Ketab El Hayat

عاموس 2:1-16

1هَذَا مَا يَقُولُهُ الرَّبُّ: مِنْ أَجْلِ مَعَاصِي مُوآبَ الثَّلاثِ وَالأَرْبَعِ لَنْ أَرُدَّ عَنْهُمْ سَخَطِي، لأَنَّ مُوآبَ أَحْرَقَ عِظَامَ مَلِكِ أَدُومَ حَتَّى صَارَتْ كِلْساً. 2لِهَذَا أُرْسِلُ نَاراً عَلَى مُوآبَ فَتَلْتَهِمُ حُصُونَ قَرْيُوتَ، فَيَمُوتُ مُوآبُ فِي وَسَطِ الضَّجِيجِ وَصَيْحَاتِ الْمُحَارِبِينَ وَدَوِيِّ الأَبْوَاقِ. 3وَأَسْتَأْصِلُ الْحَاكِمَ مِنْ بَيْنِ الْمُوآبِيِّينَ، وَأَقْضِي عَلَى كُلِّ رُؤَسَائِهِمْ، يَقُولُ الرَّبُّ.

4هَذَا مَا يَقُولُهُ الرَّبُّ: مِنْ أَجْلِ مَعَاصِي يَهُوذَا الثَّلاثِ وَالأَرْبَعِ لَنْ أَرُدَّ عَنْهُمْ سَخَطِي، لأَنَّهُمْ رَفَضُوا شَرِيعَةَ الرَّبِّ وَلَمْ يُطِيعُوا فَرَائِضَهُ، فَأَضَلَّتْهُمْ أَكَاذِيبُهُمُ الَّتِي غَوَى وَرَاءَهَا آبَاؤُهُمْ. 5لِهَذَا أُرْسِلُ نَاراً عَلَى يَهُوذَا فَتَلْتَهِمُ حُصُونَ أُورُشَلِيمَ.

دينونةإسرائيل

6هَذَا مَا يَقُولُهُ الرَّبُّ: مِنْ أَجْلِ مَعَاصِي إِسْرَائِيلَ الثَّلاثِ وَالأَرْبَعِ لَنْ أَرُدَّ عَنْهُمْ سَخَطِي، لأَنَّهُمْ بَاعُوا الصِّدِّيقَ لِقَاءَ الْفِضَّةِ، وَالْبَائِسَ مُقَابِلَ نَعْلَيْنِ. 7الَّذِينَ يَسْحَقُونَ رَأْسَ الْمِسْكِينِ فِي التُّرَابِ، وَيَجُورُونَ عَلَى الْبَائِسِينَ، وَيُعَاشِرُ الرَّجُلُ وَابْنُهُ امْرَأَةً وَاحِدَةً، فَيَتَدَنَّسُ بِذَلِكَ اسْمِي الْمُقَدَّسُ. 8يَرْقُدُونَ إِلَى جُوَارِ الْمَذْبَحِ فَوْقَ ثِيَابٍ مَرْهُونَةٍ، وَيَشْرَبُونَ فِي هَيْكَلِ إِلَهِهِمْ خَمْرَ الْمُغَرَّمِينَ.

9مَعَ أَنِّي أَهْلَكْتُ مِنْ أَمَامِهِمِ الأَمُورِيِّينَ ذَوِي الْقَامَاتِ الطَّوِيلَةِ كَأَشْجَارِ الأَرْزِ، الأَقْوِيَاءَ كَأَشْجَارِ الْبَلُّوطِ، أَتْلَفْتُ أَثْمَارَهُمْ عَلَى أَغْصَانِهَا، وَجُذُورَ أَشْجَارِهِمْ مِنْ تَحْتِ الأَرْضِ. 10كَمَا أَخْرَجْتُكُمْ مِنْ دِيَارِ مِصْرَ وَقُدْتُ طَرِيقَكُمْ عَبْرَ الصَّحْرَاءِ طَوَالَ أَرْبَعِينَ سَنَةً لِتَرِثُوا أَرْضَ الأَمُورِيِّينَ. 11وَأَقَمْتُ مِنْ بَيْنِ أَبْنَائِكُمْ أَنْبِيَاءَ وَمِنْ فِتْيَانِكُمْ نَذِيرِينَ. أَلَيْسَ هَذَا صَحِيحاً يَا أَبْنَاءَ إِسْرَائِيلَ، يَقُولُ الرَّبُّ؟ 12وَلَكِنَّكُمْ سَقَيْتُمُ النَّذِيرِينَ خَمْراً، وَأَمَرْتُمُ الأَنْبِيَاءَ قَائِلِينَ: لَا تَتَنَبَّأُوا.

13هَأَنَذَا أَسْحَقُكُمْ فِي مَوَاضِعِكُمْ فَتَئِنُّونَ كَمَا تَئِنُّ عَرَبَةٌ تَحْتَ وَطْأَةِ ثِقْلِ أَكْدَاسِهَا. 14فَلا يُتَاحُ الْهَرَبُ لِلسَّرِيعِ، وَتَتَلاشَى قُوَّةُ الْجَبَّارِ، وَيَعْجِزُ الْقَوِيُّ عَنْ إِنْقَاذِ نَفْسِهِ. 15وَلا يَصْمُدُ رَامِي الْقَوْسِ وَلا يُصِيبُ الْهَدَفَ، وَلا يَسْلَمُ سَرِيعُ الْعَدْوِ، وَلا يَنْجُو رَاكِبُ الْفَرَسِ بِحَيَاتِهِ. 16وَالثَّابِتُ الْجَنَانِ بَيْنَ أَقْرَانِهِ الأَبْطَالِ يَفِرُّ عُرْيَاناً فِي ذَلِكَ الْيَوْمِ، يَقُولُ الرَّبُّ.

Hindi Contemporary Version

आमोस 2:1-16

1याहवेह का यह कहना है:

“मोआब को दंड देने से मैं पीछे न हटूंगा,

क्योंकि उसने तीन, नहीं वरन चार अपराध किये हैं.

उसने एदोम के राजा के

हड्डियों को जलाकर राख कर दिया है,

2तब मैं मोआब पर आग बरसाऊंगा

जो केरिओथ के राजमहलों को जलाकर नष्ट कर देगी.

बड़े उपद्रव में मोआब मिट जाएगा,

उस समय युद्ध का ललकार और तुरही फूंका जा रहा होगा.

3मैं मोआब के शासक को नाश कर दूंगा

और उसे उसके सब अधिकारियों समेत मार डालूंगा,”

यह याहवेह का कहना है.

4याहवेह का यह कहना है:

“यहूदिया के तीन नहीं,

वरन चार पापों के कारण, मैं उसे दंड देने से पीछे नहीं हटूंगा.

क्योंकि उन्होंने याहवेह के कानून को तुच्छ जाना है

और उनके नियमों का पालन नहीं किया है,

वे उन झूठे देवताओं के द्वारा भटकाये गये हैं,

जिनके पीछे उनके पुरखे चलते थे,

5तब मैं यहूदिया पर आग बरसाऊंगा

जो येरूशलेम के राजमहलों को जलाकर नष्ट कर देगी.”

इस्राएल पर न्याय

6याहवेह का यह कहना है:

“इस्राएल के तीन नहीं,

वरन चार पापों के कारण, मैं उसे दंड देने से पीछे नहीं हटूंगा.

वे चांदी के लिये निर्दोष व्यक्ति को,

और एक जोड़ी चप्पल के लिए ज़रूरतमंद व्यक्ति को बेच देते हैं.

7वे निर्धन के सिर ऐसे रौंदते हैं

जैसे भूमि पर धूल को रौंदा जाता है

और पीड़ित लोगों के न्याय को बिगाड़ते हैं.

पिता और पुत्र दोनों एक ही युवती से संभोग करते हैं

और ऐसा करके वे मेरे पवित्र नाम को अपवित्र करते हैं.

8वे हर एक वेदी के बाजू में

बंधक में रखे गए कपड़ों पर लेटते हैं.

वे अपने देवता के घर में

जुर्माना में लिये गये अंगूर की दाखमधु को पीते हैं.

9“यह सब होने पर भी मैं ही था जिसने उनके सामने अमोरियों को पछाड़ा था,

यद्यपि अमोरी पुरुष देवदार वृक्ष के समान ऊंचे

और बांज वृक्ष के सदृश सशक्त थे.

मैंने ऊपर तो उनके फल

तथा नीचे उनकी जड़ें नष्ट कर दीं.

10मैं ही था, जिसने तुम्हें मिस्र देश से बाहर निकाला

और चालीस वर्ष मरुभूमि में तुम्हारी अगुवाई करता रहा,

ताकि तुम अमोरियों के देश पर अधिकार कर सको.

11“मैंने ही तुम्हारे बच्चों के बीच में से नबी

और तुम्हारे जवानों के बीच में से नाजीर खड़ा किया.

हे इस्राएलियो, क्या यह सच नहीं है?”

यह याहवेह का कहना है.

12“परंतु तुमने नाजिरों को दाखमधु पान के लिए बाध्य किया

और नबियों को आदेश दिया कि भविष्यवाणी न करें.

13“इसलिये अब, मैं तुम्हें कुचलूंगा

जैसे अनाज लदा गाड़ी कुचलता है.

14तेज गति से भागनेवाला बच नहीं पाएगा,

बलवान व्यक्ति अपना बल सहेज नहीं पाएगा,

और योद्धा अपना प्राण नहीं बचा सकेगा.

15धनुर्धारी का पैर उखड़ जाएगा,

तेज दौड़नेवाला सैनिक भाग नहीं पाएगा,

और घुड़सवार अपना प्राण नहीं बचा सकेगा.

16यहां तक कि उस दिन सबसे साहसी योद्धा भी

अपने वस्त्र छोड़ भाग खड़े होंगे,”

यह याहवेह का कहना है.