New Amharic Standard Version

ናሆም 1:1-15

1ስለ ነነዌ ጥፋት የተነገረ ንግር፤ የኤልቆሻዊው የናሆም የራእዩ መጽሐፍ ይህ ነው፤

በነነዌ ላይ የተገለጠ የእግዚአብሔር ቍጣ

2እግዚአብሔር ቀናተኛና ተበቃይ አምላክ ነው፤

እግዚአብሔር የሚበቀል፣ በመዓትም የተሞላ ነው።

እግዚአብሔር ባላጋራዎቹን ይበቀላል፤

በጠላቶቹም ላይ ቍጣውን ያመጣል

3እግዚአብሔር ለቍጣ የዘገየ በኀይሉም ታላቅ ነው፤

እግዚአብሔር በደለኛውን ሳይቀጣ አያልፍም፤

መንገዱ በዐውሎ ነፋስና በማዕበል ውስጥ ነው፤

ደመናም የእግሩ ትቢያ ነው።

4ባሕርን ይገሥጻል፤ ያደርቀዋልም፤

ወንዞችን ሁሉ ያደርቃል።

ባሳንና ቀርሜሎስ ጠውልገዋል፤

የሊባኖስም አበቦች ረግፈዋል።

5ተራሮች በፊቱ ታወኩ፤

ኰረብቶችም ቀለጡ።

ምድር በፊቱ፣

ዓለምና በውስጧ የሚኖሩት ሁሉ ተናወጡ።

6ቊጣውን ማን ሊቋቋም ይችላል?

ጽኑ ቊጣውንስ ማን ሊሸከም ይችላል?

መዓቱ እንደ እሳት ፈሶአል፤

ዐለቶችም በፊቱ ተሰነጣጥቀዋል።

7እግዚአብሔር መልካም ነው፤

በጭንቅ ጊዜም መሸሸጊያ ነው።

ለሚታመኑበት ይጠነቀቅላቸዋል፤

8ነነዌን ግን፣

በሚያጥለቀልቅ ጐርፍ ያጠፋታል፤

ጠላቶቹንም ወደ ጨለማ ያሳድዳቸዋል።

9በእግዚአብሔር ላይ ምንም ቢያሤሩ1፥9 በእግዚአብሔር ላይ የምታሤሩት ምንድን ነው? የሚሉ አሉ

እርሱ ያጠፋዋል፤

መከራም ዳግመኛ አይነሣም።

10በእሾህ ይጠላለፋሉ፤

በወይን ጠጃቸውም ይሰክራሉ፤

እሳትም እንደ ገለባ1፥10 የዕብራይስጡ ትርጒም በትክክል አይታወቅም። ይበላቸዋል።

11ነነዌ ሆይ፤ በእግዚአብሔር ላይ የሚያሤር፣

ክፋትንም የሚመክር፣

ከአንቺ ዘንድ ወጥቶአል።

12እግዚአብሔር እንዲህ ይላል፤

“ምንም ኀይለኞችና ብዙዎች ቢሆኑም፣

ይቈረጣሉ፤ ይጠፋሉም።

ይሁዳ ሆይ፤ ከዚህ በፊት ባስጨንቅህም፣

ከእንግዲህ አላስጨንቅህም።

13አሁንም ቀንበራቸውን ከዐንገትህ ላይ አንሥቼ እሰብራለሁ፤

የታሰርህበትንም ሰንሰለት በጥሼ እጥላለሁ።”

14አንቺ ነነዌ፤ እግዚአብሔር ስለ አንቺ እንዲህ ብሎ አዞአል፤

“ስም የሚያስጠራ ትውልድ አይኖራችሁም፤

በአማልክቶቻችሁ ቤት ያሉትን፣

የተቀረጹትን ምስሎችና ቀልጠው የተሠሩትን ጣዖታት እደመስሳለሁ፤

መቀበሪያህን እምስልሃለሁ፤

አንተ ክፉ ነህና።

15እነሆ፤ የምሥራች የሚያመጣው፣

ሰላምን የሚያውጀው ሰው እግር፣

በተራሮች ላይ ነው፤

ይሁዳ ሆይ፤ በዓላትህን አክብር፤

ስእለትህንም ፈጽም፤

ከእንግዲህ ክፉዎች አይወሩህም፤

እነርሱም ፈጽመው ይጠፋሉ።

Hindi Contemporary Version

नहूम 1:1-15

1नीनवेह नगर से संबंधित भविष्यवाणी. एलकोशवासी नहूम के दर्शन की पुस्तक.

परमेश्वर का नीनवेह नगर के विरुद्ध क्रोध

2याहवेह जलन रखनेवाले और बदला लेनेवाले परमेश्वर हैं;

याहवेह बदला लेनेवाले तथा बहुत क्रोधी हैं.

याहवेह अपने शत्रुओं से बदला लेते हैं

और अपना कोप अपने शत्रुओं पर प्रगट करते हैं.

3याहवेह क्रोध करने में धीमा पर बड़े सामर्थ्यी हैं;

याहवेह दुष्टों को दंड देने में पीछे न हटेंगे.

उनका मार्ग बवंडर और आंधी में से होकर जाता है,

और बादल उनकी पैरों की धूल हैं.

4वे समुद्र को फटकारते और उसे सूखा देते हैं;

वे सब नदियों को सूखा देते हैं.

बाशान और कर्मेल कुम्हला जाते

और लबानोन के फूल मुरझा जाते हैं.

5उनके सामने पर्वत कांप उठते हैं

और पहाड़ियां पिघल जाती हैं.

उनकी उपस्थिति में पृथ्वी,

सारा संसार और उसमें रहनेवाले कांप उठते हैं.

6उनके क्रोध का सामना कौन कर सकता है?

उनके भयंकर क्रोध को कौन सह सकता है?

उनका कोप आग की तरह भड़कता है;

उनके सामने चट्टानें चूर-चूर हो जाती हैं.

7याहवेह भले हैं,

और संकट के समय दृढ़ गढ़ ठहरते हैं.

वे उनका ध्यान रखते हैं जो उन पर भरोसा रखते हैं,

8पर वे भयंकर बाढ़ के द्वारा

नीनवेह नगर को नष्ट कर देंगे;

वे अपने शत्रुओं को अंधकार में खदेड़ देंगे.

9याहवेह अपने विरुद्ध की गई उनके षडयंत्र का

अंत कर देंगे;

संकट दूसरी बार नहीं आएगी.

10वे कंटीली झाड़ियों में उलझेंगे,

दाखमधु पीकर मतवाले होंगे;

उनको उपज के सूखी खूंटी के समान जलाकर नष्ट किया जाएगा.

11हे नीनवेह, तुमसे ही एक निकला है

जो याहवेह के विरुद्ध षडयंत्र करता है,

और दुष्ट योजना बनाता है.

12याहवेह का यह कहना है:

“यद्यपि उनके साथ उनको मदद करनेवाले हैं और वे असंख्य हैं,

पर वे नष्ट किए जाएंगे और वे मिट जाएंगे.

हे यहूदाह, यद्यपि मैंने तुम्हें पीड़ा पहुंचाई है,

पर अब मैं तुम्हें पीड़ा न पहुंचाऊंगा.

13अब मैं तुम्हारी गर्दन पर रखे उनके जूए को तोड़ डालूंगा

और तुम्हारे बेड़ियों को तोड़ डालूंगा.”

14हे नीनवेह, याहवेह ने तुम्हारे बारे में एक आज्ञा दी है:

“तुम्हारा वंश चलाने के लिये तुम्हारा कोई संतान न होगा.

मैं तुम्हारे देवताओं के मंदिर में रखी

तुम्हारी पूजने की वस्तु और मूर्तियों को नष्ट कर डालूंगा.

मैं तुम्हारी कब्र खोदूंगा,

क्योंकि तुम दुष्ट हो.”

15पर्वतों की ओर दृष्टि करके,

उसके पांवों को देखो, जो शुभ संदेश लेकर आता है,

जो शांति की घोषणा करता है!

हे यहूदाह, अपने त्योहारों को मनाओ,

और अपनी मन्नतों को पूरी करो.

क्योंकि दुष्ट लोग अब तुम पर कभी आक्रमण नहीं करेंगे;

वे पूरी तरह नाश किए जाएंगे.