Slovo na cestu

Matouš 4:1-25

Satan pokouší Ježíše na poušti

1-2Potom Duch Boží vedl Ježíše na poušť, kde se po dobu čtyřiceti dnů a nocí postil a velmi vyhladověl. 3Tu se k němu přiblížil pokušitel a řekl mu: „Jsi-li Boží Syn, proměň toto kamení v chleby!“

4Ježíš mu odpověděl: „V Písmu je napsáno: Člověk se nenasytí jen chlebem, ale hlad ve své duši utiší přijetím Božího slova.“

5Pak ho ďábel vzal do Jeruzaléma na věž chrámu 6a řekl: „Jsi-li Boží Syn, seskoč dolů! Vždyť je psáno, že Bůh přikáže svým andělům, aby tě zachytili na svých rukou dříve, než dopadneš na kámen.“

7Ježíš mu zase pohotově odpověděl: „Je však také psáno: Nepokoušej Boha, je tvůj Pán.“

8Nakonec ho ďábel postavil na vysokou horu a ukázal mu všechna království světa s jejich okázalostí a bohatstvím. 9Tam mu řekl: „Toto všechno ti dám, jestliže přede mnou klekneš a pokloníš se mi!“

10Ježíš odpověděl: „Odejdi, satane! Vždyť je psáno: Nikomu kromě Boha se nebudeš klanět ani ho uctívat.“

11V tu chvíli ho ďábel opustil; Ježíše obklopili andělé a pečovali o něj.

Ježíš káže v Galileji

12Když Ježíš uslyšel, že Jana uvěznili, vrátil se do Galileje. 13Nezůstal však v Nazaretu, ale usadil se v Kafarnaum. To město leželo u jezera Genezaretského, v oblasti, kterou kdysi obývaly izraelské kmeny Zabulónovy a Neftalího. 14Tím se splnila předpověď proroka Izajáše:

15„V Galileji, zemi Zabulónově

a Neftalího,

mezi mořem a Jordánem,

se usídlili pohané.

16Tento lid pohroužený do temnoty

uvidí veliké světlo.

Těm, nad kterými se rozprostírá noc smrti,

se rozední.“

17V té době začal Ježíš kázat: „Změňte se! Bůh je tu a zakládá na zemi svoje království!“

Čtyři rybáři následují Ježíše

18Ježíš šel po břehu Galilejského jezera a uviděl dva muže, jak spouštějí sítě do vody. Byli to rybáři Šimon, později nazývaný Petr, a jeho bratr Ondřej. 19Ježíš na ně volal: „Přátelé, pojďte se mnou! Udělám z vás jiné rybáře, budete zachraňovat lidi!“ 20Ti dva všeho nechali a šli s ním.

21O kus dál jiní dva bratři, Jakub a Jan, seděli spolu se svým otcem Zebedeem ve člunu a spravovali sítě. Také je Ježíš vyzval; 22oba se okamžitě zvedli, opustili otce a vykročili za ním.

Ježíš káže a uzdravuje

23Ježíš chodil po celé Galileji, vyučoval v synagogách, šířil radostnou zvěst o Božím království a uzdravoval lidi postižené všemi možnými nemocemi.

24Zprávy o něm se rychle roznesly, takže až ze Sýrie k němu vodili nemocné, posedlé démony, duševně choré, ochrnuté a on je uzdravoval. 25Všude se za ním táhly davy lidí; nejen z Galileje, ale i z Desítiměstí, Jeruzaléma, Judska a Zajordání.

Hindi Contemporary Version

मत्तियाह 4:1-25

जंगल में शैतान द्वारा मसीह येशु की परख

1इसके बाद पवित्रात्मा के निर्देश में येशु को जंगल ले जाया गया कि वह शैतान द्वारा परखे जाएं. 2उन्होंने चालीस दिन और चालीस रात उपवास किया. उसके बाद जब उन्हें भूख लगी, 3परखने वाले ने उनके पास आकर कहा, “यदि तुम परमेश्वर-पुत्र हो तो इन पत्थरों को आज्ञा दो कि ये रोटी बन जाएं.”

4येशु ने उसे उत्तर दिया, “मनुष्य का जीवन सिर्फ भोजन पर नहीं, बल्कि याहवेह के मुख से निकले हुए हर एक शब्द पर भी निर्भर है.”4:4 व्यव 8:3

5तब शैतान ने येशु को पवित्र नगर में ले जाकर मंदिर के शीर्ष पर खड़ा कर दिया 6और उनसे कहा, “यदि तुम परमेश्वर-पुत्र हो तो यहां से नीचे कूद जाओ क्योंकि लिखा है

“वह अपने स्वर्गदूतों को तुम्हारे संबंध में

आज्ञा देंगे तथा वे तुम्हें हाथों-हाथ उठा

लेंगे कि तुम्हारे पैर को पत्थर से चोट न लगे.”4:6 स्तोत्र 91:11, 12

7उसके उत्तर में येशु ने उससे कहा, “यह भी तो लिखा है तुम प्रभु अपने परमेश्वर को न परखो.”4:7 व्यव 6:16

8तब शैतान येशु को अत्यंत ऊंचे पर्वत पर ले गया और विश्व के सारे राज्य और उनका सारा ऐश्वर्य दिखाते हुए उनसे कहा, 9“मैं ये सब तुम्हें दे दूंगा यदि तुम मेरी दंडवत-वंदना करो.”

10इस पर येशु ने उसे उत्तर दिया, “हट, शैतान! दूर हो! क्योंकि लिखा है तुम सिर्फ प्रभु अपने परमेश्वर की ही आराधना और सेवा किया करो.”4:10 व्यव 6:13

11तब शैतान उन्हें छोड़कर चला गया और स्वर्गदूत आए और उनकी सेवा करने लगे.

सेवकाई का प्रारंभ गलील प्रदेश से

12यह मालूम होने पर कि बपतिस्मा देनेवाले योहन को बंदी बना लिया गया है, येशु गलील प्रदेश में चले गए 13और नाज़रेथ नगर को छोड़ कफ़रनहूम नगर में बस गए, जो झील तट पर ज़ेबुलून तथा नफताली नामक क्षेत्र में था. 14ऐसा इसलिये हुआ कि भविष्यवक्ता यशायाह की यह भविष्यवाणी पूरी हो:

15यरदन नदी के पार समुद्रतट पर बसे ज़ेबुलून तथा नफताली प्रदेश

अर्थात गलील प्रदेश में,

जहां4:15 गैर-यहूदी अथवा अयहूदी अन्यजाति बसे हुए हैं,

16अंधकार में जी रहे लोगों ने

एक बड़ी ज्योति को देखा;

गहन अंधकार के निवासियों पर

ज्योति चमकी.4:16 यशा 9:1, 2

17उस समय से येशु ने यह उपदेश देना प्रारंभ कर दिया, “पश्चाताप करो क्योंकि स्वर्ग-राज्य समीप आ गया है.”

पहले चार शिष्यों का बुलाया जाना

18एक दिन गलील झील के किनारे चलते हुए येशु ने दो भाइयों को देखा: शिमओन, जो पेतरॉस कहलाए तथा उनके भाई आन्द्रेयास को. ये समुद्र में जाल डाल रहे थे क्योंकि वे मछुआरे थे. 19येशु ने उनसे कहा, “मेरा अनुसरण करो—मैं तुम्हें मनुष्यों के मछुआरे बनाऊंगा.” 20वे उसी क्षण अपने जाल छोड़कर येशु का अनुसरण करने लगे.

21जब वे वहां से आगे बढ़े तो येशु ने दो अन्य भाइयों को देखा—ज़ेबेदियॉस के पुत्र याकोब तथा उनके भाई योहन को. वे दोनों अपने पिता के साथ नाव में अपने जाल ठीक कर रहे थे. येशु ने उन्हें बुलाया. 22उसी क्षण वे नाव और अपने पिता को छोड़ येशु के पीछे हो लिए.

सारे गलील प्रदेश में येशु द्वारा प्रचार और चंगाई की सेवा

23येशु सारे गलील प्रदेश की यात्रा करते हुए, उनके यहूदी सभागृहों में शिक्षा देते हुए, स्वर्ग-राज्य के ईश्वरीय सुसमाचार का उपदेश देने लगे. वह लोगों के हर एक रोग तथा हर एक व्याधि को दूर करते जा रहे थे. 24सारे सीरिया प्रदेश में उनके विषय में समाचार फैलता चला गया और लोग उनके पास उन सबको लाने लगे, जो रोगी थे तथा उन्हें भी, जो विविध रोगों, पीड़ाओं, प्रेतों, मूर्च्छा रोगों तथा पक्षाघात से पीड़ित थे. येशु इन सभी को स्वस्थ करते जा रहे थे. 25गलील प्रदेश, देकापोलिस, येरूशलेम, यहूदिया प्रदेश और यरदन नदी के पार से बड़ी भीड़ उनके पीछे-पीछे चली जा रही थी.