Ketab El Hayat

بطرس الأولى 1:1-25

1مِنْ بُطْرُسَ، رَسُولِ يَسُوعَ الْمَسِيحِ إِلَى الْمُشَتَّتِينَ الْمُغْتَرِبِينَ فِي بِلادِ بُنْطُسَ وَغَلاطِيَّةَ وَكَبَّدُوكِيَّةَ وَآسِيَّا وَبِيثِينِيَّةَ، 2أُولئِكَ الَّذِينَ اخْتَارَهُمُ اللهُ الآبُ بِحَسَبِ عِلْمِهِ السَّابِقِ ثُمَّ قَدَّسَهُمْ بِالرُّوحِ لِيُطِيعُوا يَسُوعَ الْمَسِيحَ وَيَطْهُرُوا بِرَشِّ دَمِهِ عَلَيْهِمْ.

لِيَكُنْ لَكُمُ الْمَزِيدُ مِنَ النِّعْمَةِ وَالسَّلامِ.

تسبيح الله لأجل الرجاء الحي

3تَبَارَكَ اللهُ أَبُو رَبِّنَا يَسُوعَ الْمَسِيحِ، فَمِنْ فَرْطِ رَحْمَتِهِ الْعَظِيمَةِ وَلَدَنَا وِلادَةً ثَانِيَةً، مَلِيئَةً بِالرَّجَاءِ عَلَى أَسَاسِ قِيَامَةِ يَسُوعَ الْمَسِيحِ مِنْ بَيْنِ الأَمْوَاتِ، 4وَإِرْثاً لَا يَفْنَى وَلا يَفْسُدُ وَلا يَزُولُ، مَحْفُوظاً لَكُمْ فِي السَّمَاوَاتِ. 5فَإِنَّكُمْ مَحْفُوظُونَ بِقُدْرَةِ اللهِ الْعَامِلَةِ مِنْ خِلالِ إِيمَانِكُمْ، إِلَى أَنْ تَفُوزُوا بِالْخَلاصِ النِّهَائِيِّ الْمُعَدِّ لَكُمْ، الَّذِي سَوْفَ يَتَجَلَّى فِي الزَّمَانِ الأَخِيرِ. 6وَهَذَا يَدْعُوكُمْ إِلَى الابْتِهَاجِ، مَعَ أَنَّهُ لابُدَّ لَكُمُ الآنَ مِنَ الْحُزْنِ فَتْرَةً قَصِيرَةً تَحْتَ وَطْأَةِ التَّجَارِبِ الْمُتَنَوِّعَةِ! 7إِلّا أَنَّ غَايَةَ هذِهِ التَّجَارِبِ هِيَ اخْتِبَارُ حَقِيقَةِ إِيمَانِكُمْ. فَكَمَا تَخْتَبِرُ النَّارُ الذَّهَبَ وَتُنَقِّيهِ، تَخْتَبِرُ التَّجَارِبُ حَقِيقَةَ إِيمَانِكُمْ، وَهُوَ أَثْمَنُ جِدّاً مِنَ الذَّهَبِ الْفَانِي. وَهكَذَا، يَكُونُ إِيمَانُكُمْ مَدْعَاةَ مَدْحٍ وَإِكْرَامٍ وَتَمْجِيدٍ لَكُمْ، عِنْدَمَا يَعُودُ يَسُوعُ الْمَسِيحُ ظَاهِراً بِمَجْدِهِ. 8أَنْتُمْ لَمْ تَرَوْا الْمَسِيحَ، وَلكِنَّكُمْ تُحِبُّونَهُ. وَمَعَ أَنَّكُمْ لَا تَرَوْنَهُ الآنَ، فَأَنْتُمْ تُؤْمِنُونَ بِهِ وَتَبْتَهِجُونَ بِفَرَحٍ مَجِيدٍ يَفُوقُ الْوَصْفَ. 9إِذْ تَبْلُغُونَ هَدَفَ إِيمَانِكُمْ، وَهُوَ خَلاصُ نُفُوسِكُمْ. 10وَكَمْ فَتَّشَ الأَنْبِيَاءُ قَدِيماً وَبَحَثُوا عَنْ هَذَا الْخَلاصِ! فَهُمْ تَنَبَّأُوا عَنْ نِعْمَةِ اللهِ الَّتِي كَانَ قَدْ أَعَدَّهَا لَكُمْ أَنْتُمْ، 11وَاجْتَهَدُوا لِمَعْرِفَةِ الزَّمَانِ وَالأَحْوَالِ الَّتِي كَانَ يُشِيرُ إِلَيْهَا رُوحُ الْمَسِيحِ الَّذِي كَانَ عَامِلاً فِيهِمْ، عِنْدَمَا شَهِدَ لَهُمْ مُسْبَقاً بِمَا يَنْتَظِرُ الْمَسِيحَ مِنْ آلامٍ، وَبِمَا يَأْتِي بَعْدَهَا مِنْ أَمْجَادٍ. 12وَلَكِنَّ اللهَ أَوْحَى إِلَيْهِمْ أَنَّ اجْتِهَادَهُمْ لَمْ يَكُنْ لِمَصْلَحَتِهِمْ هُمْ، بَلْ لِمَصْلَحَتِكُمْ أَنْتُمْ. فَقَدْ كَانَ ذَلِكَ مِنْ أَجْلِ الْبِشَارَةِ الَّتِي نَقَلَهَا إِلَيْكُمْ فِي الزَّمَانِ الْحَاضِرِ مُبَشِّرُونَ يُؤَيِّدُهُمُ الرُّوحُ الْقُدُسُ الْمُرْسَلُ مِنَ السَّمَاءِ. وَيَالَهَا مِنْ أُمُورٍ يَتَمَنَّى حَتَّى الْمَلائِكَةُ أَنْ يَطَّلِعُوا عَلَيْهَا!

13لِذَلِكَ اجْعَلُوا أَذْهَانَكُمْ مُتَنَبِّهَةً دَائِماً، وَتَيَقَّظُوا، وَعَلِّقُوا رَجَاءَكُمْ كُلَّهُ عَلَى النِّعْمَةِ الَّتِي سَتَكُونُ مِنْ نَصِيبِكُمْ عِنْدَمَا يَعُودُ يَسُوعُ الْمَسِيحُ ظَاهِراً بِمَجْدِهِ!

كونوا قديسين

14وَبِمَا أَنَّكُمْ صِرْتُمْ أَوْلاداً لِلهِ مُطِيعِينَ لَهُ، فَلا تَعُودُوا إِلَى مُجَارَاةِ الشَّهَوَاتِ الَّتِي كَانَتْ تُسَيْطِرُ عَلَيْكُمْ سَابِقاً فِي أَيَّامِ جَهْلِكُمْ. 15وَإِنَّمَا اسْلُكُوا سُلُوكاً مُقَدَّساً فِي كُلِّ أَمْرٍ، مُقْتَدِينَ بِالْقُدُّوسِ الَّذِي دَعَاكُمْ، 16لأَنَّهُ قَدْ كُتِبَ: «كُونُوا قِدِّيسِينَ، لأَنِّي أَنَا قُدُّوسٌ!»

17وَمَا دُمْتُمْ تَعْتَرِفُونَ بِاللهِ أَباً لَكُمْ، وَهُوَ يَحْكُمُ عَلَى كُلِّ إِنْسَانٍ حَسَبَ أَعْمَالِهِ دُونَ انْحِيَازٍ، فَاسْلُكُوا فِي مَخَافَتِهِ مُدَّةَ إِقَامَتِكُمُ الْمُؤَقَّتَةِ عَلَى الأَرْضِ. 18وَاعْلَمُوا أَنَّهُ قَدْ دَفَعَ الْفِدْيَةَ لِيُحَرِّرَكُمْ مِنْ سِيرَةِ حَيَاتِكُمُ الْبَاطِلَةِ الَّتِي أَخَذْتُمُوهَا بِالتَّقْلِيدِ عَنْ آبَائِكُمْ. وَهَذِهِ الْفِدْيَةُ لَمْ تَكُنْ شَيْئاً فَانِياً كَالْفِضَّةِ أَوِ الذَّهَبِ، 19بَلْ كَانَتْ دَماً ثَمِيناً، دَمَ الْمَسِيحِ، ذَلِكَ الْحَمَلِ الطَّاهِرِ الَّذِي لَيْسَ فِيهِ عَيْبٌ وَلا دَنَسٌ! 20وَمَعَ أَنَّ اللهَ كَانَ قَدْ عَيَّنَهُ لِهَذَا الْغَرَضِ قَبْلَ تَأْسِيسِ الْعَالَمِ، فَهُوَ لَمْ يُعْلِنْهُ إِلّا فِي هَذَا الزَّمَنِ الأَخِيرِ لِفَائِدَتِكُمْ 21أَنْتُمُ الَّذِينَ بِوَاسِطَةِ الْمَسِيحِ تُؤْمِنُونَ بِاللهِ الَّذِي أَقَامَهُ مِنَ الْمَوْتِ وَأَعْطَاهُ الْمَجْدَ، حَتَّى يَكُونَ اللهُ غَايَةَ إِيمَانِكُمْ وَرَجَائِكُمْ. 22وَإِذْ قَدْ خَضَعْتُمْ لِلْحَقِّ، فَتَطَهَّرَتْ نُفُوسُكُمْ وَصِرْتُمْ قَادِرِينَ أَنْ تُحِبُّوا الآخَرِينَ مَحَبَّةً أَخَوِيَّةً لَا رِيَاءَ فِيهَا، أَحِبُّوا بَعْضُكُمْ بَعْضاً مَحَبَّةً شَدِيدَةً صَادِرَةً مِنْ قَلْبٍ طَاهِرٍ! 23فَأَنْتُمْ قَدْ وُلِدْتُمْ وِلادَةً ثَانِيَةً لَا مِنْ زَرْعٍ بَشَرِيٍّ يَفْنَى، بَلْ مِمَّا لَا يَفْنَى: بِكَلِمَةِ اللهِ الْحَيَّةِ الْبَاقِيَةِ إِلَى الأَبَدِ. 24فَإِنَّ الْحَيَاةَ الْبَشَرِيَّةَ كَالْعُشْبِ، وَمَجْدَهَا كُلَّهُ كَزَهْرِ الْعُشْبِ. وَلابُدَّ أَنْ تَفْنَى كَمَا يَيْبَسُ الْعُشْبُ وَيَسْقُطُ زَهْرُهُ! 25أَمَّا كَلِمَةُ الرَّبِّ فَتَبْقَى ثَابِتَةً إِلَى الأَبَدِ، وَهِيَ الْكَلِمَةُ الَّتِي وَصَلَتْ بِشَارَتُهَا إِلَيْكُمْ!

New Chhattisgarhi Translation (नवां नियम छत्तीसगढ़ी)

1 पतरस 1:1-25

1पतरस कोति ले, जऊन ह यीसू मसीह के प्रेरित ए, परमेसर के चुने संसार के ओ अजनबीमन ला जऊन मन पुनतुस, गलातिया, कप्‍पदुकिया, एसिया अऊ बितूनिया म एती-ओती बगर गे हवंय, 2जऊन मन परमेसर ददा के पूर्व-गियान के मुताबिक पबितर आतमा के पबितर करे के दुवारा, यीसू मसीह के हुकूम माने बर अऊ ओकर लहू के छिड़के जाय बर चुने गे हवंय।

तुमन ला बहुंतायत ले अनुग्रह अऊ सांति मिलते रहय।

जीयत आसा खातिर परमेसर के इस्तुति

3हमर परभू यीसू मसीह के ददा अऊ परमेसर के धनबाद होवय! ओह यीसू मसीह के मरे म ले जी उठे के दुवारा, अपन बड़े दया के कारन, हमन ला जीयत आसा खातिर नवां जनम दे हवय, 4ताकि तुमन ला ओ वारिस के अधिकार मिलय, जऊन ह तुमन बर स्‍वरग म रखे गे हवय, अऊ ओह कभू नास नइं होवय, खराप नइं होवय या मुरझावय नइं। 5तुमन बिसवास के दुवारा, परमेसर के सामरथ ले, ओ उद्धार खातिर, जऊन ह आखिरी समय म परगट होय बर तियार हवय, सही रखे गे हवव। 6एम तुमन बहुंत आनंद मनावव, हालाकि अब कुछू समय बर, तुमन ला जम्मो किसम के परिछा के कारन दुःख सहे बर पड़त हवय। 7एह एकरसेति होईस ताकि तुम्‍हर बिसवास के असली परख हो सकय, जऊन ह सोना ले घलो जादा कीमती अय; सोना ह आगी म परखे जाय के बाद घलो नास हो सकथे; अऊ जब यीसू मसीह ह परगट होथे, तब तुम्‍हर ए बिसवास के नतीजा ह इस्तुति बड़ई अऊ आदर म होवय। 8हालाकि तुमन ओला नइं देखे हवव, तभो ले तुमन ओला मया करथव, अऊ हालाकि तुमन ओला अब नइं देखत हवव, पर ओकर ऊपर बिसवास करत हवव अऊ आनंद मनावत हवव, जेकर बखान नइं करे जा सकय अऊ जऊन ह महिमा ले भरे हवय, 9काबरकि तुमन, अपन बिसवास के मकसद ला पावत हवव, जेकर मतलब होथे – तुम्‍हर आतमा के उद्धार।

10एही उद्धार के बिसय म, अगमजानीमन बहुंत खोजिन। ओमन ओ अनुग्रह के बारे म कहिन, जऊन ह तुमन करा अवइया रिहिस अऊ बहुंत धियान लगाके, 11ओमन ओ समय अऊ हालत ला जाने के कोसिस करिन, जऊन ला मसीह के आतमा, जऊन ह कि ओमन म हवय, इसारा करत रिहिस, जब ओह मसीह के दुःख उठाय अऊ ओकर तुरते बाद ओकर आय के महिमा के बारे म कहिस। 12परमेसर ह एला अगमजानीमन ला बताईस कि ओमन अपन खुद के सेवा नइं करत रिहिन, पर ओमन तुम्‍हर सेवा करत रिहिन, जब ओमन ओ बातमन के बारे म कहिन, जऊन ला अब तुमन ओमन ले सुने हवव, जऊन मन स्‍वरग ले पठोय पबितर आतमा के दुवारा तुमन ला सुघर संदेस के परचार करे हवंय। अऊ त अऊ स्वरगदूतमन ए चीजमन ला देखे के ईछा करथें।

पबितर बनव

13एकरसेति, अपन मन ला काम करे बर तियार करव; संयमी बनव; ओ अनुग्रह ऊपर अपन पूरा आसा रखव, जऊन ह तुमन ला यीसू मसीह के परगट होय के समय दिये जाही। 14परमेसर के हुकूम ला मानव अऊ जब तुमन अगियानता म रहत रहेव, ओ समय के खराप ईछा के मुताबिक आचरन झन करव। 15पर जऊन ह तुमन ला बलाय हवय, ओह पबितर ए, त तुमन घलो अपन जम्मो काम म पबितर बनव। 16काबरकि परमेसर के बचन म ए लिखे हवय: “पबितर बनव, काबरकि मेंह पबितर अंव।”1:16 लैब्यवस्था 11:44-45

17जब तुमन अपन पराथना म, ओला “हे ददा” कहिथव, जऊन ह हर एक मनखे के काम के नियाय बिगर पखियपात के करथे, त तुमन अपन जिनगी ला इहां परदेसी के सहीं ओकर भय म बितावव। 18काबरकि तुमन जानत हव कि तुम्‍हर खोखला जिनगी, जऊन ह तुम्‍हर पुरखामन ले चले आवथे, ओकर उद्धार सोना या चांदी जइसने नासमान चीज के दुवारा नइं होय हवय, 19पर तुम्‍हर जिनगी के उद्धार एक निरदोस अऊ निस्कलंक मेढ़ा-पीला याने कि मसीह के कीमती लहू के दुवारा होय हवय। 20ओह संसार के सिरिस्टी के पहिली ले चुने गे रिहिस, पर तुम्‍हर खातिर, ए आखिरी समय म ओह परगट होईस। 21तुमन ओकर दुवारा, ओ परमेसर ऊपर बिसवास करथव, जऊन ह ओला मरे म ले जियाईस अऊ ओकर महिमा करिस, अऊ एकरसेति तुम्‍हर बिसवास अऊ आसा परमेसर ऊपर हवय।

22अब सत ला माने के दुवारा, तुमन अपन-आप ला सुध करे हवव अऊ तुमन म अपन भाईमन बर निस्कपट मया हवय, त अपन जम्मो हिरदय के संग एक-दूसर ला गहिरई ले मया करव। 23तुमन नासमान नइं, पर अबिनासी बीजा ले परमेसर के जीयत अऊ सदा ठहरइया बचन के दुवारा नवां जनम पाय हवव। 24काबरकि,

“जम्मो मनखेमन कांदी के सहीं अंय,

अऊ ओमन के जम्मो महिमा ह जंगली फूल सहीं अय;

कांदी ह सूख जाथे अऊ फूल ह झर जाथे,

25पर परभू के बचन ह सदाकाल तक बने रहिथे।”

अऊ एह ओही सुघर संदेस के बचन ए, जऊन ह तुमन ला सुनाय गे हवय। 1:25 यसायाह 40:6-8