Ketab El Hayat

التكوين 45:1-28

يوسف يكشف عن نفسه

1فَلَمْ يَسْتَطِعْ يُوسُفُ أَنْ يَتَمَالَكَ نَفْسَهُ أَمَامَ الْمَاثِلِينَ أَمَامَهُ، فَصَرَخَ: «لِيَخْرُجِ الْجَمِيعُ مِنْ هُنَا». فَلَمْ يَبْقَ أَحَدٌ مَعَ يُوسُفَ حِينَ كَشَفَ عَنْ نَفْسِهِ لإِخْوَتِهِ. 2وَبَكَى بِصَوْتٍ عَالٍ فَسَمِعَ الْمِصْرِيُّونَ كَمَا سَمِعَ بَيْتُ فِرْعَوْنَ. 3وَقَالَ يُوسُفُ لإِخْوَتِهِ: «أَنَا يُوسُفُ. فَهَلْ أَبِي مَازَالَ حَيًّا؟» فَلَمْ يَسْتَطِعْ إِخْوَتُهُ أَنْ يُجِيبُوهُ لأَنَّهُمُ امْتَلأُوا رُعْباً مِنْهُ.

4فَقَالَ يُوسُفُ لإِخْوَتِهِ: «اُدْنُوا مِنِّي». فَاقْتَرَبُوا مِنْهُ، فَقَالَ: «أَنَا يُوسُفُ أَخُوكُمُ الَّذِي بِعْتُمُوهُ إِلَى مِصْرَ. 5فَلا تَتَأَسَّفُوا الآنَ، وَلا يَصْعُبْ عَلَيْكُمْ أَنَّكُمْ بِعْتُمُونِي إِلَى هُنَا، لأَنَّ اللهَ أَرْسَلَنِي أَمَامَكُمْ حِفَاظاً عَلَى حَيَاتِكُمْ. 6فَقَدْ صَارَ لِلْمَجَاعَةِ فِي هَذِهِ الأَرْضِ سَنَتَانِ، وَبَقِيَتْ خَمْسُ سَنَوَاتٍ لَنْ يَكُونَ فِيهَا فَلاحَةٌ وَلا حَصَادٌ. 7وَقَدْ أَرْسَلَنِي اللهُ أَمَامَكُمْ لِيَجْعَلَ لَكُمْ بَقِيَّةً فِي الأَرْضِ وَيُنْقِذَ حَيَاتَكُمْ بِخَلاصٍ عَظِيمٍ. 8فَلَسْتُمْ إِذاً أَنْتُمُ الَّذِينَ أَرْسَلْتُمُونِي إِلَى هُنَا بَلِ اللهُ، الَّذِي جَعَلَنِي مُسْتَشَاراً لِفِرْعَوْنَ وَسَيِّداً لِكُلِّ بَيْتِهِ، وَمُتَسَلِّطاً عَلَى جَمِيعِ أَرْضِ مِصْرَ. 9فَأَسْرِعُوا وَارْجِعُوا إِلَى أَبِي وَقُولُوا لَهُ: ابْنُكَ يُوسُفُ يَقُولُ: لَقَدْ أَقَامَنِي اللهُ سَيِّداً عَلَى كُلِّ مِصْرَ. تَعَالَ وَلا تَتَبَاطَأْ. 10فَتُقِيمَ فِي أَرْضِ جَاسَانَ لِتَكُونَ قَرِيباً مِنِّي أَنْتَ وَبَنُوكَ وَأَحْفَادُكَ وَغَنَمُكَ وَبَقَرُكَ وَكُلُّ مَالَكَ. 11وَأَعُولُكَ هُنَاكَ لأَنَّ الْجُوعَ سَيَسْتَمِرُّ خَمْسَ سَنَوَاتٍ أُخْرَى، فَلا تَحْتَاجُ أَنْتَ وَعَائِلَتُكَ وَبَهَائِمُكَ. 12وَهَا أَنْتُمْ وَأَخِي بِنْيَامِينُ شُهُودٌ أَنَّنِي أَنَا حَقّاً الَّذِي يُخَاطِبُكُمْ. 13وَتُحَدِّثُونَ أَبِي عَنْ كُلِّ مَجْدِي فِي مِصْرَ وَعَمَّا شَهِدْتُمُوهُ. وَتُسْرِعُونَ فِي إِحْضَارِ أَبِي إِلَى هُنَا».

14ثُمَّ تَعَانَقَ يُوسُفُ وَبِنْيَامِينُ وَبَكَيَا 15وَقَبَّلَ يُوسُفُ بَاقِي إِخْوَتِهِ وَبَكَى مَعَهُمْ. وَعِنْدَئِذٍ فَقَطْ تَجَرَّأَ إِخْوَتُهُ عَلَى مُخَاطَبَتِهِ.

16وَسَرَى الْخَبَرُ إِلَى بَيْتِ فِرْعَوْنَ وَقِيلَ قَدْ جَاءَ إِخْوَةُ يُوسُفَ، فَسَرَّ ذَلِكَ فِرْعَوْنَ، وَعَبِيدَهُ أَيْضاً. 17وَقَالَ فِرْعَوْنُ لِيُوسُفَ: «اطْلُبْ مِنْ إِخْوَتِكَ أَنْ يُحَمِّلُوا دَوَابَهُمْ بِالْقَمْحِ وَيَرْجِعُوا إِلَى أَرْضِ كَنْعَانَ، 18لِيُحْضِرُوا أَبَاهُمْ وَأُسَرَهُمْ وَيَجِيئُوا إِلَيَّ، فَأُعْطِيَهُمْ أَفْضَلَ أَرْضِ مِصْرَ لِيَسْتَمْتِعُوا بِخَيْرَاتِهَا. 19وَقَدْ صَدَرَ أَمْرٌ إِلَيْكَ أَنْ يَأْخُذُوا لَهُمْ عَرَبَاتٍ مِنْ أَرْضِ مِصْرَ لِيَنْقُلُوا عَلَيْهَا أَوْلادَهُمْ وَزَوْجَاتِهِمْ وَأَبَاهُمْ وَيَحْضُرُوا إِلَى هُنَا. 20لَا يَكْتَرِثُوا لِمَا يُخَلِّفُونَهُ مِنْ مَتَاعٍ، فَخَيْرَاتُ أَرْضِ مِصْرَ كُلِّهَا هِيَ لَهُمْ».

21فَفَعَلَ بَنُو إِسْرَائِيلَ هَكَذَا، وَأَعْطَاهُمْ يُوسُفُ عَرَبَاتٍ حَسَبَ أَمْرِ فِرْعَوْنَ وَمَؤُونَةً لِلطَّرِيقِ. 22وَأَعْطَى كُلَّ وَاحِدٍ مِنْهُمْ حُلَلَ ثِيَابٍ. أَمَّا بِنْيَامِينُ فَخَصَّهُ بِثَلاثِ مِئَةِ قِطْعَةٍ مِنَ الْفِضَّةِ وَخَمْسِ حُلَلِ ثِيَابٍ. 23وَأَرْسَلَ إِلَى أَبِيهِ عَشَرَةَ حَمِيرٍ مُحَمَّلَةٍ بِأَفْضَلِ خَيْرَاتِ مِصْرَ وَعَشْرَ أُتُنٍ مُثْقَلَةٍ بِالْحِنْطَةِ وَخُبْزاً وَطَعَاماً يَقْتَاتُ مِنْهَا فِي الطَّرِيقِ. 24وَهَكَذَا صَرَفَ إِخْوَتَهُ بَعْدَ أَنْ أَوْصَاهُمْ: «لا تَتَخَاصَمُوا فِي الطَّرِيقِ».

25وَانْطَلَقُوا مِنْ مِصْرَ حَتَّى أَقْبَلُوا إِلَى أَرْضِ كَنْعَانَ إِلَى أَبِيهِمْ يَعْقُوبَ. 26فَقَالُوا لَهُ: «إِنَّ يُوسُفَ مَازَالَ حَيًّا، وَهُوَ الْمُتَسَلِّطُ عَلَى كُلِّ أَرْضِ مِصْرَ». فَغُشِيَ عَلَى قَلْبِ يَعْقُوبَ لأَنَّهُ لَمْ يُصَدِّقْهُمْ. 27ثُمَّ حَدَّثُوهُ بِكَلامِ يُوسُفَ. وَعِنْدَمَا عَايَنَ يَعْقُوبُ الْعَرَبَاتِ الَّتِي أَرْسَلَهَا يُوسُفُ لِتَنْقُلَهُ، انْتَعَشَتْ رُوحُهُ، 28وَقَالَ: «كَفَى! يُوسُفُ ابْنِي حَيٌّ بَعْدُ، سَأَذْهَبُ لأَرَاهُ قَبْلَ أَنْ أَمُوتَ».

Hindi Contemporary Version

उत्पत्ति 45:1-28

योसेफ़ तथा भाइयों के मध्य मेल

1यहां तक आकर योसेफ़ का नियंत्रण टूट गया. वह वहां उपस्थित सभी व्यक्तियों के समक्ष चिल्ला उठे, “सब यहां से बाहर चले जाएं.” तब सब वहां से बाहर चले गए. तब योसेफ़ ने स्वयं को अपने भाइयों पर अपने वास्तविक रूप में प्रकट किया. 2योसेफ़ का क्रंदन इतना प्रबल था कि बाहर मिस्री अधिकारियों ने इसे सुन लिया तथा इसके विषय में फ़रोह के परिवार ने भी सुन लिया.

3तब योसेफ़ ने अपने भाइयों से कहा, “मैं योसेफ़ हूं! क्या पिताजी अब भी जीवित हैं?” किंतु उनके भाई अवाक रह गए थे, उनके लिए योसेफ़ के समक्ष कुछ भी कह सकना असंभव हो गया था.

4तब योसेफ़ ने अपने भाइयों से अनुरोध किया, “मेरे निकट आइए” वे उनके निकट गए तब योसेफ़ ने उनसे कहा, मैं आपका भाई योसेफ़ हूं, जिसे आप लोगों ने मिस्र के हाथों बेच दिया था! 5अब आप न तो स्वयं के लिए शोकित हों और न ही क्रुद्ध, कि आपने मुझे यहां के लिए विक्रीत कर दिया था; क्योंकि परमेश्वर ही मुझे आपके पूर्व यहां ले आए हैं, कि जीवन बचाए जाएं. 6क्योंकि दो वर्ष से संपूर्ण देश में अकाल व्याप्त है तथा यह पांच वर्ष और भी व्याप्त रहेगा. तब इन वर्षों में न तो हल चलाए जा सकेंगे और न ही किसी प्रकार की कटनी संभव हो सकेगी. 7परमेश्वर ने मुझे आप लोगों के पूर्व ही यहां भेज दिया था, कि वह आप लोगों के लिए पृथ्वी पर एक शेषांश बचा रखें, कि आपको एक बड़े बचाव द्वारा जीवित रखा जा सके.

8“इसलिये अब तथ्य यह है, कि मुझे यहां आप लोगों के द्वारा नहीं, परंतु परमेश्वर द्वारा भेजा गया था. परमेश्वर ने ही मुझे फ़रोह के पिता का स्थान दिया है, मुझे फ़रोह की समस्त गृहस्थी का प्रभारी तथा पूरे मिस्र देश पर प्रशासक नियुक्त कर दिया है. 9अब आप लोग अविलम्ब मेरे पिता के पास जाकर उनसे कहें, ‘आपके पुत्र योसेफ़ का यह आग्रह है परमेश्वर ने मुझे समग्र मिस्र देश का प्रशासक नियुक्त किया है. आप यहां मेरे पास आ जाएं. अब विलंब न करें. 10आप लोग आकर गोशेन प्रदेश में बस जाएं और मेरे निकट ही आप, आपकी संतान, आपकी संतान की संतान, आपके पशुवृन्द, आपके भेड़-बकरी तथा आपकी संपूर्ण संपत्ति भी. 11वहां मैं आपके लिए भोजन की व्यवस्था करता रहूंगा, क्योंकि अकाल अभी पांच वर्ष और रहेगा, जिसके कारण आप वहां आपकी संपूर्ण गृहस्थी के साथ पूर्णतः साधन विहीन हो जाएंगे.’

12“अब आप लोग स्वयं देख लीजिए और यहां स्वयं मेरा भाई बिन्यामिन भी यह देख रहा है कि यह स्वयं मैं आप से कह रहा हूं. 13अब आप लोग जाइए और जाकर मिस्र में मेरे इस वैभव का उल्लेख वहां मेरे पिता से कीजिए तथा उस सबका भी, जो स्वयं आपने यहां देखा है. आवश्यक है कि अब आप शीघ्र अति शीघ्र जाएं और मेरे पिता को यहां ले आएं.”

14तब योसेफ़ अपने भाई बिन्यामिन को गले लगाकर रोते रहे तथा बिन्यामिन भी उनसे गले लगकर रोते रहे. 15फिर योसेफ़ ने अपने सभी भाइयों का चुंबन लिया और उनके साथ रोते रहे; इसके बाद ही उनके भाइयों ने योसेफ़ के साथ बात करना आरंभ किया.

16फ़रोह के परिवार में भी यह समाचार सुना गया कि योसेफ़ के भाई आए हुए हैं, जिसे सुनकर फ़रोह तथा उसके दासों में उल्लास की लहर दौड़ गई. 17तब फ़रोह ने योसेफ़ के समक्ष प्रस्ताव रखा “अपने भाइयों से यह कहो, ‘अपने-अपने गधों पर सामान रखें और कनान देश चले जाएं, 18वहां अपने पिता एवं समस्त गृहस्थी लेकर यहां मेरे पास आ जाएं कि मैं उन्हें मिस्र देश का सर्वोत्तम ही प्रदान करूंगा और उनका भोजन इस देश की प्रचुरता में से ही होगा.’

19“और अब, योसेफ़ तुम्हारे लिए आदेश यह है ‘ऐसा करो: यहां मिस्र देश से स्त्रियों एवं बालकों के लिए वाहन ले जाओ और अपने पिता को यहां ले आओ. 20अपने सामान की चिंता न करना, क्योंकि मिस्र देश में जो कुछ सर्वोत्तम है, वह सब तुम्हारा ही है.’ ”

21इस्राएल के पुत्रों ने ठीक यही किया. फ़रोह के आदेश के अनुरूप योसेफ़ ने उन्हें वाहन प्रदान कर दिए तथा यात्रा के लिए आवश्यक सामग्री भी दी. 22योसेफ़ ने हर एक को एक-एक जोड़ी वस्त्र भी दिया, किंतु बिन्यामिन को तीन सौ चांदी मुद्राएं और पांच जोड़ी वस्त्र दिये. 23अपने पिता के लिए योसेफ़ ने ये सभी वस्तुएं भेजी: दस गधे, जिन पर मिस्र की सर्वोत्तम वस्तुएं रख दी गई थी, दस गधियां, जिन पर भोज्य सामग्री तथा अन्न रख दिया गया था, कि यात्रा के समय उनके पिता का भरण-पोषण होता रहे. 24इस प्रकार योसेफ़ ने अपने भाइयों को कनान देश के लिए भेज दिया. जब वे विदा हो ही रहे थे, योसेफ़ ने उनसे आग्रह किया, “यात्रा करते हुए आप लोग झगड़ना नहीं.”

25इसलिये वे मिस्र देश से अपने पिता के पास कनान में पहुंच गए, 26उन्होंने अपने पिता को सूचित किया, “योसेफ़ जीवित है! और सत्य तो यह है कि वह समस्त मिस्र देश का प्रशासक है.” यह सुन याकोब अवाक रह गए—उन्हें अपने पुत्रों द्वारा दी गई सूचना का विश्वास ही न हुआ. 27तब उन्होंने अपने पिता को योसेफ़ की कही हुई वह सारी बातें बताई जो उनसे कही थी. जब उन्होंने योसेफ़ द्वारा भेजें वाहन देखे, जो उनको ले जाने के लिए भेजें गए थे, तब उनके पिता याकोब के जी में जी आया. 28तब इस्राएल ने कहा, “पर्याप्त हो चुका जब मेरा पुत्र योसेफ़ जीवित है, अपनी मृत्यु के पूर्व वहां जाकर मैं उसे देखूंगा.”