New Amharic Standard Version

ሉቃስ 6:1-49

የሰንበት ጌታ

6፥1-11 ተጓ ምብ – ማቴ 12፥1-14፤ ማር 2፥23–3፥6

1በአንድ የሰንበት ቀን ኢየሱስ በዕርሻ መካከል ያልፍ ነበር፤ ደቀ መዛሙርቱም እሸት ቀጥፈው በእጃቸው እያሹ ይበሉ ነበር። 2ከፈሪሳውያን መካከል አንዳንዶቹ ግን፣ “በሰንበት ቀን ሊደረግ ያልተፈቀደውን ለምን ታደርጋላችሁ?” አሏቸው።

3ኢየሱስም እንዲህ ሲል መለሰላቸው፤ “ዳዊት በተራበ ጊዜ ከባልንጀሮቹ ጋር ያደረገውን ከቶ አላነበባችሁምን? 4ወደ እግዚአብሔር ቤት ገብቶ ለካህናት ብቻ የተፈቀደውን ኀብስተ ገጽ ወስዶ በላ፤ አብረውት ለነበሩትም ሰጣቸው።” 5ደግሞም፣ “የሰው ልጅ ለሰንበት ጌታዋ ነው” አላቸው።

6በሌላ ሰንበት ቀንም ወደ ምኵራብ ገብቶ ያስተምር ነበር፤ በዚያም ቀኝ እጁ የሰለለ አንድ ሰው ነበረ። 7ጸሐፍትና ፈሪሳውያንም ሊከሱት ምክንያት በመፈለግ፣ ይፈውሰው እንደሆነ ለማየት ይጠባበቁት ነበር። 8ኢየሱስም ሐሳባቸውን ዐውቆ እጁ የሰለለውን ሰው፣ “ተነሥተህ በመካካል ቁም” አለው፤ ሰውየውም ተነሥቶ ቆመ።

9ኢየሱስም፣ “እስቲ አንድ ነገር ልጠይቃችሁ፤ በሰንበት ቀን የተፈቀደው በጎ ማድረግ ነው ወይስ ክፉ ማድረግ? ነፍስ ማዳን ነው ወይስ ማጥፋት?” አላቸው።

10ደግሞም ኢየሱስ በዙሪያው ያሉትን ሁሉ ከተመለከተ በኋላ ሰውየውን፣ “እጅህን ዘርጋ” አለው። ሰውየውም እንደ ተባለው አደረገ፤ እጁም ፈጽሞ ዳነለት። 11ሰዎቹ ግን በቊጣ ተሞሉ፤ በኢየሱስ ላይ ምን ማድረግ እንዳለባቸውም እርስ በርስ ተወያዩ።

የዐሥራ ሁለቱ ሐዋርያት መመረጥ

6፥13-16 ተጓ ምብ – ማቴ 10፥2-4፤ ማር 3፥16-19፤ ሐሥ 1፥13

12ከእነዚያም ቀናት በአንዱ ኢየሱስ ሊጸልይ ወደ ተራራ ወጣ፤ ሌሊቱንም ሁሉ ወደ እግዚአብሔር ሲጸልይ አደረ። 13ሲነጋም ደቀ መዛሙርቱን ጠርቶ ከእነርሱ ዐሥራ ሁለቱን መረጠ፤ እነዚህንም ሐዋርያት ብሎ ሰየማቸው፤ 14እነርሱም፣ ጴጥሮስ ብሎ የጠራው ስምዖንና ወንድሙ እንድርያስ፣ ያዕቆብ፣ ዮሐንስ፣ ፊልጶስ፣ በርተሎሜዎስ፣ 15ማቴዎስ፣ ቶማስ፣ የእልፍዮስ ልጅ ያዕቆብ፣ ቀናተኛ የተባለው ስምዖን፤ 16የያዕቆብ ልጅ ይሁዳና ኋላ አሳልፎ የሰጠው የአስቆሮቱ ይሁዳ ነበሩ።

የቡራኬና የወዮታ ስብከት

6፥20-23 ተጓ ምብ – ማቴ 5፥3-12

17ኢየሱስም አብሮአቸው ከተራራው ወርዶ ደልዳላ ቦታ ላይ ቆመ፤ ከደቀ መዛሙርቱም እጅግ ብዙ ሰዎች በዚያ ነበሩ፤ ከይሁዳ ሁሉና ከኢየሩሳሌም እንዲሁም ከጢሮስና ከሲዶና ባሕር ጠረፍ የመጣ ብዙ ሕዝብም በዚያ ነበረ፣ 18እነዚህም የመጡት ሊሰሙትና ካለባቸው ደዌ ሊፈወሱ ነበር። በርኩሳን6፥18 ወይም ክፉ መናፍስት ይሠቃዩ የነበሩትም ተፈወሱ፤ 19ኀይል ከእርሱ እየወጣ ሁሉንም ይፈውስ ስለ ነበር፣ ሰዎቹ ሁሉ እርሱን ለመንካት ይፈልጉ ነበር።

20ወደ ደቀ መዛሙርቱም በመመልከት እንዲህ አለ፤

“እናንት ድኾች ብፁዓን ናችሁ፤

የእግዚአብሔር መንግሥት የእናንተ ናትና፤

21እናንት አሁን የምትራቡ ብፁዓን ናችሁ፤

ኋላ ትጠግባላችሁና፤

እናንት አሁን የምታለቅሱ ብፁዓን ናችሁ፤

ኋላ ትሥቃላችሁና፤

22ሰዎች ስለ ሰው ልጅ ሲጠሏችሁ፣

ከመካከላቸው ሲለዩአችሁና ሲነቅፏችሁ፣

ክፉ ስምም ሲሰጧችሁ ብፁዓን ናችሁ።

23“እነሆ፤ ወሮታችሁ በሰማይ ታላቅ ነውና፣ በዚያን ቀን ደስ ይበላችሁ ፈንድቁም፤ የቀድሞ አባቶቻቸውም በነቢያት ላይ ያደረጉት ይህንኑ ነበርና።

24“ነገር ግን እናንት ሀብታሞች ወዮላችሁ፤

መጽናናታችሁን አሁኑኑ ተቀብላችኋልና።

25እናንት አሁን የጠገባችሁ ወዮላችሁ፤

ኋላ ትራባላችሁና።

እናንት አሁን የምትሥቁ ወዮላችሁ፤

ኋላ ታዝናላችሁ፤ ታለቅሳላችሁም።

26ሰዎች ሁሉ ስለ እናንተ መልካም

ሲናገሩላችሁ ወዮላችሁ፤

የቀድሞ አባቶቻቸው ለሐሰተኞች

ነቢያት ያደረጉላቸው ይህንኑ ነበርና።

ጠላትን መውደድ

6፥29፡30 ተጓ ምብ – ማቴ 5፥39-42

27“ነገር ግን ለእናንተ ለምትሰሙ እላችኋለሁ፤ ጠላቶቻችሁን ውደዱ፤ ለሚጠሏችሁም መልካም አድርጉ፤ 28የሚረግሟችሁን መርቁ፤ ለሚበድሏችሁም ጸልዩ። 29አንዱን ጒንጭህን ለሚመታህ ሌላውን ጉንጭህን ደግሞ ስጠው፤ መጐናጸፊያህን ለሚወስድብህ እጀ ጠባብህን አትከልክለው። 30ለሚለምንህ ሁሉ ስጥ፤ ንብረትህን የሚወስድ እንዲመልስልህ አትጠይቀው። 31ሰዎች እንዲያደርጉላችሁ የምትፈልጉትን እናንተም እንዲሁ አድርጉላቸው።

32“የሚወዷችሁን ብትወዱ ምን የተለየ ዋጋ ታገኛላችሁ? ኀጢአተኞችም እንኳ የሚወዷቸውን ይወዳሉና። 33መልካም ላደረጉላችሁ መልካም ብታደርጉ ምን የተለየ ዋጋ ታገኛላችሁ? ኀጢአተኞችም እንኳ እንደዚያ ያደርጋሉና። 34ብድር ይመልሳሉ ለምትሉት ብታበድሩ ምን የተለየ ዋጋ ታገኛላችሁ? ኀጢአተኞችም እንኳ ያበደሩትን ያህል መልሰው ለመቀበል ‘ለኀጢአተኞች’ ያበድራሉ። 35ነገር ግን ጠላቶቻችሁን ውደዱ፤ መልካም አድርጉ፤ መልሳችሁ ለመቀበል ተስፋ ሳታደርጉም አበድሩ፤ በዚህም ወሮታችሁ ታላቅ ይሆናል፤ የልዑልም ልጆች ትሆናላችሁ፤ እርሱ ለማያመሰግኑና ለክፉዎች ቸር ነውና። 36አባታችሁ ርኅሩኅ እንደሆነ እናንተም ርኅሩኆች ሁኑ።

በሌሎች አለመፍረድ

6፥37-42 ተጓ ምብ – ማቴ 7፥1-5

37“አትፍረዱ፤ አይፈረድባችሁም፤ አትኰንኑ፤ አትኰነኑም። ይቅር በሉ፤ ይቅር ትባላላችሁ። 38ስጡ፤ ይሰጣችኋል፤ በምትሰፍሩበት መስፈሪያ ተመልሶ ስለሚሰፈርላችሁ፣ ጫን በተደረገ፣ በተነቀነቀና በተትረፈረፈ መልካም መስፈሪያ ተሰፍሮ በዕቅፋችሁ ይሰጣችኋል።”

39ደግሞም ይህን ምሳሌ እንዲህ ሲል ነገራቸው፤ “ዕውር ዕውርን ሊመራ ይችላልን? ሁለቱ ተያይዘው ጒድጓድ አይገቡምን? 40ደቀ መዝሙር ከመምህሩ አይበልጥም፤ ነገር ግን በሚገባ የተማረ ሰው ሁሉ እንደ መምህሩ ይሆናል።

41“በወንድምህ ዐይን ውስጥ ያለውን ጒድፍ ለምን ታያለህ? በራስህ ዐይን ውስጥ የተጋደመውን ግንድ አትመለከትምን? 42በራስህ ዐይን ውስጥ ያለውን ግንድ ሳታይ ወንድምህን፣ ‘ወንድሜ ሆይ፤ በዐይንህ ውስጥ ያለውን ጒድፍ ላውጣልህ’ እንዴት ልትለው ትችላለህ? አንተ ግብዝ፤ በመጀመሪያ በዐይንህ ውስጥ የተጋደመውን ግንድ አውጣ፤ ከዚያ በኋላ በወንድምህ ዐይን ውስጥ ያለውን ጒድፍ ለማውጣት አጥርተህ ታያለህ።

ዛፍና ፍሬው

6፥43፡44 ተጓ ምብ – ማቴ 7፥16፡18፡20

43“መልካም ዛፍ ሆኖ ሳለ መጥፎ ፍሬ የሚያፈራ የለም፤ እንዲሁም መጥፎ ዛፍ ሆኖ መልካም ፍሬ የሚያፈራ የለም። 44ዛፍ ሁሉ በፍሬው ይታወቃል፤ ከእሾኽ የበለስ ፍሬ አይለቀምም፤ ከቀጋ ቁጥቋጦ የወይን ፍሬ አይቈረጥም። 45መልካም ሰው በልቡ ከሞላው መልካም ነገር መልካሙን ያወጣል፤ ክፉ ሰውም በልቡ ከሞላው ክፉ ነገር ክፉውን ያወጣል፤ ሰው በልቡ ሞልቶ የተረፈውን በአፉ ይናገራልና።

ልባምና ሰነፍ ቤተ ሠሪዎች

6፥47-49 ተጓ ምብ – ማቴ 7፥24-27

46“እኔ የምለውን አታደርጉም፤ ታዲያ ለምን፣ ‘ጌታ ሆይ፤ ጌታ ሆይ’ ትሉኛላችሁ? 47ወደ እኔ የሚመጣ፣ ቃሌንም ሰምቶ የሚፈጽም ሁሉ ማንን እንደሚመስል ላሳያችሁ፤ 48ቤት ለመሥራት አጥልቆ የቈፈረና በዐለት ላይ መሠረቱን የመሠረተ ሰው ይመስላል፤ ጐርፍ በመጣ ጊዜ የውሃው ሙላት ያን ቤት ገፋው፤ በሚገባ ስለ ታነጸም ሊያነቃንቀው አልቻለም። 49ቃሌን ሰምቶ የማይፈጽም ግን ቤቱን ያለ መሠረት በዐፈር ላይ የሠራን ሰው ይመስላል፤ የወንዝ ሙላትም ቤቱን በመታው ጊዜ ወዲያው ወደቀ፤ ክፉኛም ፈራረሰ።”

New Chhattisgarhi Translation (नवां नियम छत्तीसगढ़ी)

लूका 6:1-49

बिसराम दिन के परभू

(मत्ती 12:1-8; मरकुस 2:23-28)

1बिसराम के दिन यीसू ह खेत म ले होके जावत रिहिस, अऊ ओकर चेलामन ह कुछू बाली ला टोरके ओला अपन हांथ म मिंज-मिंज के खावत जावत रिहिन। 2तब कुछू फरीसीमन पुछिन, “तुमन अइसने काबर करत हवव, जऊन ला बिसराम के दिन म करना मना अय?”

3यीसू ह ओमन ला ए जबाब दीस, “का तुमन परमेसर के बचन म ए नइं पढ़े हवव कि दाऊद ह का करिस, जब ओला अऊ ओकर संगवारीमन ला भूख लगिस? 4ओह परमेसर के घर म गीस, अऊ भेंट चघाय रोटी ला लेके खाईस, जऊन ला पुरोहितमन के छोंड़ आने मनखे के खाना कानून के बिरूद्ध रिहिस। अऊ ओह अपन संगवारीमन ला घलो ओ रोटी म ले कुछू खाय बर दीस।” 5तब यीसू ह ओमन ला कहिस, “मनखे के बेटा ह बिसराम दिन के परभू अय।”

6एक आने बिसराम के दिन यीसू ह सभा घर म गीस अऊ उपदेस देवत रिहिस। उहां एक झन मनखे रिहिस जेकर जेवनी हांथ ह सूखा गे रहय। 7फरीसी अऊ कानून के गुरू मन यीसू ऊपर दोस लगाय के बहाना खोजत रहंय, एकरसेति ओमन धियान लगाके देखत रहंय कि ओह सूखा हांथवाले मनखे ला बिसराम के दिन म बने करथे कि नइं। 8पर यीसू ह ओमन के मन के बात ला जानत रिहिस अऊ ओह सूखा हांथवाले मनखे ला कहिस, “उठ अऊ जम्मो झन के आघू म ठाढ़ हो जा।” ओ मनखे ह उठिस अऊ उहां ठाढ़ हो गीस।

9तब यीसू ह ओमन ला कहिस, “मेंह तुमन ला पुछत हंव – बिसराम के दिन म का करना उचित ए – भलई करई या बुरई करई, जिनगी बचई या जिनगी नास करई?”

10यीसू ह चारों कोति ओ जम्मो झन ला देखिस अऊ तब ओ मनखे ला कहिस, “अपन हांथ ला बढ़ा।” ओह वइसने करिस, अऊ ओकर हांथ ह पूरा-पूरी ठीक हो गीस। 11पर फरीसी अऊ कानून के गुरू मन बहुंत नराज होईन अऊ एक-दूसर के संग बिचार करन लगिन कि यीसू के संग का करे जावय।

बारह प्रेरितमन

(मत्ती 10:1-4; मरकुस 3:13-19)

12एक दिन यीसू ह पहाड़ ऊपर पराथना करे बर गीस, अऊ परमेसर ले पराथना करत जम्मो रात बिताईस। 13जब बिहान होईस, त ओह अपन चेलामन ला बलाईस अऊ ओम के बारह झन ला चुन लीस अऊ ओमन ला प्रेरित कहिस: 14ओमन ए अंय – सिमोन (जेकर नांव यीसू ह पतरस रखिस), सिमोन के भाई अन्द्रियास, याकूब, यूहन्ना, फिलिप्पुस, बरतुलमै, 15मत्ती, थोमा, हलफई के बेटा याकूब, सिमोन जऊन ला जेलोतेस कहे गीस, 16याकूब के बेटा यहूदा, अऊ यहूदा इस्करियोती जऊन ह यीसू संग बिस‍वासघात करिस।

आसिस अऊ सराप

(मत्ती 5:1-12)

17यीसू ह अपन चेलामन संग पहाड़ ले उतरिस अऊ एक समतल जगह म ठाढ़ हो गीस। उहां ओकर चेलामन के एक बड़े भीड़ रहय अऊ जम्मो यहूदिया प्रदेस, यरूसलेम सहर, अऊ सूर अऊ सैदा के समुंदर तीर ले बहुंत मनखे जुरे रिहिन। 18ओमन यीसू के उपदेस ला सुने बर अऊ अपन बेमारीमन ले छुटकारा पाय बर आय रिहिन। अऊ परेत आतमा के सताय मनखेमन घलो बने हो गीन। 19जम्मो मनखेमन यीसू ला छुए के कोसिस करत रिहिन, काबरकि ओकर ले सामरथ निकरत रिहिस अऊ ओ जम्मो ला बने करत रिहिस।

20अपन चेलामन कोति देखके यीसू ह कहिस,

“धइन अव तुमन, जऊन मन गरीब अव,

काबरकि परमेसर के राज तुम्‍हर ए।

21धइन अव तुमन, जऊन मन अभी भूखा हवव, काबरकि तुमन ला संतोस करे जाही।

धइन अव तुमन, जऊन मन अभी रोवत हव,

काबरकि तुमन हंसहू।

22धइन अव तुमन, जब मनखे के बेटा के कारन मनखेमन तुम्‍हर ले घिन करथें

अऊ तुमन ला निकार देथें

अऊ तुम्‍हर निन्दा करथें

अऊ तुम्‍हर नांव ला खराप जानके काट देथें।

23ओ दिन खुसी मनावव अऊ आनंद के मारे कूदव, काबरकि तुम्‍हर बर स्‍वरग म एक बड़े इनाम रखे हवय। ओमन के पुरखामन अगमजानीमन के संग अइसनेच बरताव करे रिहिन।

24पर हाय लगे तुमन ऊपर,

जऊन मन धनवान अव,

काबरकि तुमन अपन सुख भोग चुके हवव।

25हाय लगे तुमन ऊपर,

जऊन मन अभी भरपेट खावथव,

काबरकि तुमन भूखा रहिहू।

हाय लगे तुमन ऊपर, जऊन मन अभी हंसथव,

काबरकि तुमन सोक मनाहू अऊ रोहू।

26हाय लगे तुमन ऊपर, जब जम्मो मनखे तुम्‍हर बड़ई करथें,

काबरकि ओमन के पुरखामन लबरा अगमजानीमन के संग अइसनेच करे रिहिन।”

बईरीमन बर मया

(मत्ती 5:38-48; 7:12)

27“पर मेंह तुमन ला जऊन मन मोर गोठ ला सुनत हव, ए कहत हंव: अपन बईरीमन ले मया करव; ओमन के भलई करव जऊन मन तुमन ले घिन करथें। 28ओमन ला आसिस देवव, जऊन मन तुमन ला सराप देथें; ओमन बर पराथना करव, जऊन मन तुम्‍हर संग गलत बरताव करथें। 29कहूं कोनो तुम्‍हर एक गाल म थपरा मारथे, त ओकर कोति दूसर गाल ला घलो कर देवव। कहूं कोनो तुम्‍हर ओढ़ना ला ले लेथे, त ओला तुम्‍हर कुरता लेय बर झन रोकव। 30जऊन कोनो तुम्‍हर ले मांगथे, ओला देवव; अऊ कहूं कोनो तुम्‍हर चीज ला ले जावय, त ओला वापिस झन मांगव। 31जइसने तुमन चाहथव कि मनखेमन तुम्‍हर संग करंय, वइसने तुमन घलो ओमन के संग करव।

32यदि तुमन ओमन ले मया करथव, जऊन मन तुम्‍हर ले मया करथें, त तुम्‍हर का बड़ई? काबरकि पापीमन घलो अपन ले मया करइयामन ले मया करथें। 33अऊ यदि तुमन ओमन के भलई करथव, जऊन मन तुम्‍हर भलई करथें, त तुम्‍हर का बड़ई? काबरकि पापीमन घलो अइसने करथें। 34अऊ यदि तुमन ओमन ला उधार देथव, जऊन मन ले तुमन वापिस पाय के आसा करथव, त तुम्‍हर का बड़ई? काबरकि पापीमन घलो पापीमन ला ए आसा म उधार देथें कि ओमन ला पूरा-पूरी वापिस मिलही। 35पर अपन बईरीमन ले मया करव, ओमन के भलई करव, अऊ बिगर कुछू चीज वापिस पाय के आसा म ओमन ला उधार देवव। तभे तुमन ला बड़े इनाम मिलही, अऊ तुमन परम परधान परमेसर के बेटा होहू, काबरकि ओह गुन नइं चिनहइया अऊ दुस्‍ट मनखेमन ऊपर दया करथे। 36दयालु बनव, जइसने तुम्‍हर स्वरगीय ददा ह दयालु ए।”

आने ऊपर दोस झन लगावव

(मत्ती 7:1-4)

37“आने मन के नुक्‍ता-चीनी झन करव, त तुम्‍हर घलो नुक्‍ता-चीनी नइं करे जाही। आने मन ला दोसी झन ठहरावव, त तुमन ला घलो दोसी नइं ठहराय जाही। आने मन ला छेमा करव, त तुमन ला घलो छेमा करे जाही। 38आने मन ला देवव, त तुमन ला घलो दिये जाही। बने ढंग ले नापके, दबा-दबाके, हला-हला के, अऊ उछरत तुम्‍हर कोरा म डारे जाही। काबरकि जऊन नाप ले तुमन आने मन बर नापथव, ओही नाप ले तुम्‍हर बर घलो नापे जाही।”

39यीसू ह ओमन ला ए पटं‍तर घलो कहिस, “का एक अंधरा ह दूसर अंधरा ला रसता देखा सकथे? का ओमन दूनों खंचवा म नइं गिर जाहीं? 40चेला ह अपन गुरू ले बड़े नइं होवय, पर पूरा सिकछा पाय के बाद ओह अपन गुरू सहीं हो जाथे।

41तेंह काबर अपन भाई के आंखी के छोटे कचरा ला देखथस, जबकि तेंह अपन खुद के आंखी के बड़े कचरा ला धियान नइं देवस? 42जब तेंह अपन खुद के आंखी के बड़े कचरा ला नइं देख सकत हस, त अपन भाई ले कइसने कह सकत हस, ‘ए भाई, लान, मेंह तोर आंखी के कचरा ला निकार देथंव?’ हे ढोंगी मनखे! पहिली अपन आंखी के बड़े कचरा ला निकार, तभे तेंह अपन भाई के आंखी के छोटे कचरा ला बने करके देखबे अऊ ओला निकार सकबे।

रूख अऊ ओकर फर

(मत्ती 7:16-20)

43बने रूख म खराप फर नइं फरय, अऊ न ही खराप रूख म बने फर फरथे। 44हर एक रूख ह ओकर फर ले पहिचाने जाथे। काबरकि मनखेमन कंटिली झाड़ीमन ले अंजीर के फर नइं टोरंय, अऊ न ही झरबेरी रूख ले अंगूर। 45बने मनखे ह अपन दिल के बने भंडार ले बने बात ला निकारथे, अऊ खराप मनखे ह अपन दिल के खराप भंडार ले खराप बात ला निकारथे। काबरकि जऊन बात ले ओकर दिल भरे रहिथे, ओहीच ला अपन मुहूं ले गोठियाथे।

बुद्धिमान अऊ मुरुख मनखे के पहिचान

(मत्ती 7:24-27)

46जब तुमन मोर कहे ला नइं मानव, त मोला काबर ‘हे परभू, हे परभू’ कहिथव? 47जऊन ह मोर करा आथे, अऊ मोर गोठमन ला सुनथे अऊ ओला मानथे – मेंह तुमन ला बतावत हंव कि ओह काकर सहीं अय। 48ओह ओ घर बनइया मनखे सहीं अय, जऊन ह भुइयां ला गहिरा कोड़िस अऊ चट्टान ऊपर नींव डारिस। जब बाढ़ (पुरा) आईस अऊ पानी ओ घर ले टकराईस, पर ओला हलाय नइं सकिस, काबरकि ओ घर ह मजबूत बने रिहिस। 49पर जऊन ह मोर गोठ ला सुनथे अऊ ओला नइं मानय, ओह ओ मनखे के सहीं अय, जऊन ह भुइयां म बिगर नींव डारे घर बनाईस, अऊ जब बाढ़ के पानी ओ घर ले टकराईस, त ओह गिरके बरबाद हो गीस।”