Japanese Living Bible

ルカの福音書 11

祈りについて

1ある時、イエスは外で祈っておられました。ちょうど祈り終えたところへ一人の弟子が来て、「主よ。バプテスマのヨハネが弟子たちに教えたように、私たちにも祈りを教えてください」と願いました。

そこでイエスは、「このように祈りなさい」とお教えになりました。

「天のお父様。
あなたのきよい御名があがめられますように。
あなたの御国がすぐに来ますように。

私たちに日々必要な食物をお与えください。

私たちの罪をお赦しください。

私たちも、私たちに罪を犯した者を赦します。
私たちを誘惑に会わせないでください。」

5-6 祈りについての教えはまだ続きました。それが、このたとえです。「真夜中に、どうしてもパンを三つ借りなければならなくなって、友達の家に駆けつけたとします。戸をドンドンたたき、声を張り上げて、『迷惑をかけてすまない。突然のお客があったのだけど、あいにく、家には一切れのパンもないんだ。お願いだから貸してくれないか』と頼みます。 友達は何と答えるでしょう。中から、『かんべんしてくれ。いま何時だと思っているんだ。戸じまりもしてしまったし、もうみんな寝ている。何も出してやれないよ』と返って来るだけかもしれません。 しかし、友達だからというのでは何もしてくれなくても、しつこく戸をたたき続けるなら、その根気に負けて、必要な物を出してくれるでしょう。 祈りも同じです。あきらめずに求め続けなさい。そうすれば与えられます。捜し続けなさい。そうすれば見つかります。戸をたたきなさい。そうすれば開けてもらえます。 10 求める人は与えられ、捜す人は見つけ出し、戸をたたく人は開けてもらえるのです。

11 パンをねだる子どもに、石ころを与える父親がいるでしょうか。魚が食べたいと言う子どもに、毒蛇を与える親がいるでしょうか。 12 卵がほしいと言うのに、さそりを渡したりするでしょうか。もちろん、そんなはずはありません。 13 罪深い人間でさえ、子どもには良い物を与えたいと思うのが人情です。そうだとしたら天の父が、求める者に聖霊を下さらないわけはありません。」

14 ある時、イエスは、悪霊につかれて口がきけない男から悪霊を追い出されました。すると、男がしゃべりだしたのです。その場に居合わせた人々はすっかり驚いてしまいました。 15 しかし中には、意地悪く中傷する者もいました。「別に驚くほどのことじゃない。悪霊を追い出すことなんか朝飯前だろう。なにしろイエスは、悪霊の王ベルゼブル(サタン)の力をもらっているのだから。」 16 またほかの者は、ほんとうにイエスがメシヤ(救い主)なら、その証拠に、何か天からのしるしを見せてほしいと求めました。

17 そういう一人一人の心を見抜いて、イエスは言われました。「内乱の絶えない国は滅びます。争ったり、けんかばかりしている家庭も同じことです。 18 あなたがたの言うように、ベルゼブルがわたしに悪霊を追い出す力を与えて、自分自身と戦っているとしたら、どうしてサタンの国はやっていけるでしょう。 19 あなたがたの仲間にも、悪霊を追い出す人がいるではありませんか。もしわたしがベルゼブルの力で悪霊を追い出しているというのなら、彼らだってそうでしょう。あなたがたの考えが正しいかどうか、その人たちに聞いてみたらどうです。 20 しかし、わたしが神の力で悪霊を追い出しているのなら、もう神の国があなたがたのところに来ている証拠です。 21 強く、完全武装したサタンが宮殿を守っているうちは、彼の国は安泰です。 22 しかし、もっと強く、もっと強力な武器を持った者が襲いかかったら、難なく倒され、武器も持ち物も、一つ残らず取り上げられてしまうでしょう。 23 わたしに味方しない者はみな敵です。助けてくれない者はじゃまをする者です。 24 悪霊が人から追い出されると、別の住みかはないかと荒野をあちこちうろつき回ります。ところが適当な場所が見つからないので、やっぱりもとの所へ戻って行きます。 25 帰って見ると、もとの家はすみずみまで掃除が行き届き、きれいになっています。 26 すると、自分よりたちの悪い七つの悪霊を連れて来て住みつくのです。そうなったら、その人の状態は以前よりもっと悪くなります。」

27 こう話しておられると、群衆の中から、一人の女が感きわまって叫びました。「あなたのお母様はなんと幸せな方でしょう! あなたを宿したお腹、あなたの吸った乳房はなんと祝福されているでしょう!」 28 しかしイエスは、「そのとおりです。でも、神のことばを聞いて、そのとおり実行する人のほうが、もっと祝福されているのです」と言われました。

29 群衆の数はどんどんふくれ上がる一方でした。そこで、イエスは教え始められました。「今の時代は、悪のはびこる悪い時代です。人々は寄ってたかって、メシヤなら何か不思議なしるしを起こして見せろと、しつこく求めます。けれども、見せられる証拠はただ一つ、ヨナの奇跡だけです。 30 ヨナの経験は、ニネベの人たちの目に、神がヨナを派遣されたことの明らかな証拠と映りました。わたしも、このヨナと同じような経験をします。それが、わたしをこの世の人たちのところへ遣わしたのは神だという、動かぬ証拠となるのです。 31 さばきの日には、シェバの女王が立ち上がり、この時代の人々を名指しで断罪します。彼女は、ソロモンから知恵のことばを聞くために、あれほど遠い国から旅して来ることをいとわなかったからです。けれども、そのソロモンよりはるかに偉大な者が、ここにいるのです。それなのに、だれ一人見向きもしません。 32 ニネベの人たちも立ち上がり、この時代の人々を罪に定めます。彼らはヨナの教えを聞いて、それまでの堕落しきった生活を悔い改めたからです。けれども、そのヨナよりもっと偉大な者が、ここにいるのです。ところが、耳を傾ける人は一人もいません。

33 ランプをつけて、わざわざそれを隠す人がいますか? ランプは部屋を明るく照らすものだから、燭台の上に置かなければ何にもなりません。 34 目は、心の中まで明るくします。澄みきった目は、たましいの中まで光を通します。肉欲に汚れた目は、光をさえぎり、あなたを暗闇に閉じ込めてしまいます。 35 ですから、光がおおい隠されないように、よく気をつけなさい。 36 心の内面が光で満ちあふれている人は、顔も、光をあてられたように明るく輝きます。」

偽善者のまちがい

37-38 話が一段落したところで、あるパリサイ人がイエスを食事に招待しました。イエスは誘われるまま彼の家に行き、食卓に着かれました。ところが、その時、イエスはきよめの手洗いをなさいませんでした。この儀式はユダヤでは必ず行う習慣だったので、それを見た家の主人は驚きました。 39 イエスはおっしゃいました。「あなたがたパリサイ人は、確かに外側はきれいに洗います。しかし、内側はどうですか。汚れたままで、貪欲や邪悪でいっぱいではありませんか。 40 愚かな人たち。神は外側だけを造られたのですか。神は内側も造られたのです。 41 内面のきよさは行いに表れます。貧しい人たちにどれだけ愛を実践するかによって、はっきりと表れるのです。

42 あなたがたパリサイ人は、実にいまわしい者です。どんなわずかな収入でも、実にきちょうめんに十分の一をささげていながら、正義を行うことと神を愛することは、きれいさっぱり忘れているのですから。もちろん、十分の一献金は大いにけっこうです。しかし、もっと大切なことをなおざりにしては意味がありません。

43 あなたがたパリサイ人は、実にいまわしい者です。会堂で上座に座ったり、市場で、みんなからていねいなあいさつを受けたりするのが、何より好きなのです。 44 そんなあなたがたを待っているのは何でしょう。恐ろしいさばきです。あなたがたはまるで、野原にある、人目につかない墓のようです。人々は、汚れたものが近くにあるとは気づかず、平気でそばを通り過ぎるのです。」

45 そばに立って話を聞いていた律法の専門家が、我慢がならないといったふうに、食ってかかりました。「ことばがすぎませんか。私たちを侮辱することを言うとは。」 46 イエスは言われました。「そんなことはありません。律法の専門家たち。あなたがたにも恐ろしいさばきが待ち受けているのです。とうてい実行できない命令を与えて、人々を押しつぶしておきながら、自分は守ろうともしないのですから。 47 あなたがたは、いまわしい者です。昔、預言者たちを殺した先祖とそっくりです。 48 人殺しと少しも変わりません。先祖が殺した預言者たちの記念碑を建て、『先祖は正しかった』と認めているのですから。だから、あなたがたも、きっと同じことをしたでしょう。 49 神はこう言っておられます。『わたしは預言者や使徒たちを派遣します。しかしあなたがたは、彼らを殺したり、迫害したりするのです。』 50-51 今の時代に生きるあなたがたは、世界の初めからずっと、すなわち、アベルが殺された時創世4・8から、ザカリヤが聖所と祭壇との間で殺された時Ⅱ歴代24・20-22まで、神の預言者たちを殺し続けてきた責任を問われます。そうです。確かにあなたがたには責任があるのです。 52 律法の専門家たちよ、あなたがたはわざわいです。人々の目から真理を隠しているのですから。あなたがたは自分が真理を信じないばかりか、ほかの人たちが信じるチャンスまでも奪っているのです。」

53-54 それは、パリサイ人や律法の専門家たちに激しい敵対心を生じさせました。この時からです。彼らがむずかしい質問を矢のようにあびせて、何とかイエスをわなにかけ、逮捕する口実を得ようとし始めたのは。

Saral Hindi Bible

लूकॉ 11

प्रभु द्वारा दिया गया प्रार्थना का उदाहरण

(मत्ति 6:9-13)

1एक दिन मसीह येशु एक स्थान पर प्रार्थना कर रहे थे. जब उन्होंने प्रार्थना समाप्त की उनके शिष्यों में से एक ने उनसे विनती की, “प्रभु, हमको प्रार्थना करना सिखा दीजिए—ठीक जैसे योहन ने अपने शिष्यों को सिखाया है.”

मसीह येशु ने उनसे कहा, “जब भी तुम प्रार्थना करो, इस प्रकार किया करो:

“‘हमारे स्वर्गीय पिता!
आपका नाम सभी जगह सम्मानित हो.
आपका राज्य हर जगह स्थापित हो.
हमारा रोज़ का भोजन हमें हर दिन दिया कीजिए.
हमारे पापों को क्षमा कीजिए.
    हम भी उनके पाप क्षमा करते हैं, जो हमारे विरुद्ध पाप करते हैं.
हमें परीक्षा में फँसने से बचाइए.’”

“कल्पना करो,” मसीह येशु ने उनसे आगे कहा, “तुममें से किसी का एक मित्र आधी रात में आ कर यह विनती करे, ‘मित्र! मुझे तीन रोटियां दे दो; क्योंकि मेरा एक मित्र यात्रा करते हुए घर आया है और उसके भोजन के लिए मेरे पास कुछ नहीं है.’ तब वह अंदर ही से उत्तर दे, ‘मुझे मत सताओ! द्वार बन्द हो चुका है और मेरे बालक मेरे साथ सो रहे हैं. अब मैं उठ कर तुम्हें कुछ नहीं दे सकता.’ मैं जो कह रहा हूँ उसे समझो: हालांकि वह व्यक्ति मित्र होने पर भी भले ही उसे देना न चाहे, फिर भी उस मित्र के बहुत विनती करने पर उसकी ज़रूरत के अनुसार उसे अवश्य देगा.

“यही कारण है कि मैंने तुमसे कहा है: विनती करो, तो तुम्हें दिया जाएगा; खोजो, तो तुम पाओगे; द्वार खटखटाओ, तो वह तुम्हारे लिए खोल दिया जाएगा 10 क्योंकि हर एक, जो विनती करता है, प्राप्त करता है; हर एक, जो खोजता है, पाता है तथा हर एक, जो खटखटाता है, उसके लिए द्वार खोल दिया जाता है.

11 “तुममें कौन पिता ऐसा है, जो अपने पुत्र के मछली माँगने पर उसे साँप दे 12 या अण्डे की विनती पर बिच्छू? 13 जब तुम बुरे होते हुए भी अपने बालकों को सबसे अच्छी वस्तुएं देना जानते हो तो तुम्हारे स्वर्गीय पिता कहीं अधिक बढ़कर उन्हें, जो उनसे विनती करते हैं, पवित्रात्मा क्यों न देंगे!”

मसीह येशु पर शैतान का दूत होने का आरोप

(मत्ति 12:22-37; मारक 3:20-30)

14 मसीह येशु एक व्यक्ति में से, जो गूँगा था, एक प्रेत को निकाल रहे थे. प्रेत के निकलते ही वह, जो गूँगा था, बोलने लगा. यह देख भीड़ अचम्भित रह गई. 15 किन्तु उनमें से कुछ ने कहा, “वह तो प्रेतों के प्रधान शैतान की सहायता से प्रेत निकालता है.” 16 कुछ अन्य ने मसीह येशु को परखने के उद्देश्य से उनसे अद्भुत चिह्न की माँग की.

17 उनके मन की बातें जानकर मसीह येशु ने उनसे कहा, “कोई भी राज्य, जिसमें फूट पड़ चुकी है, नाश हो जाता है और जिस परिवार में फूट पड़ चुकी हो, उसका नाश हो जाता है. 18 यदि शैतान अपने ही विरुद्ध काम करने लगे तो उसका राज्य स्थिर कैसे रह सकता है? मैं ये सब इसलिए कह रहा हूँ कि तुम यह दावा कर रहे हो कि मैं प्रेतों को शैतान की सहायता से निकाला करता हूँ. 19 अच्छा, यदि मैं प्रेतों को शैतान की सहायता से निकाला करता हूँ, तब तुम्हारे शिष्य उन्हें किसकी सहायता से निकाला करते हैं? परिणामस्वरूप तुम्हारे ही शिष्य तुम पर आरोप लगाएँगे. 20 किन्तु यदि मैं प्रेतों को परमेश्वर के सामर्थ्य के द्वारा निकालता हूँ, तब परमेश्वर का राज्य तुम्हारे मध्य आ चुका है.

21 “जब कोई बलवान व्यक्ति शस्त्रों से पूरी तरह से सुसज्जित हो कर अपने घर की चौकसी करता है, तो उसकी सम्पत्ति सुरक्षित रहती है 22 किन्तु जब उससे अधिक बलवान कोई व्यक्ति उस पर आक्रमण कर उसे अपने वश में कर लेता है और वे सभी शस्त्र, जिन पर वह भरोसा करता था, छीन लेता है, तो वह उसकी सम्पत्ति को लूट कर बांट देता है.

23 “वह, जो मेरे पक्ष में नहीं है मेरे विरुद्ध है और वह, जो मेरे साथ इकट्ठा नहीं करता, वह बिखेरता है.

24 “जब प्रेत किसी व्यक्ति में से बाहर निकलता है, वह सूखे स्थानों में विश्राम की खोज में भटकता रहता है और न मिलने पर वह विचार करता है, ‘मैं उसी घर में लौट जाऊँगा, जिसमें से मैं निकला था.’ 25 वहाँ पहुँच कर वह उस घर को साफ़ और सजा हुआ पाता है. 26 वह जा कर अपने से अधिक दुष्ट सात अन्य प्रेत ले आता है. वे सभी उस मनुष्य में प्रवेश कर उसमें निवास करने लगते हैं. उस व्यक्ति की यह दशा पहली दशा से अधिक बुरी हो जाती है.”

27 जब मसीह येशु यह शिक्षा दे रहे थे, भीड़ में से एक नारी पुकार उठी, “धन्य है वह माता, जिसने आपको जन्म दिया और आपका पालन-पोषण किया.”

28 किन्तु मसीह येशु ने कहा, “परन्तु धन्य वे हैं, जो परमेश्वर के वचन को सुन कर उसका पालन करते हैं.”

अविश्वास के प्रति चेतावनी

29 जब और अधिक लोग इकट्ठा होने लगे, मसीह येशु ने कहा, “यह पीढ़ी अत्यन्त बुरी पीढ़ी है. यह चमत्कार चिह्नों की माँग करती है किन्तु भविष्यद्वक्ता योना के चिह्न के अतिरिक्त इसे और कोई चिह्न नहीं दिया जाएगा. 30 जिस प्रकार परमेश्वर की ओर से भविष्यद्वक्ता योना नीनवे नगरवासियों के लिए एक चिह्न थे, उसी प्रकार मनुष्य का पुत्र इस पीढ़ी के लिए एक चिह्न है. 31 न्याय के दिन पर इस समय की पीढ़ी के साथ दक्षिण की रानी भी होगी, जो इस पीढ़ी की निन्दा करेगी क्योंकि वह पृथ्वी के सीमान्त से राजा शलोमोन के ज्ञान के वचन सुनने आई थी; और आज, जो यहाँ है, वह शलोमोन से भी बढ़कर है. 32 नीनवे नगरवासी न्याय के दिन पर इस पीढ़ी के साथ इकट्ठा होंगे तथा वे इस पीढ़ी की निन्दा करेंगे क्योंकि उन्होंने तो योना का प्रचार सुन कर पश्चाताप किया था, किन्तु आज जो यहाँ है, वह भविष्यद्वक्ता योना से भी बढ़कर है.

भीतरी ज्योति के विषय में शिक्षा

33 “दीप जला कर कोई भी उसे न तो ऐसे स्थान पर रखता है, जहाँ वह छुप जाए और न ही किसी बर्तन के नीचे; परन्तु वह उसे उसके नियत स्थान पर रखता है, कि जो प्रवेश करते हैं, देख सकें. 34 तुम्हारे शरीर का दीपक तुम्हारी आँख हैं. यदि तुम्हारी आँख निरोगी हैं, तुम्हारा सारा शरीर उजियाला होगा किन्तु यदि तुम्हारी आँखें रोगी हैं, तो तुम्हारा शरीर भी अंधियारा होगा. 35 ध्यान रहे कि तुम्हारे भीतर छिपा हुआ उजाला अन्धकार न हो. 36 इसलिए यदि तुम्हारा सारा शरीर उजियाला है, उसमें ज़रा सा भी अन्धकार नहीं है, तब वह सब जगह उजाला देगा—जैसे एक दीप अपने उजाले से तुम्हें उजियाला करता है.”

यहूदी अगुवों के पाखण्ड की उल्लाहना

37 जब मसीह येशु अपना प्रवचन समाप्त कर चुके, एक फ़रीसी ने उन्हें भोजन के लिए आमन्त्रित किया. मसीह येशु उसके साथ गए तथा भोजन के लिए बैठ गए. 38 उस फ़रीसी को यह देख आश्चर्य हुआ कि भोजन के पूर्व मसीह येशु ने हाथ नहीं धोए.

39 प्रभु मसीह येशु ने इस पर उससे कहा, “तुम फ़रीसी प्याले और थाली को बाहर से तो साफ़ करते हो किन्तु तुम्हारे हृदय लोभ और दुष्टता से भरे हुए हैं. 40 निर्बुद्धियों! जिसने बाहरी भाग बनाया है, क्या उसी ने अन्दरूनी भाग नहीं बनाया? 41 तुम में जो अन्दर बसा हुआ है, उसे दान में दे दो, तब तुम और तुम्हारे संस्कार शुद्ध हो पाएँगे.

42 “धिक्कार है तुम पर, फ़रीसियो! तुम परमेश्वर को अपने पुदीना, ब्राम्ही तथा अन्य हर एक साग पात का दसवां अंश तो देते हो किन्तु मनुष्यों के प्रति न्याय और परमेश्वर के प्रति प्रेम की उपेक्षा करते हो. ये ही वे चीज़ें हैं, जिनको पूरा करना आवश्यक है—अन्यों की उपेक्षा किए बिना.

43 “धिक्कार है तुम पर, फ़रीसियो! तुम्हें सभागृहों में प्रधान आसन तथा नगर चौक में लोगों द्वारा सम्मान भरा नमस्कार पसन्द है.

44 “धिक्कार है तुम पर! क्योंकि तुम उन छिपी हुई क़ब्रों के समान हो जिन पर लोग अनजाने ही चलते-फिरते हैं.”

45 एक वकील ने मसीह येशु से कहा, “गुरुवर! ऐसा कह कर आप हमारा भी अपमान कर रहे हैं.”

46 मसीह येशु ने इसके उत्तर में कहा, “धिक्कार है तुम पर भी, वकीलों! क्योंकि तुम लोगों पर नियमों का ऐसा बोझ लाद देते हो, जिसको उठाना कठिन होता है, जबकि तुम स्वयं उनकी सहायता के लिए अपनी उँगली से छूते तक नहीं.

47 “धिक्कार है तुम पर! क्योंकि तुम भविष्यद्वक्ताओं के लिए स्मारक बनाते हो, जबकि तुम्हारे अपने पूर्वजों ने ही उन भविष्यद्वक्ताओं की हत्या की थी. 48 इस प्रकार तुम अपने पूर्वजों के कुकर्मों के गवाह हो और इसका पूरी तरह समर्थन करते हो—क्योंकि ये ही थे, जिन्होंने भविष्यद्वक्ताओं की हत्या की थी और अब तुम उन्हीं के स्मारक बनाते हो. 49 इसीलिए परमेश्वर की बुद्धि का भी यह कहना है: ‘मैं उनके पास भविष्यद्वक्ता और प्रेरित भेजूँगा. वे उनमें से कुछ की हत्या कर देंगे तथा कुछ को उत्पीड़ित करेंगे 50 कि सृष्टि की स्थापना से ले कर आज तक सारे भविष्यद्वक्ताओं के लहू बहने का हिसाब इसी पीढ़ी से लिया जाए; 51 हाबिल से ले कर ज़कर्याह तक, जिनकी हत्या वेदी तथा मन्दिर के मध्य की गई थी. हाँ, मेरा विश्वास करो: इसका हिसाब इसी पीढ़ी से लिया जाएगा.’”

52 “धिक्कार है तुम पर, वकीलों! तुमने ज्ञान की कुंजी तो ले ली हैं, किन्तु तुमने ही इसमें प्रवेश नहीं किया, और जो इसमें प्रवेश कर रहे थे, उनका भी मार्ग बंद कर दिया है.”

53 मसीह येशु के वहाँ से निकलने पर शास्त्री और फ़रीसी, जो उनके कट्टर विरोधी हो गए थे, उनसे अनेक विषयों पर कठिन प्रश्न करने लगे. 54 वे इस घात में थे कि वे मसीह येशु को उनके ही किसी कथन द्वारा फँसा लें.