Słowo Życia

Mateusza 8:1-34

Trędowaty

1Jezus zszedł ze wzgórza, a ogromne tłumy poszły za Nim. 2Wtem podszedł do Niego jakiś trędowaty, pokłonił Mu się i poprosił:

—Panie! Jeśli zechcesz, możesz mnie uzdrowić.

3Jezus dotknął go i powiedział:

—Chcę. Bądź uzdrowiony!

I w jednej chwili trąd zniknął.

4—Nie mów o tym nikomu!—dodał Jezus. —Idź i poproś, aby zbadał cię kapłan. A na dowód tego, że wyzdrowiałeś, zanieś ofiarę, jaką Mojżesz wyznaczył uleczonemu z trądu.

Wiara żołnierza

5Gdy Jezus przybył do Kafarnaum, podszedł do Niego rzymski dowódca oddziału z prośbą:

6—Panie, mój sługa leży w domu, jest sparaliżowany i strasznie cierpi.

7—Dobrze, pójdę go uzdrowić—rzekł Jezus.

8—Panie—powiedział dowódca—nie jestem godny przyjmować Ciebie w moim domu. Wystarczy, że powiesz jedno słowo, a on wyzdrowieje. 9Wiem to, bo sam podlegam władzy i mam pod sobą żołnierzy. Jeśli powiem któremuś: „Idź!”, on idzie, a jeśli powiem któremuś: „Przyjdź tu!”, przychodzi. I jak powiem słudze: „Wykonać!”, to wykonuje polecenie.

10Słysząc taką odpowiedź, Jezus zdziwił się. Rzekł więc do tłumu:

—Zapewniam was: Tak wielkiej wiary nie spotkałem u nikogo w Izraelu! 11Przyjdzie czas, że wielu pogan z całego świata zasiądzie w królestwie niebieskim razem z Abrahamem, Izaakiem i Jakubem. 12Natomiast ci, dla których to królestwo było przygotowane, zostaną wyrzuceni na zewnątrz—w ciemności, gdzie panuje rozpacz i lament.

13Dowódcy zaś powiedział:

—Idź do domu. Niech stanie się tak, jak uwierzyłeś.

I właśnie o tej godzinie jego sługa odzyskał zdrowie.

Jezus uzdrawia

14Potem Jezus poszedł do domu Piotra. Gdy wszedł do środka, zauważył, że teściowa Piotra leży na łóżku i ma wysoką gorączkę. 15Dotknął jej ręki i temperatura natychmiast spadła, a teściowa wstała i przygotowała im posiłek.

16Wieczorem przyprowadzono do Jezusa wielu zniewolonych przez demony. Rozkazał demonom wyjść z ludzi i uzdrowił wszystkich chorych. 17Tak spełniło się proroctwo Izajasza:

„On wziął na Siebie nasze słabości

i niósł nasze choroby”.

Cena naśladowania Jezusa

18Tłumy wokół Jezusa zaczęły rosnąć. Polecił więc uczniom przeprawić się na drugi brzeg jeziora. 19Wówczas podszedł do Niego jeden z przywódców religijnych i powiedział:

—Nauczycielu, pójdę z Tobą, dokądkolwiek się udasz!

20—Lisy mają nory, a ptaki gniazda—odrzekł mu Jezus—lecz ja, Syn Człowieczy, nie mam własnego kąta, gdzie mógłbym odpocząć.

21A któryś z uczniów powiedział:

—Panie, pozwól mi tylko pójść i pochować zmarłego ojca!

22—Chodź ze Mną!—odpowiedział Jezus. —Niech umarli grzebią umarłych.

Jezus ucisza burzę

23Następnie wsiadł z uczniami do łodzi i wypłynęli na jezioro. 24W pewnej chwili zerwała się tak silna burza, że fale zalewały łódź. Jezus wtedy spał. 25Zaczęli więc Go budzić:

—Panie, ratuj nas, toniemy!

26—Dlaczego się tak boicie, nieufni?!—rzekł Jezus.

Wstał i rozkazał wiatrowi oraz wodzie zamilknąć. I zaległa głęboka cisza.

27—Kim On jest—dziwili się wszyscy—że nawet wiatr i jezioro są Mu posłuszne?

Uzdrowienie dwóch zniewolonych przez demony

28Gdy przybyli na drugi brzeg jeziora, do krainy Gadareńczyków, wybiegło Jezusowi naprzeciw dwóch opętanych. Mieszkali w grobowcach i byli tak niebezpieczni, że nikt nie miał odwagi tamtędy chodzić.

29—Czego od nas chcesz, Synu Boży?—zaczęli krzyczeć. —Czemu przyszedłeś przed czasem nas dręczyć?!

30W oddali zaś pasło się wielkie stado świń.

31—Jeśli już nas wypędzasz, poślij nas w te świnie—prosiły demony.

32—Dobrze!—zezwolił im. —Idźcie!

Opuściły więc ludzi i weszły w świnie, po czym całe stado rzuciło się pędem ze stromego zbocza wprost do jeziora i utonęło. 33Pasterze stada uciekli wtedy do pobliskiego miasta i o wszystkim tam opowiedzieli—również o opętanych. 34Wkrótce całe miasto wyszło Jezusowi na spotkanie. Gdy Go zobaczyli, zaczęli prosić, aby odszedł z ich okolic.

New Chhattisgarhi Translation (नवां नियम छत्तीसगढ़ी)

मत्ती 8:1-34

कोढ़ी मनखे

(मरकुस 1:40-45; लूका 5:12-16)

1जब यीसू ह पहाड़ ले उतरिस, त एक बड़े भीड़ ओकर पाछू हो लीस। 2तब एक झन मनखे जऊन ला कोढ़ के बेमारी रहय, ओकर करा आईस, अऊ ओह यीसू ला दंडवत करके कहिस, “हे परभू, यदि तेंह चाहस, त मोला सुध कर सकथस।”

3यीसू ह अपन हांथ ला ओकर अंग लमाईस अऊ ओला छू के कहिस, “मेंह चाहथंव; तेंह सुध हो जा।” अऊ तुरते ओ मनखे ह कोढ़ के बेमारी ले सुध हो गीस। 4तब यीसू ह ओला कहिस, “देख, तें कोनो ला कुछू झन कहिबे। पर जा अऊ अपनआप ला पुरोहित ला देखा, अऊ मूसा के कानून के मुताबिक भेंट चघा, ताकि मनखेमन जानय कि तेंह कोढ़ के बेमारी ले ठीक हो गे हवस।8:4 मरकुस 1:45

रोमी सेना के अधिकारी के बिसवास

(लूका 7:1-10)

5जब यीसू ह कफरनहूम सहर म आईस, त एक झन रोमी सेना के अधिकारी ओकर करा आईस अऊ ओकर ले बिनती करके कहिस, 6“हे परभू, मोर सेवक ह घर म पड़े हवय; ओला लकवा मार दे हवय, अऊ ओह अब्‍बड़ दुःख भोगत हवय।”

7यीसू ह ओला कहिस, “मेंह जाहूं अऊ ओला चंगा करहूं।” 8तब रोमी सेना के अधिकारी ह ए जबाब दीस, “हे परभू, मेंह एकर लइक नो हंव कि तेंह मोर घर म आ। पर सिरिप मुहूं ले कहि दे, अऊ मोर सेवक ह ठीक हो जाही। 9काबरकि मेंह खुदे आने अधिकारी के खाल्‍हे म काम करथंव, अऊ मोर खाल्‍हे म सैनिकमन काम करथें। जब मेंह एक झन ला कहिथंव, ‘जा’, त ओह जाथे अऊ दूसर झन ले कहिथंव, ‘आ’, त ओह आथे। जब मेंह अपन सेवक ले कहिथंव, ‘एला कर’, त ओह करथे।”

10एला सुनके यीसू ह चकित हो गीस, अऊ जऊन मन ओकर पाछू-पाछू आवत रिहिन, ओमन ला ओह कहिस, “मेंह तुमन ला सच कहत हंव कि मेंह इसरायली मनखेमन म घलो अइसने मजबूत बिसवास नइं देखेंव। 11मेंह तुमन ला कहत हंव कि कतको मनखेमन पूरब अऊ पछिम दिग ले आहीं अऊ अब्राहम, इसहाक अऊ याकूब के संग स्‍वरग के राज के भोज म सामिल होहीं। 12पर जऊन मन ला स्‍वरग राज म होना चाही, ओमन ला बाहिर अंधियार म डार दिये जाही, जिहां ओमन रोहीं अऊ अपन दांत पीसहीं।”

13तब यीसू ह रोमी सेना के अधिकारी ले कहिस, “जा, जइसने तेंह बिसवास करे हवस वइसने तोर बर होही।” अऊ ओकर सेवक ह ओहीच घरी चंगा हो गीस।

यीसू ह बहुंते झन ला चंगा करथे

(मरकुस 1:29-34; लूका 4:38-41)

14जब यीसू ह पतरस के घर म आईस, त ओह देखिस कि पतरस के सास ह जर के मारे खटिया म पड़े रहय। 15यीसू ह ओकर हांथ ला छुईस अऊ ओकर जर ह उतर गीस, अऊ ओह उठके यीसू के सेवा टहल करे लगिस।

16जब सांझ होईस, त मनखेमन परेत आतमा ले जकड़े बहुंते मनखेमन ला यीसू करा लानिन। यीसू ह सिरिप गोठ के दुवारा ओ परेत आतमामन ला निकार दीस अऊ जम्मो बेमरहामन ला चंगा करिस। 17ए किसम ले, यसायाह अगमजानी के दुवारा कहे गय ए बचन ह पूरा होईस:

“ओह हमर कमजोरी ला ले लीस,

अऊ हमर रोगमन ला दूर करिस।”8:17 यसायाह 53:4

यीसू के चेला बने के कीमत

(लूका 9:57-62)

18जब यीसू ह अपन चारों कोति मनखेमन के भीड़ ला देखिस, त ओह अपन चेलामन ला झील के ओ पार जाय के हुकूम दीस। 19तब मूसा के कानून के एक गुरू ह यीसू करा आके कहिस, “हे गुरू, तेंह जिहां कहीं घलो जाबे, मेंह तोर पाछू-पाछू चलहूं।”

20यीसू ह ओला कहिस, “कोलिहामन बर रहे के बिल हवय अऊ अकास के चिरईमन करा गुड़ा हवय, पर मनखे के बेटा करा रहे के कोनो ठऊर नइं ए।”

21अऊ एक झन जऊन ह यीसू के चेला रिहिस, ओकर ले कहिस, “हे परभू, पहिली मोला जावन दे कि मेंह अपन मरे ददा ला माटी दे दंव।”

22पर यीसू ह ओला कहिस, “तेंह मोर पाछू हो ले, अऊ मुरदामन ला अपन मुरदा गाड़न दे।”

यीसू ह गर्रा ला सांत करथे

(मरकुस 4:35-41; लूका 8:22-25)

23तब यीसू ह डोंगा म चघिस अऊ ओकर चेलामन घलो ओकर संग गीन। 24अचानक झील म एक भयंकर गर्रा उठिस अऊ डोंगा ह पानी के लहरामन ले भरे लगिस। पर यीसू ह सोवत रहय। 25चेलामन यीसू करा गीन अऊ ओला उठाके कहिन, “हे परभू, हमन ला बचा। हमन पानी म बुड़त हवन।”

26यीसू ह ओमन ला कहिस, “हे अल्‍प बिसवासी मनखेमन हो, तुमन काबर डर्रावत हव?” तब ओह उठिस अऊ गर्रा अऊ पानी के लहरामन ला दबकारिस अऊ जम्मो ह पूरा-पूरी सांत हो गीस।

27ओ मनखेमन अचम्भो म पड़ गीन अऊ कहिन, “एह का किसम के मनखे अय? गर्रा अऊ पानी के लहरामन घलो एकर हुकूम मानथें।”

परेत आतमा बाधित दू झन मनखे के चंगई

(मरकुस 5:1-20; लूका 8:26-39)

28जब यीसू ह झील के ओ पार गदरेनीमन के इलाका म आईस, त दू झन मनखे, जेमन म परेत आतमा रहंय, मसानघाट ले निकरके ओकर करा आईन8:28 गदरेनी ह आनजातमन के इलाका रिहिस।। ओमन अतेक उदन्‍ड रिहिन कि कोनो ओ रसता म आय-जाय नइं सकत रिहिन। 29ओमन चिचियाके कहिन, “हे परमेसर के बेटा, हमर ले तोर का लेना देना? का तेंह ठहराय गय समय ले पहिली हमन ला इहां सताय बर आय हवस?”

30उहां ले कुछू दूरिहा म, सुरामन के एक बड़े झुंड ह चरत रहय। 31ओ परेत आतमामन यीसू ले बिनती करके कहिन, “यदि तेंह हमन ला निकारत हवस, त हमन ला ओ सुरामन के झुंड म पठो दे।”

32यीसू ह ओमन ला कहिस, “जावव।” तब परेत आतमामन ओ मनखेमन ले निकरके सुरामन म हमा गीन अऊ सुरामन के जम्मो झुंड ह तीर म खड़े पथरा ले झील म कूदिस, अऊ पानी म बुड़ मरिस। 33सुरा चरइया मनखेमन भाग गीन अऊ सहर म जाके जम्मो बात बताईन। ओमन ओ परेत आतमा ले बाधित मनखेमन के बारे म घलो बताईन। 34तब सहर के जम्मो मनखेमन यीसू करा भेंट करे बर आईन, अऊ जब ओमन ओला देखिन, त ओकर ले बिनती करके कहिन, “तेंह हमर इलाका ले चले जा।8:34 मत्ती 12:9-14