Słowo Życia

Mateusza 7:1-29

Osądzanie innych

1Nie krytykujcie innych, to i sami tego nie doświadczycie. 2Osądzą was bowiem tak, jak wy osądzacie, i odmierzą wam taką miarą, jaką sami mierzycie. 3Dlaczego zwracasz uwagę na rzęsę w czyimś oku, jeśli w twoim własnym tkwi cała belka? 4Jak możesz powiedzieć: „Przyjacielu, pozwól, że wyciągnę ci rzęsę”, podczas gdy sam masz w oku belkę? 5Obłudniku! Usuń najpierw belkę ze swojego oka, a wtedy przejrzysz i pomożesz mu wyjąć rzęsę z jego oka.

6Nie dawajcie psom tego, co święte, i nie rzucajcie pereł przed świnie. Bo i tak je podepczą, a was mogą zaatakować.

Proś, szukaj, pukaj

7Proście, a dostaniecie. Szukajcie, a znajdziecie. Pukajcie, a otworzą wam. 8Każdy bowiem, kto prosi—dostaje; kto szuka—znajduje; a temu, kto puka—otwierają. 9Kto z was dałby swojemu dziecku kamień, gdy ono prosi o chleb? 10Albo węża, gdy poprosi o rybę? 11Skoro wy, źli ludzie, dajecie dzieciom to, co dobre, to tym bardziej wasz Ojciec w niebie da dobre rzeczy tym, którzy Go proszą. 12Czyńcie innym to, czego sami od nich oczekujecie. Na tym polega cała nauka Prawa i proroków.

Wąska i szeroka droga

13Brama do nieba jest ciasna! Wielu ludzi wchodzi przez szeroką bramę i idzie przestronną drogą, która prowadzi do śmierci. 14Niewielu jednak odnajduje ciasną bramę i wąską drogę prowadzącą do życia.

Drzewo i owoce

15Strzeżcie się fałszywych proroków, którzy przychodzą do was jak wilki przebrane za owce. 16Rozpoznacie ich po ich czynach. Czy zbiera się winogrona albo figi z dzikich krzewów? 17Szlachetne drzewo rodzi dobre owoce, a dzikie drzewo—gorzkie. 18Ani to pierwsze nie może rodzić cierpkich owoców, ani to drugie—dobrych. 19A drzewo nie dające dobrego owocu wycina się i pali. 20Fałszywych proroków również rozpoznacie po ich owocach.

Słowa i czyny

21Nie każdy, kto nazywa Mnie swoim Panem, wejdzie do królestwa niebieskiego—tylko ten, kto wypełnia wolę mojego Ojca w niebie. 22W dniu sądu wielu mi powie: „Panie, czy w Twoim imieniu nie prorokowaliśmy, nie wypędzaliśmy demonów i nie dokonywaliśmy wielkich dzieł?”. 23Ale Ja im odpowiem: „Nigdy was nie znałem. Odejdźcie stąd wy wszyscy, którzy czynicie zło!”.

Mądry i głupi budowniczy

24Ten, kto Mnie słucha, i postępuje według moich słów, jest jak człowiek rozsądny, który swój dom zbudował na mocnym fundamencie. 25Gdy przyszła ulewa, a powódź i wicher uderzyły w ten dom, nie runął, bo miał solidny fundament. 26Kto zaś słucha Mnie, ale nie postępuje według tego, co słyszy, jest jak człowiek głupi, który swój dom zbudował bezpośrednio na piasku—bez fundamentów. 27Gdy przyszła ulewa, a powódź i wicher uderzyły w ten dom, on zawalił się—a była to wielka katastrofa.

28Gdy Jezus skończył, tłumy były zdumione Jego nauczaniem. 29Mówił bowiem do nich nie jak ich przywódcy religijni, ale jak ktoś, kto ma prawdziwą władzę nad ludźmi.

New Chhattisgarhi Translation (नवां नियम छत्तीसगढ़ी)

मत्ती 7:1-29

आने ऊपर दोस लगई

(लूका 6:37-38, 41-42)

1“आने ऊपर दोस झन लगावव, ताकि तुम्‍हर ऊपर घलो दोस झन लगाय जावय। 2काबरकि जऊन किसम ले तुमन आने ऊपर दोस लगाथव, ओही किसम ले तुम्‍हर ऊपर घलो दोस लगाय जाही, अऊ जऊन नाप ले तुमन नापथव, ओही नाप ले तुम्‍हर बर नापे जाही।

3तुमन काबर अपन भाई के आंखी के छोटे कचरा ला देखथव, जबकि अपन खुद के आंखी म पड़े लकड़ी के लट्ठा ला धियान नइं देवव? 4जब तुम्‍हर खुद के आंखी म लकड़ी के लट्ठा हवय, त तुमन अपन भाई ला कइसने कह सकथव, ‘लान मेंह तोर आंखी के छोटे कचरा ला निकार दंव?’ 5हे ढोंगीमन हो, पहिली अपन खुद के आंखी के लट्ठा ला निकारव, तभे तुमन अपन भाई के आंखी के छोटे कचरा ला साफ-साफ देखहू अऊ ओला निकार सकहू।

6पबितर चीज कुकुरमन ला झन देवव, अऊ अपन मोती ला सुरामन के आघू म झन डालव, नइं तो ओमन ओला अपन गोड़ तरी कुचरहीं अऊ तब लहुंटके तुम्‍हर ऊपर चढ़ बईठहीं।”

मांगव, खोजव, खटखटावव

(लूका 11:9-13)

7“मांगव, त तुमन ला दिये जाही; खोजव त तुमन ह पाहू; खटखटावव त तुम्‍हर बर कपाट ह खोले जाही। 8काबरकि जऊन ह मांगथे, ओला मिलथे; जऊन ह खोजथे, ओह पाथे; अऊ जऊन ह खटखटाथे, ओकर खातिर कपाट ला खोले जाथे।

9तुमन म अइसने कोन मनखे अय कि यदि ओकर बेटा ह ओकर ले रोटी मांगथे, त ओह ओला पथरा देथे? 10या यदि ओह मछरी मांगथे, त ओला सांप देथे? 11खराप मनखे होके घलो, जब तुमन अपन लइकामन ला बने चीज देय बर जानथव, त स्‍वरग म रहइया तुम्‍हर ददा ह ओमन ला अऊ बने चीज काबर नइं दिही, जऊन मन ओकर ले मांगथें। 12आने मन संग वइसने बरताव करव, जइसने तुमन चाहथव कि ओमन तुम्‍हर संग करंय, काबरकि मूसा के कानून अऊ अगमजानीमन के एहीच सिकछा अय।”

संकरा दुवार अऊ चाकर दुवार

(लूका 13:24)

13“छोटे कपाट ले घुसरव। काबरकि चाकर हवय ओ कपाट अऊ सरल हवय ओ रसता, जऊन ह बिनास कोति ले जाथे अऊ बहुंते झन ओम ले होके जाथें। 14पर छोटे हवय ओ कपाट अऊ कठिन हवय ओ रसता, जऊन ह जिनगी कोति ले जाथे, अऊ सिरिप थोरकन झन एला पाथें।”

रूख अऊ ओकर फर

(लूका 6:43-44, 46; 13:25-27)

15“लबरा अगमजानीमन ले सचेत रहव। ओमन भेड़ के भेस म तुम्‍हर करा आथें, पर भीतर ले ओमन ह भयंकर भेड़िया अंय। 16ओमन के काम के दुवारा ओमन ला तुमन चिन डारहू। का मनखेमन कंटिली झाड़ी ले अंगूर या ऊंटकटारा झाड़ी ले अंजीर के फर टोरथें? 17ओही किसम ले बने रूख ह बने फर देथे, अऊ खराप रूख ह खराप फर देथे। 18बने रूख ह खराप फर नइं दे सकय अऊ न ही खराप रूख बने फर दे सकथे। 19हर ओ रूख जऊन ह बने फर नइं देवय, काटे अऊ आगी म झोंके जाथे। 20ए किसम ले, ओमन के फर के दुवारा, तुमन ओमन ला चिन डारहू।

21जऊन मन मोला, ‘हे परभू! हे परभू!’ कहिथें, ओमन म ले जम्मो झन स्‍वरग के राज म नइं जा सकंय, पर जऊन ह स्‍वरग म रहइया मोर ददा के ईछा ला पूरा करथे, सिरिप ओहीच ह स्‍वरग के राज म जाही। 22नियाय के दिन म कतको मनखेमन मोला कहिहीं, ‘हे परभू! हे परभू! का हमन ह तोर नांव म अगमबानी नइं करेन? का हमन तोर नांव म परेत आतमामन ला नइं निकारेन? अऊ तोर नांव म कतको अचरज के काम नइं करेन?’ 23तब मेंह ओमन ला साफ-साफ बता दूहूं, ‘मेंह तुमन ला कभू नइं जानेंव। हे कुकरमीमन हो, मोर ले दूरिहा हटव।’ ”

घर बनवइया दू झन मनखे: बुद्धिमान अऊ मुरुख

(लूका 6:47-49)

24“एकरसेति, जऊन ह मोर ए गोठमन ला सुनथे अऊ ओकर पालन करथे, ओह ओ बुद्धिमान मनखे सहीं अय, जऊन ह चट्टान ऊपर अपन घर बनाईस। 25पानी बरसिस, नदीमन म पूरा आईस, गरेर चलिस, अऊ ओ घर ले टकराईस, तभो ले ओ घर ह नइं गिरिस, काबरकि ओकर नींव ह चट्टान ऊपर डारे गे रिहिस। 26पर जऊन ह मोर ए गोठमन ला सुनथे अऊ ओकर पालन नइं करय, ओह ओ मुरुख मनखे सहीं अय, जऊन ह बालू ऊपर अपन घर बनाईस। 27पानी बरसिस, नदीमन म पूरा आईस, गरेर चलिस अऊ ओ घर ले टकराईस अऊ ओ घर ह भरभरा के गिर गीस।”

28जब यीसू ह ए बातमन ला कह चुकिस, त मनखेमन के भीड़ ह ओकर उपदेस ला सुनके चकित हो गीस। 29काबरकि यीसू ह ओमन के कानून के गुरूमन सहीं नइं, पर अधिकार के संग ओमन ला उपदेस देवत रिहिस।