Slovo na cestu

Judův 1:1-25

Nebezpečí hrozící od falešných učitelů

1Juda, služebník Ježíše Krista, bratr Jakubův, píše těm, které Bůh povolal, miluje a pro Ježíše Krista chrání. 2Přeji vám, abyste zakoušeli stále více milosti, pokoje a lásky!

3Moji drazí, tolik jsem si přál napsat vám o našem společném spasení, ale cítím, že je potřebnější, abych vás povzbudil v zápase o víru, která byla jednou provždy darována Božímu lidu. 4Mezi vás se totiž vloudili lidé, kteří nemají žádnou úctu před Bohem a jeho milost využívají jako příležitost k nevázanému životu. O takových lidech bylo už dávno psáno, že jsou odsouzeni, protože se obrátili proti našemu jedinému Vládci a Pánu – Ježíši Kristu.

5Připomínám vám to, co už znáte: ačkoliv Bůh zachránil Izraelce vyvedením z Egypta, přece potom zahubil ty z nich, kteří mu nedůvěřovali a neposlouchali ho. 6Také anděly, kteří zklamali ve svém vysokém postavení, Bůh navždy vyhostil ze své blízkosti a střeží je pro den soudu. 7Podobně obyvatelé Sodomy a Gomory i okolních měst, kteří šli cestou nemravnosti a sexuální zvrácenosti, jsou stále výstražným příkladem hrozného konce ve věčném ohni.

8Přesto se tito falešní křesťané chovají podobně. Zapadli hluboko do hříchu, zneužívají svá těla, pohrdají jakoukoliv autoritou a rouhají se nadpozemským mocnostem. 9A přece ani sám archanděl Michael se neodvážil odsoudit satana. Když se s ním přel o Mojžíšovo tělo, řekl pouze: „Pán tě potrestej!“

10Tito zbloudilci si však klidně tropí žerty z toho, co nechápou. Co svými pudy jako nerozumná zvířata znají, tomu propadají, a to je vede ke zkáze. 11Běda jim! Dali se cestou Kainovou, který nedbal na Boží příkazy a stal se nakonec vrahem svého bratra. Stejně jako Bileám jsou schopni zradit Boží pravdu pro peníze. Odsoudili se k záhubě vzpourou proti Bohu, podobně jako Kórach, který toužil dosáhnout vysokého postavení.

12Při vašem bratrském stolování se tito lidé beze studu přecpávají, protože myslí jen na sebe, a tak se stávají poskvrnou vašeho společenství. Jsou jako mraky bez deště hnané větrem sem a tam, jako neplodné stromy na podzim, mrtvé a vykořeněné. 13Jsou jako divoké mořské vlny vyplavující vlastní špínu, jako zbloudilé hvězdy, které se ztratily v temnotě vesmíru. 14O takových lidech prorokoval Henoch, příslušník šesté generace od Adama: „Pán přijde s mnoha tisíci anděly, 15aby všechny soudil a bezbožné hříšníky trestal za jejich nevěru, špatné jednání a tvrdá slova proti Bohu.“

Těmto lidem není nic vhod a dělají všechno zlé, co se jim zachce. 16Mluví nadutě a lichotí lidem, přináší-li jim to prospěch.

Výzva k vytrvalosti

17Ale vy, moji milovaní, pamatujte na slova Ježíšových apoštolů, 18kteří nám předpověděli, že se v posledním čase objeví lidé zlehčující Boží pravdu. Jejich jediným cílem je „užívat života“, jak se dá. 19Působí roztržky. Jsou to lidé ovládaní svými pudy, a ne Božím Duchem.

20-21Ale vy, moji přátelé, budujte dále na základech dokonalé víry, modlete se v Duchu svatém a zůstávejte v Boží lásce. Trpělivě čekejte na věčný život daný z milosti našeho Pána Ježíše Krista. 22Soucitně pomáhejte těm, kteří kolísají ve víře. 23Zachráníte je tak od záhuby. Mějte slitování i nad těmi, kteří hrubě zhřešili. Přistupujte k nim však s velkou opatrností, abyste sami zůstali čistí.

24Bůh má moc uchránit vás před pádem a přivést vás čisté a dokonalé do slávy ve věčně trvající radosti. 25Pouze jemu jedinému, který nás v Kristu zachránil, patří všechna sláva, velebnost, vláda a moc nyní a zůstane navěky!

New Chhattisgarhi Translation (नवां नियम छत्तीसगढ़ी)

यहूदा 1:1-25

1ए चिट्ठी ह यीसू मसीह के सेवक अऊ याकूब के भाई यहूदा के तरफ ले, ओमन ला लिखे जावत हे, जऊन मन परमेसर के दुवारा बलाय गे हवंय, जऊन मन परमेसर के मयारू अंय अऊ जऊन मन यीसू मसीह खातिर रखे गे हवंय।

2परमेसर के दया, सांति अऊ मया तुम्‍हर ऊपर अब्‍बड़ होवय।

अधरमीमन के पाप अऊ ओमन के बिनास

3हे मयारू संगीमन हो, हालाकि मेंह तुमन ला उद्धार के बारे म लिखे बर बहुंत उत्सुक रहेंव, जऊन म हमन सहभागी हवन, पर मेंह ए जरूरी समझेंव कि तुमन ला लिखंव अऊ बिनती करंव कि तुमन ओ बिसवास खातिर पूरा मिहनत करव, जऊन ला परमेसर ह अपन मनखेमन ला जम्मो के सेति एकेच बार म दे हवय। 4काबरकि कुछू मनखेमन गुपत रूप ले तुमन म आके मिल गे हवंय, जऊन मन के दंड के हुकूम बहुंत पहिली ले लिखे गे हवय। ओमन अधरमी मनखे अंय। ओमन हमर परमेसर के अनुग्रह ला दुराचार म बदल देथें अऊ हमर एकेच मालिक परभू यीसू मसीह के इनकार करथें।

5हालाकि तुमन ए जम्मो बात ला पहिली ले जानत हव, पर मेंह सुरता कराय चाहत हंव कि परभू ह अपन मनखेमन ला मिसर देस ले छोंड़ाईस, पर बाद म ओमन ला नास कर दीस, जऊन मन बिसवास नइं करिन। 6अऊ ओ स्‍वरगदूत, जऊन मन अपन अधिकार के सीमा म नइं रिहिन अऊ स्‍वरग म अपन खुद के घर ला तियाग दीन – ओमन ला परमेसर ह नियाय के महान दिन खातिर नरक के अंधियार म, कभू नइं टूटइया बेड़ी म बांधके रखे हवय। 7एही किसम ले सदोम, अमोरा अऊ आस-पास के सहर के मनखेमन अपन-आप ला छिनारी काम अऊ खराप चाल-चलन म लगाईन। एमन ओमन बर एक नमूना ठहरिन, जऊन मन सदाकाल के आगी के सजा भोगत हवंय।

8ओहीच किसम ले, ए मनखेमन सपना म अपन खुद के देहें ला असुध करथें; परमेसर के परभूता ला इनकार करथें, अऊ स्वरगदूतमन के बदनाम करथें। 9अऊ त अऊ परधान स्‍वरगदूत मीकाएल ह जब सैतान के संग अगमजानी मूसा के लास के बारे म बिवाद करत रिहिस, त ओह सैतान ऊपर बदनामी के दोस लगाय के हिम्मत नइं करिस, पर ए कहिस, “परभू ह तोला दबकारय।” 10पर ए मनखेमन, जऊन बातमन ला नइं समझंय, ओकर बारे म खराप गोठ गोठियाथें, अऊ जऊन बातमन ला, एमन जंगली पसुमन के सहीं सहज रूप म जानथें, ओहीच बातमन एमन ला नास कर देथें।

11एमन ऊपर हाय! काबरकि एमन कैन के डहार म चलथें; एमन फायदा खातिर, बिलाम के सहीं गलती करथें; एमन कोरह के सहीं बिदरोह करथें, अऊ ओकरे सहीं नास हो जाथें।

12ए मनखेमन तुम्‍हर मया के जेवनार म गंदगी के सहीं अंय, एमन तुम्‍हर संग बेसरम सहीं खाथें-पीथें अऊ सिरिप अपन-आप के खियाल रखथें। एमन बिगर पानी के बादर अंय, जऊन ला हवा उड़ा ले जाथे। एमन पतझड़ के ओ रूख सहीं अंय, जऊन म फर नइं लगय अऊ उखाने जाथें अऊ दूबारा मर जाथें। 13एमन समुंदर के भयानक लहरा सहीं अंय, जऊन मन अपन लाज के फेन ला निकारथें। एमन गिंजरत तारामन सहीं अंय, जेमन खातिर परमेसर ह सदाकाल बर घोर अंधियार ठहिराय हवय।

14हनोक, जऊन ह आदम के सातवां पीढ़ी के रिहिस, ए मनखेमन के बारे म ए अगमबानी करे रिहिस, “देखव, परभू ह हजारों-हजार अपन पबितर स्वरगदूतमन संग आवत हवय, 15कि हर एक के नियाय करय, अऊ ओ जम्मो अधरमीमन ला दोसी ठहिराय, जऊन मन कुकरम करके अधरम के काम करे हवंय, अऊ परमेसर के बिरोध म ओ जम्मो कठोर बचन, ए अधरमी पापीमन कहे हवंय।” 16ए मनखेमन कुड़कुड़ावत अऊ आने ऊपर दोस लगावत रहिथें; एमन अपन खराप ईछा के मुताबिक चलथें; एमन अपन खुद के बड़ई मारथें अऊ अपन खुद के फायदा बर दूसर के चापलूसी करथें।

बिसवास म बने रहव

17पर हे मयारू संगवारीमन हो, तुमन ओ बातमन ला सुरता करव, जऊन ला हमर परभू यीसू मसीह के प्रेरितमन तुमन ला पहिली कहे रिहिन। 18ओमन तुमन ला कहे रिहिन, “आखिरी समय म, ठट्ठा करइयामन होहीं, जऊन मन अपन खुद के खराप ईछा के मुताबिक चलहीं।” 19एमन ओ मनखे अंय, जऊन मन तुम्‍हर बीच म फूट डारथें; एमन अपन संसारिक ईछा के मुताबिक चलथें अऊ एमन करा पबितर आतमा नइं ए।

20पर हे मयारू संगवारीमन, तुमन अपन-आप ला अपन परम पबितर बिसवास म बढ़ावव, अऊ पबितर आतमा के सामरथ म पराथना करव। 21अपन-आप ला परमेसर के मया म बनाय रखव, अऊ हमर परभू यीसू मसीह के दया के बाट जोहत रहव, जऊन ह तुमन ला परमेसर के संग सदाकाल के जिनगी दिही। 22जऊन मन बचन ऊपर संका करथें, ओमन ऊपर दया करव; 23आने मन ला लबरा गुरूमन के सिकछा ले बचावव, जइसने तुमन कोनो ला आगी ले खींचके बचाथव; भय के संग आने मन ऊपर दया करव; पर ओ मनखेमन के ओ ओन्ढा ले घलो घिन करव, जऊन म ओमन के पापी सरीर के दाग लगे हवय।

24अब जऊन ह तुमन ला गिरे ले बचा सकथे अऊ तुमन ला निरदोस अऊ आनंद के संग ओकर महिमा ला देखा सकथे – 25ओहीच एके परमेसर, हमर उद्धार करइया के महिमा, गौरव, पराकरम अऊ अधिकार, हमर परभू यीसू मसीह के जरिये सनातन काल, अब अऊ सदाकाल तक होवत रहय। आमीन।