New Amharic Standard Version

ይሁዳ 1:1-25

1የኢየሱስ ክርስቶስ አገልጋይና የያዕቆብ ወንድም ይሁዳ፤

ለተጠሩት፣ በእግዚአብሔር አብ ለተወደዱትና በኢየሱስ ክርስቶስ ለተጠበቁት1፥1 ወይም የተጠበቁት ሊሆን ይችላል

2ምሕረት፣ ሰላምና ፍቅር ይብዛላችሁ።

የዐመፀኞች ኀጢአትና የሚጠብቃቸው ፍርድ

3ወዳጆች ሆይ፤ አብረን ስለምንካፈለው ድነት ልጽፍላችሁ እጅግ ጓጒቼ ነበር፤ ነገር ግን ለቅዱሳን አንዴና ለመጨረሻ ስለ ተሰጠው እምነት እንድትጋደሉ ለመምከር እጽፍላችሁ ዘንድ ግድ ሆነብኝ። 4ከረጅም ጊዜ በፊት ለዚህ ፍርድ1፥4 ወይም ፍርድ የተወሰነባቸውን ሰዎች የተጻፉ አንዳንድ ሰዎች ሾልከው ወደ እናንተ ገብተዋልና፤ እነርሱ ፈሪሀ እግዚአብሔር የሌላቸው፣ የአምላካችንን ጸጋ በርኵሰት የሚለውጡና እርሱ ብቻ ልዑል ገዣችንና ጌታችን የሆነውን ኢየሱስ ክርስቶስን የሚክዱ ናቸው።

5ምንም እንኳ አስቀድማችሁ ይህን ሁሉ የምታውቁ ቢሆንም፣ ጌታ1፥5 አንዳንድ የጥንት ቅጆች ኢየሱስ ይላሉ ሕዝቡን ከግብፅ ምድር እንዴት እንዳወጣ፣ በኋላ ግን ያላመኑትን እንዳጠፋ ላስታውሳችሁ እወዳለሁ። 6የሥልጣን ስፍራቸውን ያልጠበቁትን ነገር ግን መኖሪያቸውን የተዉትን መላእክት በዘላለም እስራት እስከ ታላቁ ቀን ፍርድ ድረስ በጨለማ ጠብቆአቸዋል። 7እንዲሁም ሰዶምና ገሞራ፣ በዙሪያቸውም ያሉ ከተሞች ለሴሰኛነትና ከተፈጥሮ ሥርዐት ውጭ ለሆነ ሩካቤ ሥጋ ራሳቸውን አሳልፈው ሰጡ፤ እነርሱም በዘላለም እሳት በመቀጣት ለሚሠቃዩት ምሳሌ ሆነዋል።

8በዚህ ሁኔታ እነዚህ ሕልም አላሚዎች የገዛ ሥጋቸውን ያረክሳሉ፤ ሥልጣንን ይቃወማሉ፤ በሰማይ ክብር ያላቸውንም ፍጥረታት ይሳደባሉ። 9የመላእክት አለቃ የሆነው ሚካኤል እንኳ ስለ ሙሴ ሥጋ ከዲያብሎስ ጋር በተከራከረ ጊዜ፣ “ጌታ ይገሥጽህ” አለው እንጂ የስድብ ቃል በመናገር ሊከሰው አልደፈረም። 10እነዚህ ሰዎች ግን የማያውቁትን ነገር ሁሉ ይሳደባሉ፤ አእምሮ እንደሌላቸው እንስሳት በደመ ነፍስ በሚያወቁት ነገር ይጠፋሉ።

11ወዮላቸ በቃየን መንገድ ሄደዋል፤ ለገንዘብ ሲስገበገቡ በበለዓም ስሕተት ውስጥ ወድቀዋል፤ በቆሬም ዐመፅ ጠፍተዋል።

12እነዚህ ሰዎች በፍቅር ግብዣችሁ ላይ ያለ አንዳች ኀፍረት ከእናንተ ጋር ቀርበው የሚበሉ ነውረኞች ናቸው፤ ደግሞም ራሳቸውን ብቻ የሚመግቡ እረኞች ናቸው፤ እነርሱም በነፋስ የሚነዱ ዝናብ የሌላቸው ደመናዎች ናቸው፤ በመከር ወራት ፍሬ የማይገኝባቸው ከሥራቸው ተነቅለው ሁለት ጊዜ የሞቱ ዛፎች ናቸው። 13የነውራቸውን አረፋ የሚደፍቁ የተቈጡ የባሕር ማዕበል፣ ድቅድቅ ጨለማ ለዘላለም የሚጠብቃቸው ተንከራታች ከዋክብት ናቸው።

14ከአዳም ጀምሮ ሰባተኛ የሆነው ሄኖክ ስለ እነዚህ ሰዎች እንዲህ ሲል ተንብዮአል፤ “እነሆ፤ ጌታ ከእልፍ አእላፋት ቅዱሳኑ ጋር ይመጣል፤ 15ይህም፣ በሰው ሁሉ ላይ ለመፍረድ እንዲሁም ዐመፀኞችን ሁሉ በክፋት መንገድ በሠሩት የዐመፅ ሥራና በክፋት በእርሱ ላይ ስለ ተናገሩት የስድብ ቃል ሁሉ አጥፊነታቸውን ይፋ ለማድረግ ነው”። 16እነዚህ ሰዎች የሚያጒረመርሙና ሌሎችን ሰዎች የሚከሱ ናቸው፤ ርኩስ ምኞታቸውን ይከተላሉ፤ በራሳቸው ይታበያሉ፤ ጥቅም ለማግኘት ሲሉ ሌሎችን ይክባሉ።

ጸንቶ ስለ መቆም የቀረበ ጥሪ

17ነገር ግን ወዳጆች ሆይ፤ የጌታችን የኢየሱስ ክርስቶስ ሐዋርያት አስቀድመው የተናገሩትን አስታውሱ። 18እነርሱም፣ “በመጨረሻው ዘመን ርኩስ ምኞታቸውን የሚከተሉ ዘባቾች ይመጣሉ” ብለዋችኋል። 19እነዚህ ሰዎች በመካከላችሁ መለያየትን የሚፈጥሩ፣ በደመ ነፍስ የሚነዱ መንፈስ የሌላቸው ናቸው።

20እናንተ ግን ወዳጆች ሆይ፤ እጅግ ቅዱስ በሆነው እምነታችሁ ራሳችሁን ለማነጽ ትጉ፤ በመንፈስ ቅዱስም ጸልዩ። 21ወደ ዘላለም ሕይወት የሚያደርሳችሁን የጌታችንን የኢየሱስ ክርስቶስን ምሕረት ስትጠባበቁ ሳለ፣ በእግዚአብሔር ፍቅር ራሳችሁን ጠብቁ።

22ተጠራጣሪ ለሆኑት ራሩላቸው፤ 23አንዳንዶችን ከእሳት ነጥቃችሁ አድኗቸው፤ ለሌሎች ደግሞ በርኩስ ሥጋ የተበከለውን ልብሳቸውን እንኳ እየጠላችሁ በፍርሀት ምሕረት አሳዩአቸው።

ቃለ ውዳሴ

24እንዳትወድቁ ሊጠብቃችሁና ያለ ነቀፋና በደስታ በክብሩ ፊት ሊያቀርባችሁ ለሚችለው፣ 25እርሱ ብቻ አዳኛችን ለሆነው አምላክ በጌታችን በኢየሱስ ክርስቶስ በኩል ከዘመናት ሁሉ በፊት፣ አሁንና እስከ ዘላለምም ድረስ ክብር፣ ግርማ፣ ኀይልና ሥልጣን ይሁን፤ አሜን።

Hindi Contemporary Version

यहूदाह 1:1-25

1मसीह येशु के दास और याकोब के भाई यहूदाह की ओर से,

तुम सबको, जो परमेश्वर पिता के द्वारा बुलाए गए हैं और प्रेम पात्र हो और मसीह येशु के लिए सुरक्षित रखे गए हो:

2कृपा, शांति और प्रेम अधिकता में मिलते जाएं.

पत्र लिखने का उद्देश्य

3प्रियों, हालांकि मैं बहुत ही उत्सुक था कि तुमसे हम सभी को मिले समान उद्धार का वर्णन करूं किंतु अब मुझे यह ज़रूरी लग रहा है कि मैं तुम्हें उस विश्वास की रक्षा के प्रयास के लिए प्रेरित करूं, जो पवित्र लोगों को सदा के लिए एक ही बार में सौंप दिया गया है. 4तुम्हारे बीच कुछ ऐसे व्यक्ति चुपचाप घुस आए हैं, जिनके लिए यह दंड बहुत पहले ही तय कर दिया गया था. ये वे भक्तिहीन हैं, जो हमारे एकमात्र स्वामी व प्रभु मसीह येशु को अस्वीकार करते हुए परमेश्वर के अनुग्रह को बिगाड़कर कामुकता में बदल देते हैं.

5हालांकि तुम इस सच्चाई से पहले से ही परिचित हो, तो भी यहां मेरा उद्देश्य तुम्हें यह याद दिलाना है कि प्रभु ने अपनी प्रजा को मिस्र से छुड़ाने के बाद अन्ततः उन्हीं में से उन लोगों का विनाश कर दिया, जो विश्वास से दूर हो गए थे. 6जिस प्रकार परमेश्वर ने उन स्वर्गदूतों को भीषण न्याय के दिन तक के लिए सदाकाल के लिए जंजीरों से बंधे, अंधकार में रख छोड़ा है, जिन्होंने अपने आचार नियमों का उल्लंघन करके अपने राजपद तथा घर को त्याग दिया, 7उसी प्रकार सोदोम और गोमोरा और आस-पास के नगरों को, जो इनके समान व्यभिचारी हो गये और अप्राकृतिक वासना का अनुसरण करने लगे और अग्नि के दंड के भोगी होकर अन्यों के लिये उदाहरण ठहरें.

8फिर भी ये स्वप्नदर्शी, शरीर को उसी प्रकार अशुद्ध करते हैं, प्रभुत्व को अस्वीकार करते हैं और स्वर्गीय प्राणियों की निंदा करते हैं. 9प्रधान स्वर्गदूत मीख़ाएल तक ने, जब वह मोशेह के शव के विषय में शैतान से वाद-विवाद कर रहा था, उसे लांछित कर अपमानित नहीं किया, परंतु सिर्फ इतना ही कहा, “प्रभु ही तुझे फटकारें.” 10ये लोग जिन विषयों को नहीं समझते, उन्हीं की बुराई करते और जिन विषयों को मूल रूप से अचेतन पशुओं की तरह समझते हैं, उन्हीं के द्वारा नाश हो जाते हैं.

11धिक्कार है इन पर! जिन्होंने काइन का मार्ग अपना लिया; धन के लालच के कारण उन्होंने वही गलती की, जो बिलआम ने की थी और उसी प्रकार नाश हुए जिस प्रकार विद्रोही कोराह.

12ये लोग समुद्र में छिपी हुई विनाशकारी चट्टानें हैं, जो तुम्हारे प्रेम-भोजों में प्रेम जताते हुए सिर्फ अपनी संतुष्टि के लिए बेशर्म हो भाग लेते हैं. ये निर्जल बादल हैं जिन्हें हवा उड़ा ले जाती है. यह शरद ऋतु के फलहीन और जड़ से गिरे हुए पेड़ हैं, जिनकी दोहरी मृत्यु हुई है. 13ये समुद्र की प्रचंड लहरों के समान हैं, जो अपनी लज्जा फेन के रूप में उछालते हैं. ये मार्ग से भटके हुए तारागण हैं, जिनके लिए अनंत काल के लिए घोर अंधकार तय किया गया है.

14हनोख ने भी, जो आदम की सातवीं पीढ़ी में थे, इनके विषय में भविष्यवाणी की थी: “देखो, प्रभु अपने हज़ारों पवित्र लोगों के साथ आए 15कि सबका न्याय करें और दुष्टों को उनके सभी बुरे कामों के लिए, जो उन्होंने बुराई से किए हैं और दुष्ट पापियों को, जिन्होंने परमेश्वर के विरोध में कड़वे वचन इस्तेमाल किए हैं, दोषी ठहराएं.” 16ये वे हैं, जो कुड़कुड़ाते रहते हैं, सदा दोष खोजते रहते हैं तथा जो वासना-लिप्त, घमंडी और अपने लाभ के लिए चापलूसी करनेवाले हैं.

एक चेतावनी

17इसलिये प्रियो, यह आवश्यक है कि तुम हमारे प्रभु मसीह येशु के प्रेरितों की पहले से की गई घोषणाओं को याद रखो. 18वे तुमसे कहते थे, “अंतिम दिनों में ऐसे लोग होंगे, जिनका स्वभाव उनकी अभक्ति की अभिलाषाओं के अनुसार होगा.” 19ये लोग फूट डालनेवाले, सांसारिक और आत्मा से रहित हैं.

20किंतु प्रियो, तुम स्वयं को अपने अति पवित्र विश्वास में बढ़ाते जाओ. पवित्रात्मा में प्रार्थना करते हुए 21अनंत काल के जीवन के लिए हमारे प्रभु मसीह येशु की दया की बड़ी आशा से प्रतीक्षा करते हुए स्वयं को परमेश्वर के प्रेम में स्थिर बनाए रखो.

22जो विश्वास में अस्थिर हैं, उनके लिए दया दिखाओ, 23बाकियों को आग में से झपटकर निकाल लो, दया करते हुए सावधान रहो, यहां तक कि शरीर के द्वारा कलंकित वस्त्रों से भी घृणा करो.

स्तुति गान

24अब वह जो ठोकर खाने से तुम्हारी रक्षा करने और अपनी महिमामय उपस्थिति में आनंदपूर्वक तुम्हें निर्दोष प्रस्तुत करने में समर्थ हैं, 25उन अतुल्य परमेश्वर हमारे उद्धारकर्ता की महिमा, वैभव, पराक्रम और राज्य, मसीह येशु हमारे प्रभु के द्वारा जैसी सनातन काल से थी, अब है, युगानुयुग बनी रहे, आमेन.