New Amharic Standard Version

ሐዋርያት ሥራ 7:1-60

እስጢፋኖስ በሸንጎው ፊት ያደረገው ንግግር

1ሊቀ ካህናቱም፣ “ይህ የቀረበብህ ክስ እውነት ነውን?” አለው።

2እስጢፋኖስም እንዲህ ሲል መለሰ፤ “ወንድሞችና አባቶች ሆይ፤ አድምጡኝ! አባታችን አብርሃም ወደ ካራን ከመምጣቱ በፊት፣ ገና በመስጴጦምያ ሳለ፣ የክብር አምላክ ተገልጦለት፤ 3ከአገርህና ከወገንህ ተለይተህ እኔ ወደማሳይህ ምድር ሂድ አለው።

4“እርሱም ከከለዳውያን ምድር ወጥቶ በካራን ተቀመጠ። ከአባቱም ሞት በኋላ፣ አሁን እናንተ ወደምትኖሩበት ወደዚህ አገር አመጣው። 5በዚህም ስፍራ አንዲት ጫማ ታህል እንኳ ርስት አልሰጠውም፤ ነገር ግን በዚያን ጊዜ ምንም ልጅ ሳይኖረው፣ እርሱና ከእርሱም በኋላ ዘሩ ምድሪቱን እንደሚወርሱ እግዚአብሔር ቃል ገባለት። 6ደግሞም እግዚአብሔር እንዲህ ብሎ ተናገረው፤ ‘ዘርህ በባዕድ አገር መጻተኛ ይሆናል፤ አራት መቶ ዓመትም በባርነት ቀንበር ሥር ይማቅቃል። 7ሆኖም በባርነት የሚገዛቸውን ሕዝብ እኔ ደግሞ እቀጣዋለሁ። ከዚያም አገር ወጥተው በዚህች ስፍራ ያመልኩኛል።’ 8ከዚያም የግዝረትን ኪዳን ሰጠው፤ አብርሃምም ይስሐቅን ወለደ፤ በስምንተኛውም ቀን ገረዘው። ይስሐቅም ያዕቆብን ወለደ፤ ያዕቆብም ዐሥራ ሁለቱን የነገድ አባቶች ወለደ።

9“የነገድ አባቶችም በዮሴፍ ቀንተው በባርነት ወደ ግብፅ ሸጡት፤ እግዚአብሔር ግን ከእርሱ ጋር ስለ ነበር፣ 10ከመከራው ሁሉ አወጣው፤ በግብፅም ንጉሥ በፈርዖን ፊት ሞገስና ጥበብን አጐናጸፈው፤ ፈርዖንም በግብፅና በቤተ መንግሥቱ ሁሉ ላይ ኀላፊ አድርጎ ሾመው።

11“በዚያ ጊዜም በግብፅና በከነዓን አገር ሁሉ፣ ታላቅ መከራን ያስከተለ ራብ መጣ፤ አባቶቻችንም የሚበሉትን አጡ። 12ያዕቆብም እህል በግብፅ መኖሩን በሰማ ጊዜ፣ አባቶቻችንን ለመጀመሪያ ጊዜ ወደ ግብፅ ላካቸው፤ 13ለሁለተኛ ጊዜ ሲሄዱ ደግሞ ዮሴፍ ማንነቱን ለወንድሞቹ ገለጠ፤ ፈርዖንም ስለ ዮሴፍ ዘመዶች ተረዳ። 14ከዚህ በኋላ፣ ዮሴፍ ልኮ አባቱን ያዕቆብንና ሰባ አምስት ነፍስ የሚሆኑ ቤተ ዘመዶቹን በሙሉ አስመጣ። 15ያዕቆብ ወደ ግብፅ ወረደ፤ እርሱም አባቶቻችንም በዚያ ሞቱ። 16አስከሬናቸውም ወደ ሴኬም ተወስዶ፣ አብርሃም ከዔሞር ልጆች ላይ በጥሬ ብር በገዛው መቃብር ተቀበረ።

17“እግዚአብሔር ለአብርሃም የገባው ቃል የሚፈጸምበት ጊዜ ሲቃረብም፣ በግብፅ የነበረው የሕዝባችን ቍጥር እየበዛ ሄደ። 18ከዚያ በኋላ ዮሴፍን የማያውቅ ሌላ ንጉሥ በግብፅ ነገሠ። 19እርሱም ሕዝባችንን በተንኰሉ አስጨነቀ፤ ገና የተወለዱ ሕፃናታቸውም ይሞቱ ዘንድ ወደ ውጭ አውጥተው እንዲጥሏቸው አስገደዳቸው።

20“በዚህ ጊዜ ሙሴ ተወለደ፤ እርሱም በእግዚአብሔር ፊት ሞገስን ያገኘ ውብ ሕፃን7፥20 ወይም ተራ ልጅ አልነበረም ነበር። በአባቱም ቤት ሦስት ወር በእንክ ብካቤ አደገ። 21ወደ ውጭ በተጣለም ጊዜ የፈርዖን ልጅ አግኝታ ወሰደችው፤ እንደ ራሷ ልጅ አድርጋም አሳደገችው። 22ሙሴም የግብፆችን ጥበብ ሁሉ ተማረ፤ በንግግሩና በተግባሩም ብርቱ ሆነ።

23“ሙሴ አርባ ዓመት በሆነው ጊዜ፣ ወንድሞቹን የእስራኤልን ልጆች ሊጐበኝ በልቡ አሰበ። 24እርሱም፣ አንድ ግብፃዊ ከወገኖቹ አንዱን በደል ሲያደርስበት አይቶ ግብፃዊውንም ገደለ፤ ለተገፋው ወገኑም ተበቀለ። 25ወገኖቹም እግዚአብሔር በእርሱ እጅ ነጻ እንደሚያወጣቸው የሚያሰተውሉ መስሎት ነበር፤ እነርሱ ግን አላስተዋሉም። 26በማግስቱም ደግሞ ሁለት እስራኤላውያን ሲጣሉ ደረሰ፤ ሊያስታርቃቸውም ፈልጎ፣ ‘ሰዎች፤ እናንተ እኮ ወንድማማቾች ናችሁ፤ እንዴት እርስ በርሳችሁ ትጐዳዳላችሁ?’ አላቸው።

27“በባልንጀራው ላይ በደል ሲያደርስ የነበረው ሰው ግን፣ ሙሴን ገፈተረውና እንዲህ አለ፤ ‘አንተን ገና ፈራጅ አድርጎ በእኛ ላይ የሾመህ ማን ነው? 28ወይስ ትናንት ግብፃዊውን እንደ ገደልኸው እኔንም ልትገድለኝ ትፈልጋልህን?’ 29ሙሴም ይህን እንደ ሰማ ሸሽቶ በምድያም አገር መጻተኛ ሆኖ ተቀመጠ፤ በዚያም ሁለት ወንዶች ልጆች ወለደ።

30“ከአርባ ዓመት በኋላ፣ በሲና ተራራ አካባቢ ባለው ምድረ በዳ፣ በሚነድ ቍጥቋጦ ነበልባል ውስጥ መልአክ ተገለጠለት። 31ሙሴም ባየው ነገር ተደነቀ፤ ነገሩን ለማጣራት ወደዚያ ሲቀርብ የጌታ ድምፅ፤ 32‘እኔ የአባቶችህ አምላክ፣ የአብርሃም፣ የይስሐቅ፣ የያዕቆብ አምላክ ነኝ’ ሲል ሰማ። ሙሴም በፍርሀት ተዋጠ፤ ለመመልከትም አልደፈረም።

33“ጌታም እንዲህ አለው፤ ‘የእግርህን ጫማ አውልቅ፤ የቆምህባት ስፍራ የተቀደሰች ምድር ናትና። 34በግብፅ ያለውን የሕዝቤን መከራ በርግጥ አይቻለሁ፤ የጭንቅ ጩኸታቸውን ሰምቻለሁ፤ ላድናቸውም ወርጃለሁ። አሁንም ና፤ ወደ ግብፅ መልሼ እልክሃለሁ።’

35“እንግዲህ እነዚያ፣ ‘ገዥና ፈራጅ አድርጎ የሾመህ ማን ነው?’ ብለው የናቁትን ይህንን ሙሴ እግዚአብሔር በቊጥቋጦው ውስጥ በታየው መልአክ አማካይነት ገዥና ታዳጊ አድርጎ ወደ እነርሱ ላከው። 36እርሱም መርቶ ከግብፅ አወጣቸው፤ በግብፅ፣ በቀይ ባሕርና በምድረ በዳ አርባ ዓመት ድንቅ ነገሮችንና ታምራዊ ምልክቶችን አደረገ።

37“የእስራኤልንም ሕዝብ፣ ‘እግዚአብሔር እንደ እኔ ያለ ነቢይ ከመካከላችሁ ያስነሣላችኋል’ ያላቸው ይኸው ሙሴ ነበር። 38እርሱም በሲና ተራራ ከተናገረው መልአክና ከአባቶቻችን ጋር በምድረ በዳ በሕዝቡ ጉባኤ መካከል ነበር፤ የሕይወትንም ቃል ወደ እኛ ለማስተላለፍ ተቀበለ።

39“አባቶቻችን ግን ተቃወሙት እንጂ ሊታዘዙት ስላልፈለጉ በልባቸው ወደ ግብፅ ተመለሱ። 40አሮንንም፣ ‘ፊት ፊታችን የሚሄዱ አማልክት አብጅልን፤ ከግብፅ ምድር መርቶ ያወጣን ያ ሙሴ ምን እንደ ደረሰበት አናውቅምና’ አሉት። 41በዚያን ጊዜ የጥጃ ምስል ሠርተው፣ ለጣዖቱ መሥዋዕት አቀረቡ፤ በእጃቸውም ሥራ ተደሰቱ፤ ፈነጠዙም። 42እግዚአብሔር ግን ከእነርሱ ዘወር አለ፤ ያመልኳቸውም ዘንድ ለሰማይ ከዋክብት አሳልፎ ሰጣቸው፤ ይህም በነቢያት መጽሐፍ እንዲህ ተብሎ በተጻፈው መሠረት ተፈጸመ፤

“ ‘እናንት የእስራኤል ቤት ሆይ፤ አርባ ዓመት በምድረ በዳ በነበራችሁ ጊዜ፣

መሥዋዕትንና መባን ለእኔ አቀረባችሁልኝን?

43ይልቁንም ልታመልኳቸው የሠራችኋቸውን፣

የሞሎክን ድንኳንና የጣዖታችሁን፣

የሬምፉምን ኮከብ ከፍ ከፍ አድርጋችሁ ያዛችሁ።

ስለዚህ እኔም እንድትጋዙ አደርጋለሁ፤ ከባቢሎንም ወዲያ እሰዳችኋለሁ።

44“እግዚአብሔር ለሙሴ ባሳየው ንድፍና ባዘዘው መሠረት የተሠራችው የምስክር ድንኳን፣ ከአባቶቻችን ጋር በምድረ በዳ ነበረች። 45አባቶቻችንም ድንኳንዋን ከተቀበሉ በኋላ፣ እግዚአብሔር በኢያሱ መሪነት ያሳደዳቸውን የአሕዛብን አገር በወረሱ ጊዜ ይዘዋት ገቡ፤ እስከ ዳዊትም ዘመን ድረስ በምድሪቱ ተቀመጠች፤ 46ዳዊትም በእግዚአብሔር ፊት ሞገስ በማግኘቱ ለያዕቆብ7፥46 አንዳንድ የጥንት ቅጆች የያዕቆብ ቤት ይላሉ። አምላክ ማደሪያ ያዘጋጅ ዘንድ ለመነ፤ 47ነገር ግን የማደሪያውን ቤት የሠራለት ሰሎሞን ነበር።

48“ይሁን እንጂ፣ ልዑል የሰው እጅ በሠራው ቤት ውስጥ አይኖርም፤ ይህም ነቢዩ እንዲህ ባለው መሠረት ነው፤

49“ ‘ሰማይ ዙፋኔ ነው፤

ምድርም የእግሬ ማሳረፊያ ናት፤

ታዲያ ምን ዐይነት ቤት ትሠሩልኛላችሁ?

ይላል ጌታ፤

ወይንስ ማረፊያ የሚሆነኝ የትኛው ቦታ ነው?

50ይህን ሁሉ የሠራው እጄ አይደለምን?’

51“እናንት ልባችሁና ጆሮአችሁ ያልተገረዘ፣ አንገተ ደንዳኖች ልክ እንደ አባቶቻችሁ መንፈስ ቅዱስን ሁል ጊዜ ትቃወማላችሁ። 52ከነቢያት መካከል አባቶቻችሁ ያላሳደዱት ማን አለ? የጻድቁን መምጣት አስቀድመው የተናገሩትን እንኳ ገድለዋል፤ እናንተም አሁን አሳልፋችሁ ሰጣችሁት፤ ገደላችሁትም፤ 53በመላእክት አማካይነት የተሰጣችሁንም ሕግ ተቀበላችሁ እንጂ አልጠበቃችሁትም።”

የእስጢፋኖስ መወገር

54በሸንጎው ስብሰባ ላይ የነበሩትም ይህን በሰሙ ጊዜ እጅግ ተጡ፤ ጥርሳቸውንም አፋጩበት። 55እስጢፋኖስ ግን በመንፈስ ቅዱስ ተሞልቶ ወደ ሰማይ ትኵር ብሎ ሲመለከት፣ የእግዚአብሔርን ክብር፣ እንዲሁም ኢየሱስ በእግዚአብሔር ቀኝ ቆሞ አየና፣ 56“እነሆ፤ ሰማያት ተከፍተው፣ የሰው ልጅም በእግዚአብሔር ቀኝ ቆሞ አያለሁ” አለ።

57በዚህ ጊዜ በታላቅ ድምፅ እየጮኹ ጆሮአቸውን ደፍነው እርሱ ወደ አለበት በአንድነት ሮጡ፤ 58ይዘውም ከከተማው ውጭ ጣሉት፤ በድንጋይም ይወግሩት ጀመር። ይህ በሚሆንበት ጊዜ በዚያ የነበሩ ምስክሮችም ልብሳቸውን ሳውል በተባለ ጒልማሳ እግር አጠገብ አስቀመጡ።

59እስጢፋኖስም እየወገሩት ሳለ፣ “ጌታ ኢየሱስ ሆይ፤ ነፍሴን ተቀበላት” ብሎ ጸለየ፤ 60ከዚያም ተንበርክኮ፤ በታላቅ ድምፅ፣ “ጌታ ሆይ! ይህን ኀጢአት አትቍጠርባቸው” ብሎ ጮኸ፤ ይህን ካለ በኋላም አንቀላፋ።

Hindi Contemporary Version

प्रेरित 7:1-60

महासभा को स्तेफ़ानॉस का संबोधन

1महापुरोहित ने उनसे प्रश्न किया, “क्या यह आरोप सच है?”

2स्तेफ़ानॉस ने उसे उत्तर दिया, “आदरणीय गुरुवर और बंधुओं,” कृपया सुनिए: महामहिम परमेश्वर ने हमारे पूर्वज अब्राहाम को उनके हारान प्रदेश में आकर बसने के पूर्व, जब वह मेसोपोतामिया में थे, दिव्य दर्शन देते हुए आज्ञा दी: 3अपने पिता के घर तथा अपने रिश्तेदारों को छोड़कर उस देश को चला जा, जो मैं तुझे दिखाऊंगा.7:3 उत्प 12:1

4“इसलिये वह कसदियों के देश को छोड़कर हारान नगर में बस गए. इसके बाद उनके पिता की मृत्यु के बाद, परमेश्वर उन्हें इस भूमि पर ले आए जिस पर आप निवास कर रहे हैं. परमेश्वर ने उन्हें इस भूभाग का कोई उत्तराधिकार नहीं दिया; 5यहां तक कि पैर रखने का भी स्थान नहीं. किंतु परमेश्वर ने उनके उस समय निःसंतान होने पर भी उनसे यह प्रतिज्ञा की कि उनके बाद वह उनके वंशजों को यह भूमि उनकी संपत्ति के रूप में प्रदान करेंगे. 6तब परमेश्वर ने अब्राम से कहा, ‘यह सच है तुम्हारे वंश के लोग पराए देश में परदेशी होकर रहेंगे, जहां उन्हें दास बना लिया जाएगा, और उन्हें चार सौ वर्ष तक दुख देंगे.7:6 उत्प 15:13 7फिर जिस देश के वे दास होंगे, उस देश के लोगों को मैं दंड दूंगा, फिर तुम्हारे वंश के लोग वहां से बहुत धन लेकर निकलेंगे.’7:7 उत्प 15:13-14 8परमेश्वर ने अब्राहाम के साथ ख़तना की वाचा स्थापित की. जब अब्राहाम के पुत्र यित्सहाक का जन्म हुआ, तो आठवें दिन उनका ख़तना किया गया. यित्सहाक के पुत्र थे याकोब और याकोब से बारह कुलपिता उत्पन्न हुए.

9“जलन के कारण कुलपिताओं ने योसेफ़ को मिस्र देश में बेच दिया किंतु परमेश्वर की कृपादृष्टि योसेफ़ पर बनी रही. 10इसलिये परमेश्वर ने योसेफ़ को सभी यातनाओं से मुक्त कर उन्हें बुद्धि प्रदान की और मिस्र देश के राजा फ़रोह की कृपादृष्टि प्रदान की तथा फ़रोह ने उन्हें मिस्र देश और पूरे राजभवन पर अधिकारी बना दिया.

11“तब सारे मिस्र और कनान देश में अकाल पड़ा जिससे हर जगह हाहाकार मच गया और हमारे पूर्वजों के सामने भोजन का अभाव हो गया. 12किंतु जब याकोब को यह मालूम हुआ कि मिस्र देश में अन्न उपलब्ध है, उन्होंने हमारे पूर्वजों को अन्न लेने वहां भेजा, जिनकी यह पहली मिस्र की यात्रा थी. 13जब वे अन्न लेने वहां दूसरी बार गए, योसेफ़ ने स्वयं को अपने भाइयों पर प्रकट कर दिया, जिससे फ़रोह योसेफ़ के परिवार से परिचित हो गया. 14तब योसेफ़ ने अपने पिता और सारे परिवार को, जिनकी संख्या पचहत्तर थी, मिस्र देश में बुला लिया. 15तब याकोब मिस्र देश में बस गए और वहीं उनकी और हमारे पूर्वजों की मृत्यु हुई. 16उनके अवशेष शेकेम नगर लाए गए तथा उन्हें अब्राहाम द्वारा मोल ली गई कंदरा-क़ब्र में रखा गया, जिसे अब्राहाम ने शेकेम नगर के निवासी हामोर के पुत्रों को दाम देकर खरीदा था.

17“जब परमेश्वर द्वारा अब्राहाम से की गई प्रतिज्ञा को पूरी करने का समय आया तब मिस्र देश में हमारे पूर्वजों की संख्या में कई गुणा वृद्धि हो चुकी थी. 18उस समय मिस्र में एक नया राजा बना, जो योसेफ़ को नहीं जानता था.7:18 निर्ग 1:8 19उसने हमारे पूर्वजों के साथ चालाकी से बुरा व्यवहार किया और नवजात शिशुओं को नाश करने के लिए विवश किया कि एक भी शिशु बचा न रहे.

20“इसी काल में मोशेह का जन्म हुआ. वह परमेश्वर की दृष्टि में चाहने योग्य थे. तीन माह तक उनका पालन पोषण उनके पिता के ही परिवार में हुआ. 21जब उनको छुपाए रखना असंभव हो गया, तब फ़रोह की पुत्री उन्हें ले गई. उसने उनका पालन पोषण अपने पुत्र जैसे किया. 22मिस्र देश की सारी विद्या में मोशेह को प्रशिक्षित किया गया. वह बातचीत और कर्तव्य-पालन करने में प्रभावशाली थे.

23“जब मोशेह लगभग चालीस वर्ष के हुए, उनके मन में अपने इस्राएली बंधुओं से भेंट करने का विचार आया. 24वहां उन्होंने एक इस्राएली के साथ अन्याय से भरा व्यवहार होते देख उसकी रक्षा की तथा सताए जानेवाले के बदले में मिस्रवासी की हत्या कर दी. 25उनका विचार यह था कि उनके इस काम के द्वारा इस्राएली यह समझ जाएंगे कि परमेश्वर स्वयं उन्हीं के द्वारा इस्राएलियों को मुक्त करा रहे हैं किंतु ऐसा हुआ नहीं. 26दूसरे दिन जब उन्होंने आपस में लड़ते हुए दो इस्राएलियों के मध्य यह कहते हुए मेल-मिलाप का प्रयास किया, ‘तुम भाई-भाई हो, क्यों एक दूसरे को आहत करना चाह रहे हो?’

27“उस अन्याय करनेवाले इस्राएली ने मोशेह को धक्का देते हुए कहा, ‘किसने तुम्हें हम पर राजा और न्याय करनेवाला ठहराया है? 28कहीं तुम्हारा मतलब कल उस मिस्री जैसे मेरी भी हत्या का तो नहीं है? बोलो!’7:28 निर्ग 2:14 29यह सुन मोशेह वहां से भाग खड़े हुए और मिदियन देश में परदेशी होकर रहने लगे. वहां उनके दो पुत्र उत्पन्न हुए.

30“चालीस वर्ष व्यतीत होने पर सीनाय पर्वत के जंगल में एक जलती हुई कंटीली झाड़ी आग की लौ में उन्हें एक स्वर्गदूत दिखाई दिया. 31इस दृश्य ने उन्हें आश्चर्यचकित कर दिया. जब वह इसे नज़दीकी से देखने के उद्देश्य से झाड़ी के पास गए तो परमेश्वर ने उनसे कहा: 32‘मैं तुम्हारे पूर्वजों के पिता अर्थात अब्राहाम, यित्सहाक तथा याकोब का परमेश्वर हूं.’7:32 निर्ग 3:6 मोशेह भय से कांपने लगे और ऊपर आंख उठाने का साहस न कर सके.

33“प्रभु ने मोशेह से कहा, अपनी पैरों से जूती उतार दो, क्योंकि यह स्थान, जिस पर तुम खड़े हो, पवित्र है. 34मिस्र देश में मेरी प्रजा पर हो रहा अत्याचार मैंने अच्छी तरह से देखा है. ‘मैंने उनका कराहना भी सुना है. मैं उन्हें मुक्त कराने नीचे उतर आया हूं. सुनो, मैं तुम्हें मिस्र देश भेजूंगा.’7:34 निर्ग 3:5, 7, 8, 10

35“यह वही मोशेह हैं, जिन्हें इस्राएलियों ने यह कहते हुए अस्वीकार कर दिया था, ‘किसने तुम्हें हम पर राजा और न्याय करनेवाला ठहराया है?’ परमेश्वर ने उन्हीं को उस स्वर्गदूत द्वारा, जो झाड़ी में उन्हें दिखाई दिया था, राजा तथा छुड़ानेवाला ठहराकर भेज दिया. 36यह वही मोशेह थे, जिन्होंने उनका नायक होकर उन्हें बाहर निकाला और मिस्र देश, लाल सागर तथा चालीस वर्ष जंगल में अद्भुत चिह्न दिखाते हुए उनका मार्गदर्शन किया.

37“यही थे वह मोशेह, जिन्होंने इस्राएल की संतान के सामने यह घोषणा पहले से ही की थी, ‘तुम्हारे ही देशवासियों में से परमेश्वर मेरे ही समान एक भविष्यवक्ता को उठाएंगे.’7:37 व्यव 18:15 38यह वही हैं, जो जंगल में इस्राएली समुदाय में उस स्वर्गदूत के साथ मौजूद थे, जिसने उनसे सीनाय पर्वत पर बातें की और जो हमारे पूर्वजों के साथ थे तथा मोशेह ने तुम्हें सौंप देने के लिए जिनसे जीवित वचन प्राप्त किए.

39“हमारे पूर्वज उनके आज्ञापालन के इच्छुक नहीं थे. वे मन ही मन मिस्र देश की कामना करने लगे. 40वे हारोन से कहते रहे, ‘हमारे आगे-आगे जाने के लिए देवताओं को स्थापित करो. इस मोशेह की, जो हमें मिस्र साम्राज्य से बाहर लेकर आया है, कौन जाने क्या हुआ!’7:40 निर्ग 32:1 41तब उन्होंने बछड़े की एक मूर्ति बनाई, उसे बलि चढ़ाई तथा अपने हाथों के कामों पर उत्सव मनाने लगे. 42इससे परमेश्वर ने उनसे मुंह मोड़कर उन्हें नक्षत्रों की उपासना करने के लिए छोड़ दिया, जैसा भविष्यद्वक्ताओं के अभिलेख में लिखा है:

“ ‘हे इस्राएल के वंशजों, निर्जन प्रदेश में चालीस साल तक

क्या तुमने मुझे बलिदान और भेंट चढ़ाया?

43तुमने देवता मोलेक की वेदी की स्थापना की,

अपने देवता रेफ़ान के तारे को ऊंचा किया

और उन्हीं की मूर्तियों को आराधना के लिए स्थापित किया.

इसलिये मैं तुम्हें बाबेल से दूर’ निकाल ले जाऊंगा.7:43 आमो 5:25-27

44“जंगल में गवाही का तंबू हमारे पूर्वजों के पास था.7:44 निर्ग 25:22 इसका निर्माण ठीक-ठीक परमेश्वर द्वारा मोशेह को दिए गए निर्देश के अनुसार किया गया था, जिसका आकार स्वयं मोशेह देख चुके थे. 45हमारे पूर्वज इस गवाही के तंबू को योशुआ के नेतृत्व में अपने साथ उस भूमि पर ले आए, जिसे उन्होंने अपने अधिकार में ले लिया था और जहां से परमेश्वर ने हमारे पूर्वजों के सामने से राष्ट्रों को निकाल दिया था. ऐसा दावीद के समय तक रहा. 46दावीद पर परमेश्वर की कृपादृष्टि थी. दावीद ने उनसे याकोब के परमेश्वर के लिए एक निवास स्थान बनाने की आज्ञा चाही. 47किंतु इस भवन का निर्माण शलोमोन द्वारा किया गया.

48“सच तो यह है कि, परम प्रधान परमेश्वर मनुष्य के हाथ से बने भवन में वास नहीं करते. भविष्यवक्ता की घोषणा है:

49“ ‘स्वर्ग मेरा सिंहासन

तथा पृथ्वी मेरे पैरों की चौकी है.

किस प्रकार का घर बनाओगे तुम मेरे लिए?

परमेश्वर का कहना है,

या कहां होगा मेरा विश्राम स्थान?

50क्या ये सभी मेरे ही हाथों की रचना नहीं?’7:50 यशा 66:1, 2

51“आप, जो हठीले हृदय और कान के ख़तना रहित लोग हैं, हमेशा पवित्रात्मा का विरोध करते रहते हैं. आप ठीक वही कर रहे हैं, जो आपके पूर्वजों ने किया. 52क्या कभी भी कोई ऐसा भविष्यवक्ता हुआ है, जिसे आपके पूर्वजों ने सताया न हो? यहां तक कि उन्होंने तो उन भविष्यद्वक्ताओं की हत्या भी कर दी जिन्होंने उस धर्मी जन के आगमन की पहले से ही घोषणा की थी. यहां उसी की हत्या करके आप लोग विश्वासघाती और हत्यारे बन गए हैं. 53आप वही हैं जिन्हें स्वर्गदूतों द्वारा प्रभावशाली व्यवस्था सौंपी गई थी, फिर भी आपने उसका पालन नहीं किया.”

स्तेफ़ानॉस का पथराव—शाऊल भी एक उत्पीड़क

54यह सुन सारे सुननेवाले तिलमिला उठे और स्तेफ़ानॉस पर दांत पीसने लगे. 55किंतु पवित्रात्मा से भरकर स्तेफ़ानॉस ने जब अपनी दृष्टि स्वर्ग की ओर उठाई, उन्होंने परमेश्वर की महिमा को और मसीह येशु को परमेश्वर के दाहिनी ओर खड़े हुए देखा. 56स्तेफ़ानॉस ने सुननेवालों को संबोधित करते हुए कहा, “वह देखिए! मुझे स्वर्ग खुला हुआ तथा मनुष्य का पुत्र परमेश्वर के दाहिनी ओर खड़े हुए दिखाई दे रहे हैं.”

57यह सुनते ही सुननेवालों ने चीखते हुए अपने कानों पर हाथ रख लिए. फिर वे गुस्से में स्तेफ़ानॉस पर एक साथ टूट पड़े. 58उन्होंने स्तेफ़ानॉस को पकड़ा और घसीटते हुए नगर के बाहर ले गए और वहां उन्होंने पथराव करके उनकी हत्या कर दी. इस समय उन्होंने अपने बाहरी कपड़े शाऊल नामक युवक के पास रख छोड़े थे.

59जब वे स्तेफ़ानॉस का पथराव कर रहे थे, स्तेफ़ानॉस ने प्रभु से इस प्रकार प्रार्थना की, “प्रभु येशु, मेरी आत्मा को स्वीकार कीजिए.” 60तब उन्होंने घुटने टेककर ऊंचे शब्द में यह कहा, “प्रभु, इन्हें इस पाप का दोषी न ठहराना.” यह कहते हुए स्तेफ़ानॉस लंबी नींद में सो गए.