प्रशासक 2 – HCV & NRT

Hindi Contemporary Version

प्रशासक 2:1-23

स्वर्गदूत बोकीम में

1याहवेह का दूत गिलगाल से बोकीम आया. उसने उनसे कहा, “तुम्हें मिस्र देश से निकालकर मैं उस देश में ले आया हूं, जिसकी शपथ मैंने तुम्हारे पूर्वजों से की थी. मैंने कहा था, ‘तुमसे की गई अपनी वाचा मैं कभी न तोड़ूंगा. 2तुमसे आशा यह की गई थी कि तुम इस देश के मूल निवासियों से कोई वाचा न बांधोगे. तुम उनकी वेदियां तोड़ डालोगे.’ 3इस कारण मैंने यह भी कहा, ‘मैं उन्हें तुम्हारे सामने से न निकालूंगा. वे तुम्हारे पंजर के कांटे हो जाएंगे तथा उनके देवता तुम्हारे लिए फंदा.’ ”

4जब याहवेह के दूत ने सारे इस्राएल के वंश से यह कहा, लोग ऊंची आवाज में रोने लगे. 5इस कारण उन्होंने उस स्थान नाम बोकीम2:5 बोकीम अर्थात् रोनेवाले रखा. उन्होंने वहां याहवेह को बलि चढ़ाई.

यहोशू की मृत्यु—एक युग का अंत

6जब यहोशू सभा को विदा कर चुके, इस्राएल के वंश अपनी-अपनी मीरास को लौट गए, कि वे देश को अपने अधीन कर लें. 7ये यहोशू तथा यहोशू के बाद पुरनियों के सारे जीवन में याहवेह की सेवा और स्तुति करते रहे. ये उन सभी महान कामों के चश्मदीद गवाह थे, जो याहवेह द्वारा इस्राएल की भलाई के लिए किए गए थे.

8याहवेह का दास यहोशू, नून के पुत्र की मृत्यु हो गई. इस समय उनकी उम्र एक सौ दस वर्ष की थी. 9उन्होंने उन्हें उन्हीं की मीरास की सीमा के अंदर तिमनथ-हेरेस में गाड़ दिया. यह स्थान गाश पर्वत के उत्तर में एफ्राईम के पहाड़ी इलाके में है.

10वह सारी पीढ़ी भी अपने पुरखों के साथ मिट्टी में जा मिली. उसके बाद एक नई पीढ़ी का उदय हुआ, जिसे न तो याहवेह का ज्ञान था, न ही उन्हें यह मालूम था कि याहवेह ने इस्राएल की भलाई के लिए क्या-क्या किया था. 11इस्राएल के वंशजों ने वह किया, जो याहवेह की नज़र में गलत है. उन्होंने बाल की उपासना शुरू कर दी. 12उन्होंने अपने पुरखों के परमेश्वर, याहवेह को, जो उन्हें मिस्र देश से निकाल लाए थे, छोड़ दिया. उन्होंने उन देवताओं का अनुसरण करना शुरू कर दिया, जो उन लोगों के देवता थे, जो उनके आस-पास रह रहे थे. वे उन्हीं देवताओं की उपासना करने लगे. यह करके उन्होंने याहवेह का क्रोध भड़का दिया. 13उन्होंने याहवेह को छोड़कर बाल तथा अश्तोरेथ की उपासना शुरू कर दी. 14इस्राएल पर याहवेह का क्रोध भड़क उठा. याहवेह ने उन्हें उनके अधीन कर दिया, और वे उन्हें लूटने लगे. याहवेह ने उन्हें उनके शत्रुओं के हाथों में बेच दिया, जो उनके आस-पास रहते थे. इस कारण वे अपने शत्रुओं के सामने ठहर न सके. 15वे जहां कहीं जाते, याहवेह का हाथ उनकी हानि ही के लिए उठा रहता था. यह सब वही था, जिसकी चेतावनी याहवेह दे चुके थे, जिसकी शपथ याहवेह ले चुके थे. इस्राएली बड़ी मुश्किल में आ पड़े थे.

16तब याहवेह ने न्यायियों का उदय किया. इन न्यायियों ने इस्राएल के वंशजों को उन लोगों से छुड़ाया, जो उनके साथ लूटपाट कर रहे थे. 17इतना होने पर भी उन्होंने अपने प्रशासकों की आज्ञाओं का पालन नहीं किया. वे पराए देवताओं की उपासना करने के द्वारा परमेश्वर के विरुद्ध व्यभिचार, अर्थात् विश्वासघात, करते रहे. याहवेह के आदेशों का पालन करने की अपने पूर्वजों की नीतियों से वे जल्द ही दूर हो गए. उन्होंने अपने पूर्वजों के समान व्यवहार करना छोड़ दिया. 18जब कभी याहवेह ने उनके लिए प्रशासक का उदय किए, याहवेह उस प्रशासक के साथ साथ रहे और वह प्रशासक जीवन भर उन्हें उनके शत्रुओं से छुटकारा दिलाया करता था; इसलिये कि याहवेह उनके शत्रुओं द्वारा उन पर की जा रही ताड़ना से हुई पीड़ा की कराहट के कारण, करुणा से दुःखी हो जाते थे. 19मगर होता यह था, कि जब उस प्रशासक की मृत्यु होती थी, वे पराए देवताओं का अनुसरण करने के द्वारा, उनकी उपासना करने के द्वारा तथा उनके सामने झुककर नमन करने के द्वारा अपने पुरखों से कहीं अधिक बुराई करने में लौट जाते थे. न तो उन्होंने अपने इन बुरे कामों को छोड़ा, न ही अपने हठीले स्वभाव को.

20इस पर इस्राएल के विरुद्ध याहवेह का क्रोध भड़क उठा. याहवेह ने विचार किया “इसलिये कि इस देश ने मेरी उस वाचा का उल्लंघन किया है, जिसकी आज्ञा मैंने उनके पुरखों को दी थी, उन्होंने मेरे आदेश का भी उल्लंघन किया है, 21मैं उन जनताओं को भी उनके सामने से नहीं निकालूंगा, जिन्हें यहोशू अपनी मृत्यु के पहले छोड़ गए थे. 22मैं उन देशों के द्वारा इस्राएल को परखूं, कि वे अपने पुरखों के समान याहवेह के आदेशों का पालन करते हैं, या नहीं.” 23इस कारण याहवेह ने ही उन जनताओं को वहां रहने दिया तथा उन्हें वहां से जल्द ही नहीं निकाला. याहवेह ने इन्हें यहोशू के अधीन भी न होने दिया था.

New Russian Translation

Судей 2:1-23

Ангел Господень приходит в Бохим

1Ангел Господень2:1 Ангел Господень – этот особенный ангел отождествляется с Самим Господом. Многие толкователи видят в Нем явления Иисуса Христа до Его воплощения. То же в 6:11-23; 13:2-23. пришел из Гилгала2:1 В Гилгале находился ковчег завета (см. Исх. 25:10-22). в Бохим и сказал:

– Я вывел вас из Египта и привел в землю, о которой клялся вашим отцам. Я сказал: «Я никогда не нарушу Мой завет с вами, 2а вы не заключайте союз с жителями этой земли, но сокрушите их жертвенники». Но вы не послушались Меня. Почему? 3Теперь Я говорю вам, что не стану прогонять их от вас; они будут вам жалом в теле, а их боги будут для вас западней.

4Когда Ангел Господень сказал эти слова всем израильтянам, народ громко заплакал, 5и они назвали то место Бохим2:5 По-еврейски это название означает «плачущие».. Там они совершили жертвоприношение Господу.

Непослушание и поражение

6После того как Иисус отпустил народ, они пошли каждый в свой удел, чтобы овладеть землей. 7Народ служил Господу во время жизни Иисуса и старейшин, переживших его, которые видели все великие дела, совершенные Господом для Израиля.

8Иисус, сын Навин, слуга Господа, умер в возрасте ста десяти лет. 9Его похоронили в его собственном наделе, в городе Тимнат-Хересе2:9 См. Иис. Нав. 19:50; 24:30 – «Тимнат-Серах», в нагорьях Ефрема к северу от горы Гааш.

10Когда все то поколение отошло к своим отцам и выросло другое поколение, которое не знало ни Господа, ни того, что Он совершил для Израиля, 11израильтяне стали творить зло в глазах Господа и служить Баалам2:11 Баал – ханаанский бог плодородия и бог-громовержец.. 12Они оставили Господа, Бога своих отцов, Который вывел их из Египта, последовали за богами народов, которые были вокруг них, и стали поклоняться им. Они гневили Господа, 13потому что оставили Его и служили Баалу и Астартам2:13 Астарта – ханаанская богиня любви и плодородия, богиня-воительница.. 14Гнев Господа вспыхнул на Израиль, и Он отдал их в руки разбойников, которые стали грабить их. Он отдал их во власть врагов, окружавших их со всех сторон, и они уже не могли им противостоять. 15Всякий раз, когда Израиль шел воевать, рука Господа была против них, и они терпели поражение, как Господь предупреждал и клялся им. Они терпели великое бедствие.

16Господь ставил им судей2:16 Или: «вождей»; также в ст. 17-49., которые спасали их от рук грабителей. 17Но они не слушали судей, а распутничали с другими богами и поклонялись им. Они быстро уклонились от пути, которым ходили их отцы, – пути послушания повелениям Господа; они не следовали их примеру. 18Всякий раз, когда Господь ставил над ними судью, Он Сам был с ним и берег их от врагов, пока судья был жив: Господь жалел их, стонавших под гнетом мучителей. 19Но когда судья умирал, они принимались за старое и поступали еще хуже, чем их отцы, следуя другим богам, служа и поклоняясь им. Они не хотели оставить свои злые дела и упрямство. 20Поэтому Господь сильно разгневался на Израиль и сказал:

– Раз этот народ нарушил завет, который Я заключил с их отцами, и не послушался Меня, 21Я больше не стану прогонять от них ни одного из народов, которые остались в этой стране после смерти Иисуса.

22Чтобы испытать Израиль – станут ли израильтяне стараться ходить по пути Господа, как делали их отцы, – 23оставил Господь эти народы, не прогнав их сразу и не отдав в руки Иисуса.