New Amharic Standard Version

ዘፍጥረት 20:1-18

አብርሃምና አቤሜሌክ

20፥1-18 ተጓ ምብ – ዘፍ 12፥10-20፤ 26፥1-11

1አብርሃም ከዚያ ተነሥቶ ወደ ኔጌብ አካባቢ ሄዶ በቃዴስና በሱር መካከል ሰፈረ፤ ለጥቂት ጊዜም በጌራራ ተቀመጠ። 2በዚያም አብርሃም ሚስቱን ሣራን፣ “እህቴ ናት” ይል ነበር። ስለዚህ የጌራራ ንጉሥ አቢሜሌክ መልእክተኛ ልኮ ሣራን ወሰዳት።

3እግዚአብሔርም (ኤሎሂም) በአንድ ሌሊት በሕልም ወደ አቢሜሌክ መጥቶ፣ “እነሆ፤ በወሰድሃት ሴት ምክንያት ምውት ነህ፤ እርሷ ባለ ባል ናት” አለው።

4አቢሜሌክም ገና አልደረሰባትም ነበርና እንዲህ አለ፤ “ጌታ ሆይ፤ በደል ያልፈጸመውን ሕዝብ ታጠፋለህን? 5‘እኅቴ ናት’ ያለኝ ራሱ አይደለምን? ደግሞስ ራሷም ብትሆን፣ ‘ወንድሜ ነው’ አላለችምን? እኔ ይህን ያደረግሁት በቅን ልቦናና በንጹሕ እጅ ነው።”

6እግዚአብሔርም (ኤሎሂም) በሕልሙ እንዲህ አለው፤ “አንተ ይህን ያደረግኸው በቅን ልቦና መሆኑን ዐውቄአለሁ፤ በእኔም ላይ ኀጢአት እንዳትሠራ የጠበቅሁህና እንዳትነካትም ያደረግሁት ለዚሁ ነው። 7አሁንም ሚስቱን ለሰውዬው መልስለት፤ ነቢይ ነውና ይጸልይልሃል፤ አንተም ትድናለህ፤ ባትመልስለት ግን አንተም ሆንህ የአንተ የሆነ ሁሉ እንደምትሞቱ ዕወቅ።”

8በማግስቱም ማለዳ፣ አቢሜሌክ ሹማምቱን ሁሉ ጠርቶ፣ የሆነውን ሁሉ ነገራቸው፤ እነርሱም ታላቅ ፍርሀት አደረባቸው። 9ከዚያም አቢሜሌክ አብርሃምን አስጠርቶ እንዲህ አለው፤ “ይህ ያደረግህብን ነገር ምንድን ነው? ምን በደልሁህና ነው በእኔና በግዛቴ ላይ እንዲህ ያለውን ታላቅ የጥፋት መዘዝ ያመጣብህን? በእውነቱ መደረግ የማይገባውን ነው ያደረግህብን።” 10ከዚያም አቢሜሌክ፣ “ለመሆኑ ይህን ያደረግህበት ምክንያት ምንድን ነው?” ሲል አብርሃምን ጠየቀው።

11አብርሃምም አቢሜሌክን እንዲህ አለው፤ “እዚህ ቦታ ፈሪሀ እግዚአብሔር (ኤሎሂም) አለመኖሩን ተገነዘብሁ፤ ሰዎቹም ለሚስቴ ሲሉ ይገድሉኛል ብዬ ሠጋሁ፤ 12ደግሞም እኮ በእርግጥ እኅቴ ናት፤ ከአንድ እናት ባንወለድም በአባት አንድ ነን፤ ኋላም አገባኋት። 13እግዚአብሔር (ኤሎሂም) አዞኝ ከአባቴ ቤት ወጥቼ በየአገሩ ስዞር፣ ‘ለእኔ ያለሽን ፍቅር በዚህ ግለጭልኝ፤ በየደረስንበት ስፍራ ሁሉ “እርሱ ወንድሜ ነው” በዪ’ ብያት ነበር።”

14ከዚያም አቢሜሌክ፣ በጎችና የቀንድ ከብቶች፣ ወንድና ሴት አገልጋዮችን ለአብርሃም ሰጠው፤ ሚስቱን ሣራንም መለሰለት። 15አቢሜሌክም አብርሃምን፣ “እነሆ፤ አገሬ አገርህ ናት፤ በፈቀድህበት ስፍራ መኖር ትችላለህ” አለው።

16ሣራንም፣ “እነሆ፤ ለወንድምሽ ለአብርሃም 1000 ጥሬ ብር20፥16 11.5 ኪ.ግ. ገደማ ይሆናል። እሰጠዋለሁ፤ ይህም በአንቺ ላይ ለተፈጸመው በደል ካሣ እንዲሆንና አብረውሽ ያሉ ሁሉ እንዲያውቁት ነው፤ በዚህም ንጽሕናሽ ይረጋገጣል” አላት።

17ከዚያም አብርሃም ወደ እግዚአብሔር (ኤሎሂም) ጸለየ፤ እግዚአብሔርም (ኤሎሂም) አቢሜሌክን፣ ሚስቱንና ሴት አገልጋዮቹን ፈወሳቸው፤ እንደ ገናም ልጅ ለመውለድ በቁ። 18እግዚአብሔር (ያህዌ) በአብርሃም ሚስት በሣራ ምክንያት፣ በአቢሜሌክ ቤት የሚገኙትን ሴቶች ማሕፀናቸውን ሁሉ ዘግቶ ነበርና።

Hindi Contemporary Version

उत्पत्ति 20:1-18

अब्राहाम और अबीमेलेक

1फिर अब्राहाम नेगेव देश की ओर गया तथा कादेश और शूर के बीच में रहने लगा, कुछ समय तक वह गेरार में रहा, 2और वहां अब्राहाम ने अपनी पत्नी साराह के विषय में कहा, “वह मेरी बहन है.” और गेरार के राजा अबीमेलेक ने साराह को बुलवाया तथा अपने महल में रखा.

3परंतु एक रात परमेश्वर ने स्वप्न में अबीमेलेक से कहा, “तू एक मृत व्यक्ति की तरह है, क्योंकि जिस स्त्री को तुमने ले लिया है, वह एक विवाहित स्त्री है.”

4फिर अबीमेलेक ने परमेश्वर से कहा, “हे प्रभु, क्या आप एक निर्दोष जाति को नाश करेंगे? 5क्या उसने मुझसे नहीं कहा, ‘वह मेरी बहन है,’ और क्या साराह ने भी नहीं कहा, ‘वह मेरा भाई है’? मैंने यह काम साफ विवेक और स्वच्छ मन से किया है.”

6तब स्वप्न में ही परमेश्वर ने उससे कहा, “मुझे मालूम है कि तुमने यह काम साफ मन से किया है, इसलिये मैंने तुमको मेरे विरुद्ध में पाप करने से रोक रखा है. इसी कारण से मैंने तुम्हें उसे छूने नहीं दिया है. 7अब तुम उसकी पत्नी को उसे लौटा दो, क्योंकि वह एक नबी है. वह तुम्हारे लिए प्रार्थना करेगा और तुम जीवित रहोगे. पर यदि तुम उसकी पत्नी को न लौटाओगे, तो तुम यह निश्चित जान लो कि तुम और तुम्हारे सारे लोग मर जायेंगे.”

8अबीमेलेक ने अगले दिन बड़े सुबह अपने सब कर्मचारियों को बुलवाया, और उन्हें सब बातें बताई, जिसे सुनकर वे बहुत डर गये. 9तब अबीमेलेक ने अब्राहाम को भीतर बुलवाया और उससे कहा, “तुमने हमसे ये क्या किया? मैंने तुम्हारा क्या बिगाड़ा है कि तुमने मेरे और मेरे राज्य को इस मुसीबत में डाल दिया है? तुमने मेरे साथ ऐसा काम किया है जो कभी नहीं करना चाहिए.” 10अबीमेलेक ने अब्राहाम से यह भी पूछा, “ऐसा करने का कारण क्या है?”

11अब्राहाम ने कहा, “मैंने अपने मन में सोचा, ‘इस नगर में निश्चित रूप से कोई परमेश्वर से नहीं डरता, और वे लोग मुझे मेरी पत्नी के कारण मार डालेंगे.’ 12इसके बावजूद, वह सही में मेरी बहन ही है, मेरे पिता की बेटी है, पर मेरी मां की बेटी नहीं है; और वह मेरी पत्नी हो गई. 13और जब परमेश्वर ने मुझे अपने पिता का घर छोड़कर निकलने को कहा, तब मैंने ही अपनी पत्नी से यह कहा, ‘तुम इस प्रकार से अपना प्रेम मेरे प्रति दिखा सकती हो: जहां भी हम जाएं, तुम मेरे बारे में यही कहना, “यह मेरा भाई है.” ’ ”

14तब अबीमेलेक ने भेड़, बछड़े, सेवक तथा सेविकाएं लाकर अब्राहाम को दिया, और उसकी पत्नी साराह को भी उसे लौटा दिया. 15और अबीमेलेक ने अब्राहाम से कहा, “मेरा पूरा देश तुम्हारे सामने है; तुम जहां चाहे, वहां रह सकते हो.”

16साराह से उसने कहा, “मैं तुम्हारे भाई को चांदी के एक हजार टुकड़े दे रहा हूं. यह तेरे साथ के लोगों के सामने उस अपराध की भरपाई है, जिसे मैंने तेरे विरुद्ध किया है; तू पूरी तरह से निर्दोष है.”

17तब अब्राहाम ने परमेश्वर से प्रार्थना की, और परमेश्वर ने अबीमेलेक, उसकी पत्नी तथा उसकी सेविकाओं को चंगा किया कि वे फिर से संतान पैदा करने लगें, 18क्योंकि याहवेह ने अब्राहाम की पत्नी साराह के कारण अबीमेलेक के परिवार की सभी स्त्रियों की कोखों को बंद कर दिया था.