New International Reader's Version

2 Thessalonians 3:1-18

Paul Asks for Prayer

1Now I want to talk about some other matters. Brothers and sisters, pray for us. Pray that the Lord’s message will spread quickly. Pray that others will honor it just as you did. 2And pray that we will be saved from sinful and evil people. Not everyone is a believer. 3But the Lord is faithful. He will strengthen you. He will guard you from the evil one. 4We trust in the Lord. So we are sure that you are doing the things we tell you to do. And we are sure that you will keep on doing them. 5May the Lord fill your hearts with God’s love. May Christ give you the strength to go on.

Paul Warns Those Who Do Not Want to Work

6Brothers and sisters, here is a command we give you. We give it in the name of the Lord Jesus Christ. Keep away from every believer who doesn’t want to work and makes trouble. Keep away from any believer who doesn’t live up to the teaching you received from us. 7You know how you should follow our example. We worked when we were with you. 8We didn’t eat anyone’s food without paying for it. In fact, it was just the opposite. We worked night and day. We worked very hard so that we wouldn’t cause any expense to any of you. 9We worked, even though we have the right to receive help from you. We did it in order to be a model for you to follow. 10Even when we were with you, we gave you a rule. We said, “Anyone who won’t work shouldn’t be allowed to eat.”

11We hear that some people among you don’t want to work and are making trouble. They aren’t really busy. Instead, they are bothering others. 12We belong to the Lord Jesus Christ. So we strongly command people like that to settle down. They have to earn the food they eat. 13Brothers and sisters, don’t ever get tired of doing what is good.

14Keep an eye on anyone who doesn’t obey the teachings in our letter. Don’t have anything to do with that person. Then they will feel ashamed. 15But don’t think of them as an enemy. Instead, warn them as you would warn another believer.

Final Greetings

16May the Lord who gives peace give you peace at all times and in every way. May the Lord be with all of you.

17I, Paul, write this greeting in my own handwriting. That’s how I prove that I am the author of all my letters. I always do it that way.

18May the grace of our Lord Jesus Christ be with you all.

Hindi Contemporary Version

2 थेस्सलोनिकेयुस 3:1-18

प्रार्थना के लिए अनुरोध

1अंत में, प्रियजन, हमारे लिए प्रार्थना करो कि प्रभु का संदेश तेज गति से हर जगह फैलता जाए और उसे महिमा प्राप्त हो, ठीक जैसी तुम्हारे बीच. 2और यह भी कि हम टेढ़े मनवाले व्यक्तियों तथा दुष्ट मनुष्यों से सुरक्षित रहें क्योंकि विश्वास का वरदान सभी ने प्राप्त नहीं किया है. 3किंतु प्रभु विश्वासयोग्य हैं. वही तुम्हें स्थिर करेंगे और उस दुष्ट से तुम्हारी रक्षा करेंगे. 4प्रभु में हमें तुम्हारे विषय में पूरा निश्चय है कि तुम हमारे आदेशानुसार ही स्वभाव कर रहे हो और ऐसा ही करते रहोगे. 5प्रभु तुम्हारे हृदयों को परमेश्वर के प्रेम तथा मसीह येशु के धीरज की ओर अगुवाई करें.

आलस्य तथा मन मुटाव के विरुद्ध चेतावनी

6प्रियजन, प्रभु मसीह येशु के नाम में हम तुम्हें यह आज्ञा देते हैं कि तुम ऐसे हर एक व्यक्ति से दूर रहो, जो अनुचित चाल चलता है, जो हमारे द्वारा दी गई शिक्षाओं का पालन नहीं करता. 7यह तुम्हें मालूम है कि तुम्हारे लिए हमारे जैसी चाल चलना सही है क्योंकि तुम्हारे बीच रहते हुए हम निकम्मे नहीं रहे. 8इतना ही नहीं, हमने किसी के यहां दाम चुकाए बिना भोजन नहीं किया परंतु हमने दिन-रात परिश्रम किया और काम करते रहे कि हम तुममें से किसी के लिए भी बोझ न बनें. 9यह इसलिये नहीं कि तुमसे सहायता पाना हमारा अधिकार नहीं है परंतु इसलिये कि हम स्वयं को तुम्हारे सामने आदर्श स्वभाव प्रस्तुत करें और तुम हमारी सी चाल चलो. 10यहां तक कि जब हम तुम्हारे बीच में थे, हम तुम्हें यह आज्ञा दिया करते थे: “किसी आलसी को भोजन न दिया जाए.”

11सुनने में यह आया है कि तुममें से कुछ की जीवनशैली आलस भरी हो गई है. वे कोई भी काम नहीं कर रहे; वस्तुत: वे अन्यों के लिए बाधा बन गए हैं. 12ऐसे व्यक्तियों के लिए प्रभु मसीह येशु में हमारी विनती भरी आज्ञा है कि वे गंभीरता पूर्वक काम पर लग जाएं तथा वे अपने ही परिश्रम से कमाया हुआ भोजन करें. 13किंतु, प्रियजन, तुम स्वयं वह करने में पीछे न हटना, जो सही और भला है.

14यदि कोई व्यक्ति हमारे इस पत्र के आदेशों को नहीं मानता है, उस पर विशेष ध्यान दो. उसका साथ न दो कि वह लज्जित हो. 15इतना सब होने पर भी उसे शत्रु न मानो परंतु एक भाई समझकर उसे समझाओ.

आशीर्वचन

16शांति के परमेश्वर स्वयं तुम्हें हर एक परिस्थिति में निरंतर शांति प्रदान करते रहें. प्रभु तुम सबके साथ हों.

17मैं, पौलॉस, अपने हाथों से नमस्कार लिख रहा हूं. मेरे हर एक पत्र का पहचान चिह्न यही है. यही मेरे लिखने का तरीका है.

18हमारे प्रभु मसीह येशु का अनुग्रह तुम सब पर बना रहे.