New Amharic Standard Version

ማርቆስ 1:1-45

የመጥምቁ ዮሐንስ ስብከት

1፥2-8 ተጓ ምብ – ማቴ 3፥1-11፤ ሉቃ 3፥2-16

1የእግዚአብሔር ልጅ1፥1 አንዳንድ ቅጆች የእግዚአብሔር ልጅ የሚለው ሐረግ የላቸውም።፣ የኢየሱስ ክርስቶስ ወንጌል መጀመሪያ።

2በነቢዩ በኢሳይያስ፣ እንዲህ ተብሎ ተጽፎአል፤

“እነሆ መንገድህን የሚያዘጋጅ መልእክተኛዬን

በፊትህ እልካለሁ፤

3‘የጌታን መንገድ አዘጋጁ፤

ጥርጊያውንም አስተካክሉ እያለ በበረሓ የሚጮኽ ድምፅ’።”

4ስለዚህ መጥምቁ ዮሐንስ በበረሓ እያጠመቀና ለኀጢአት ስርየት የንስሓ ጥምቀት እየሰበከ መጣ። 5የይሁዳ አገር በሞላ፣ የኢየሩሳሌም ሰዎች በጠቅላላ ወደ እርሱ በመሄድ ኀጢአታቸውን እየተናዘዙ በዮርዳኖስ ወንዝ በዮሐንስ እጅ ተጠመቁ። 6ዮሐንስ የግመል ጠጒር ይለብስ፣ በወገቡ ጠፍር ይታጠቅ፣ አንበጣና የበረሓ ማር ይበላ ነበር። 7ስብከቱም፣ “እኔ ጐንበስ ብዬ የጫማውን ማሰሪያ መፍታት ከማይገባኝ፣ ከእኔ የሚበልጥ ከእኔ በኋላ ይመጣል፤ 8እኔ በውሃ አጠምቃችኋለሁ፤ እርሱ ግን በመንፈስ ቅዱስ ያጠምቃችኋል” የሚል ነበር።

የኢየሱስ መጠመቅና መፈተን

1፥9-11 ተጓ ምብ – ማቴ 3፥13-17፤ ሉቃ 3፥21-22

1፥12፡13 ተጓ ምብ – ማቴ 4፥1-11፤ ሉቃ 4፥1-13

9በዚህ ጊዜ ኢየሱስ የገሊላ ከተማ ከሆነችው ከናዝሬት መጥቶ በዮርዳኖስ ወንዝ በዮሐንስ እጅ ተጠመቀ። 10ከውሃው በሚወጣበትም ጊዜ፣ ሰማያት ተከፍተው፣ መንፈስ ቅዱስ እንደ ርግብ በእርሱ ላይ ሲወርድ አየ፤ 11“የምወድህ ልጄ አንተ ነህ፤ በአንተ ደስ ይለኛል” የሚል ድምፅ ከሰማይ ተሰማ።

12ወዲያውም መንፈስ ቅዱስ ወደ በረሓ መራው፤ 13በሰይጣንም እየተፈተነ አርባ ቀን በበረሓ ቈየ። ከአራዊትም ጋር ነበር፤ መላእክትም አገለገሉት።

የመጀመሪያዎቹ ደቀ መዛሙርት መመረጥ

1፥16-20 ተጓ ምብ – ማቴ 4፥18-22፤ ሉቃ 5፥2-11፤ ዮሐ 1፥35-42

14ዮሐንስ እስር ቤት ከገባ በኋላ፣ ኢየሱስ የእግዚአብሔርን ወንጌል እየሰበከ ወደ ገሊላ ሄዶ፣ 15“ጊዜው ደርሶአል፤ የእግዚአብሔር መንግሥት ቀርባለች፤ ንስሓ ግቡ፤ በወንጌልም እመኑ” እያለ ይሰብክ ነበር።

16ኢየሱስ በገሊላ ባሕር አጠገብ ሲያልፍ፣ ስምዖንና ወንድሙ እንድርያስ ዓሣ አጥማጆች ስለ ነበሩ፣ መረብ ወደ ባሕር ሲጥሉ አያቸው። 17ኢየሱስም፣ “ተከተሉኝ፤ ሰው አጥማጆች አደርጋችኋለሁ” አላቸው። 18እነርሱም ወዲያውኑ መረባቸውን ትተው ተከተሉት።

19ትንሽ እልፍ እንዳለ፣ የዘብዴዎስ ልጅ ያዕቆብና ወንድሙ ዮሐንስ በጀልባ ሆነው መረባቸውን ሲያበጃጁ አያቸውና፣ 20ወዲያውኑ ጠራቸው። እነርሱም አባታቸውን ከቅጥር ሠራተኞቹ ጋር በጀልባው ላይ ትተው ተከትለውት ሄዱ።

ኢየሱስ ርኩስ መንፈስ አስወጣ

1፥21-28 ተጓ ምብ – ሉቃ 4፥31-37

21ከዚያም ወደ ቅፍርናሆም ሄዱ፤ ኢየሱስም ወዲያው በሰንበት ቀን ወደ ምኵራብ ገብቶ ማስተማር ጀመረ። 22እንደ ጸሓፍት ሳይሆን፣ እንደ ባለ ሥልጣን በማስተማሩ ሕዝቡ በትምህርቱ ተገረሙ። 23በዚያን ጊዜ በምኵራባቸው ውስጥ የነበረ ርኩስ1፥23 ወይም ክፉ፤ እንዲሁም ቍ 26 እና 27 ይመ መንፈስ ያደረበት አንድ ሰው እንዲህ በማለት ጮኸ፤ 24“የናዝሬቱ ኢየሱስ ሆይ፤ ከኛ ምን ትሻለህ? ልታጠፋን መጣህን? እኔ ማን እንደሆንህ ዐውቃለሁ፤ አንተ የእግዚአብሔር ቅዱስ ነህ!”

25ኢየሱስም፣ “ጸጥ በል፤ ከእርሱም ውጣ!” ብሎ ገሠጸው። 26ርኩሱም መንፈስ ሰውየውን በኀይል ካንፈራገጠው በኋላ እየጮኸ ወጣ። 27ሕዝቡ በሙሉ በመገረም፣ “ይህ ነገር ምንድን ነው? ሥልጣን ያለው አዲስ ትምህርት መሆኑ ነው! ርኩሳን መናፍስትን እንኳ ያዛል፤ እነርሱም ይታዘዙለታል!” እያሉ እርስ በርስ ተጠያየቁ። 28ወዲያውም ዝናው በገሊላ ዙሪያ ባሉ ስፍራዎች ሁሉ ተዳረሰ።

ኢየሱስ ብዙዎችን ፈወሰ

1፥29-31 ተጓ ምብ – ማቴ 8፥14-15፤ ሉቃ 4፥38፡39

1፥32-34 ተጓ ምብ – ማቴ 8፥16፡17፤ ሉቃ 4፥40፡41

29ወዲያው ከምኵራብ እንደ ወጡ፣ ከያዕቆብና ከዮሐንስ ጋር ወደ ስምዖንና ወደ እንድርያስ ቤት ገቡ። 30የስምዖን አማት በትኵሳት በሽታ ታማ ተኝታ ነበር፤ ስለ እርሷም ነገሩት፤ 31ስለዚህም እርሱ ወደ ተኛችበት በመሄድ እጇን ይዞ አስነሣት፤ ትኵሳቱም ተዋት፤ ተነሥታም ታገለግላቸው ጀመር።

32ጀንበር ከጠለቀች በኋላ፣ ምሽት ላይ የአካባቢው ሰዎች ሕመምተኞችንና በአጋንንት የተያዙትን ሁሉ ወደ እርሱ አመጡ።

33የከተማዋ ሕዝብ በሙሉ በቤቱ ደጅ ላይ ተሰብስቦ ነበር። 34እርሱም በተለያየ በሽታ የታመሙትን ብዙዎችን ፈወሰ፤ ብዙ አጋንንትም አወጣ፤ ነገር ግን አጋንንቱ የኢየሱስን ማንነት ያውቁ ስለ ነበር እንዲናገሩ አልፈቀደላቸውም።

ኢየሱስ በገለልተኛ ስፍራ ጸለየ

1፥35-38 ተጓ ምብ – ሉቃ 4፥42፡43

35ማለዳም ገና ጎሕ ሳይቀድ፣ ኢየሱስ ተነሥቶ ከቤት ወጣ፤ ወደ አንድ ገለልተኛ ስፍራም ሄዶ ይጸልይ ጀመር። 36ስምዖንና ባልደረቦቹም ተከትለው ይፈልጉት ጀመር፤ 37ባገኙትም ጊዜ፣ “ሰዉ ሁሉ ይፈልግሃል” አሉት።

38እርሱም፣ “ከዚህ ተነሥተን በአቅራቢያ ወዳሉት መንደሮች እንሂድ፤ እዚያም ልስበክ፤ የመጣሁት ለዚሁ ነውና” አላቸው። 39ስለዚህ ወደ ምኵራባቸው እየገባ በመስበክና አጋንንትን በማስወጣት በመላዋ ገሊላ ይዘዋወር ጀመር።

ኢየሱስ ለምጻሙን ሰው አነጻ

1፥40-44 ተጓ ምብ – ማቴ 8፥2-4፤ ሉቃ 5፥12-14

40አንድ ለምጻም1፥40 ለምጽ የሚለው ቃል በግሪኩ አገላለጽ የተለያዩ የቆዳ በሽታዎችን ያመለክታል ወደ እርሱ ቀርቦ ከፊቱ በመንበርከክ፣ “ብትፈቅድ እኮ ልታነጻኝ ትችላለህ” በማለት ለመነው።

41ኢየሱስም ለሰውየው በመራራት እጁን ዘርግቶ ዳሰሰውና፣ “እፈቅዳለሁ፣ ንጻ” አለው። 42እርሱም ወዲያው ከለምጹ ነጻ፤ ከበሽታውም ተፈወሰ።

43ኢየሱስም ሰውየውን አጥብቆ በማስጠንቀቅ እንዲህ ሲል አሰናበተው፤ 44“ለማንም አንድ ነገር እንኳ እንዳትናገር ተጠንቀቅ፤ ነገር ግን ምስክር እንዲሆናቸው ሄደህ ራስህን ለካህን አሳይ፤ ስለ መንጻትህም ሙሴ ያዘዘውን መሥዋዕት አቅርብ” አለው። 45ሰውየው ግን በሄደበት ሁሉ ነገሩን በሰፊው አወራ፣ ወሬውንም አሠራጨ። በዚህ ምክንያት ኢየሱስ ወደ ማንኛውም ከተማ በግልጽ መግባት አልተቻለውም፤ ከዚህም የተነሣ ከከተማ ውጭ በሚገኙ ሰዋራ ቦታዎች መኖር ጀመረ፤ ሰዎች ግን ከየአቅጣጫው እርሱ ወዳለበት መምጣት አላቋረጡም።

Hindi Contemporary Version

मार्का 1:1-45

बपतिस्मा देनेवाले योहन का उपदेश

1परमेश्वर-पुत्र1:1 कुछ हस्तलेखों में परमेश्वर-पुत्र शब्द नहीं पाए जाते. मला 3:1 येशु मसीह के सुसमाचार का आरंभ: 2भविष्यवक्ता यशायाह के अभिलेख के अनुसार,

“तुम्हारे पूर्व मैं अपना एक दूत भेज रहा हूं,

जो तुम्हारा मार्ग तैयार करेगा”1:2 मला 3:1;

3“जंगल में पुकारनेवाले की आवाज है,

‘प्रभु का रास्ता सीधा करो, उनका मार्ग सरल बनाओ.’ ”

4बपतिस्मा देनेवाले योहन जंगल में पाप क्षमा के लिए पश्चाताप के बपतिस्मा का प्रचार करते हुए आए. 5यहूदिया प्रदेश के क्षेत्रों से सारी भीड़ तथा येरूशलेम नगर के सभी लोग उनसे भेंट करने जाने लगे. ये सब पाप स्वीकार करते हुए यरदन नदी में योहन से बपतिस्मा ले रहे थे. 6योहन का परिधान, ऊंट के रोम से निर्मित वस्त्र और उसके ऊपर चमड़े का कमरबंध था और उनका भोजन था टिड्डियां तथा जंगलीमधु. 7वह प्रचार कर कहते थे, “मेरे बाद एक ऐसा व्यक्ति आएगा, जो मुझसे अधिक शक्तिमान हैं—मैं तो इस योग्य भी नहीं हूं कि उनके सामने झुककर उनकी जूतियों के बंध खोलूं. 8मैं बपतिस्मा जल में देता हूं; वह तुम्हें पवित्रात्मा में बपतिस्मा देंगे.”

मसीह येशु का बपतिस्मा

9उसी समय मसीह येशु गलील प्रदेश के नाज़रेथ नगर से आए और उन्हें योहन द्वारा यरदन नदी में बपतिस्मा दिया गया. 10जब मसीह येशु जल से बाहर आ रहे थे, उसी क्षण उन्होंने आकाश को खुलते तथा आत्मा को, जो कबूतर के समान था, अपने ऊपर उतरते हुए देखा 11और स्वर्ग से निकला एक शब्द भी सुनाई दिया: “तुम मेरे पुत्र हो—मेरे प्रिय—तुमसे में अतिप्रसन्न हूं.”

12उसी समय पवित्रात्मा ने उन्हें जंगल में भेज दिया. 13जंगल में वह चालीस दिन शैतान के द्वारा परखे जाते रहे. वह वहां जंगली पशुओं के साथ रहे और स्वर्गदूतों ने उनकी सेवा की.

प्रचार का प्रारंभ गलील प्रदेश से

14योहन के बंदी बना लिए जाने के बाद येशु, परमेश्वर के सुसमाचार का प्रचार करते हुए गलील प्रदेश आए. 15उनका संदेश था, “समय पूरा हो चुका है, परमेश्वर का राज्य पास आ गया है. मन फिराओ तथा सुसमाचार में विश्वास करो.”

पहले चार शिष्यों का बुलाया जाना

16गलील झील के पास से जाते हुए मसीह येशु ने शिमओन तथा उनके भाई आन्द्रेयास को देखा, जो झील में जाल डाल रहे थे. वे मछुआरे थे. 17मसीह येशु ने उनसे कहा, “मेरा अनुसरण करो—मैं तुम्हें मनुष्यों के मछुआरे बनाऊंगा.” 18वे उसी क्षण अपने जाल छोड़कर येशु का अनुसरण करने लगे.

19आगे जाने पर उन्होंने ज़ेबेदियॉस के पुत्र याकोब तथा उनके भाई योहन को देखा. वे भी नाव में थे और अपने जाल सुधार रहे थे. 20उन्हें देखते ही मसीह येशु ने उनको बुलाया. वे अपने पिता ज़ेबेदियॉस को मज़दूरों के साथ नाव में ही छोड़कर उनके साथ चल दिए.

मसीह येशु की अधिकार भरी शिक्षा

21वे सब कफ़रनहूम नगर आए. शब्बाथ पर मसीह येशु स्थानीय यहूदी सभागृह में जाकर शिक्षा देने लगे. 22लोग उनकी शिक्षा से आश्चर्यचकित रह गए क्योंकि वह शास्त्रियों के समान नहीं परंतु इस प्रकार शिक्षा दे रहे थे कि उन्हें इसका अधिकार है. 23उसी समय सभागृह में एक व्यक्ति, जो दुष्टात्मा से पीड़ित था, चिल्ला उठा, 24“नाज़रेथवासी येशु! क्या चाहते हैं आप? क्या आप हमें नाश करने आए हैं? मैं जानता हूं कि आप कौन हैं; परमेश्वर के पवित्र जन!”

25“चुप!” उसे फटकारते हुए मसीह येशु ने कहा, “बाहर निकल जा इसमें से!” 26उस व्यक्ति को मरोड़ते हुए वह प्रेत ऊंचे शब्द में चिल्लाता हुआ उसमें से बाहर निकल गया.

27सभी हैरान रह गए. वे आपस में विचार करने लगे, “यह सब क्या हो रहा है? यह अधिकारपूर्वक शिक्षा देते हैं और अशुद्ध आत्मा तक को आज्ञा देते है और वे उनका पालन भी करती हैं!” 28तेजी से उनकी ख्याति गलील प्रदेश के आस-पास सब जगह फैल गई.

पेतरॉस की सास को स्वास्थ्यदान

29यहूदी सभागृह से निकलकर वे सीधे याकोब और योहन के साथ शिमओन तथा आन्द्रेयास के घर पर गए. 30वहां शिमओन की सास बुखार में पड़ी हुई थी. उन्होंने बिना देर किए मसीह येशु को इसके विषय में बताया. 31मसीह येशु उनके पास आए, उनका हाथ पकड़ उन्हें उठाया और उनका बुखार जाता रहा तथा वह उनकी सेवा टहल में जुट गईं.

32संध्या समय सूर्यास्त के बाद लोग अस्वस्थ तथा जिनमें दुष्टात्माऐं थी उन लोगों को येशु के पास लाने लगे. 33सारा नगर ही द्वार पर इकट्ठा हो गया 34मसीह येशु ने विभिन्न रोगों से पीड़ित अनेकों को स्वस्थ किया और अनेक दुष्टात्माओं को भी निकाला. वह दुष्टात्माओं को बोलने नहीं देते थे क्योंकि वे उन्हें पहचानती थी.

समग्र गलील प्रदेश में मसीह येशु द्वारा प्रचार तथा स्वास्थ्यदान सेवा

35भोर होने पर, जब अंधकार ही था, मसीह येशु उठे और एक सुनसान जगह को गए. वहां वह प्रार्थना करने लगे. 36शिमओन तथा उनके अन्य साथी उन्हें खोज रहे थे. 37उन्हें पाकर वे कहने लगे, “सभी आपको खोज रहे हैं.”

38किंतु मसीह येशु ने उनसे कहा, “चलो, कहीं और चलें—यहां पास के नगरों में—जिससे कि मैं वहां भी प्रचार कर सकूं क्योंकि मेरे यहां आने का उद्देश्य यही है.” 39वह सारे गलील प्रदेश में घूमते हुए यहूदी सभागृहों में जा-जाकर प्रचार करते रहे तथा लोगों में से दुष्टात्माओं को निकालते गए.

कोढ़ रोगी की शुद्धि

40एक कोढ़ रोगी उनके पास आया. उसने मसीह येशु के सामने घुटने टेक उनसे विनती की, “आप चाहें तो मुझे शुद्ध कर सकते हैं.”

41तरस खाकर मसीह येशु ने हाथ बढ़ाकर उसे स्पर्श किया और कहा, “मैं चाहता हूं. तुम शुद्ध हो जाओ!” 42उसी समय उसका कोढ़ रोग जाता रहा और वह शुद्ध हो गया.

43मसीह येशु ने उसे उसी समय इस चेतावनी के साथ विदा किया, 44“सुनो! इस विषय में किसी से कुछ न कहना. हां, जाकर स्वयं को पुरोहित के सामने प्रस्तुत करो तथा अपनी शुद्धि के प्रमाण के लिए मोशेह द्वारा निर्धारित विधि के अनुसार शुद्धि संबंधी भेंट चढ़ाओ.” 45किंतु उस व्यक्ति ने जाकर खुलेआम इसकी घोषणा की तथा यह समाचार इतना फैला दिया कि मसीह येशु इसके बाद खुल्लम-खुल्ला किसी नगर में न जा सके और उन्हें नगर के बाहर सुनसान स्थानों में रहना पड़ा. फिर भी सब स्थानों से लोग उनके पास आते रहे.