ज़करयाह 1 HCV – زكريا 1 PCB

Hindi Contemporary Version

ज़करयाह 1:1-21

याहवेह के पास वापस लौटने के लिये बुलाहट

1राजा दारयावेश के शासनकाल के दूसरे साल के आठवें महीने में याहवेह का यह वचन बेरेखियाह के पुत्र और इद्दो के पोता ज़करयाह भविष्यवक्ता के पास आया:

2“याहवेह तुम्हारे पूर्वजों से बहुत क्रोधित थे. 3इसलिये लोगों को बताओ: सर्वशक्तिमान याहवेह का यह कहना है: ‘मेरे पास लौट आओ,’ सर्वशक्तिमान याहवेह का यह घोषणा है, ‘तो मैं भी तुम्हारे पास लौट आऊंगा,’ सर्वशक्तिमान याहवेह का कहना है. 4अपने पूर्वजों के समान मत बनो, जिन्हें पहले के भविष्यवक्ताओं ने पुकार-पुकारकर कहा था: सर्वशक्तिमान याहवेह का यह कहना है: ‘अपने बुरे चालचलन और अपने बुरे कार्यों को छोड़ो.’ किंतु उन्होंने न तो मेरी बातों को सुना और न ही मेरी ओर ध्यान दिया, याहवेह की घोषणा है. 5तुम्हारे पूर्वज अब कहां हैं? और भविष्यवक्ता, नबी, क्या वे सदाकाल तक जीवित हैं? 6पर मेरे वचन और कानून, जो मैंने अपने सेवक भविष्यवक्ताओं को दिये थे, क्या वे तुम्हारे पूर्वजों की मृत्यु के बाद भी बने हुए नहीं हैं?

“तब उन्होंने प्रायश्चित किया और कहा, ‘सर्वशक्तिमान याहवेह ने ठीक वही किया है जैसा कि हमारे चालचलन और हमारे कर्मों के कारण हमारे साथ किया जाना चाहिये, जैसा कि उन्होंने करने की ठानी थी.’ ”

मेंहदी पेड़ों के बीच मनुष्य

7राजा दारयावेश के शासनकाल के दूसरे साल के ग्यारहवें महीने अर्थात शबात महीने के चौबीसवें दिन याहवेह का यह वचन बेरेखियाह के पुत्र और इद्दो के पोते ज़करयाह भविष्यवक्ता के पास पहुंचा.

8रात के समय मैंने एक दर्शन में देखा कि मेरे सामने लाल घोड़े में सवार एक व्यक्ति था. वह घाटी में मेंहदी के पेड़ों के बीच खड़ा था, और उसके पीछे लाल, भूरे और सफेद रंग के घोड़े थे.

9तब मैंने पूछा, “हे मेरे प्रभु, ये क्या हैं?”

जो स्वर्गदूत मुझसे बात कर रहा था, उसने उत्तर दिया, “मैं तुम्हें दिखाऊंगा कि ये क्या हैं.”

10तब जो व्यक्ति मेंहदी के पेड़ों के बीच खड़ा था, उसने कहा, “ये वे हैं जिन्हें याहवेह ने पूरे पृथ्वी पर भेजा है.”

11और उन्होंने याहवेह के उस स्वर्गदूत को यह सूचित किया, जो मेंहदी के पेड़ों के मध्य बीच खड़ा था, “हम पूरी पृथ्वी में गये और देखे कि सारी पृथ्वी में चैन और शांति है.”

12तब याहवेह के स्वर्गदूत ने कहा, “हे सर्वशक्तिमान याहवेह, आप जो येरूशलेम तथा यहूदिया के शहरों पर पिछले सत्तर सालों से क्रोधित हैं, कब तक आप इन पर अपनी दया नहीं दिखाएंगे?” 13तब याहवेह ने उस स्वर्गदूत से, जो मुझसे बात कर रहा था, दयालु और सान्त्वनापूर्ण शब्द कहा.

14फिर वह स्वर्गदूत जो मुझसे बातें कर रहा था, उसने कहा, “इन बातों की घोषणा करो: सर्वशक्तिमान याहवेह का यह कहना है: ‘येरूशलेम तथा ज़ियोन के प्रति मेरी बहुत जलन है, 15और मैं उन जातियों से बहुत क्रोधित हूं जो आराम में हैं. पहले मैं सिर्फ थोड़ा क्रोधित था, किंतु उन्होंने खुद ही अपनी विपत्तियां बढ़ा ली हैं.’

16“इसलिये याहवेह का यह कहना है: ‘मैं कृपा करने के लिये येरूशलेम लौटूंगा, और वहां मेरे भवन को फिर से बनाया जाएगा. और येरूशलेम के ऊपर नापने की लकीर खींची जाएगी,’ सर्वशक्तिमान याहवेह की घोषणा है.

17“आगे और घोषणा करो: सर्वशक्तिमान याहवेह का यह कहना है: ‘मेरे नगर फिर समृद्ध होंगे, और एक याहवेह फिर ज़ियोन को सांत्वना देंगे तथा येरूशलेम को अपना ठहराएंगे.’ ”

चार सींग और चार शिल्पकार

18फिर मैंने देखा, और वहां मेरे सामने चार सींग थे. 19तो मैंने उस स्वर्गदूत, जो मुझसे बातें कर रहा था, उससे पूछा, “ये क्या हैं?”

उसने मुझे उत्तर दिया, “ये वे सींग हैं जिन्होंने यहूदिया, इस्राएल और येरूशलेम को तितर-बितर कर दिया है.”

20फिर याहवेह ने मुझे चार शिल्पकार दिखाये. 21मैंने पूछा, “ये क्या करने के लिये आये हैं?”

उन्होंने उत्तर दिया, “ये वे सींग हैं जिन्होंने यहूदिया को तितर-बितर कर दिया है, ताकि कोई अपना सिर न उठा सके, पर ये शिल्पकार उन्हें भयभीत करने उन जातियों के इन सीगों को काट डालने के लिये आए हैं जिन्होंने यहूदिया देश के शत्रुओं को भयभीत कर देंगे और उन राष्ट्रों के सींग काट डालेंगे, जिन्होंने यहूदिया के लोगों को तितर-बितर करने के लिये आक्रमण किया है.”

Persian Contemporary Bible

زكريا 1:1-21

دعوت به سوی خداوند

1در سال دوم سلطنت داريوش پادشاه، در ماه هشتم، پيامی از جانب خداوند بر زكريا (پسر بركيا و نوهٔ عدوی نبی) نازل شد. خداوند قادر متعال به زكريا فرمود كه از قول او به مردم چنين بگويد: 2«من از اجداد شما بسيار خشمگين بودم. 3ولی اينک به شما می‌گويم كه اگر به سوی من بازگشت كنيد، من هم به سوی شما باز می‌گردم. 4مانند اجداد خود نباشيد كه انبيای گذشته هر چه سعی كردند آنها را از راههای زشتشان بازگردانند، توجهی به ايشان نكردند. من توسط انبيا به ايشان گفتم كه به سوی من بازگشت كنند، ولی آنها گوش ندادند.

5‏-6«اجداد شما و انبيای گذشته همگی مردند، ولی كلام من جاودانه است. كلام من گريبانگير اجداد شما شد و آنها را مجازات نمود. ايشان سرانجام بازگشت نموده گفتند: خداوند ما را به سزای اعمالمان رسانيده و آنچه را كه به ما اخطار نموده بود دقيقاً انجام داده است.»

رؤيای اسبها

7در روز بيست و چهارم، ماه يازدهم يعنی ماه شباط، از سال دوم سلطنت داريوش پادشاه، پيامی ديگر از جانب خداوند در رؤيای شب به من، زكريا رسيد. 8در كنار رودخانه‌ای، در ميان درختان آس، فرشته‌ای را سوار بر اسب سرخ ديدم. پشت سر او اسبانی به رنگهای سرخ، زرد و سفيد ايستاده بودند.

9پرسيدم: «ای سرورم، اين اسبها برای چه آنجا ايستاده‌اند؟»

فرشته جواب داد: «به تو خواهم گفت.»

10سپس به من گفت كه خداوند آنها را فرستاده است تا زمين را بررسی كنند.

11آنگاه سواران آن اسبها به فرشتهٔ خداوند گزارش داده گفتند: «در سراسر جهان گشتيم و همه جا صلح و آرامش برقرار بود.»

12فرشتهٔ خداوند چون اين را شنيد گفت: «ای خداوند قادر متعال، مدت هفتاد سال بر اورشليم و شهرهای يهودا خشمگين بودی. چقدر طول می‌كشد تا دوباره بر ايشان رحمت فرمايی؟»

13جواب خداوند به فرشته تسلی‌آميز و اطمينان‌بخش بود.

14آنگاه فرشته به من گفت: «اين پيام را از طرف خداوند قادر متعال با صدای بلند اعلام كن: من برای اورشليم و يهودا غيرت زيادی دارم. 15ولی از قومهايی كه در امنيت هستند به شدت خشمگينم، زيرا ايشان بيشتر از آنچه می‌خواستم قوم مرا آزار رساندند. 16پس من با رحمت بسيار به اورشليم باز خواهم گشت و خانهٔ من و تمام اورشليم از نو ساخته خواهد شد. 17شهرهای اسرائيل دوباره مملو از سعادت خواهند شد و من بار ديگر اورشليم را تسلی و بركت داده در آن ساكن خواهم گشت.»

رؤيای شاخها

18در رؤيايی ديگر، چهار شاخ حيوان ديدم!

19از فرشته پرسيدم: «اينها چه هستند؟»

جواب داد: «اينها نمايندهٔ آن چهار قدرت بزرگ جهانی هستند كه مردم يهودا، اسرائيل و اورشليم را پراكنده ساخته‌اند.»

20سپس فرشته، چهار آهنگر به من نشان داد.

21پرسيدم: «اين مردان برای انجام چه كاری آمده‌اند؟»

فرشته جواب داد: «آمده‌اند تا آن چهار شاخی را كه باعث پراكندگی مصيبت‌بار مردم يهودا شده‌اند، بگيرند و بر روی سندان خرد كنند و به دور اندازند.»