Habrit Hakhadasha/Haderekh

אגרת פולוס השנייה אל-הקורנתים 4:1-18

1אלוהים בעצמו נתן לנו ברחמיו את העבודה הנפלאה של הפצת דברו, ולכן איננו מתייאשים. 2איננו מרמים איש, איננו משתמשים בתכסיסים ותחבולות כדי להביא אנשים לידי אמונה, ומעולם לא סילפנו את דבר אלוהים. שכן אנו בוחלים בכל הונאה. אנו עומדים לנוכח ה׳ ודוברים אמת, וכל המכיר אותנו יודה בכך.

3אם הבשורה שאנו מספרים נסתרת מאיש, היא נסתרת מאלה שפניהם מועדות לאבדון. 4השטן, שהוא שר העולם המרושע הזה, עיוור את עיניהם, כדי שלא יוכלו לראות את אור הבשורה שזורח עליהם, ושלא יבינו את הבשורה הנפלאה על כבוד המשיח שהוא צלם האלוהים. 5איננו מכריזים על עצמנו, אלא על ישוע המשיח כאדון, ועל עצמנו כעבדיכם בזכות המשיח. 6האלוהים אשר אמר: ”יהי אור מן החושך“, הציף את לבנו באור דעת כבוד אלוהים אשר בפניו של המשיח.

7אך אוצר זה – האור והגבורה שזורחים בנו – טמון בכלי חרס בר־חלוף, כלומר בגופנו. עובדה זאת מוכיחה שהגבורה בתוכנו היא מאת אלוהים ולא מעצמנו.

8הצרות לוחצות עלינו מכל עבר, אך לא נשברנו. אנו נבוכים, אך לא נואשנו. 9אנו נרדפים, אך אלוהים לא נטש אותנו. אנו מוכים, אך לא הושמדנו. 10מדי יום אנו מתנסים במידת־מה במות המשיח, על מנת שגבורת חיי המשיח תיגלה בגופנו.

11אכן, חיינו בסכנה מתמדת כי אנו משרתים את האדון, אך הדבר מאפשר לנו להפגין את גבורת ישוע בגופנו בר־התמותה. 12לפיכך, אנו עומדים בפני מוות, בגלל הטפת דבר אלוהים, על־מנת שתזכו בחיי נצח. 13כתבי־הקודש אומרים:4‏.13 ד 13 תהלים קטז 10 ”האמנתי כי אדבר.“ באותה רוח אמונה גם אנחנו מאמינים ולכן מדברים. 14אנו יודעים כי האלוהים אשר הקים לתחייה את האדון ישוע, יקים לתחייה גם אותנו עם ישוע ויציגנו לפניו יחד אתכם. 15סבלנו הוא למענכם, וככל שירבו מקרבכם המאמינים במשיח, כן ירבו המודים לו על טובו לכבוד אלוהים.

16משום כך איננו מתייאשים. גופנו הפיזי אמנם הולך ובלה, אך כוחנו הפנימי שמקורו בה׳ הולך ומתחזק מדי יום. 17צרתנו הקלה של הרגע תביא לנו את ברכתו העשירה והנצחית של אלוהים. 18לפיכך איננו מתרכזים בדברים שאנו רואים עתה, כלומר בצרות הסובבות אותנו, אלא עינינו נשואות לשמחה המצפה לנו בשמים ושטרם ראינו אותה. הצרות תעלמנה בקרוב, אך השמחה שמצפה לנו תעמוד לעולם.

Hindi Contemporary Version

2 कोरिंथ 4:1-18

मिट्टी के पात्रों में रखी हुई निधि

1इसलिये कि यह सेवकाई हमें परमेश्वर की कृपा से प्राप्त हुई है, हम निराश नहीं होते. 2हमने लज्जा के गुप्त कामों को त्याग दिया है. न तो हमारे स्वभाव में किसी प्रकार की चतुराई है और न ही हम परमेश्वर के वचन को तोड़ मरोड़ कर प्रस्तुत करते हैं. किंतु सच्चाई को प्रकट करके हम परमेश्वर के सामने स्वयं को हर एक के विवेक के लिए प्रस्तुत करते हैं. 3यदि हमारा ईश्वरीय सुसमाचार ढका हुआ है, तो यह उन्हीं के लिए ढका हुआ है, जो विनाश की ओर जा रहे हैं. 4इस संसार के ईश्वर ने उन अविश्वासियों की बुद्धि को अंधा कर दिया है कि वे परमेश्वर के प्रतिरूप, मसीह के तेजोमय ईश्वरीय सुसमाचार के प्रकाश को न देख सकें. 5हम स्वयं को ऊंचा नहीं करते—हम मसीह येशु को प्रभु तथा स्वयं को मसीह येशु के लिए तुम्हारे दास घोषित करते हैं. 6परमेश्वर, जिन्होंने कहा, “अंधकार में से ज्योति चमके,”4:6 उत्प 1:3 वही परमेश्वर हैं, जिन्होंने हमारा हृदय चमका दिया कि हमें मसीह के मुख में चमकते हुए परमेश्वर के प्रताप के ज्ञान का प्रकाश प्रदान करें.

7यह बेशकीमती खजाना मिट्टी के पात्रों में इसलिये रखा हुआ है कि यह साफ़ हो जाए कि यह असीम सामर्थ्य हमारा नहीं परंतु परमेश्वर का है. 8हम चारों ओर से कष्टों से घिरे रहते हैं किंतु कुचले नहीं जाते; घबराते तो हैं किंतु निराश नहीं होते; 9सताए तो जाते हैं किंतु त्यागे नहीं जाते; बहुत चोटिल किए जाते हैं किंतु नष्ट नहीं किए जाते. 10हम हरदम मसीह येशु की मृत्यु को अपने शरीर में लिए फिरते हैं कि मसीह येशु का जीवन हमारे शरीर में प्रकट हो जाए. 11इसलिये हम, जो जीवित हैं, हरदम मसीह येशु के लिए मृत्यु को सौंपे जाते हैं कि हमारी शारीरिक देह में मसीह येशु का जीवन प्रकट हो जाए. 12इस स्थिति में मृत्यु हममें सक्रिय है और जीवन तुममें.

13विश्वास के उसी भाव में, जैसा कि पवित्र शास्त्र का लेख है: मैंने विश्वास किया, इसलिये मैं चुप न रहा. हम भी यह सब इसलिये कहते हैं कि हमने भी विश्वास किया है.4:13 स्तोत्र 116:10 14यह जानते हुए कि जिन्होंने प्रभु येशु को मरे हुओं में से जीवित किया, वही हमें भी मसीह येशु के साथ जीवित करेंगे तथा तुम्हारे साथ हमें भी अपनी उपस्थिति में ले जाएंगे. 15यह सब तुम्हारे हित में है कि अनुग्रह, जो अधिक से अधिक मनुष्यों में व्याप्त होता जा रहा है, परमेश्वर की महिमा के लिए अधिक से अधिक धन्यवाद का कारण बने.

16इसलिये हम उदास नहीं होते. हमारा बाहरी मनुष्यत्व तो कमजोर होता जा रहा है किंतु भीतरी मनुष्यत्व दिन-प्रतिदिन नया होता जा रहा है. 17हमारा यह छोटा-सा क्षण भर का कष्ट हमारे लिए ऐसी अनंत और अत्यधिक महिमा को उत्पन्न कर रहा है, जिसकी तुलना नहीं कर सकते 18क्योंकि हमने अपना ध्यान उस पर केंद्रित नहीं किया, जो दिखाई देता है परंतु उस पर, जो दिखाई नहीं देता है. जो कुछ दिखाई देता है, वह क्षण भर का है किंतु जो दिखाई नहीं देता वह अनंत काल का.