Nueva Versión Internacional

Amós 9:1-15

Quinta visión

1Vi al Señor de pie junto al altar, y él dijo:

«Golpea los capiteles de las columnas

para que se estremezcan los umbrales,

y que caigan en pedazos sobre sus cabezas.

A los que queden los mataré a espada.

Ni uno solo escapará,

ninguno saldrá con vida.

2Aunque se escondan en lo profundo del sepulcro,

de allí los sacará mi mano.

Aunque suban hasta el cielo,

de allí los derribaré.

3Aunque se oculten en la cumbre del Carmelo,

allí los buscaré y los atraparé.

Aunque de mí se escondan en el fondo del mar,

allí ordenaré a la serpiente que los muerda.

4Aunque vayan al destierro arriados por sus enemigos,

allí ordenaré que los mate la espada.

Para mal, y no para bien,

fijaré en ellos mis ojos».

5El Señor omnipotente, el Todopoderoso,

toca la tierra, y ella se desmorona.

Sube y baja la tierra

como las aguas del Nilo, el río de Egipto,

y se enlutan todos los que en ella viven.

6Dios construye su excelso palacio en el cielo

y pone su cimiento9:6 excelso palacio … cimiento. Palabras de difícil traducción. en la tierra,

llama a las aguas del mar

y las derrama sobre la superficie de la tierra:

su nombre es el Señor.

7«Israelitas, ¿acaso ustedes

no son para mí como cusitas?

¿Acaso no saqué de Egipto a Israel,

de Creta9:7 Creta. Lit. Caftor. a los filisteos

y de Quir a los sirios?

—afirma el Señor—.

8Por eso los ojos del Señor omnipotente

están sobre este reino pecaminoso.

Borraré de la faz de la tierra a los descendientes de Jacob,

aunque no del todo

—afirma el Señor—.

9Daré la orden de zarandear al pueblo de Israel

entre todas las naciones,

como se zarandea la arena en una criba,

sin que caiga a tierra ni una sola piedra.

10Morirán a filo de espada

todos los pecadores de mi pueblo,

todos los que dicen:

“No nos alcanzará la calamidad;

¡jamás se nos acercará!”

Restauración de Israel

11»En aquel día levantaré

la choza caída de David.

Repararé sus grietas,

restauraré sus ruinas

y la reconstruiré tal como era en días pasados,

12para que ellos posean el remanente de Edom

y todas las naciones que llevan mi nombre

—afirma el Señor,

que hará estas cosas—.

13»Vienen días —afirma el Señor—,

»en los cuales el que ara alcanzará al segador

y el que pisa las uvas, al sembrador.

Los montes destilarán vino dulce,

el cual correrá por todas las colinas.

14Restauraré a9:14 Restauraré a. Alt. Haré volver a los cautivos de. mi pueblo Israel;

ellos reconstruirán las ciudades arruinadas

y vivirán en ellas.

Plantarán viñedos y beberán su vino;

cultivarán huertos y comerán sus frutos.

15Plantaré a Israel en su propia tierra,

para que nunca más sea arrancado

de la tierra que yo le di»,

dice el Señor tu Dios.

Hindi Contemporary Version

आमोस 9:1-15

इस्राएल का नाश किया जाना

1मैंने प्रभु को वेदी के निकट खड़े देखा, और उन्होंने कहा:

“मीनारों के सिराओं को ऐसे मारो

कि नीवें तक हिल जाएं.

उन्हें सब लोगों के सिरों पर गिराओ;

जो बच जाएंगे, उनको मैं तलवार से मार डालूंगा.

एक भी भाग नहीं सकेगा,

एक भी बच न सकेगा.

2चाहे वे खोदकर अधोलोक तक पहुंच जाएं,

मेरा हाथ उन्हें वहां से भी खींच लाएगा.

चाहे वे आकाश के ऊपर भी चढ़ जाएं,

मैं उन्हें वहां से भी नीचे ले आऊंगा.

3चाहे वे कर्मेल पर्वत के शिखर पर जा छिपें,

मैं उन्हें वहां भी ढूंढ़कर पकड़ लूंगा.

चाहे वे मेरी दृष्टि से समुद्र के तल में छिप जाएं,

वहां मैं सर्प को उन्हें डसने की आज्ञा दूंगा.

4चाहे उनके शत्रु उन्हें बंधुआई में ले जाएं,

वहां मैं आज्ञा देकर उन्हें तलवार से मरवा डालूंगा.

“मैं उनकी भलाई के लिये नहीं

पर उनकी हानि के लिये उन पर नजर रखूंगा.”

5प्रभु, सर्वशक्तिमान याहवेह,

वे पृथ्वी को छूते हैं और वह पिघल जाती है,

और उसमें रहनेवाले सब विलाप करते हैं;

पूरी भूमि नील नदी के समान ऊपर उठती है,

और फिर मिस्र देश की नदी के समान नीचे बैठ जाती है;

6वे आकाश में अपना ऊंचा महल बनाते हैं

और उसकी नींव पृथ्वी पर रखते हैं;

वे समुद्र के पानी को बुलाते हैं

और भूमि पर वर्षा करते हैं—

याहवेह है उनका नाम.

7“क्या तुम इस्राएली मेरे लिये

कूशवासियों के समान नहीं हो?”

याहवेह की यह घोषणा है.

“क्या मैं इस्राएलियों को मिस्र देश से,

फिलिस्तीनियों को काफ़तोर देश से

और सीरियावासियों को कीर देश से बाहर निकालकर नहीं लाया?

8“निश्चित रूप से परम प्रभु की आंखें

पापमय राज्य पर लगी हुई हैं.

मैं धरती पर से

इसे नाश कर दूंगा.

तौभी, मैं याकोब के वंश को

पूरी तरह नाश नहीं करूंगा,”

याहवेह की यह घोषणा है.

9“क्योंकि मैं आज्ञा दूंगा,

और मैं इस्राएल के लोगों को

सब जातियों बीच ऐसे हिलाऊंगा,

जैसे किसी चलनी में अनाज को हिलाया जाता है,

और भूमि पर एक भी कंकड़ नहीं गिरता.

10मेरे लोगों के बीच में जो पापी हैं,

वे सब जो यह कहते हैं,

‘न तो विपत्ति हमारे ऊपर आएगी और न ही विपत्ति से हमारा सामना होगा,’

वे सबके सब तलवार से मारे जाएंगे.

इस्राएल की वापसी

11“उस समय

“मैं दावीद के गिरे हुए आश्रय का पुनर्निमाण करूंगा,

मैं इसके टूटे दीवारों को ठीक करूंगा,

इसके खंडहरों को ठीक करूंगा,

और इसको पहले जैसा फिर से बना दूंगा,

12ताकि वे एदोम के बचे लोगों को

और उन सब जाति के लोगों को अपने अधीन कर लें, जो मेरा नाम लेते हैं,”

यह उन्हीं याहवेह की घोषणा है, जो यह सब करने पर हैं.

13यह याहवेह का कहना है, “ऐसे दिन आ रहे हैं,

“जब हल चलानेवाला फसल काटनेवाले से,

और अंगूर को रौंदनेवाला पौधा रोपनेवाले से आगे निकल जाएगा.

नया अंगूर की शराब पर्वतों से टपकने लगेगा

और यह सब पहाड़ियों से बह जाएगा,

14और मैं अपने इस्राएली लोगों को बंधुआई से वापस ले आऊंगा.

“वे नष्ट हुए नगरों का पुनर्निर्माण करेंगे और उनमें रहने लगेंगे.

वे अंगूर की बारियां लगाएंगे और उनकी शराब पीएंगे;

वे बगीचा लगाएंगे और उनके फलों को खाएंगे.

15मैं इस्राएल को उनके अपने देश में स्थापित करूंगा,

और वे उस देश से फिर कभी निकाले नहीं जाएंगे

जिसे मैंने उन्हें दिया है,”

यह याहवेह तुम्हारे परमेश्वर का कहना है.