይ የመቅሠፍቴን መዓት ሁሉ አሁን አወርድብሃለሁ፤ ይኸውም በምድር ሁሉ እንደ እኔ ያለ ማንም እንደሌለ ታውቅ ዘንድ ነው። 15አሁን እጄን ዘርግቼ አንተንና ሕዝብህን ከገጸ ምድር ሊያጠፋችሁ በሚችል መቅሠፍት በመታኋችሁ ነበር። 16ነገር ግን ኀይሌን እንዳሳይህና ስሜም በምድር ዙሪያ ሁሉ እንዲታወቅ ለዚህ አስነሥቼሃለሁ።9፥16 ወይም፣ ለዚህ ምሕረቴን አሳይቼሃለሁ 17እስካሁንም በሕዝቤ ላይ እንደ ተነሣህ ነው፤ ይሄዱም ዘንድ አትለቃቸውም። 18ስለዚህ ነገ በዚህ ጊዜ ከተመሠረተችበት ጊዜ ጀምሮ እስካሁን ድረስ በግብፅ ላይ ወርዶ የማያውቅ አስከፊ የበረዶ ማዕበል እልካለሁ። 19ከብቶችህና በመስክ ላይ ያለህ ማንኛውም ነገር ወደ መጠለያ ይገቡ ዘንድ አሁን ትእዛዝ ስጥ፤ ምክንያቱም በረዶው ወደ መጠለያ ባልገቡትና በመስክ ላይ በቀሩት በማንኛውም ሰውና እንስሳት ላይ ወርዶባቸው ስለሚሞቱ ነው።

20የእግዚአብሔርን (ያህዌ) ቃል የፈሩት የፈርዖን ሹማምቶች፣ ባሮቻቸውንና ከብቶቻቸውን ለማስገባት ተጣደፉ። 21የእግዚአብሔርን (ያህዌ) ቃል ችላ ያሉት ግን ባሮቻቸውንና ከብቶቻቸውን በመስክ ላይ እንደ ነበሩ ተዉአቸው።

22ከዚያም እግዚአብሔር (ያህዌ) ሙሴን፣ “በመላይቱ የግብፅ ምድር ባሉት ሰዎች፣ በእንስሳት እንዲሁም በምድሪቱ ላይ በሚበቅሉት ነገሮች ሁሉ ላይ በረዶ እንዲወርድ እጅህን ወደ ሰማይ አንሣ” አለው። 23ሙሴ በትሩን ወደ ሰማይ ባነሣ ጊዜ እግዚአብሔር (ያህዌ) ነጐድጓድና በረዶ አወረደ፤ መብረቅም በምድሪቱ ላይ ሆነ። እግዚአብሔር (ያህዌ) በግብፅ ምድር በረዶ አዘነበ፤ 24በረዶ ወረደ፤ መብረቅም አብረቀረቀ፤ ግብፅ ሐገር ከሆነችበት ዘመን አንሥቶ በምድሪቱ ሁሉ እንደዚህ ያለ አስከፊ ማዕበል ሆኖ አያውቅም። 25በመላው ግብፅ በረዶ በመስክ ላይ ያለውን ሁሉ፣ ሰዎችንና እንስሳትንም መታ፤ በመስክ ላይ የበቀለውን ሁሉ አጠፋ፤ ዛፉን ሁሉ ባዶ አስቀረ። 26በረዶ ያልወረደበት ቢኖር እስራኤላውያን የሚኖሩበት የጌሤም ምድር ብቻ ነበር።

27ከዚያም ፈርዖን ሙሴንና አሮንን አስጠራ፤ እንዲህም አላቸው፤ ‘አሁንስ በድያለሁ፤ እግዚአብሔር (ያህዌ) ትክክል ነው፤ እኔና ሕዝቤ ግን ስተናል። 28መብረቅና በረዶ በዝቶብናልና ወደ እግዚአብሔር (ያህዌ) ጸልዩልን፤ እንድትሄዱ እለቃችኋለሁ፤ ከዚህ በኋላ በዚህ የመኖር ግዴታ የለባችሁም።

29ሙሴም መልሶ፣ “ከከተማዋ በወጣሁ ጊዜ፣ እጆቼን ለጸሎት ወደ እግዚአብሔር (ያህዌ) እዘረጋለሁ፤ አንተም ምድር የእግዚአብሔር (ያህዌ) እንደሆነች ታውቅ ዘንድ መብረቁ ያቆማል፤ ከእንግዲህ በኋላ በረዶ አይኖርም። 30ሆኖም አንተና ሹማምትህ አሁንም ቢሆን እግዚአብሔር (ያህዌ) አምላክን እንደማትፈሩ ዐውቃለሁ።

31ተልባው አብቦ፣ ገብሱም ፍሬ ይዞ ስለ ነበር፣ ተልባውና ገብሱ ከጥቅም ውጭ ሆኑ። 32ስንዴውና አጃው ግን በዚያ ወቅት ባለማፍራቱ አልጠፋም ነበር።

33ከዚያም ሙሴ ከፈርዖን ተለይቶ ከከተማው ወጣ። እጁን ወደ እግዚአብሔር (ያህዌ) ዘረጋ፤ ነጎድጓዱና በረዶው ቆመ፤ ዝናቡም በምድሪቱ ላይ መዝነቡን አቆመ። 34ፈርዖንም ዝናቡ፣ በረዶውና ነጎድጓዱ መቆሙን ባየ ጊዜ እንደ ገና በደለ፤ እርሱና ሹማምቶቹ ልባቸውን አደነደኑ። 35ስለዚህ የፈርዖን ልብ ደነደነ፤ እግዚአብሔር (ያህዌ) ለሙሴ እንደ ተናገረውም እስራኤላውያን ይሄዱ ዘንድ አልለቀቃቸውም።

Hindi Contemporary Version

निर्गमन 9:1-35

मिस्र के पशुओं की मृत्यु

1फिर परमेश्वर ने मोशेह से कहा कि, “जाकर फ़रोह को यह बता दो कि ‘इब्रियों के परमेश्वर याहवेह ने यह कहा है कि, “मेरी प्रजा को यहां से जाने दो, ताकि वे मेरी वंदना कर सकें.” 2क्योंकि यदि तुम उन्हें जाने नहीं दोगे 3तो याहवेह का हाथ तुम्हारे पशुओं, घोडों, गधों, ऊंटों, गायों एवं भेड़-बकरियों पर बढ़ेगा और बड़ी महामारी फैल जायेगी 4याहवेह मिस्रियों के पशुओं में महामारी फैलायेंगे लेकिन इस्राएल के पशुओं को कुछ नहीं होगा—जिसके कारण इस्राएल वंश के एक भी पशु की मृत्यु न होगी.’ ”

5याहवेह ने यह कहकर एक समय ठहरा दिया: कि अगले दिन “याहवेह इस देश में महामारी फैलायेंगे.” 6तब याहवेह ने अगले दिन वही किया—मिस्र देश के सभी पशु मर गए; किंतु इस्राएल वंश में एक भी पशु नहीं मरा. 7फ़रोह ने सच्चाई जानने के लिए सेवक को भेजा तब उन्होंने देखा कि इस्राएल में एक भी पशु की मृत्यु नहीं हुई थी. यह देख फ़रोह का मन और कठोर हो गया, उसने प्रजा को जाने नहीं दिया.

फोड़ की विपत्ति

8फिर याहवेह ने मोशेह और अहरोन से कहा “अपने-अपने हाथों में मुट्ठी भरके राख लेना, और उस राख को फ़रोह के सामने आकाश की ओर फेंकना. 9यह राख पूरे देश पर रेत में बदल जाएगी, जिससे पूरे मिस्रवासियों एवं पशुओं के शरीर पर फोड़े फुंसी हो जायेंगे.”

10इसलिये मोशेह तथा अहरोन ने भट्ठे से राख उठाई और फ़रोह के सामने गए. मोशेह ने राख को आकाश की ओर उछाला, जिसके कारण मनुष्यों और पशुओं के शरीर पर फोड़े निकल आए. 11इन फोड़ों के कारण जादूगर मोशेह के सामने खड़े न रह सके, क्योंकि फोड़े न केवल मिस्रवासियों की देह पर निकल आए थे किंतु जादूगरों के शरीर भी फोड़े से भर गये थे! 12याहवेह ने फ़रोह के मन को कठोर बना दिया, और फ़रोह ने मोशेह की बात नहीं मानी यह बात याहवेह ने मोशेह से पहले ही कह दी थी.

ओले की विपत्ति

13तब याहवेह ने मोशेह से कहा, “सुबह जल्दी उठकर फ़रोह के पास जाकर यह कहना की ‘याहवेह, इब्रियों के परमेश्वर की यह आज्ञा है कि, मेरी प्रजा को यहां से जाने दो, ताकि वे मेरी वंदना कर सकें. 14क्योंकि इस बार मैं और ज्यादा परेशानियां तुम पर, तुम्हारे सेवकों पर तथा तुम्हारी प्रजा पर डाल दूंगा, जिससे की तुम्हें यह मालूम हो जाए कि पूरे पृथ्वी पर मेरे तुल्य कोई भी नहीं है. 15क्योंकि अब तक मैं अपना हाथ बढ़ाकर तुम और तुम्हारी प्रजा पर बहुत बड़ीं विपत्तियां डालकर तुम्हें मिटा देता. 16किंतु मैंने तुम्हें इसलिये जीवित रखा है कि मैं तुम पर अपने सामर्थ्य के कामों को बता सकूं ताकि सारी पृथ्वी में मेरे नाम का प्रचार हो 17लेकिन तुमने मेरी प्रजा को यहां से जाने की अनुमति न देकर अपने आपको महान समझा है! 18अब देखना, कल इसी समय मैं बड़े-बड़े ओले बरसाऊंगा—ऐसा, मिस्र देश में आज तक नहीं देखा गया है 19इसलिये अब सबको बता दो कि मैदानों से अपने पशुओं को तथा जो कुछ इस समय खेतों में रखा हुआ है, सुरक्षित स्थान पर ले जाएं. अगर कोई मनुष्य या पशु, ओले गिरने से पहले अपने घरों में न पहुंचें, वे अवश्य मर जायेंगे.’ ”

20तब फ़रोह के उन सेवकों ने, जिन्होंने याहवेह की बात पर ध्यान दिया वे सब जल्दी अपने-अपने लोगों एवं पशुओं को लेकर घर चले गये 21और जिन्होंने उस बात पर ध्यान नहीं दिया वे सेवक एवं उनके पशु मैदान में ही रह गए.

22याहवेह ने मोशेह को आदेश दिया, “अपना हाथ आकाश की ओर बढ़ाओ, ताकि पूरे मिस्र देश पर, मनुष्य एवं पशु, मैदान के हर एक वृक्ष पर ओले गिरना शुरू हो जाए.” 23मोशेह ने अपनी लाठी आकाश की ओर बढ़ाई, और याहवेह ने आकाश से बादल गरजाये और ओले बरसाए और ओलों के साथ आग भी पृथ्वी पर आने लगी. 24ओलों के साथ आग भी गिर रही थी ऐसी दशा मिस्र देश में इससे पहले कभी नहीं हुई थी. 25ओले उन सब पर गिरे, जो मैदानों में थे—ओले पौधे तथा वृक्ष पर भी गिरे जो पूरे नष्ट हो गये. 26केवल गोशेन प्रदेश में जहां इस्राएली रहते थे, ओले नहीं गिरे.

27तब फ़रोह ने मोशेह एवं अहरोन को बुलवाया और “उनके सामने मान लिया कि मैंने पाप किया है, याहवेह ही महान परमेश्वर हैं मैं तथा मेरी प्रजा अधर्मी है. 28तुम याहवेह से बिनती करो, बहुत हो चुका गरजना और ओले बरसना. मैं तुमको यहां से जाने दूंगा, तुम यहां मत रुको.”

29मोशेह ने फ़रोह को उत्तर दिया, “जैसे ही मैं नगर से बाहर निकलूंगा, मैं अपनी भुजाएं याहवेह की ओर उठाऊंगा; तब आग तथा ओले गिरना रुक जाएंगे, तब तुमको मालूम हो जाएगा कि पृथ्वी पर याहवेह का ही अधिकार है. 30लेकिन तुम तथा तुम्हारे सेवकों के विषय में मुझे मालूम है कि अब भी तुममें याहवेह परमेश्वर के प्रति श्रद्धा एवं भक्ति नहीं है.”

31(इस समय सन एवं जौ की फसल नष्ट हो चुकी थी, क्योंकि जौ की बालें आ चुकी थी तथा सन में कलियां खिल रही थी; 32लेकिन गेहूं नष्ट नहीं हुई थी, क्योंकि उनकी उपज देर से होती है.)

33तब मोशेह फ़रोह के पास से निकलकर नगर के बाहर चले गए और उन्होंने याहवेह की ओर अपने हाथ उठाए; और तुरंत बादल गरजना एवं ओला गिरना रुक गया, भूमि पर हो रही वर्षा भी रुक गई. 34जैसे ही फ़रोह ने देखा कि ओले गिरना तथा बादल गरजना रुक गया, उन्होंने पाप किया और उसने और उसके सेवकों ने अपना मन कठोर कर लिया. 35कठोर मन से फ़रोह ने इस्राएलियों को जाने नहीं दिया—मोशेह को याहवेह ने पहले ही बता दिया था कि फ़रोह किस प्रकार अपने मन को फिर कठोर करेंगे.