उत्पत्ति 22 HCV – التكوين 22 NAV

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Hindi Contemporary Version

उत्पत्ति 22:1-24

अब्राहाम के विश्वास की परीक्षा

1कुछ समय के बाद, परमेश्वर ने अब्राहाम की परीक्षा ली. परमेश्वर ने उससे कहा, “हे अब्राहाम!”

उसने उत्तर दिया, “हे प्रभु! मैं यहां हूं.”

2परमेश्वर ने कहा, “अपने एकलौते पुत्र यित्सहाक को, जो तुम्हें प्रिय है, साथ लेकर मोरियाह देश को जाओ. वहां उसे एक पर्वत पर, जिसे मैं बताऊंगा, होम बलि करके चढ़ाओ.”

3अगले दिन अब्राहाम ने सुबह जल्दी उठकर अपने गधे पर काठी कसी. उन्होंने अपने साथ दो सेवकों तथा अपने पुत्र यित्सहाक को लिया. जब उसने होम बलि के लिये पर्याप्त लकड़ी काट ली, तब वह उस स्थान की ओर चले, जिसके बारे में परमेश्वर ने उन्हें बताया था. 4तीसरे दिन अब्राहाम ने दूर से उस जगह को देखा. 5उसने अपने सेवकों से कहा, “गधे के साथ यहीं रुको. मैं और मेरा बेटा वहां जायेंगे और परमेश्वर की आराधना करके तुम्हारे पास लौट आएंगे.”

6अब्राहाम ने होम बलि के लिए तैयार की गई लकड़ियां ली और यित्सहाक को पकड़ा दिया और स्वयं आग एवं छुरा ले लिया. जब दोनों आगे जा रहे थे, 7तब यित्सहाक ने अपने पिता अब्राहाम से पूछा, “पिताजी?”

अब्राहाम ने उत्तर दिया, “हां, बेटा?”

यित्सहाक ने कहा, “आग और लकड़ी तो यहां है, पर होम बलि के लिए मेमना कहां है?”

8अब्राहाम ने जवाब दिया, “हे मेरे पुत्र, परमेश्वर खुद होम बलि के लिये मेमने का इंतजाम करेंगे.” और वे दोनों एक साथ आगे बढ़ गये.

9जब वे उस स्थल पर पहुंचे, जिसे परमेश्वर ने उन्हें बताया था, तब वहां अब्राहाम ने एक वेदी बनाई और उस पर लकड़ियां रखी. उसने अपने पुत्र यित्सहाक को बांधकर उसे उन लकड़ियों के ऊपर वेदी पर लिटा दिया. 10फिर अब्राहाम ने अपने बेटे को मार डालने के लिये हाथ में छुरा लिया. 11पर स्वर्ग से याहवेह के स्वर्गदूत ने उसे पुकारकर कहा, “हे अब्राहाम! हे अब्राहाम!”

अब्राहाम ने कहा, “हे प्रभु! मैं यहां हूं.”

12याहवेह ने कहा, “उस लड़के पर हाथ मत उठा; उसे कुछ मत कर. अब मुझे यह मालूम हो चुका है कि तुम परमेश्वर का भय मानते हो, क्योंकि तुम मेरे लिये अपने एकलौते पुत्र तक को बलिदान करने के लिये तैयार हो गये.”

13उसी समय अब्राहाम को झाड़ी में एक मेढ़ा दिखा जिसका सींग झाड़ी में फंसा हुआ था. अब्राहाम जाकर उस मेढ़ा को लाया और अपने पुत्र के बदले में उसे होम बलि चढ़ाया. 14अब्राहाम ने उस जगह का नाम “याहवेह यिरेह” रखा अर्थात याहवेह उपाय करनेवाले. इसलिये आज भी यह कहा जाता है, “याहवेह के पहाड़ पर उपाय किया जाएगा.”

15फिर स्वर्ग से याहवेह के स्वर्गदूत ने दूसरी बार पुकारकर 16और कहा, “याहवेह अपनी ही शपथ खाकर कहता है, क्योंकि तुमने यह किया है और अपने एकलौते पुत्र तक को बलिदान करने के लिये तैयार हो गये, 17तो मैं निश्चचय रूप से तुम्हें आशीष दूंगा और तुम्हारे वंश को आकाश के तारे और समुद्र के बालू के कण के समान अनगिनत करूंगा. तुम्हारा वंश अपने शत्रुओं के शहरों को अपने अधिकार में ले लेगा, 18और तुम्हारे वंश के ज़रिये पृथ्वी की सारी जातियां आशीष पायेंगी, क्योंकि तुमने मेरी बात को माना है.”

19तब अब्राहाम अपने सेवकों के पास लौट आया और वे सब बेअरशेबा चले गए. और अब्राहाम बेअरशेबा में रहने लगा.

नाहोर के पुत्र

20कुछ समय के बाद, अब्राहाम को यह बताया गया, “मिलकाह भी मां बन गई है; उसने तुम्हारे भाई नाहोर के लिये बेटों को जन्म दिया है:

21बड़ा बेटा उज, उसका भाई बुज़,

कोमुएल (अराम का पिता),

22फिर केसेद, हाज़ो, पिलदाश, यिदलाफ तथा बेथुएल.”

23बेथुएल रेबेकाह का पिता हुआ.

अब्राहाम के भाई नाहोर से मिलकाह से ये आठ पुत्र पैदा हुए.

24नाहोर की रखैल रियूमाह के भी ये पुत्र हुए:

तेबाह, गाहम, ताहाश तथा माकाह.

Ketab El Hayat

التكوين 22:1-24

الله يمتحن إبراهيم

1وَبَعْدَ هَذَا امْتَحَنَ اللهُ إِبْرَاهِيمَ، فَنَادَاهُ: «يَا إِبْرَاهِيمُ» فَأَجَابَهُ: «لَبَّيْكَ». 2فَقَالَ لَهُ: «خُذِ ابْنَكَ وَحِيدَكَ، إِسْحاقَ الَّذِي تُحِبُّهُ، وَانْطَلِقْ إِلَى أَرْضِ الْمُرِيَّا وَقَدِّمْهُ مُحْرَقَةً عَلَى أَحَدِ الْجِبَالِ الَّذِي أَهْدِيكَ إِلَيْهِ». 3فَاسْتَيْقَظَ إِبْرَاهِيمُ مُبَكِّراً فِي الصَّبَاحِ التَّالِي، وَأَسْرَجَ حِمَارَهُ، وَأَخَذَ اثْنَيْنِ مِنْ غِلْمَانِهِ، وَابْنَهُ إِسْحاقَ. وَجَهَّزَ حَطَباً لِمُحْرَقَةٍ، وَانْطَلَقَ مَاضِياً إِلَى الْمَوْضِعِ الَّذِي قَالَ لَهُ اللهُ عَنْهُ. 4وَفِي الْيَوْمِ الثَّالِثِ تَطَلَّعَ إِبْرَاهِيمُ فَشَاهَدَ الْمَكَانَ مِنْ بَعِيدٍ، 5فَقَالَ إِبْرَاهِيمُ لِغُلامَيْهِ: «امْكُثَا هُنَا مَعَ الْحِمَارِ، رَيْثَمَا أَصْعَدُ أَنَا وَالصَّبِيُّ إِلَى هُنَاكَ لَنَتَعَبَّدَ لِلهِ ثُمَّ نَعُودَ إِلَيْكُمَا». 6فَحَمَّلَ إِبْرَاهِيمُ إِسْحاقَ حَطَبَ الْمُحْرَقَةِ، وَأَخَذَ هُوَ بِيَدِهِ النَّارَ وَالسِّكِّينَ وَذَهَبَا كِلاهُمَا مَعاً. 7وَقَالَ إِسْحاقُ لإِبْرَاهِيمَ أَبِيهِ: «يَا أَبِي». فَأَجَابَهُ: «نَعَمْ يَا بُنَيَّ». فَسَأَلَهُ: «هَا هِيَ النَّارُ وَالْحَطَبُ، وَلَكِنْ أَيْنَ خَرُوفُ الْمُحْرَقَةِ؟». 8فَرَدَّ عَلَيْهِ إِبْرَاهِيمُ: «إِنَّ اللهَ يُدَبِّرُ لِنَفْسِهِ الْخَرُوفَ لِلْمُحْرَقَةِ يَا ابْنِي». وَتَابَعَا مَسِيرَهُمَا مَعاً.

9وَلَمَّا بَلَغَا الْمَوْضِعَ الَّذِي أَشَارَ إِلَيْهِ اللهُ شَيَّدَ إِبْرَاهِيمُ مَذْبَحاً هُنَاكَ، وَرَتَّبَ الْحَطَبَ، ثُمَّ أَوْثَقَ إِسْحاقَ ابْنَهُ وَوَضَعَهُ عَلَى الْمَذْبَحِ فَوْقَ الْحَطَبِ. 10وَمَدَّ إِبْرَاهِيمُ يَدَهُ وَتَنَاوَلَ السِّكِّينَ لِيَذْبَحَ ابْنَهُ. 11فَنَادَاهُ مَلاكُ الرَّبِّ مِنَ السَّمَاءِ قَائِلاً: «إِبْرَاهِيمُ، إِبْرَاهِيمُ» فَأَجَابَ: «نَعَمْ». 12فَقَالَ: «لا تَمُدَّ يَدَكَ إِلَى الصَّبِيِّ وَلا تُوْقِعْ بِهِ ضَرَراً لأَنِّي عَلِمْتُ أَنَّكَ تَخَافُ اللهَ وَلَمْ تَمْنَعِ ابْنَكَ وَحِيدَكَ عَنِّي». 13وَإِذْ تَطَلَّعَ إِبْرَاهِيمُ حَوْلَهُ رَأَى خَلْفَهُ كَبْشاً قَدْ عَلِقَ بِفُرُوعِ أَشْجَارِ الْغَابَةِ، فَذَهَبَ وَأَحْضَرَهُ وَأَصْعَدَهُ مُحْرَقَةً عِوَضاً عَنِ ابْنِهِ. 14وَدَعَا إِبْرَاهِيمُ اسْمَ ذَلِكَ الْمَكَانِ «يَهْوَهْ يِرْأَه» (وَمَعْنَاهُ: الرَّبُّ يُدَبِّرُ). وَلِذَلِكَ يُقَالُ حَتَّى الْيَوْمِ «فِي جَبَلِ الرَّبِّ، الإِلَهِ يُرَى».

15وَنَادَى مَلاكُ الرَّبِّ إِبْرَاهِيمَ مِنَ السَّمَاءِ مَرَّةً ثَانِيَةً: 16وَقَالَ: «هَا أَنَا أُقْسِمُ بِذَاتِي يَقُولُ الرَّبُّ: لأَنَّكَ صَنَعْتَ هَذَا الأَمْرَ، وَلَمْ تَمْنَعِ ابْنَكَ وَحِيدَكَ عَنِّي، 17لأُبَارِكَنَّكَ وَأُكَثِّرَنَّ ذُرِّيَّتَكَ فَتَكُونُ كَنُجُومِ السَّمَاءِ وَكَرَمْلِ شَاطِئِ الْبَحْرِ، وَتَرِثُ ذُرِّيَّتُكَ مُدُنَ أَعْدَائِهَا. 18وَبِذُرِّيَّتِكَ تَتَبَارَكُ جَمِيعُ أُمَمِ الأَرْضِ، لأَنَّكَ أَطَعْتَنِي». 19ثُمَّ رَجَعَ إِبْرَاهِيمُ إِلَى غُلَامَيْهِ، وَعَادُوا جَمِيعاً إِلَى بِئْرِ سَبْعٍ حَيْثُ أَقَامَ إِبْرَاهِيمُ.

ذرية ناحور

20وَقِيلَ لإِبْرَاهِيمَ بَعْدَ هَذِهِ الأُمُورِ: «هُوَذَا مِلْكَةُ أَيْضاً قَدْ وَلَدَتْ بَنِينَ لأَخِيكَ نَاحُورَ. 21عُوصاً الْبِكْرَ، وَأَخَاهُ بُوزاً وَقُمُوئِيلَ أَبَا أَرَامَ، 22وَكَاسَدَ وَحَزْواً وَفِلْدَاشَ وَيِدْلافَ وَبَتُوئِيلَ». 23وَأَنْجَبَ بَتُوئِيلُ رِفْقَةَ. هَؤُلاءِ الثَّمَانِيَةُ أَنْجَبَتْهُمْ مِلْكَةُ لِنَاحُورَ أَخِي إِبْرَاهِيمَ. 24كَذَلِكَ أَنْجَبَتْ لَهُ سُرِّيَّتُهُ الْمَدْعُوَّةُ رُؤُومَةَ طَابَحَ وَجَاحَمَ وَتَاحَشَ وَمَعْكَةَ.