Habrit Hakhadasha/Haderekh

הבשורה על-פי מרקוס 5:1‏-43

1‏-2בהגיעם אל הגדה השנייה של הכינרת ירד ישוע מהסירה, והנה רץ לקראתו מכיוון בית־הקברות איש אחוז רוח רעה. 3‏-4איש זה גר בבית־הקברות והיה בעל כוח פיזי אדיר. בכל פעם שאסרו אותו בכבלים ושרשרות הוא היה מנתק אותם בקלות ויוצא לחופשי. איש לא היה יכול להתגבר עליו. 5יומם ולילה נהג להסתובב כמשוגע בין הקברים ועל ההרים, צועק ופוצע את עצמו באבנים חדות.

6בראותו את ישוע מרחוק, רץ האיש לקראתו ונפל לרגליו.

7‏-8ישוע פקד על השד שבתוך האיש: ”צא החוצה, שד!“ השד צעק צעקה מחרידה: ”מה אתה עומד לעשות לי, ישוע בן אל־עליון? למען אלוהים, אל תייסר אותי!“

9”מה שמך?“ שאל ישוע.

”לגיון“, השיב השד. ”אינני לבדי; אנחנו כאן שדים רבים.“ 10השדים התחננו לפני ישוע שלא ישלח אותם למקום נידח.

11בקרבת המקום היה עדר גדול של חזירים שרעה במורד ההרים. 12”שלח אותנו לתוך החזירים האלה“, התחננו השדים. 13ישוע הסכים, והם יצאו מהאיש ונכנסו לתוך החזירים. כל החזירים (בערך אלפיים) דהרו בטירוף במורד ההר ישר לתוך הים וטבעו.

14רועי החזירים ברחו לערים ולכפרים שבסביבה, וסיפרו לכולם מה שקרה. כל האנשים רצו מיד אל המקום כדי לראות את המחזה במו עיניהם. 15עד מהרה התאספו אנשים רבים ליד ישוע, אולם כשראו את האיש יושב לרגלי ישוע לבוש היטב ושפוי בדעתו, נמלאו פחד. 16עדי ראייה סיפרו לבאים מה שהתרחש, 17והאנשים התחננו לפני ישוע שילך משם ויעזוב אותם לנפשם. 18כשחזר ישוע לסירה התחנן לפניו האיש שיצאו ממנו השדים שירשה לו להצטרף אליו. 19אולם ישוע לא הסכים לכך.

”לך הביתה למשפחתך ולחבריך“, אמר ישוע. ”ספר להם כיצד ריחם עליך אלוהים, ואיזה נס חולל בך.“

20האיש הלך לבקר בעשר הערים הגדולות וסיפר לאנשים על הפלא הגדול שחולל ישוע, וכולם התפלאו מאוד.

21ישוע חצה בסירתו את הכינרת והגיע אל הגדה שממול, שם כבר חיכה לו קהל רב.

22אחד מראשי בית־הכנסת המקומי, יאיר שמו, נפל לפני ישוע 23והתחנן בפניו שירפא את בתו הקטנה. ”בתי גוססת“, קרא יאיר בייאוש. ”אנא, בוא לביתי ושים את ידיך עליה, כדי שתבריא ותחיה.“

24ישוע הלך עם יאיר, והקהל הגדול הלך אחריהם, נדחף ונדחק סביב ישוע. 25בקרב הקהל הייתה אישה שסבלה משטף דם מתמיד במשך שתים־עשרה שנה. 26היא סבלה קשות מטיפולים של רופאים שונים, ולאחר שהוציאה את כל כספה, לא זו בלבד שמצבה לא השתפר, הוא אף החמיר! 27היא שמעה על המעשים שישוע עשה, ולכן הלכה אחריו ונגעה בבגדו.

28”אם רק אצליח לגעת בבגדיו אהיה בריאה“, חשבה לעצמה. 29ואכן, ברגע שנגעה בבגדו פסק שטף הדם, והאישה ידעה שנרפאה.

30באותו רגע הרגיש ישוע שיצא ממנו כוח ריפוי. הוא הסתובב לאחור ושאל: ”מי נגע בי?“ 31תלמידיו התפלאו על השאלה המשונה והשיבו: ”ראה כמה אנשים נדחפים אליך מכל צד, ואתה שואל מי נגע בך?“

32אולם ישוע התעלם מהערתם והמשיך להסתכל סביבו, מחפש את מי שנגע בו. 33האישה, אשר ידעה כי נרפאה, התקרבה אליו, נפלה לרגליו בפחד ובחרדה וסיפרה לו את כל האמת. 34”בתי, אמונתך ריפאה אותך!“ אמר לה ישוע. ”היי בריאה ולכי לשלום.“

35בזמן שישוע דיבר אל האישה, הגיעו למקום שליחים מביתו של יאיר והודיע לאב: ”בתך מתה; אין צורך להטריח את המורה.“ 36אולם ישוע התעלם מכך ואמר ליאיר: ”אל תפחד; רק תאמין!“

37ישוע עצר את הקהל ולא הרשה לאיש ללכת איתו, פרט לפטרוס, יעקב ויוחנן. 38בהגיעם לביתו של יאיר מצאו את כולם בוכים ומתאבלים על מות הילדה. 39ישוע נכנס פנימה ושאל את האנשים: ”מדוע אתם בוכים ומתרגשים? הילדה לא מתה; היא רק ישנה.“

40כל הנוכחים לעגו לו, אולם הוא לא שם לב לכך וביקש מכולם לצאת משם. הוא לקח את ההורים ואת תלמידיו ונכנס איתם לחדרה של הילדה.

41‏-42ישוע אחז בידה של הילדה וקרא: ”טליתא, קומי!“ (כלומר: ”קומי, ילדה!“) היא הייתה בת 12 והיא אכן קמה ממיטתה והתהלכה בבית. הוריה התפלאו מאוד, 43אך ישוע הזהיר אותם שלא יספרו לאף אחד מה שקרה, וביקש שיתנו לילדה משהו לאכול.

Hindi Contemporary Version

मार्का 5:1-43

प्रेतात्मा से पीड़ित व्यक्ति

1तब वे झील के दूसरे तट पर गिरासेनॉस क्षेत्र में आए. 2मसीह येशु के नाव से नीचे उतरते ही एक मनुष्य जिसमें अशुद्ध आत्मा थी कब्र से निकलकर उनके पास आया. 3वह कब्रों के मध्य ही रहा करता था. अब कोई भी उसे सांकलों तथा बेड़ियों से भी बांध पाने में समर्थ न था. 4बहुधा उसे बेड़ियों तथा सांकलों में बांधे जाने के प्रयास किए गए किंतु वह सांकलों को तोड़ देता तथा बेड़ियों के टुकड़े-टुकड़े कर डालता था. अब किसी में इतनी क्षमता न थी कि उसे वश में कर सके. 5रात-दिन कब्रों के मध्य तथा पहाड़ियों में वह चिल्लाता रहता था तथा स्वयं को पत्थर मार-मार कर घायल कर लेता था.

6दूर से ही जब उसने मसीह येशु को देखा, वह दौड़कर उनके पास आया, अपना सिर झुकाया 7और उसमें से ऊंची आवाज में ये शब्द सुनाई दिए, “परम प्रधान परमेश्वर के पुत्र येशु! मेरा आपका कोई लेनदेन नहीं. आपको परमेश्वर की शपथ, मुझे कोई कष्ट न दें,” 8क्योंकि मसीह येशु उसे आज्ञा दे चुके थे, “ओ दुष्टात्मा, इस मनुष्य में से निकल आ!”

9तब मसीह येशु ने उससे प्रश्न किया, “क्या नाम है तेरा?”

प्रेत ने उत्तर दिया, “सेना5:9 मूल में लेगिओन—क्योंकि हम बहुत हैं.” 10प्रेत मसीह येशु से विनती करने लगा कि वह उसे उस प्रदेश से बाहर न भेजें.

11वहीं पहाड़ी पर सूअरों का एक विशाल झुंड चर रहा था. 12प्रेत-समूह ने मसीह येशु से विनती की, “हमें इन सूअरों में भेज दीजिए कि हम उनमें जा बसें.” 13मसीह येशु ने उन्हें यह आज्ञा दे दी. वे प्रेत बाहर निकलकर उन सूअरों में प्रवेश कर गए. लगभग दो हज़ार सूअरों का वह झुंड पहाड़ की तीव्र ढलान पर तेज गति से दौड़ता हुआ झील में जा डूबा.

14भयभीत रखवाले भाग गए तथा नगर और पास के क्षेत्रों में जाकर इस घटना के विषय में बताने लगे. नगरवासी, जो कुछ हुआ था, उसे देखने वहां आने लगे. 15जब वे मसीह येशु के पास पहुंचे, उन्होंने देखा कि वह प्रेतात्मा से पीड़ित व्यक्ति वस्त्र धारण किए हुए सचेत स्थिति में वहां बैठा था. यह वही व्यक्ति था जिसमें प्रेतों की सेना पैठी थी. यह देख वे डर गए. 16सारे घटनाक्रम को देखनेवाले लोगों ने उनके सामने इसका बयान किया कि प्रेतात्मा से पीड़ित व्यक्ति तथा सूअरों के साथ क्या-क्या हुआ है. 17इस पर वे मसीह येशु से विनती करने लगे कि वह उनके क्षेत्र से बाहर चले जाएं.

18जब मसीह येशु नाव पर सवार हो रहे थे, प्रेतों से विमुक्त हुआ व्यक्ति मसीह येशु से विनती करने लगा कि उसे उनके साथ ले लिया जाए. 19मसीह येशु ने उसे इसकी अनुमति नहीं दी परंतु उसे आदेश दिया, “अपने परिजनों के पास लौट जाओ और उन्हें बताओ कि तुम्हारे लिए प्रभु ने कैसे-कैसे आश्चर्यकर्म किए हैं तथा तुम पर उनकी कैसी कृपादृष्टि हुई है.” 20वह देकापोलिस नगर में गया और उन कामों का वर्णन करने लगा, जो मसीह येशु ने उसके लिए किए थे. यह सुन सभी चकित रह गए.

पीड़ित स्त्री की चंगाई तथा मरी हुई बालिका का नया जीवन

21मसीह येशु दोबारा झील के दूसरे तट पर चले गए. एक बड़ी भीड़ उनके पास इकट्ठी हो गयी. मसीह येशु झील तट पर ही रहे. 22स्थानीय यहूदी सभागृह का एक अधिकारी, जिसका नाम जाइरूस था, वहां आया. यह देख कि वह कौन हैं, वह उनके चरणों पर गिर पड़ा. 23बड़ी ही विनती के साथ उसने मसीह येशु से कहा, “मेरी बेटी मरने पर है. कृपया चलिए और उस पर हाथ रख दीजिए कि वह स्वस्थ हो जाए और जीवित रहे.” 24मसीह येशु उसके साथ चले गए.

बड़ी भीड़ भी उनके पीछे-पीछे चल रही थी और लोग उन पर गिरे पड़ते थे. 25एक स्त्री बारह वर्ष से रक्तस्राव से पीड़ित थी. 26अनेक चिकित्सकों के हाथों उसने अनेक पीड़ाएं सही थी. इसमें वह अपना सब कुछ व्यय कर चुकी थी फिर भी इससे उसे लाभ के बदले हानि ही उठानी पड़ी थी. 27मसीह येशु के विषय में सुनकर उसने भीड़ में उनके पीछे आकर उनका वस्त्र छुआ. 28उसका यह विश्वास था: “यदि मैं उनके वस्त्र को भी छू लूं, तो मैं स्वस्थ हो जाऊंगी.” 29उसी क्षण उसका रक्तस्राव थम गया. स्वयं उसे अपने शरीर में यह मालूम हो गया कि वह अपनी पीड़ा से ठीक हो चुकी है.

30उसी क्षण मसीह येशु को भी यह आभास हुआ कि उनमें से सामर्थ्य निकली है. भीड़ में ही उन्होंने मुड़कर प्रश्न किया, “कौन है वह, जिसने मेरे वस्त्र को छुआ है?”

31शिष्यों ने उनसे कहा, “आप तो देख ही रहे हैं कि किस प्रकार भीड़ आप पर गिरी पड़ रही है और आप प्रश्न कर रहे हैं, ‘कौन है वह, जिसने मेरे वस्त्र को छुआ है’!”

32प्रभु की दृष्टि उसे खोजने लगी, जिसने यह किया था. 33वह स्त्री यह जानते हुए कि उसके साथ क्या हुआ है, भय से कांपती हुई उनके चरणों पर आ गिरी और उन पर सारी सच्चाई प्रकट कर दी. 34मसीह येशु ने उस स्त्री से कहा, “पुत्री, तुम्हारे विश्वास ने तुम्हें स्वस्थ किया है. शांति में विदा हो जाओ और स्वस्थ रहो.”

35जब मसीह येशु यह कह ही रहे थे, याइरॉस के घर से आए कुछ लोगों ने यह सूचना दी, “आपकी पुत्री की मृत्यु हो चुकी है. अब गुरुवर को कष्ट देने का क्या लाभ?”

36मसीह येशु ने यह सुन उस यहूदी सभागृह अधिकारी से कहा, “भयभीत न हो—केवल विश्वास करो.”

37उन्होंने पेतरॉस, याकोब तथा याकोब के भाई योहन के अतिरिक्त अन्य किसी को भी अपने साथ आने की अनुमति न दी 38और ये सब यहूदी सभागृह अधिकारी के घर पर पहुंचे. मसीह येशु ने देखा कि वहां शोर मचा हुआ है तथा लोग ऊंची आवाज में रो-पीट रहे हैं. 39घर में प्रवेश कर मसीह येशु ने उन्हें संबोधित करते हुए कहा, “यह शोर और रोना-पीटना क्यों! बच्ची की मृत्यु नहीं हुई है—वह केवल सो रही है.” 40यह सुन वे मसीह येशु का ठट्ठा करने लगे.

किंतु मसीह येशु ने उन सभी को वहां से बाहर निकाल बच्ची के पिता तथा अपने साथियों को साथ ले उस कक्ष में प्रवेश किया, जहां वह बालिका थी. 41वहां उन्होंने बालिका का हाथ पकड़कर उससे कहा, “तालीथा कोऊम” (अर्थात बालिके, उठो!) 42उसी क्षण वह उठ खड़ी हुई और चलने फिरने लगी. इस पर वे सभी चकित रह गए. बालिका की आयु बारह वर्ष थी. 43मसीह येशु ने उन्हें स्पष्ट आदेश दिए कि इस घटना के विषय में कोई भी जानने न पाए और फिर उनसे कहा कि उस बालिका को खाने के लिए कुछ दिया जाए.