उत्पत्ति 45 HCV – Бытие 45 NRT

Select chapter 45

Hindi Contemporary Version

उत्पत्ति 45:1-28

योसेफ़ तथा भाइयों के मध्य मेल

1यहां तक आकर योसेफ़ का नियंत्रण टूट गया. वह वहां उपस्थित सभी व्यक्तियों के समक्ष चिल्ला उठे, “सब यहां से बाहर चले जाएं.” तब सब वहां से बाहर चले गए. तब योसेफ़ ने स्वयं को अपने भाइयों पर अपने वास्तविक रूप में प्रकट किया. 2योसेफ़ का क्रंदन इतना प्रबल था कि बाहर मिस्री अधिकारियों ने इसे सुन लिया तथा इसके विषय में फ़रोह के परिवार ने भी सुन लिया.

3तब योसेफ़ ने अपने भाइयों से कहा, “मैं योसेफ़ हूं! क्या पिताजी अब भी जीवित हैं?” किंतु उनके भाई अवाक रह गए थे, उनके लिए योसेफ़ के समक्ष कुछ भी कह सकना असंभव हो गया था.

4तब योसेफ़ ने अपने भाइयों से अनुरोध किया, “मेरे निकट आइए” वे उनके निकट गए तब योसेफ़ ने उनसे कहा, मैं आपका भाई योसेफ़ हूं, जिसे आप लोगों ने मिस्र के हाथों बेच दिया था! 5अब आप न तो स्वयं के लिए शोकित हों और न ही क्रुद्ध, कि आपने मुझे यहां के लिए विक्रीत कर दिया था; क्योंकि परमेश्वर ही मुझे आपके पूर्व यहां ले आए हैं, कि जीवन बचाए जाएं. 6क्योंकि दो वर्ष से संपूर्ण देश में अकाल व्याप्त है तथा यह पांच वर्ष और भी व्याप्त रहेगा. तब इन वर्षों में न तो हल चलाए जा सकेंगे और न ही किसी प्रकार की कटनी संभव हो सकेगी. 7परमेश्वर ने मुझे आप लोगों के पूर्व ही यहां भेज दिया था, कि वह आप लोगों के लिए पृथ्वी पर एक शेषांश बचा रखें, कि आपको एक बड़े बचाव द्वारा जीवित रखा जा सके.

8“इसलिये अब तथ्य यह है, कि मुझे यहां आप लोगों के द्वारा नहीं, परंतु परमेश्वर द्वारा भेजा गया था. परमेश्वर ने ही मुझे फ़रोह के पिता का स्थान दिया है, मुझे फ़रोह की समस्त गृहस्थी का प्रभारी तथा पूरे मिस्र देश पर प्रशासक नियुक्त कर दिया है. 9अब आप लोग अविलम्ब मेरे पिता के पास जाकर उनसे कहें, ‘आपके पुत्र योसेफ़ का यह आग्रह है परमेश्वर ने मुझे समग्र मिस्र देश का प्रशासक नियुक्त किया है. आप यहां मेरे पास आ जाएं. अब विलंब न करें. 10आप लोग आकर गोशेन प्रदेश में बस जाएं और मेरे निकट ही आप, आपकी संतान, आपकी संतान की संतान, आपके पशुवृन्द, आपके भेड़-बकरी तथा आपकी संपूर्ण संपत्ति भी. 11वहां मैं आपके लिए भोजन की व्यवस्था करता रहूंगा, क्योंकि अकाल अभी पांच वर्ष और रहेगा, जिसके कारण आप वहां आपकी संपूर्ण गृहस्थी के साथ पूर्णतः साधन विहीन हो जाएंगे.’

12“अब आप लोग स्वयं देख लीजिए और यहां स्वयं मेरा भाई बिन्यामिन भी यह देख रहा है कि यह स्वयं मैं आप से कह रहा हूं. 13अब आप लोग जाइए और जाकर मिस्र में मेरे इस वैभव का उल्लेख वहां मेरे पिता से कीजिए तथा उस सबका भी, जो स्वयं आपने यहां देखा है. आवश्यक है कि अब आप शीघ्र अति शीघ्र जाएं और मेरे पिता को यहां ले आएं.”

14तब योसेफ़ अपने भाई बिन्यामिन को गले लगाकर रोते रहे तथा बिन्यामिन भी उनसे गले लगकर रोते रहे. 15फिर योसेफ़ ने अपने सभी भाइयों का चुंबन लिया और उनके साथ रोते रहे; इसके बाद ही उनके भाइयों ने योसेफ़ के साथ बात करना आरंभ किया.

16फ़रोह के परिवार में भी यह समाचार सुना गया कि योसेफ़ के भाई आए हुए हैं, जिसे सुनकर फ़रोह तथा उसके दासों में उल्लास की लहर दौड़ गई. 17तब फ़रोह ने योसेफ़ के समक्ष प्रस्ताव रखा “अपने भाइयों से यह कहो, ‘अपने-अपने गधों पर सामान रखें और कनान देश चले जाएं, 18वहां अपने पिता एवं समस्त गृहस्थी लेकर यहां मेरे पास आ जाएं कि मैं उन्हें मिस्र देश का सर्वोत्तम ही प्रदान करूंगा और उनका भोजन इस देश की प्रचुरता में से ही होगा.’

19“और अब, योसेफ़ तुम्हारे लिए आदेश यह है ‘ऐसा करो: यहां मिस्र देश से स्त्रियों एवं बालकों के लिए वाहन ले जाओ और अपने पिता को यहां ले आओ. 20अपने सामान की चिंता न करना, क्योंकि मिस्र देश में जो कुछ सर्वोत्तम है, वह सब तुम्हारा ही है.’ ”

21इस्राएल के पुत्रों ने ठीक यही किया. फ़रोह के आदेश के अनुरूप योसेफ़ ने उन्हें वाहन प्रदान कर दिए तथा यात्रा के लिए आवश्यक सामग्री भी दी. 22योसेफ़ ने हर एक को एक-एक जोड़ी वस्त्र भी दिया, किंतु बिन्यामिन को तीन सौ चांदी मुद्राएं और पांच जोड़ी वस्त्र दिये. 23अपने पिता के लिए योसेफ़ ने ये सभी वस्तुएं भेजी: दस गधे, जिन पर मिस्र की सर्वोत्तम वस्तुएं रख दी गई थी, दस गधियां, जिन पर भोज्य सामग्री तथा अन्न रख दिया गया था, कि यात्रा के समय उनके पिता का भरण-पोषण होता रहे. 24इस प्रकार योसेफ़ ने अपने भाइयों को कनान देश के लिए भेज दिया. जब वे विदा हो ही रहे थे, योसेफ़ ने उनसे आग्रह किया, “यात्रा करते हुए आप लोग झगड़ना नहीं.”

25इसलिये वे मिस्र देश से अपने पिता के पास कनान में पहुंच गए, 26उन्होंने अपने पिता को सूचित किया, “योसेफ़ जीवित है! और सत्य तो यह है कि वह समस्त मिस्र देश का प्रशासक है.” यह सुन याकोब अवाक रह गए—उन्हें अपने पुत्रों द्वारा दी गई सूचना का विश्वास ही न हुआ. 27तब उन्होंने अपने पिता को योसेफ़ की कही हुई वह सारी बातें बताई जो उनसे कही थी. जब उन्होंने योसेफ़ द्वारा भेजें वाहन देखे, जो उनको ले जाने के लिए भेजें गए थे, तब उनके पिता याकोब के जी में जी आया. 28तब इस्राएल ने कहा, “पर्याप्त हो चुका जब मेरा पुत्र योसेफ़ जीवित है, अपनी मृत्यु के पूर्व वहां जाकर मैं उसे देखूंगा.”

New Russian Translation

Бытие 45:1-28

Иосиф открывается своим братьям

1Тогда Иосиф не мог более сдержать себя перед рабами и воскликнул:

– Уходите все прочь от меня! – и никого не было с Иосифом, когда он открылся своим братьям.

2Он так громко зарыдал, что услышали египтяне, и слух об этом дошел до двора фараона.

3Иосиф сказал братьям:

– Я – Иосиф! Жив ли еще мой отец?

Но братья ничего не могли ответить – так они были ошеломлены.

4Тогда Иосиф сказал братьям:

– Подойдите же ко мне.

И когда они подошли, он сказал:

– Я – ваш брат Иосиф, которого вы продали в Египет! 5Но не тревожьтесь и не обвиняйте больше себя за то, что продали меня сюда: это Бог послал меня перед вами для спасения вашей жизни. 6Уже два года, как в стране голод, и еще пять лет не будет ни пахоты, ни жатвы. 7Но Бог послал меня перед вами, чтобы сохранить ваш род на земле и великим избавлением спасти ваши жизни.

8Итак, не вы послали меня сюда, но Бог: Он сделал меня отцом фараону, господином над всем его домом и правителем всего Египта. 9Поспешите вернуться к моему отцу и скажите ему: «Вот что говорит твой сын Иосиф: „Бог сделал меня правителем всего Египта. Приходи ко мне, не медли; 10ты будешь жить в области Гошен и будешь рядом со мной: и ты, и твои дети и внуки, и твой крупный и мелкий скот, и все, что у тебя есть. 11Там я смогу прокормить тебя, ведь предстоят еще пять лет голода – а иначе и ты, и твой дом, и все, кто принадлежат тебе, будете в нужде“».

12Вы видите своими глазами, и вы, и мой брат Вениамин, что это действительно я говорю с вами. 13Расскажите же моему отцу о том, как я прославлен в Египте, и обо всем, что вы видели. И поскорее приведите сюда моего отца.

14Он обнял своего брата Вениамина и заплакал, и Вениамин плакал, обнимая его. 15Он поцеловал всех братьев и с плачем обнимал их. Потом братья беседовали с ним.

Фараон позволяет Иакову переселиться в Египет

16Слух о том, что пришли братья Иосифа, дошел до двора фараона. Фараон обрадовался, и его придворные тоже, 17и фараон сказал Иосифу:

– Скажи братьям: «Сделайте вот что: навьючьте своих животных, возвращайтесь в землю Ханаана 18и приведите ко мне отца и ваши семьи. Я дам вам лучшую землю в Египте, и вы будете жить ее плодами». 19Еще повелеваю тебе сказать им: «Сделайте вот что: возьмите из Египта колесницы для ваших детей и жен, привезите отца и приходите сами. 20Не жалейте о вашем имуществе, потому что все лучшее в Египте будет вашим».

21Сыновья Израиля так и сделали. Иосиф дал им колесницы, как приказал фараон, и припасы в дорогу. 22Каждому он подарил новую одежду, а Вениамину дал триста шекелей серебра45:22 Около 3,5 кг. и пять смен одежды. 23Отцу он послал десять ослов, нагруженных лучшим добром Египта, и десять ослиц, нагруженных зерном, хлебом и другими припасами для путешествия. 24После этого он отпустил братьев, и когда они уходили, сказал им:

– Ни о чем не тревожьтесь в пути!45:24 Или: «Не ссорьтесь в пути!».

25Они отправились в путь из Египта, пришли к своему отцу Иакову в землю Ханаана 26и сказали ему:

– Иосиф жив! Иосиф – правитель всего Египта!

У Иакова замерло сердце, и он не поверил им. 27Но когда они передали ему все, что сказал Иосиф, и когда он увидел колесницы, которые Иосиф послал, чтобы перевезти его, душа Иакова ожила. 28И Израиль сказал:

– Довольно! Мой сын Иосиф жив. Пойду и увижу его, прежде чем умру.