Nueva Versión Internacional

Joel 1:1-20

1Esta es la palabra del Señor, que vino a Joel hijo de Petuel.

La invasión de langostas

2¡Oigan esto, ancianos del pueblo!

¡Presten atención, habitantes todos del país!

¿Alguna vez sucedió cosa semejante

en sus tiempos o en los de sus antepasados?

3Cuéntenselo a sus hijos,

y que ellos se lo cuenten a los suyos,

y estos a la siguiente generación.

4Lo que dejaron las langostas grandes

lo devoraron las langostas pequeñas;

lo que dejaron las langostas pequeñas

se lo comieron las larvas;

y lo que dejaron las larvas

se lo comieron las orugas.1:4 El texto hebreo en este versículo usa cuatro términos que se refieren a langostas y que son de difícil traducción; también en 2:25.

5¡Despierten, borrachos, y lloren!

Giman, todos los entregados al vino,

porque el vino dulce les fue arrebatado de los labios.

6Una nación poderosa e innumerable

ha invadido mi país:

tiene dientes de león,

colmillos de leona.

7Asoló mis vides,

desgajó mis higueras.

Las peló hasta dejar blancas sus ramas;

¡las derribó por completo!

8Mi pueblo gime como virgen vestida de luto

por la muerte de su prometido.

9Las ofrendas de cereales y las libaciones

no se ofrecen ya en la casa del Señor.

Hacen duelo los sacerdotes,

los ministros del Señor.

10Los campos yacen devastados,

reseca está la tierra;

han sido arrasados los cereales,

se ha secado el vino nuevo

y agotado el aceite.

11Séquense también ustedes, labradores;

giman, viñadores,

por el trigo y la cebada,

porque se ha perdido la cosecha de los campos.

12La vid se marchitó;

languideció la higuera;

se marchitaron los granados,

las palmeras, los manzanos,

¡todos los árboles del campo!

¡Y hasta la alegría de la gente acabó por marchitarse!

Llamado al arrepentimiento

13Vístanse de duelo y giman, sacerdotes;

laméntense, ministros del altar.

Vengan, ministros de mi Dios,

y pasen la noche vestidos de luto,

porque las ofrendas de cereales y las libaciones

han sido suspendidas en la casa de su Dios.

14Entréguense al ayuno,

convoquen a una asamblea solemne.

Reúnan a los ancianos del pueblo

en la casa del Señor su Dios;

reúnan a todos los habitantes del país,

y clamen al Señor.

15¡Ay de aquel día, el día del Señor, que ya se aproxima!

Vendrá como devastación de parte del Todopoderoso.

16¿No se nos arrebató el alimento

ante nuestros propios ojos,

y la alegría y el regocijo

de la casa de nuestro Dios?

17La semilla se pudrió

a pesar de haber sido cultivada.1:17 La semilla … cultivada. Texto de difícil traducción.

Los silos están en ruinas

y los graneros derribados

porque la cosecha se perdió.

18¡Cómo brama el ganado!

Vagan sin rumbo las vacas

porque no tienen donde pastar,

y sufren también las ovejas.

19A ti clamo, Señor,

porque el fuego ha devorado los pastizales de la estepa;

las llamas han consumido todos los árboles silvestres.

20Aun los animales del campo te buscan con ansias,

porque se han secado los arroyos

y el fuego ha devorado los pastizales de la estepa.

Hindi Contemporary Version

योएल 1:1-20

1याहवेह का वह वचन जो पथूएल के पुत्र योएल के पास आया.

टिड्डियों का धावा

2हे अगुओं, यह बात सुनो;

हे देश में रहनेवाले सब लोगों, मेरी बात सुनो.

क्या तुम्हारे समय में

या तुम्हारे पूर्वजों के समय में ऐसी कोई बात कभी हुई?

3अपने बच्चों को यह बात बताओ,

और तुम्हारे बच्चे यह बात अपने बच्चों को बताए,

और वे बच्चे उनके अगली पीढ़ी को बताएं.

4टिड्डियों के झुंड ने जो छोड़ दिया था

उसे बड़े टिड्डियों ने खा लिया है;

बड़े टिड्डियों ने जो छोड़ दिया था

उसे छोटे टिड्डियों ने खा लिया है;

और छोटे टिड्डियों ने छोड़ दिया था

उसे दूसरे टिड्डियों ने खा लिया है.

5हे मतवालो, जागो, और रोओ!

हे सब शराब पीने वालों, विलाप करो;

नई दाखमधु के कारण विलाप करो,

क्योंकि इसे तुम्हारे मुंह से छीन लिया गया है.

6मेरे देश पर एक-एक जाति ने आक्रमण कर दिया है,

वह एक शक्तिशाली सेना है और उनकी संख्या अनगिनत है;

उसके दांत सिंह के दांत के समान,

और उसकी दाढ़ें सिंहनी की दाढ़ के समान हैं.

7उसने मेरी अंगूर की लताओं को उजाड़ दिया है

और मेरे अंजीर के पेड़ों को नष्ट कर दिया है.

उसने उनकी छाल को छील दिया है,

और उनकी शाखाओं को सफेद छोड़कर

उनकी छाल को फेंक दिया है.

8तुम ऐसे विलाप करो, जैसे एक कुंवारी टाट के कपड़े पहिने

अपने युवावस्था के सगाई के पुरुष के लिये शोक करती है.

9याहवेह के भवन में अब

न तो अन्नबलि और न ही पेय बलि चढ़ाई जाती है.

याहवेह की सेवा करनेवाले पुरोहित

विलाप कर रहे हैं.

10खेत नष्ट हो गये हैं,

ज़मीन सूख गई है;

अनाज नष्ट हो गया है,

नई दाखमधु सूख गई है,

जैतून का तेल समाप्त होता है.

11हे किसानों, निराश हो,

हे अंगूर की लता लगानेवालो, विलाप करो;

गेहूं और जौ के लिये दुख मनाओ,

क्योंकि खेत का फसल नाश हो गया है.

12अंगूर की लता सूख गई है

और अंजीर का पेड़ मुरझा गया है;

अनार, खजूर तथा सेब के पेड़—

मैदान के सब पेड़—सूख गये हैं.

इसमें संदेह नहीं कि

लोगों का आनंद जाता रहा है.

विलाप करने के लिए आह्वान

13हे पुरोहितो, शोक-वस्त्र पहनकर विलाप करो;

तुम जो वेदी पर सेवा करते हो, विलाप करो.

तुम जो मेरे परमेश्वर की सेवा करते हो,

आओ, और शोक-वस्त्र पहनकर रात बिताओ;

क्योंकि तुम्हारे परमेश्वर के भवन में

अन्नबलि और पेय बलि चढ़ाना बंद कर दिया गया है.

14एक पवित्र उपवास की घोषणा करो;

एक विशेष सभा करो.

अगुओं को और उन सबको

जो देश में रहते हैं

याहवेह तुम्हारे परमेश्वर के भवन में बुलाओ,

और याहवेह के सामने गिड़गिड़ाकर विनती करो.

15उस दिन के लिये हाय!

क्योंकि याहवेह का दिन निकट है;

यह सर्वशक्तिमान की ओर से विनाश का दिन होकर आएगा.

16क्या हमारे देखते-देखते

भोजन वस्तुओं की पूर्ति बंद नहीं हुईं—

और इसी प्रकार हमारे परमेश्वर के भवन से

आनंद और खुशी खत्म नहीं हो गया?

17मिट्टी के ढेलों के नीचे

बीज झुलस गये हैं.

भण्डारगृह खंडहर हो रहे हैं,

भण्डारगृह ढहा दिये गये हैं,

क्योंकि उपज हुई ही नहीं.

18पशु कैसे कराह रहे हैं!

पशुओं के झुंड के झुंड विचलित हो भटक रहे हैं

क्योंकि उनके लिए चरागाह नहीं है;

यहां तक कि भेड़ों के झुंड भी कष्ट में हैं.

19हे याहवेह, मैं आपको पुकारता हूं,

क्योंकि सुनसान जगह के चारागाहों को आग ने नष्ट कर दिया है

और आग की ज्वाला ने मैदान के सब पेड़ों को जला डाला है.

20और तो और जंगली जानवर आपकी चाह करते हैं;

जल के सोते सूख चुके हैं

और सुनसान जगह के चारागाहों को आग ने नष्ट कर दिया है.