2 Corinthians 13 – NIRV & NCA

New International Reader’s Version

2 Corinthians 13:1-14

Final Warnings

1This will be my third visit to you. Scripture says, “Every matter must be proved by the words of two or three witnesses.” (Deuteronomy 19:15) 2I already warned you during my second visit. I now say it again while I’m away. When I return, I won’t spare those who sinned earlier. I won’t spare any of the others either. 3You are asking me to prove that Christ is speaking through me. He is not weak in dealing with you. He is powerful among you. 4It is true that Christ was nailed to the cross because he was weak. But Christ lives by God’s power. In the same way, we share his weakness. But by God’s power we will live with Christ as we serve you.

5Take a good look at yourselves to see if you are really believers. Test yourselves. Don’t you realize that Christ Jesus is in you? Unless, of course, you fail the test! 6I hope you will discover that I haven’t failed the test. 7I pray to God that you won’t do anything wrong. I don’t pray so that people will see that I have passed the test. Instead, I pray this so that you will do what is right, even if it seems I have failed. 8I can’t do anything to stop the truth. I can only work for the truth. 9I’m glad when I am weak but you are strong. I pray that there will be no more problems among you. 10That’s why I write these things before I come to you. Then when I do come, I won’t have to be hard on you when I use my authority. The Lord gave me the authority to build you up. He didn’t give it to me to tear you down.

Final Greetings

11Finally, brothers and sisters, be joyful! Work to make things right with one another. Help one another and agree with one another. Live in peace. And the God who gives love and peace will be with you.

12Greet one another with a holy kiss.

13All God’s people here send their greetings.

14May the grace shown by the Lord Jesus Christ be with you all. May the love that God has given us be with you. And may the sharing of life brought about by the Holy Spirit be with you all.

New Chhattisgarhi Translation (नवां नियम छत्तीसगढ़ी)

2 कुरिन्‍थुस 13:1-14

आखिरी चेतउनी

1मेंह तीसरा बार तुम्‍हर करा आवत हंव। परमेसर के बचन म लिखे हवय, “हर एक बात के फैसला दू या तीन झन के गवाही ले होना चाही।”13:1 ब्यवस्था 19:15 2जब मेंह दूसर बार तुम्‍हर करा आय रहेंव, त तुमन ला चेताय रहेंव। जब मेंह तुम्‍हर बीच म नइं अंव, त मेंह ओ बात ला फेर कहत हंव: जब मेंह आहूं, त ओमन ला नइं छोड़ंव, जऊन मन पहिली पाप करे रिहिन। 3तुमन एकर सबूत चाहथव कि मसीह ह मोर दुवारा गोठियाथे। मसीह ह तुम्‍हर बर निरबल नो हय, पर ओह तुम्‍हर बीच म अपन सामरथ ला देखाथे। 4ए बात तो सच ए कि ओह निरबलता म कुरुस ऊपर चघाय गीस, पर ओह परमेसर के सामरथ के दुवारा जीयत हवय। वइसनेच हमन ओम निरबल हवन, पर परमेसर के सामरथ ले तुम्‍हर सेवा करे बर हमन ओकर संग जीयत रहिबो।

5तुमन अपन-आप ला परखव अऊ देखव कि तुमन बिसवास के मुताबिक चलत हवव कि नइं। अपन-आप ला जांचव। का तुमन नइं जानव कि मसीह यीसू ह तुमन म हवय? यदि नइं ए, त फेर तुमन जांच म फेल हो गे हवव। 6पर मोला बिसवास हवय कि तुमन जान जाहू कि हमन जांच म पास हो गे हवन। 7अब हमन परमेसर ले पराथना करत हवन कि तुमन कोनो गलत काम झन करव। एकरसेति नइं कि हमन जांच म पास हो गे हवन, पर एकरसेति कि तुमन ओ काम करव जऊन ह सही ए, चाहे हमन फेल हो गे हवन सहीं भले ही लगय। 8काबरकि हमन सच के बिरोध म कुछू नइं कर सकन, पर हमन सिरिप सच के खातिर ही कर सकथन। 9हमन ला खुसी हवय कि जब भी हमन निरबल हवन, त तुमन मजबूत हवव अऊ हमन पराथना करथन कि तुमन सिद्ध बनव। 10एकरे कारन, जब मेंह तुम्‍हर संग नइं अंव, त ए बातमन ला लिखत हवंव, ताकि जब मेंह तुम्‍हर करा आवंव, त मोला अपन अधिकार के उपयोग करे म कठोर झन होना पड़य; काबरकि परभू ह मोला ए अधिकार तुम्‍हर आतमिक उन्नति बर दे हवय, तुम्‍हर बिनास बर नइं।

आखिरी जोहार

11आखिर म, हे भाईमन हो। अब बिदा लेथंव। सिद्ध बने के कोसिस म रहव; मोर बिनती ला सुनव; एक मत होके रहव अऊ सांति बनाय रखव। तभे मया अऊ सांति देवइया परमेसर ह तुम्‍हर संग रहिही। 12पबितर चूमा के संग एक-दूसर ला जोहार करव। 13जम्मो संत मनखेमन तुमन ला अपन जोहार कहत हवंय।

14परभू यीसू मसीह के अनुग्रह, परमेसर के मया अऊ पबितर आतमा के संगति तुमन जम्मो झन संग रहय।