Habrit Hakhadasha/Haderekh

אגרת פולוס השנייה אל-הקורנתים 13:1-14

1זוהי הפעם השלישית שאבוא אליכם. הכתובים אומרים שעל־פי שניים או שלושה עדים יקום כל דבר. 2כבר הזהרתי אתכם פעם אחת בביקורי הקודם, ועתה בהעדרי אני חוזר על האזהרה: בשובי אליכם הפעם לא אחוס על אלה שחטאו מקודם ועל כל הראויים לעונש.

3אוכיח לכם מעל כל ספק שהמשיח אכן מדבר באמצעותי. המשיח שבו אתם מאמינים אינו חלש לפניכם, אלא חזק בתוככם! 4המשיח אמנם נצלב בחולשה, אך עתה הוא חי בגבורת אלוהים. כך גם אנחנו חלשים, כשם שהמשיח היה חלש, אך אנו נחיה עמו למענכם בגבורת אלוהים.

5בחנו את עצמכם וראו אם אתם עומדים במבחן: האם אתם באמת מאמינים במשיח? האם אתם מרגישים בקרבכם את נוכחותו וגבורתו? או האם אמונתכם במשיח אינה אלא העמדת פנים? 6אני מקווה שאתם מסכימים אתי שעברתי מבחן זה בהצלחה.

7אני מתפלל לאלוהים שלא תעשו רע – לא כדי להוכיח את הצלחתנו, אלא כדי שתעשו את הטוב גם אם כלפי חוץ ייראה שנכשלנו. 8תפקידנו לעודד את הטוב בכל עת, ולא לקוות לרע.13‏.8 יג 8 או: כי איננו יכולים לעשות דבר נגד האמת אלא רק בעד האמת.

9אנו תמיד מוכנים להיות חלשים, אם פרוש הדבר שאתם חזקים. משאלתנו ותפילתנו היא שתתבגרו באמונתכם.

10אני כותב לכם עתה מכתב זה בתקווה שלא אצטרך לנזוף בכם או להעניש אתכם בבואי, כי ברצוני להשתמש בסמכות שנתן לי האדון לחזק אתכם ולא להענישכם.

11אני מסיים מכתבי במילים הבאות: שמחו, התבגרו באמונתכם, שימו לב לדברים שאמרתי, חיו באהבה ובשלום. מי ייתן שאלוהי האהבה והשלום יהיה עמכם.

12‏-13ברכו איש את רעהו לשלום בנשיקה קדושה. כל המאמינים המשיחיים מוסרים לכם דרישת שלום.

14מי ייתן שחסד אדוננו ישוע המשיח, אהבת האלוהים וחברת רוח־הקודש יהיו עם כולכם.

Hindi Contemporary Version

2 कोरिंथ 13:1-14

अंतिम चेतावनियां

1तुम्हारे पास मैं तीसरी बार आ रहा हूं. “हर एक बात की पुष्टि के लिए दो या तीन गवाहों की ज़रूरत होती है.”13:1 व्यव 19:15 2वहां अपने दूसरी बार ठहरने के अवसर पर मैंने तुमसे कहा था और अब वहां अनुपस्थित होने पर भी वहां आने से पहले मैं उन सबसे यह कह रहा हूं: जिन्होंने अतीत में पाप किया है तथा बाकी लोगों से भी, यदि मैं फिर आऊंगा तो किसी पर दया न करूंगा 3क्योंकि तुम यह सबूत चाहते हो कि जो मेरे द्वारा बातें करते हैं, वह मसीह हैं और वह तुम्हारे प्रति निर्बल नहीं परंतु तुम्हारे मध्य सामर्थ्यी हैं. 4वास्तव में वह दुर्बलता की अवस्था में ही क्रूसित किए गए, फिर भी वह परमेश्वर के सामर्थ्य में जीवित हैं. निस्संदेह हम उनमें कमजोर हैं, फिर भी हम तुम्हारे लिए परमेश्वर के सक्रिय सामर्थ्य के कारण उनके साथ जीवित रहेंगे.

5स्वयं को परखो कि तुम विश्वास में हो या नहीं. अपने आपको जांचो! क्या तुम्हें यह अहसास नहीं होता कि मसीह येशु तुममें हैं. यदि नहीं तो तुम कसौटी पर खरे नहीं उतरे. 6मुझे भरोसा है कि तुम यह जान जाओगे कि हम कसौटी पर खोटे नहीं उतरे. 7हम परमेश्वर से प्रार्थना करते हैं कि तुमसे कोई गलती न हो. इसलिये नहीं कि हम भले दिखाई दें परंतु इसलिये कि तुम वही करो, जो उचित है, फिर हम भले ही खोटे दिखाई दें. 8सच्चाई के विरोध में हम कुछ भी नहीं कर सकते. हम सच के पक्षधर ही रह सकते हैं. 9हम अपने कमजोर होने तथा तुम्हारे समर्थ होने पर आनंदित होते हैं और यह प्रार्थना भी करते हैं कि तुम सिद्ध बन जाओ. 10इस कारण दूर होते हुए भी मैं तुम्हें यह सब लिख रहा हूं कि वहां उपस्थिति होने पर मुझे प्रभु द्वारा दिए गए अधिकार का प्रयोग कठोर भाव में न करना पढ़े. इस अधिकार का उद्देश्य है उन्नत करना, न कि नाश करना.

आशीर्वचन

11अंत में, प्रियजन, आनंदित रहो, अपना स्वभाव साफ़ रखो, एक दूसरे को प्रोत्साहित करते रहो, एक मत रहो, शांति बनाए रखो और प्रेम और शांति के परमेश्वर तुम्हारे साथ होंगे.

12पवित्र चुंबन से एक दूसरे को नमस्कार करो.

13सभी पवित्र लोगों की ओर से नमस्कार.

14प्रभु मसीह येशु का अनुग्रह, और परमेश्वर का प्रेम, और पवित्रात्मा की सहभागिता तुम सभी के साथ बनी रहे.