New Russian Translation

Бытие 18:1-33

Три гостя Авраама

1Господь явился Аврааму у дубравы Мамре, когда он сидел у входа в свой шатер во время дневного зноя. 2Авраам поднял взгляд и увидел, что неподалеку стоят три человека. Увидев их, он побежал от входа в шатер им навстречу и поклонился до земли.

3Он сказал:

– Если я нашел милость в Твоих глазах, Владыка18:3 Евр.: «Адонай»., не пройди мимо Твоего слуги. 4Пусть принесут немного воды, чтобы вам вымыть ноги и отдохнуть под этим деревом, 5а я принесу вам что-нибудь поесть. Вы подкрепитесь и продолжите свой путь – раз уж вы пришли к вашему слуге.

– Очень хорошо, – ответили они. – Делай, как говоришь.

6Авраам поспешил в шатер к Сарре и сказал:

– Скорее, достань три саты18:6 Три саты что равняется 22 литрам (примерно 14 кг муки). лучшей муки, замеси тесто и испеки хлеба.

7Затем он побежал к стаду, выбрал лучшего, нежного теленка и отдал слуге, который быстро приготовил его. 8Потом он принес творога, молока и приготовленного теленка и поставил перед ними. Пока они ели, он стоял рядом с ними под деревом.

9– Где твоя жена Сарра? – спросили они.

– Там, в шатре, – ответил он.

10Тогда Господь18:10 Букв.: «Он». сказал:

– Я непременно вернусь к тебе в следующем году, примерно в это же время, и у Сарры, твоей жены, будет сын.

Сарра слушала, стоя у Него за спиной, у входа в шатер. 11Авраам и Сарра были уже стары и в преклонных годах, и то, что обычно бывает у женщин, у Сарры прекратилось. 12Поэтому Сарра рассмеялась про себя, подумав: «Я уже состарилась, и господин мой стар; мне ли иметь еще такую радость?»18:12 Или: «наслаждение».

13Тогда Господь сказал Аврааму:

– Почему Сарра смеется и говорит: «Неужели у меня в самом деле будет ребенок, ведь я стара?» 14Есть ли что-нибудь слишком трудное для Господа? Я вернусь к тебе через год в назначенное время, и у Сарры будет сын.

15Сарра испугалась и солгала, сказав:

– Я не смеялась.

Но Он сказал:

– Нет, ты смеялась.

Просьба Авраама о сохранении города Содома

16Мужи поднялись и пошли в сторону Содома. Авраам же пошел с ними, чтобы проводить их. 17Господь сказал:

– Скрою ли Я от Авраама то, что собираюсь сделать? 18От Авраама непременно произойдет великий и сильный народ, и все народы на земле получат благословение через него. 19Ведь Я избрал его, чтобы он заповедал своим детям и всем своим потомкам хранить путь Господа, поступая правильно и справедливо, чтобы Господь исполнил то, что обещал Аврааму.

20Господь сказал:

– Вопль против Содома и Гоморры так велик, их грех так тяжек, 21что Я сойду и посмотрю, верен ли вопль, достигший Меня, так ли скверно они поступают. Если нет, Я узнаю.

22Мужи повернулись и пошли к Содому, но Господь остался стоять перед Авраамом18:22 Так по древней текстовой традиции. В нормативном еврейском тексте «но Авраам остался стоять перед Господом».. 23Авраам приблизился к Нему и сказал:

– Неужели Ты уничтожишь праведного вместе с грешным? 24Что, если в городе есть пятьдесят праведников? Неужели Ты уничтожишь и не пощадишь18:24 Или: «не простишь»; также в ст. 26. этого места ради пятидесяти праведников? 25Не можешь Ты сделать такое – погубить праведного вместе с нечестивым, обойтись с праведным и нечестивым одинаково. Не можешь Ты сделать так! Разве Судья всей земли может творить неправду?

26Господь сказал:

– Если Я найду в Содоме пятьдесят праведников, то пощажу ради них все это место.

27Тогда Авраам сказал вновь:

– Вот, я осмелился говорить с Владыкой, хотя я лишь прах и пепел; 28что, если число праведных на пять меньше пятидесяти? Уничтожишь ли Ты весь город из-за пяти человек?

– Если Я найду там сорок пять, – ответил Он, – то не уничтожу его.

29Авраам обратился к Нему еще раз:

– Что, если там найдутся лишь сорок?

Он ответил:

– Ради сорока Я не сделаю этого.

30Тогда тот сказал:

– Да не разгневается Владыка, но позволит мне сказать. Что, если найдутся там только тридцать?

Он ответил:

– Я не сделаю этого, если найду там тридцать.

31Авраам сказал:

– Вот, я был так смел, что решился говорить Владыке. Что, если найдутся там лишь двадцать?

Он сказал:

– Ради двадцати Я не уничтожу его.

32Тогда Авраам сказал:

– Да не разгневается Владыка, но позволит мне сказать еще лишь один раз. Что, если найдутся там лишь десять?

Он ответил:

– Ради десяти Я не уничтожу его.

33Когда Господь закончил говорить с Авраамом, Он ушел, а Авраам вернулся домой.

Hindi Contemporary Version

उत्पत्ति 18:1-33

यित्सहाक के जन्म की प्रतिज्ञा

1याहवेह ने ममरे के बांज वृक्षों के पास अब्राहाम को दर्शन दिया, तब अब्राहाम दिन की कड़ी धूप में अपने तंबू के द्वार पर बैठे हुए थे. 2अब्राहाम ने देखा कि उसके सामने तीन व्यक्ति खड़े हैं. जब उसने इन व्यक्तियों को देखा, तब वह उनसे मिलने के लिये तंबू के द्वार से दौड़कर उनके पास गया, और झुककर उनको प्रणाम किया.

3अब्राहाम ने उनसे कहा, “मेरे स्वामी, यदि मुझ पर आपकी कृपादृष्टि हो, तो अपने सेवक के यहां रुके बिना न जाएं. 4आप इस पेड़ के नीचे बैठिये, मैं पानी लेकर आता हूं, ताकि आप अपने पांव धो सकें.” 5मैं आपके लिए भोजन तैयार करता हूं, ताकि आप खाकर तरो ताजा हो सकें और तब अपनी आगे की यात्रा में जाएं—क्योंकि आप अपने सेवक के यहां आए हैं.

उन्होंने अब्राहाम से कहा, “वैसा ही करो, जैसा कि तुमने कहा है.”

6अब्राहाम जल्दी तंबू में साराह के पास गए और कहा, “तुरंत, तीन माप मैदा गूंधकर कुछ रोटियां बनाओ.”

7अब्राहाम दौड़कर अपने गाय-बैल के झुंड के पास गया और एक कोमल अच्छा बछड़ा छांट कर अपने सेवक को दिया और उससे कहा, जल्दी से खाना तैयार करो. 8फिर अब्राहाम ने दही, दूध तथा बछड़ा जो तैयार करवाया था, उनको खिलाया. जब वे तीनों भोजन कर रहे थे, अब्राहाम पेड़ की छाया में उनके पास खड़ा रहा.

9उन्होंने अब्राहाम से पूछा, “तुम्हारी पत्नी साराह कहां है?”

अब्राहाम ने कहा, “वह तंबू में है.”

10इस पर उनमें से एक ने कहा, “अगले वर्ष इसी समय तुम्हारी पत्नी साराह को एक पुत्र होगा.”

अब्राहाम की पीठ तंबू की ओर थी, और तंबू के द्वार पर साराह यह बात सुन रही थी. 11अब्राहाम तथा साराह बहुत बूढ़े थे, और साराह बच्चा पैदा करने की उम्र को पार कर चूकी थी. 12इसलिये साराह मन ही मन हंसते हुए सोचने लगी, “मैं और मेरे स्वामी हम दोनों बहुत बूढ़े हैं, अब क्या यह खुशी हमारे जीवन में आयेगी?”

13तब याहवेह ने अब्राहाम से प्रश्न किया, “साराह यह कहकर क्यों हंसी रही है कि क्या मैं वास्तव में एक बच्चे को जन्म दूंगी, जबकि मैं तो इतनी बूढ़ी हो चुकी हूं? 14क्या याहवेह के लिए कोई काम कठिन है? मैं अगले साल इसी समय तुमसे मिलने आऊंगा, जब साराह का एक पुत्र होगा.”

15तब साराह डर गयी, और यह कहकर झूठ बोलने लगी, “मैं नहीं हंसी थी.”

तब परमेश्वर के दूत ने कहा “तुम हंसी ज़रूर थी.”

सोदोम के लिए अब्राहाम का आग्रह

16इसके बाद वे व्यक्ति जाने के लिए उठे और सोदोम की ओर देखने लगे, अब्राहाम उनको विदा करने के लिए उनके साथ-साथ चल रहे थे. 17तब याहवेह ने सोचा, “जो काम मैं करनेवाला हूं, क्या मैं अब्राहाम से यह बात न कहूं? 18अब्राहाम से तो निश्चय एक बड़ी और सामर्थ्यी जाति होगी तथा उससे ही पृथ्वी की सारी जाति आशीष पाएगी 19क्योंकि मैंने उसे इसलिये चुना कि वह अपने बच्चों एवं घर के लोगों को सही और न्याय की बात सिखायें और वे याहवेह के मार्ग में स्थिर रहें, ताकि याहवेह अब्राहाम से किए गए वायदे को पूरा करें.”

20तब याहवेह ने बताया, “सोदोम तथा अमोराह की चिल्लाहट बढ़ गई है, उनका पाप बहुत बढ़ गया है 21इसलिये मैं वहां जाकर देखूंगा कि उनके काम सही हैं या नहीं. यदि नहीं, तो मैं समझ लूंगा.”

22फिर उनमें से दो व्यक्ति वहां से मुड़कर सोदोम की ओर चले गए, जबकि अब्राहाम याहवेह के सामने रुके रहे. 23अब्राहाम ने याहवेह से कहा: “क्या आप सचमुच बुरे लोगों के साथ धर्मियों को भी नाश करेंगे? 24यदि उस नगर में पचास धर्मी हों, तो क्या आप उस नगर को नाश करेंगे? क्या उन पचास धर्मियों के कारण बाकी सब लोग बच नहीं सकते? 25इस प्रकार का काम करना आप से दूर रहे—दुष्ट के साथ धर्मी को मार डालना, दुष्ट और धर्मी के साथ एक जैसा व्यवहार करना. ऐसा करना आप से दूर रहे! क्या सारी पृथ्वी का न्यायी न्याय न करे?”

26याहवेह ने कहा, “यदि मुझे सोदोम शहर में पचास धर्मी व्यक्ति मिल जाएं, तो मैं उनके कारण पूरे शहर को छोड़ दूंगा.”

27अब्राहाम ने फिर कहा: “हालाकि मैं केवल मिट्टी और राख हूं, फिर भी मैंने प्रभु से बात करने की हिम्मत की है, 28यदि वहां पचास में से पांच धर्मी कम हो जायें, तो क्या आप पांच धर्मी कम होने के कारण पूरा नगर का नाश करेंगे?”

याहवेह ने उत्तर दिया, “यदि मुझे वहां पैंतालीस भी मिल जाएं, तो मैं उस नगर को नाश नहीं करूंगा.”

29एक बार फिर अब्राहाम ने याहवेह से कहा, “यदि वहां चालीस ही धर्मी पाए जाएं तो?”

याहवेह ने उत्तर दिया, “उन चालीस के कारण भी मैं नाश न करूंगा.”

30तब अब्राहाम ने कहा, “प्रभु, आप मुझ पर नाराज न होएं, पर मुझे बोलने दें. यदि वहां तीस ही धर्मी पाए जाएं तो?”

याहवेह ने उत्तर दिया, “यदि मुझे वहां तीस भी मिल जाएं, तो मैं नाश न करूंगा.”

31अब्राहाम ने कहा, “प्रभु, मैंने आप से बात करने की हिम्मत तो कर ही ली है; यह भी हो सकता है कि वहां बीस ही पाए जाएं तो?”

याहवेह ने उत्तर दिया, “मैं उन बीस के कारण उस नगर को नाश न करूंगा.”

32फिर अब्राहाम ने कहा, “हे प्रभु, आप क्रोधित न हों, आखिरी बार आप से विनती करता हूं. यदि वहां दस ही पाए जाएं तो?”

याहवेह ने उत्तर दिया, “मैं उन दस के कारण उस नगर को नाश न करूंगा.”

33जब याहवेह अब्राहाम से बात कर चुके, तो वे वहां से चले गये, और अब्राहाम अपने घर वापस चला गया.