Священное Писание (Восточный перевод), версия для Таджикистана

Римлянам 10:1-21

1Братья, желание моего сердца и моя молитва к Всевышнему о том, чтобы Исроил был спасён. 2Я сам свидетель того, что они ревностно стремятся к Всевышнему, но ревность их не основана на истине: 3не понимая праведности, что даёт Всевышний, и пытаясь установить свою собственную, они не приняли праведности Всевышнего.

4Масех – конец Закона10:4 Или: «конечная цель Закона»., и отныне каждый верующий получает праведность. 5Мусо так описывает праведность по Закону: «Тот, кто исполняет все эти повеления, будет жив благодаря им»10:5 Лев. 18:5.. 6Праведность, которая даётся по вере, говорит: «Не спрашивай себя: кто же поднимется на небо?» – чтобы привести оттуда Масеха. 7И: «Не спрашивай: кто же спустится в бездну?» – чтобы воскресить Масеха из мёртвых. 8Но что она говорит? «Слово близко к тебе, оно в твоих устах и твоём сердце»10:6-8 См. Втор. 30:11-14. – вот слово веры, которое мы возвещаем! 9Если ты исповедуешь своим языком, что Исо – Вечный Повелитель, и если ты веришь сердцем, что Всевышний воскресил Его из мёртвых, то будешь спасён. 10Потому что вера сердца даёт человеку праведность, а исповедание уст приносит спасение.

11Писание говорит: «Верующий в Него никогда не будет постыжен»10:11 Ис. 28:16.. 12В этом между иудеями и другими народами нет никакого различия – один и тот же Вечный Повелитель является Повелителем всех и обильно благословляет всех, кто взывает к Нему. 13Ведь «каждый, кто призовёт имя Вечного, будет спасён»10:13 Иоиль 2:32..

14Но как им призывать Того, в Кого они не поверили? Как поверить в Того, о Ком не слышали? И как услышать, если никто им не будет возвещать? 15И как кто-либо может возвещать, не будучи посланным? Написано: «Как прекрасны ноги тех, кто возвещает Радостную Весть!»10:15 Ис. 52:7; Наум 1:15.

16Но не все исроильтяне послушались Радостной Вести. Исаия говорит: «Вечный, кто поверил слышанному от нас?»10:16 Ис. 53:1. 17Итак, вера приходит от услышанного слова, а слышат его там, где возвещается о Масехе. 18Но я хочу спросить, разве они не слышали? Конечно же слышали, ведь написано:

«Их голос слышен по всей земле,

их слова – до краёв света»10:18 Заб. 18:5..

19Тогда я спрашиваю: может быть, Исроил не понял? Но ведь ещё Мусо говорил словами Всевышнего:

«Я пробужу в вас ревность теми, кто не Мой народ;

Я разгневаю вас невежественными язычниками»10:19 Втор. 32:21..

20А Исаия смело говорит слова Всевышнего:

«Я найден теми, кто не искал Меня;

Я открылся тем, кто не спрашивал Меня»10:20 Ис. 65:1..

21Но об Исроиле Всевышний говорит:

«Весь день Я простирал руки Мои

к этому непокорному и своевольному народу»10:21 Ис. 65:2..

New Chhattisgarhi Translation (नवां नियम छत्तीसगढ़ी)

रोमीमन 10:1-21

1हे भाईमन हो! इसरायलीमन बर मोर दिल के ईछा अऊ परमेसर ले पराथना हवय कि ओमन उद्धार पावंय। 2काबरकि मेंह ओमन बर गवाही दे सकथंव कि ओमन के हिरदय म परमेसर खातिर उत्साह हवय, पर ओमन के उत्साह ह गियान के ऊपर अधारित नइं ए। 3ओमन ओ बात ला नइं जानिन कि कइसने परमेसर ह मनखे ला धरमी बनाथे, पर ओमन मूसा के कानून ला माने के दुवारा खुद धरमी बने के कोसिस करिन। ओमन परमेसर के मुताबिक धरमी बने नइं चाहिन। 4मसीह ह मूसा के कानून के अंत अय, ताकि जऊन कोनो ओकर ऊपर बिसवास करय, ओह परमेसर के नजर म धरमी ठहरय।

5कानून ला माने के दुवारा जऊन धरमीपन होथे, ओकर बारे म मूसा ह ए किसम ले लिखथे, “जऊन मनखे कानून के पालन करही, ओह एकर दुवारा जीयत रहिही।”10:5 लैब्यवस्था 18:5 6पर जऊन धरमीपन ह बिसवास ऊपर अधारित अय, ओकर बारे म ए कहे गे हवय, “तुमन अपन हिरदय म ए झन कहव, कि स्‍वरग ऊपर कोन जाही।”10:6 ब्यवस्था 30:12 (कि ओह मसीह ला उहां ले उतार लानय), 7या अइसने घलो झन कहव, “गहिरई म कोन उतरही।”10:7 ब्यवस्था 30:13 (कि ओह मसीह ला मरे म ले जियाके ऊपर लानय)। 8पर ओम ए घलो लिखाय हवय: “परमेसर के बचन ह तोर लकठा म हवय; एह तोर मुहूं म अऊ तोर हिरदय म हवय।”10:8 ब्यवस्था 30:14 एह ओही बिसवास के बचन अय, जेकर परचार हमन करथन। 9यदि तेंह अपन मुहूं ले कबूल करथस कि यीसू ह परभू अय अऊ अपन हिरदय म बिसवास करथस कि परमेसर ह ओला मरे म ले जियाईस, त तेंह उद्धार पाबे। 10काबरकि मनखे ह अपन हिरदय म बिसवास करे के दुवारा परमेसर के नजर म सही ठहिरथे अऊ मुहूं ले कबूल करे के दुवारा उद्धार पाथे। 11परमेसर के बचन ह ए कहिथे, “जऊन कोनो ओकर (यीसू) ऊपर बिसवास करही, ओला लज्‍जित होय बर नइं पड़ही।”10:11 यसायाह 28:16 12यहूदी अऊ आनजात म कोनो फरक नइं ए। ओही परभू ह जम्मो झन के परभू अय, अऊ ओह ओमन ला बहुंते आसिस देथे, जऊन मन ओकर नांव लेथें, 13काबरकि “हर ओ मनखे जऊन ह परभू के नांव लेथे, ओह उद्धार पाही।”10:13 योएल 2:32

14पर जब ओमन ओकर ऊपर बिसवास नइं करे हवंय, त ओकर नांव कइसने ले सकथें? अऊ ओमन ओकर ऊपर कइसने बिसवास कर सकथें, जब ओमन ओकर बारे म कभू नइं सुने हवंय? अऊ ओमन ओकर बारे म कइसने सुनंय, जब तक कि कोनो ओमन ला नइं बतावय? 15अऊ ओमन ओकर परचार कइसने कर सकथें, जब तक ओमन ला पठोय नइं जावय? जइसने कि परमेसर के बचन म लिखे हवय, “कतेक सुघर होथे ओमन के अवई ह, जऊन मन सुघर संदेस लेके आथें।”10:15 यसायाह 52:7

16पर जम्मो इसरायलीमन सुघर संदेस ला नइं मानिन। यसायाह अगमजानी ह कहे हवय, “हे परभू! कोन ह हमर संदेस ऊपर बिसवास करिस?”10:16 यसायाह 53:1 17बिसवास ह संदेस के सुने ले होथे, अऊ संदेस के सुनई ह मसीह के बचन ले होथे। 18पर मेंह पुछत हंव – का ओमन नइं सुनिन? ओमन जरूर सुनिन; काबरकि परमेसर के बचन म लिखे हवय:

“ओमन के अवाज ह जम्मो धरती म,

अऊ ओमन के बचन ह संसार के छोर तक हबर गे हवय।”10:18 भजन-संहिता 19:4

19मेंह फेर पुछत हंव – का इसरायलीमन नइं समझिन? पहिली मूसा ह कहिस,

“जऊन मन जाति नो हंय, ओमन के दुवारा मेंह तुमन म जलन पैदा करहूं,

एक मुरुख जाति के दुवारा, मेंह तुमन म कोरोध पैदा करहूं।”10:19 ब्यवस्था 32:21

20यसायाह अगमजानी ह बहुंत हिम्मत के संग कहिथे,

“जऊन मन मोला नइं खोजत रिहिन,

ओमन मोला पा गीन,

अऊ जऊन मन मोर बारे म पुछत घलो नइं रिहिन,

ओमन ऊपर मेंह अपन-आप ला परगट करेंव।”10:20 यसायाह 65:1

21पर इसरायलीमन के बारे म, ओह कहिथे,

“मेंह दिन भर अइसने मनखेमन कोति अपन हांथ ला ओमन के सुवागत खातिर पसारे रहेंव,

जऊन मन हुकूम मनइया नो हंय अऊ ढीठ अंय।”10:21 यसायाह 65:2